जैसे ही वह लिफ्ट से बाहर कदम रख रहा था, अचानक लिफ्ट में खराबी आ गई और वह चल पड़ी। अपनी तेज़ सूझबूझ दिखाते हुए उसने तुरंत खुद को नीचे की ओर गिरा लिया, जिससे वह आख़िरी पल में कुचलने से बाल-बाल बच गया।
मास्टर साहब आराम फरमा रहे! 😴
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के उमर्दा ब्लॉक स्थित कंपोजिट विद्यालय सिकरोरी से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ड्यूटी के दौरान एक शिक्षक कक्षा में सोते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि शिक्षक के सोने के दौरान कक्षा में मौजूद बच्चे पढ़ाई करने के बजाय मोबाइल चलाते नजर आए। वीडियो वायरल होने के बाद सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
बुलंदशहर के एक गांव मे अम्मा नूर जहाँ कई दशक से, संसाधन ना होने के कारण बिना बिजली के ही जीवन गुज़ार रही थी!😔
फिर अचानक एक दिन पुलिस गश्त के दौरान आईपीएस अनुकृति शरमा का वहां से गुज़र हुआ और उनकी नज़र जब इस बूढ़ी अम्मा के घर पर पड़ी और पता चला के इनके घर मे अभी तक बिजली का कनेक्शन तक नहीं,
तो तुरंत ही उन्होंने बिजली विभाग फ़ोन कराया और अपने खर्चे से उनके घर मीटर और बिजली की फिटिंग कराई!
फिटिंग होने के बाद अम्मा से ही स्विच ऑन कराया तो अम्मा के चेहरे की खुशी देखने लायक थी, ये सब देखकर जहाँ बहुत खुशी भी हुई के असली अफसर की यही पहचान होती है जो गरीब जनता का दर्द समझकर उनके चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास करते हैँ,
साथ मे दुख भी हुआ के अमीर, अमीर से और अमीर होता जाता है, और गरीब आज भी इस हाल मे अपनी पूरी जिंदिगी गुज़ार देता है, जहाँ उसके पास बेसिक सुविधा भी नहीं!
अनुकृति शरमा जी और उनकी टीम को दिल से सलाम जिन्होंने एक बूढ़ी अम्मा को अपने जीवन के आख़िरी पड़ाव मे ये खुशी दी!🫡❤️👇
Phuket से दिल्ली आते हुए एयर इंडिया की फ्लाइट तेज टर्बुलेंस में फंस गईं थी जिससे कई यात्री घायल हो गए थे जिन्हें को अस्पताल में पहुंचाया गया।
लेकिन घायल महिला यात्री कैमरे से मुंह छिपाती आ रही है। क्या घर बिना बताए थाईलैंड मस्ती करने गई थी ?
देखे वीडियो 👇
SC ST ने मेरा घर बर्बाद कर दिया - झूठे SC ST से पीड़ित परिवार।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक सवर्ण परिवार पर झूठा sc st लगवा कर फंसा दिया और चमोड़ो ने सरकार से रकम भी वसूल ली।
लेकिन अब झूठे sc st केस इतने ज्यादा बढ़ गए है कि किसी पर भी झूठा केस लगाओ और पैसा कमाओ।
आगे खड़ा किया हिन्दुओं को, पीछे से दिया बैकअप,
जुबैर गैंग ने ली थी कांवड़ियों को बदनाम करने की सुपारी ?
2 पुलिसवालों पर हमले का झूठा आरोप लगा कर कॉकरोचों को कवर फायर वाला नैरेटिव,
मेरठ प्रशासन ने खोली एक खास गिरोह की पोल तब भी बेशर्मी से जारी है बकवास,
अब उठ रही है झूठी हिंदुद्रोही खबरों के सीरियल ऑफेंडर पर फिर से एक्शन की मांग..
#KanwarYatra #FactCheck @meerutpolice@Uppolice
🚨 इंदिरा गांधी के 12 ऐसे फैसले और विवाद, जिन्हें देखकर नेहरू-गांधी परिवार की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
"गूंगी गुड़िया" से "आयरन लेडी" बनने की कहानी जितनी चर्चित है, उतनी ही विवादों से भी घिरी हुई है।
आलोचकों का मानना है कि Indira Gandhi के कई निर्णयों ने भारतीय लोकतंत्र, संस्थाओं और अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला। आइए, उन प्रमुख विवादों पर नज़र डालते हैं। 👇
1️⃣ लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी मृत्यु (1966) 🕵️♂️
तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ताशकंद (सोवियत संघ) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हुई। आलोचक प्रश्न उठाते हैं कि इसकी स्वतंत्र और व्यापक जांच क्यों नहीं हुई।
2️⃣ गौ-रक्षा आंदोलन पर गोलीकांड (7 नवंबर 1966) 🐄⚠️
करपात्री महाराज के नेतृत्व में गौ-हत्या पर प्रतिबंध की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई हुई। इस घटना को लेकर आज भी अलग-अलग दावे और विवाद सामने आते हैं।
3️⃣ कांग्रेस का विभाजन और वामपंथ से गठबंधन (1969) 🚩
कांग्रेस में विभाजन के बाद इंदिरा गांधी ने वाम दलों का समर्थन लिया। आलोचकों का आरोप है कि इसके बाद शिक्षा और कई संस्थानों में वामपंथी प्रभाव बढ़ा।
4️⃣ राष्ट्रीयकरण की नीति 🏦
बैंक, कोयला, तेल सहित कई क्षेत्रों का राष्ट्रीयकरण किया गया। समर्थकों ने इसे समाजवादी कदम बताया, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे सरकारी नियंत्रण और अक्षमता बढ़ी।
5️⃣ FERA और विदेशी कंपनियों का पलायन (1973-74) 📉
Foreign Exchange Regulation Act (FERA) लागू होने के बाद IBM और Coca-Cola जैसी कंपनियों ने भारत छोड़ दिया। इसे आर्थिक विकास के लिए झटका माना जाता है।
6️⃣ प्रिवी पर्स समाप्त करना बनाम वक्फ नीति 👑⚖️
रियासतों को मिलने वाला प्रिवी पर्स समाप्त कर दिया गया। वहीं आलोचक आरोप लगाते हैं कि अन्य मामलों में तुष्टिकरण की राजनीति जारी रही।
7️⃣ 1971 की जीत और शिमला समझौता 🇮🇳🤝
1971 युद्ध में भारतीय सेना ने ऐतिहासिक विजय हासिल की और लगभग 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। आलोचकों का मत है कि शिमला समझौते में भारत बेहतर रणनीतिक लाभ ले सकता था।
8️⃣ न्यायपालिका में हस्तक्षेप (1973) ⚖️
तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बड़ा प्रश्न माना जाता है।
9️⃣ आपातकाल (1975-77) 🚨
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद देश में आपातकाल लगाया गया। प्रेस सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और नागरिक स्वतंत्रताओं पर रोक के कारण इसे भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय कहा जाता है।
🔟 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय संशोधन (1981) 🏛️
AMU के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर संसद में संशोधन किया गया, जिस पर आज तक कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है।
1️⃣1️⃣ भिंडरांवाले और पंजाब संकट ⚠️
आलोचकों का आरोप है कि पंजाब की राजनीति में संत जरनैल सिंह भिंडरांवाले को शुरुआती दौर में अप्रत्यक्ष राजनीतिक बढ़ावा मिला, जिसने बाद में गंभीर सुरक्षा संकट का रूप लिया।
1️⃣2️⃣ ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984) 🔫
स्वर्ण मंदिर परिसर में सैन्य अभियान चलाया गया। यह भारतीय इतिहास की सबसे संवेदनशील घटनाओं में से एक रही, जिसके दूरगामी परिणाम सामने आए।
📌 निष्कर्ष:
इंदिरा गांधी के समर्थक उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनके शासनकाल को संस्थाओं के केंद्रीकरण, आपातकाल, राजनीतिक हस्तक्षेप और कई विवादास्पद निर्णयों के लिए याद करते हैं।
इतिहास का मूल्यांकन भावनाओं से नहीं, तथ्यों, बहस और विभिन्न दृष्टिकोणों से होना चाहिए। 🇮🇳
अगर अभिजीत दीपके टाइफाइड में डांस कर सकते हैं तो झारखंड क्यों नहीं जा सकते भाई?
और चलो मान लिया कि अभिजीत दीपके टाइफाइड में बहुत कमजोर हो चुके हैं
लेकिन यह आशुतोष रांका सौरभ दास क्या अपनी मैया $$%& रहे है ??
यह क्यों नहीं झारखंड जाते
ब्राह्मण की बेटी से शादी करके यदि तुम डिलीट से ब्राह्मण बन सकते, तो बाबा साहब के वंशज आज तक डिलीट न होते। रामविलास पासवान का बेटा भी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ रहा होता।
बेहतर यह है कि अपनी लड़की ब्राह्मणों को ब्याहो।
इससे पक्का तुम्हारी जाति बदल जाएगी..😉
जिस विषय की शिक्षिका है उसी विषय को खुद भी नहीं पढ़ पा रही है।
यही है ढाबा सांप की देन।
वाह रे आरक्षण के क्योदो,बेड़ा गर्क है देश का कुछ ना होने वाला।
ऐसे भारत देश विश्वगुरु तो कभी नहीं बन सकता और हां विश्व पिछड़ा जरूर बन सकता है।
दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) का नाम आज इतना बड़ा हो गया है कि हर जगह इसकी फ्रेंचाइज़ खुलती जा रही है। लेकिन सिर्फ नाम बड़ा होने से काम नहीं चलता। अगर फ्रेंचाइज़ देने के बाद गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तो ब्रांड की साख भी गिरती है।
रीगा में देखिए, एक छोटी टाटा मैजिक जिसमें मुश्किल से 10–12 लोग बैठ सकते हैं, उसमें करीब 30 बच्चों को भरकर स्कूल लाया-ले जाया जा रहा है। अगर ऐसा हो रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और बच्चों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए। स्कूल चाहे कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। @DPSBhagalpur@cbseindia29@Richie_IAS
तमिलनाडु के CM विजय पर अश्लील टिप्पणी करके बुरे फंसे उदयनिधि स्टालिन; वैन में ठूंसकर ले गई तमिलनाडु पुलिस
इससे पहले सनातन धर्म को लेकर भी बेहद ही घटिया बयानबाजी कर चुके हैं स्टालिन