✨ क्या केवल तप, ब्रह्मचर्य और सिद्धियाँ ही मोक्ष दिला सकती हैं?
महर्षि शुकदेव जी जन्म से ही महान तपस्वी थे। उन्हें पूर्व जन्म का ज्ञान था, वे सिद्धियों के धनी थे, यहाँ तक कि वे विष्णु लोक तक पहुँच गए। फिर भी उन्हें प्रवेश क्यों नहीं मिला?
आखिर ऐसा कौन-सा अभिमान था, जिसने एक महान तपस्वी को भी रोक दिया?
और कैसे राजा जनक, जो स्वयं गृहस्थ थे, शुकदेव जी के गुरु बने और उनके सूक्ष्म अहंकार को समाप्त कर उन्हें वास्तविक आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया?
📖 इस विशेष Sunday Satsang में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज शास्त्रों के प्रमाणों के आधार पर बताएँगे—
✅ बिना गुरु के साधना क्यों अधूरी है?
✅ क्या केवल ब्रह्मचर्य या जंगल में रहना ही वैराग्य है?
✅ राजा जनक ने शुकदेव जी को क्या आध्यात्मिक शिक्षा दी?
✅ अहंकार मोक्ष मार्ग की सबसे बड़ी बाधा क्यों है?
✅ पूर्ण सतगुरु की शरण ग्रहण करना क्यों अनिवार्य है?
"बिन सतगुरु ना पाइए, घर अपने की राह।"
— कबीर साहिब
यदि आप मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य, गुरु महिमा और आत्मकल्याण का मार्ग समझना चाहते हैं, तो इस विशेष सत्संग से अवश्य जुड़ें।
🗓️ 02 August 2026 (Sunday)
🕚 11:00 AM (IST)
📺 LIVE | Sant Rampal Ji Maharaj Satsang
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सब जग भूला पाया! कबीर जी ने खोला सबसे बड़ा आध्यात्मिक रहस्य | Sant Rampal Ji Satsang
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"सब जग भूला पाया" केवल एक भजन नहीं, बल्कि मानव जीवन की सबसे गहरी आध्यात्मिक सच्चाई है।
इस सत्संग में विस्तार से बताया गया है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित तीनों लोकों के देवता भी पूर्ण तत्वज्ञान से परिचित नहीं थे। कबीर परमेश्वर स्वयं इस पृथ्वी पर आए और मानव समाज को बताया कि जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति कैसे प्राप्त की जा सकती है। साथ ही यह भी समझाया गया कि केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सही तत्वज्ञान और सच्ची भक्ति ही मोक्ष का मार्ग है।
यदि आप भी जानना चाहते हैं—
"सब जग भूला पाया" का वास्तविक अर्थ
तत्वज्ञान क्या है?
जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्ति कैसे मिलेगी?
सच्ची भक्ति कौन-सी है?
तो इस वीडियो को अंत तक अवश्य देखें।
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कबीर जी की चेतावनी अनसुनी करने का अंजाम | Sant Rampal Ji Satsang | SATLOK ASHRAM
क्या आपने कभी सोचा है कि भक्ति को बार-बार टालने का परिणाम क्या हो सकता है?
यह प्रेरणादायक कथा एक किसान की है, जिसे कबीर परमेश्वर साधु रूप में बार-बार सच्ची भक्ति करने के लिए समझाते हैं। लेकिन वह हर बार परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों का बहाना बनाकर भक्ति टाल देता है। मृत्यु के बाद उसे मनुष्य जन्म नहीं मिलता—पहले बैल और फिर साँप की योनि में जन्म लेना पड़ता है। अंत में उसे अपनी भूल का एहसास होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति को कभी कल पर नहीं टालना चाहिए, क्योंकि अगला पल हमारे हाथ में नहीं है।
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अंत समय की सबसे बड़ी सच्चाई | हर इंसान को जानना चाहिए | Sant Rampal Ji Satsang
क्या आपने कभी सोचा है कि मृत्यु के समय बहुत से लोग भगवान का नाम क्यों नहीं ले पाते?
इस सत्संग में बताया गया है कि जिस व्यक्ति ने पूरे जीवन सच्ची भक्ति नहीं की, परमात्मा का नाम नहीं जपा और पूर्ण संत से नामदीक्षा नहीं ली, उसके अंतिम समय में यमदूत उसकी वाणी को रोक देते हैं। इसलिए मृत्यु के समय वही याद आता है जिसका अभ्यास पूरे जीवन किया गया हो।
गीता जी के अध्याय 8 के आधार पर समझाया गया है कि अंतिम सांस तक परमात्मा का स्मरण करने वाला साधक ही श्रेष्ठ गति को प्राप्त करता है। इसलिए अभी से सच्ची भक्ति, नाम-स्मरण और सत्संग का अभ्यास करना आवश्यक है।
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