Ex-District President Nsui
EX-Genral Secretary Youth Congress
EX-Member of zila parishad
EX-Member Rajasthan Parnyas Board Gov Of Raj
Politician at Politics
आदिशक्ति, जगज्जननी माँ जगदम्बा की आराधना-उपासना के महापर्व 'शारदीय नवरात्र' की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
माँ भगवती की अपार कृपा सभी पर बनी रहे। सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, यही प्रार्थना है।
जय माता दी🙏
#ShardiyaNavratri
बेटियां ईश्वर का वरदान हैं,
बेटियां जीवन की मुस्कान हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर शक्ति स्वरूपा सभी बेटियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
बेटियाँ गौरव हैं, गर्व हैं और सृष्टि का आधार हैं; ये ही भारतीय संस्कृति, परंपरा और विरासत की ध्वजवाहक हैं।
आइए, हम सब मिलकर बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा ��र सशक्तीकरण का संकल्प लें।
#InternationalGirlChildDay
📍 न्यूयॉर्क, अमेरिका
राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के कार्यक्रम में साथी संसद सदस्यों के साथ भाग लिया।
आत्मीय स्वागत व अभिनंदन के लिये अध्यक्ष प्रेम भंडारी जी सहित RANA परिवार का आभार। यह संगठन सुदूर विदेशी धरती पर राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में अग्रणी व सराहनीय भूमिका निभा रहा है।
#USA #NewYork
@PremBhandariNYC
सनातन संस्कृति में मनुष्य का जीवन पूर्वजों के पुरुषार्थ, ऋषियों की प्रज्ञा, माताओं की ममता और अनेक पीढ़ियों के त्याग से अनुप्राणित एक अनवरत यात्रा है। हमारे व्यक्तित्व में जो संस्कार हैं, हमारी वाणी में जो भाषा है, हमारे आचरण में जो मर्यादा है और हमारी चेतना में जो धर्मबोध है, उसके निर्माण में असंख्य पूर्वजों का मौन योगदान समाहित है। "सर्वपित�� अमावस्या" इसी अदृश्य उपकार के प्रति श्रद्धावनत होने का पावन अवसर है। इस दिन मनुष्य अपनी जीवनधारा के उद्गम का स्मरण करता है और कृतज्ञ हृदय से स्वीकार करता है कि उसकी उपलब्धियों की पृष्ठभूमि में अनेक जीवनों की साधना विद्यमान है।
पितृपक्ष की पूर्णता के रूप में प्रतिष्ठित सर्वपितृ अमावस्या, जिसे "महालय अमावस्या" भी कहते हैं, समस्त ज्ञात व अज्ञात पितरों के श्रद्धापूर्वक स्मरण का दिन है। वि���ेषतः जिन पूर्वजों की देहावसान-तिथि ज्ञात नहीं है अथवा जिनका श्राद्ध नियत तिथि पर नहीं हो सका, उनके निमित्त भी इस अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण करने की परम्परा है। इस पर्व की भावना में पितृकुल व मातृकुल, दोनों के प्रति आदर समाहित है।
"सर्वपितृ" शब्द हमारे स्मरण को व्यापक बनाता है। कुछ पूर्वजों के नाम कुलवृत्तान्त में सुरक्षित रहते हैं; कुछ की छवियाँ परिवार की स्मृतियों में जीवित रहती हैं; और कुछ काल के विस्तार में अनाम हो जाते हैं। उनकी पहचान विस्मृत हो सकती है, किन्तु हमारे अस्तित्व के निर्माण में उनका योगदान बना रहता है। श्रद्धा उस सम्बन्ध को भी प्रणाम करती है, जिसे स्मृति अब नाम देकर पुकार नहीं सकती।
ऋग्वेद के पितृसूक्त में इसी व्यापक स्मरण की अत्यन्त उदात्त अभिव्यक्ति है-
"ये चेह पितरो ये च नेह याँश्च विद्म याँ उ च न प्रविद्म।
त्वं वेत्थ यति ते जातवेदः स्वधाभिर्यज्ञं सु���ृतं जुषस्व ।।"
जो पितर यहाँ हैं और जो यहाँ नहीं हैं, जिन्हें हम जानते हैं और जिन्हें नहीं जानते, हे जातवेदस् अग्नि ! आप उन सबको जानते हैं; स्वधा से युक्त इस सुकृत यज्ञ को स्वीकार कीजिए। इस मन्त्र की भावना हमें अपनी सीमित जानकारी से आगे बढ़कर समस्त पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखने की प्रेरणा देती है।
पितृस्मरण की यह वैदिक भूमि अत्यन्त मंगलमयी है। यहाँ पूर्वजों के प्रति आदर के साथ उनके अनुग्र�� और संरक्षण की प्रार्थना भी है।
"उदीरतामवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुं य ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु ।।
“ऋग्वेद”
इस मंत्र में विविध श्रेणियों के सोमभागी पितरों का आवाहन करते हुए प्रार्थना की गई है कि अहिंसक और ऋतज्ञ पितर हमारी पुकार पर हमारी रक्षा करें। पितरों के लिए प्रयुक्त ‘ऋतज्ञ’ विशेषण उनके स्मरण को सत्य, यज्ञ और धर्ममय व्यवस्था के प्रति आदर से जोड़त�� है।
पूर्वजों के प्रति हमारी कृतज्ञता उनके सद्गुणों के अनुकरण में भी अभिव्यक्त होनी चाहिए। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में परिवार को सँभाला, परिश्रम से आजीविका अर्जित की, अतिथियों का सत्कार किया, धर्म की रक्षा की और अगली पीढ़ी के लिए अपने सुखों का त्याग किया। उनके इन गुणों को अपने आचरण में प्रतिष्ठ��त करना पितृस्मृति को जीवन्त बनाता है। जिस घर में बड़ों का सम्मान, सम्बन्धों में संवेदना और व्यवहार में सत्य बना रहता है, वहाँ पूर्वजों की शुभ परम्परा निरन्तर फलित होती रहती है।
इसी उत्तरदायित्व का उपदेश "तैत्तिरीयोपनिषद्" अत्यन्त स्पष्ट शब्दों में देता है -
"देवपितृकार्याभ्यां न प्रमदितव्यम्।
मातृदेवो भव। पितृदेवो भव।
आचार्यदेवो भव। अतिथिदेवो भव।
“तैत्तिरीयोपनिषद्”
देवताओं और पितरों से सम्बन्धित कर्तव्यों में प्रमाद न हो; माता, पिता, आचार्य और अतिथि के प्रति देवभाव रखा जाए। यह उपदेश श्रद्धा को दैनिक जीवन का अनुशासन बनाता है।
इसलिए "सर्वपितृ अमावस्या" हमें जीवित माता-पिता और परिवार के वरिष्ठजनों के प्रति अपने व्यवहार का भी अवलोकन कराती है। क्या हम उनके लिए समय निकालते हैं? क्या उनके अनुभवों को धैर्यपूर्वक सुनते हैं? क्या उनकी असहाय अवस्था में उन्हें स्नेह और सम्मान देते हैं? दिवंगत पूर्वजों का तर्पण और जीवित वृद्धजनों की सेवा, दोनों एक ही कृतज्ञ चेतना की अभिव्यक्तियाँ हैं। श्रद्धा की गहराई तभी प्रकट होती है, जब वह हमारे समय, व्यवहार और सेवा में उतरती है।
पौराणिक साहित्य में पितृकर्म के साथ सामर्थ्य और श्रद्धा का सुन्दर समन्वय मिलता है। श्रीमद्भागवत महापुराण में कहा गया है -
"कुर्यादपरपक्षीयं मासि प्रौष्ठपदे द्विजः ।
श्राद्धं पित्रोर्यथावि���्तं तद्बन्धूनां च वित्तवान् ।।
“श्रीमद्भागवत महापुराण”
यहाँ पितृपक्ष में अपनी आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार पितरों तथा उनके बान्धवों के निमित्त श्राद्ध करने का विधान है।
#सर्वपितृ_अमावस्या #AvdheshanandG_Quotes #AvdheshanandG_Mission
🙏 आज के दिव्य श्रृंगार दर्शन - सालासर बालाजी 🙏🌸
आज 10 अक्टूबर, 2026 शनिवार – आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या ✨
🚩 श्री सालासर बालाजी महाराज की कृपा आप सभी पर सदैव बनी रहे।
यशोदानंदन पुजारी
सालासर धाम 🚩
#salasarbalaji#salasardham#hanumanbhakt#salasarofficial
ऑल इंडिया ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पूर्व मंत्री वरिष्ठ नेता स्व. पँ.श्रीभॅवरलाल शर्माजी की पुण्यतिथी पर उन्हे श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ।💐💐
@anilsharmainc
हिंदी साहित्य सम्राट, मुंशी प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन।
श्रद्धेय प्रेमचंद जी की लेखनी केवल साहित्यिक ही नहीं, वरन् सामाजिक चेतना और समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कुठाराघात करने वाली भी थी। आपकी रचनाएँ मनुष्य को नए सिरे से सोचने औ�� जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का विवेक देती हैं।
माननीय संसद सदस्यों के साथ संयुक्त राष्ट्र में सिंगापुर के स्थायी प्रतिनिधि एवं राजदूत बुरहान गफूर जी से मुलाकात की।
इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के भविष्य, बहुपक्षवाद को मजबूत बनाए रखने में छोटे देशों की भूमिका तथा वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भारत-आसियान साझेदारी के महत्व पर सार्थक चर्चा हुई।
📍संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क (UNHQ)
#IndiaAtUN
आज जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में ���िला अध्यक्षों, प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की बैठक में भाग लिया।
पंचायतीराज चुनाव को लेकर गांव-गांव में भाजपा सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी है। नगरीय निकाय चुनाव में जिस तरह सत्ता का दुरुपयोग हुआ, उसे गांवों की जनता ने भी देखा है और अब वह भाजपा को इसका जवाब देगी।
राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। प्रदेश स्तर पर सभी वरिष्ठ नेता मिलकर काम कर रहे हैं। अब सभी जिला अध्यक्ष एकजुटता का यही संदेश लेकर अपने-अपने जिलों में जाएं, हर नेता-कार्यकर्ता को साथ लेकर चलें और पूरी ताकत से कांग्रेस की जीत सुनिश���चित करें।
गांव की चौपाल से भाजपा के खिलाफ उठ रही नाराजगी अब मतपेटी तक पहुंचेगी, और संगठन की ताकत व जनता के भरोसे के साथ पंचायतीराज चुनाव में कांग्रेस का परचम लहराएगा।