जो करना हैं उसकी शुरुआत अब से ही करे
क्योंकि इंतजार करने से समय ठीक नहीं होता
बल्कि समय बर्बाद होता हैं ॥
जय जय राजस्थान
जन नायक माननीय राजेंद्र राठौड़ साहब @Rajendra4BJP@BJP4Rajasthan@BJP4India
राजेंद्र राठौड़ साहब ज़िंदाबाद
#Mission_2023_Rajasthan
राठौड़ राजवंश की कुलदेवी #श्रीनागणेचिया माता।
#रावधूहड़ जी #कर्नाटक से लाये थे।
माता को अपनी राजधानी #खेड़ में प्रतिस्थापित करना चाहते थे माता #चील रुप मे पधारे थे।परन्तु राजा ने जहां विश्राम किया था वही उन्होने पीछे मुड़कर देख लिया इसलिए माता वहीं विराजमान हो गए।
जय नागाणा राय🙏
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यात् देवी दानवघातिनी।।
शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की उपासना की जाती है। मां कात्यायनी साहस, शक्ति और विजय की अधिष्ठात्री हैं।
#ShardiyaNavratri
विश्व पर्यटन दिवस की सभी पर्यटन प्रेमियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। पर्यटन की दृष्टि से हमारा राजस्थान पर्यटकों के बीच एक विशेष और पसंदीदा स्थान है। आइये, इस अवसर पर हम सभी पर्यटन से जुड़ी सांस्कृतिक विरासतों एवं धरोहरों के संरक्षण तथा उनको स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने का संकल्प लें।
#WorldTourismDay
एक बार फिर गौचर एवं ओरण की ज़मीन को बचाने के लिए बईया गांव में ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी। भाटी ने प्रशासन से कहा की “जब तक लिखित में आश्वासन नहीं तब तक काम नहीं होगा शुरू”। धरना स्थल पर प्रशासन एवं ग्रामीणों के बीच चल रही बातचीत।
@RavindraBhati__
#राजपूतो का उद्भव,
आज राजपूत विरोधी शक्तिया राजपूत और #क्षत्रिय दोनो को भिन्न बता रही है,
आओ समझने का प्रयास करते है इस वीडियो के माध्यम से.. राजपूत क्षत्रिय समाज 1947 तक अच्छी और मजबूत स्थिति मे था, 500 प्लस रियासतो के साथ क्षत्रिय राजा भारत एकीकरण मे शामिल होते है, सरदार वल्लभभाई पटेल के अध्यक्षता मे सारी रियासतो का विलय भारत मे होता है,
और सरदार वल्लभ भाई पटेल की अध्यक्षता मे यह निर्णय होता है की राज्यसभा राजपूतो के लिए आरक्षित रहेगी अगर भारत मे कोई भी कानून पास होता है , तो बगैर राज्यसभा के उस कानून को कानूनी रूप से मानता नही मिलेगी, और आज ऐसा होता भी है लोकसभा राज्यसभा दोनो जगह बिल पास होने के बाद कोई नया कानून बनाया जाता है,
राज्यसभा आरक्षित होने के प्रमाण आपको पुराने वीडियो क्लिप या फोटो में दिखाई देगे जहा राज्यसभा मे सभी राजा साफा और पगड़ी के साथ बैठे हुए है,
1950 मे संविधान लागू होता है तो कांग्रेस के द्वारा छलपूर्वक राज्यसभा राजपूतो से विहीन कर दी जाती है,
चलो मुख्य बिंदु पर आती हू,
क्षत्रिय समाज आस्था बान रहा है और सभी की भावनाओ का सम्मान करता रहा है,
#कांग्रेस के गलत नीतियो के विरोध मे जनसंघ बाद #भाजपा का उदय होता है राजपूत समाज ने भाजपा मे मोक्ष की प्राप्ति ढूंढना प्रारंभ कर दिया,
1991 आते-आते भारत मे जातिवाद चरम पर आ गया जो जातियां भारत मे अधिक संख्या मे थी उन्होने अपनी अपनी पार्टी बनाना शुरू कर दिया,
और जन-जातीय ने जातिगत पार्टिया बनाई थी उन जातियो का उत्थान होना शुरू हो गया और वह आज अच्छी स्थिति मे है,
और जिन जनजातीय ने जाती आधारित पार्टी बनाई थी उनका कहना यह था कि हमारा शोषण हुआ है, और आज उन जातियो के पास आज अच्छा खासा धन भी है तो उन्हे सम्मान की आवश्यकता पड़ने लगी,
मगर भारत मे जो यश क्षत्रियो का था वह किसी अन्य के पास न था,
धर्मअंध क्षत्रिय समाज को बीजेपी से #राम_मंदिर निर्माण की अपेक्षा मे बीजेपी के साथ जुड़ा रहा,
राम मंदिर का निर्माण भी हुआ किंतु परंतु #क्षत्रिय_विहीन_राम_मंदिर रामलाल ट्रस्ट से क्षत्रियो को कोई स्थान प्राप्त नही हुआ,
2014 बीजेपी पूर्ण रूप से गुजरात लिमिटेड पार्टी हो जाती है इतिहास विकृति करण सुचारू रूप से चालू है #इतिहास विकृति कारण और इतिहास की कमेटी बनने पर अभी तक कोई निर्णय नही हुआ खैर कोई बात नही बीजेपी की भी मजबूरी है #आयुर्वेदिक क्षत्रिय बनाना ,
क्योंकि भारत मे दो संगठन प्रभावशाली है एक वह जो दलित शोषित वंचित और कुचलित के नाम पर राज्यसभा लोकसभा विधानसभा में पहुंचता है,
और बीजेपी #संघ को इन जातियो के वोट चाहिए बीजेपी को भय होता है कही यह #जय_भीम के नारे के साथ ये जातिया हमारे विरोधी खेमे मे शामिल न हो जाए तो क्यो ना इन जातियो को क्षत्रिय घोषित कर दिया जाए,
भाजपा को वोट भी प्राप्त होगा और फंड के रूप में धान की प्राप्ति भी होगी,
हमे तो भय प्रतीत होता है कांग्रेस के समय राम काल्पनिक हो गए थे
भाजपा के राजपूत #काल्पनिक क्षत्रिय ना घोषित हो जाए
इसीलिये
#क्षत्रिय_हिंदू_नहीं_है
क्षत्रिय का स्वधर्म, सनातन क्षात्र धर्म,
जय सियाराम, जय श्री माधव, नमो बुद्धाय,
#जय_क्षात्र_धर्म 🚩⚔️
दम है कितना दमन में तेरे, देख लिया है देखेंगे, जगह है कितनी जेल में तेरे देख लिया है देखेंगे...
जननेता बड़े भाई @RavindraBhati__ जी के हौसले को सलाम। 🫡#ओरण_हमारी_विरासत
वक्त सेटलमेंट, सबसे ज्यादा चूक और लापरवाही तत्कालीन राजस्व अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में बरती गई। सेटलमेंट हमेशा मौके पर जाकर, जनता से जानकारी जुटाकर दर्ज किया जाता है। इन जिलों में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ये नहीं किया गया। सिर्फ कार्यालय में बैठ कर खानापूर्ति कर दी गई। परिणाम ये हुआ कि हजारों वर्षों से जो भूमि ओरण थी वो ओरण के नाम से राजस्व रेकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई। ऊपरी तौर पर रिकॉर्ड में ये सरकारी भूमि प्रतीत होती है। और यही वजह है कि, आज समस्या पैदा हो रही है। गौमाता के नाम पर जो भाजपा सत्ता में आती रही है उसकी ये नैतिक जिम्मेदारी है कि इस भूल को सुधारा जाए। मुझे लगता है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व को , वक्त सेटलमेंट की इस त्रुटि की जानकारी नहीं होगी। उन्हें तो अधिकारी रिकॉर्ड अनुसार पर्याप्त सरकारी भूमि बता रहे होंगे। आज एक पीढ़ी की भूल दूसरी पीढ़ी की समस्या बन कर रह गया है। ओरण हमारे धार्मिक सदभाव का सबसे बड़े प्रतीक हैं। इसमें हर जाति धर्म के लोग निसंकोच अपने पशु चराते रहे हैं व अपना जीवनयापन कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बाड़मेर जैसलमेर की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पशुपालन रहा है। मैं ये मानता हूँ कि भाजपा नेतृत्व को इस गंभीर भूल का समाधान करना ही चाहिए। नहीं तो ये एक अच्छा संदेश नहीं जाएगा व करनी व कथनी में फर्क दिखाई देगा। उम्मीद है भाजपा सरकारें इस और ध्यान देगी।
#CP
#ओरण_हमारी_विरासत
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#ओरण_हमारी_विरासत
बात ओरण भूमि री - बात पूर्वजों री
ओरण वही भूमि है जहां राजपूत योद्धा लड़े-मरे थे, अपने धर्म का पालन करते हुए अजर-अमर हुए थे। उनकी पीढ़ियों ने उस भूमि को उनका नाम देकर "ओरण" घोषित कर दिया और अपने पूर्वज राजपूत वीरों की स्मृति में पेड़ लगाए, एवम अपने धर्म के अनुकूल 'सर्व जीव हितार्थ' को मूल उद्देश्य मानते हुए गायों आदि पशुओं के लिए उस भूमि को छोड़ दिया और पशुओं और मनुष्यों के लिए तालाब बनवाए..!
ओरण वह भूमि जिस पर राजपूतों ने अपने ईष्ट देवी-देवताओं, जुझारों की देवलिया, मंदिर बनवाए और उस पवित्र ओरण भूमि को सदा के लिए कर मुक्त ओरण घोषित किया, उस भूमि पर ऐसा वातावरण बनाया की सैकड़ों अनाथ, असहाय पशु-पक्षी उसे अपना घर बना सकें।
लेकिन लोकतंत्र की इस सरकार ने इसी पवित्र ओरण भूमि को प्राइवेट कंपनियों को सौंप दिया, और ये कंपनियां यहां के पेड़ काटकर, सैकड़ों पशु-पक्षियों को बेघर करके यहां सौर ऊर्जा की प्लेटें लगा रही है, अपने स्वार्थ के लिए सभी पशुओं और पक्षियों के जीवन यापन की अमृत भूमि ओरण को धूमिल कर रहे हैं।
एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण की बातें करती है और दूसरी तरफ यह सब दोगला व्यवहार... जैसा कि गोदीजी ने कहा था "हिपोक्रेसी की भी सीमा होती है"
@RavindraBhati__
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@RavindraBhati__#ओरण_हमारी_विरासत