राठौड़ है , हार नहीं मानेगा ।
इस दुर्गादास के वंशज को तुम कितना भी जोर लगा लो , देश निकाला नहीं दे पाओगे।
यह शब्द उन अपनो के लिए जो छोटे लालच में देवेन्द्र सिंह के खिलाफ खड़े हैं।
@OnkarSinghRat92@KuldeepBadiyal@9noHall
डोटु भाऊ,भाजपा पर निशाना क्यों लगा रहा है,मंदिर समिति का अध्यक्ष कट्टर कांग्रेसी है,डोटु भाऊ की सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था।
लेकिन डोटु भाऊ ने इसलिए बिना किसी जांच पड़ताल की पोस्ट कर दी कि मंदिर समिति अध्यक्ष डेगाना से कांग्रेस की टिकट मांग रहा है।
पहले कर्नल केसरी सिंह राठौड़ को हाईलाइट किया था। अब देवेंद्र सिंह राठौड़ को हाईलाइट कर रहे हैं। इन लोगों की मनमानी नहीं होने दे रहे । ये वहीं आवाज उठाते हैं। जहाँ इनकी चव्वनी नहीं चलती हो खेर विरोध जारी रखों। हम सत्य के साथ है।
विरोध करने वाले, जांच करने वाले और मिडिया में खबर छापने वाले सभी एक ही बेल के पत्ते क्यों है ।
राजपूतों को आपस में लड़ाओ म्हारे मजे लुटो। राजपूतो का दादा ठगा,गया बाप ठगा गया और अब वर्तमान पीढ़ी भी ठगी जा रही,खुद के लखणो से।
22 करोड़ मंदिर ही इनकम नहीं है फिर इतना बड़ा घोटाला कैसे हूवा?
मोहन चौधरी व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए संत श्री चतुरदास जी महाराज की तपोभूमि बुटाटी धाम को बदनाम कर गया।
जिसने अतिक्रमियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी उसके खिलाफ अतिक्रमियों ने जातीकार्ड खेलकर भ्रष्टाचारी घोषित कर दिया।
एक पुरा सिंडिकेट लागु है। राजपूतों के पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई जमीन पर अन्य लोग कब्जा कर रहे हैं और राजपूत अपनी आपसी लड़ाई में उन लोगों का साथ दे रहें।कितनी शर्म कुछ बात है
जिस मोती सिंह ने आपके लिए बलिदान दिया आज वो अनजान बनकर बरसात में भीगता रहा.....
सम्मान नहीं दे सकते तो अपमानित करने का अधिकार नहीं!
@ArvindSBhati9@Motijodha9
•जाति बनाम जातिवाद•
विचारधाराएं अलग हो सकती हैं,राजनीतिक मतभेद भी स्वाभाविक हैं,लेकिन अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का साहस सबके लिए एक जैसा होना चाहिए।यदि किसी विशेष जाति के साथ घटना होती है तो तुरंत प्रतिक्रियाएं आने लगती हैं।++
#अपणायत#मालाणी#जातिबनामजातिवादी#सलेक्टिवराजनीति
कुकृत्य को किसी भी तरह सुकृत्य बनाना हैं। क्यौंकि यह इनके खुदके लोगों द्वारा किया गया है। इस मामले में ये लोग सदियों से माहिर हैं। पांच किलोमीटर और 5000 किलोमीटर दूर बैठा भी सुरक्षा को खतरा बताकर पोस्ट कर रहा जबकि आम जनता सबकुछ देख रही है। एसे लक्षण लोकतंत्र के लिए खतरा है।
हार से किरदार नहीं,बस दौर बदल जाता है,
कुछ चेहरे जल्दी खिलते हैं,कुछ वक्त पर नज़र आता है।
जो आज खुद को अगला सूरज बता रहे हैं,
उन्हें याद रहे,सुबह का फैसला रात नहीं करती।
ऐतिहासिक आयोजन की बधाई🎉
@RavindraBhati__@RavindraMarwar
रविन्द्र सिंह भाटी के कार्यों से सबसे ज्यादा मिर्ची 0 विधायक वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं के लगी है।
ओर 0 विधायक वाली पार्टी के सुप्रीमो कई राज्यों की सरकार बनाते ओर गिराते है लेकिन बेचारे खुद खड़े नहीं हो पाते 😅
@RavindraBhati__ अकेला 3 पार्टियों के खिलाफ लड़कर जीता है।
बीजेपी ने शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी को कितना मजबूर किया है। यह आप खुद देख लीजिए। रविंद्र सिंह भाटी ने सवंम अपने ऊपर छिड़का पेट्रोल,आसपास के लोगों ने रोका लोकतंत्र में इस तरह का व्यवहार बीजेपी वालों को नहीं करना चाहिए। बीजेपी सरकार को उनकी मांगें स्वीकार करनी चाहिए। अन्यथा बीजेपी को भारी नुकसान उठाना भी पड़ सकता है।
@RajCMO@BhajanlalBjp
@9noHall@RavindraBhati__ विधायको की यह हालत है, उनको अपनी बात मनवाने के लिए इतना खतरनाक कदम उठाना पड़ रहा है।
बैचारे आम आदमी की कितनी भयावह हालत होगी, सोच सकते हो।
जो नेता क्षत्रिय होकर भी क्षत्रिय समाज की ओर नहीं देखते हैं उन्हें भूल जाओ, नए चेहरों को आगे बढ़ाओ फिर देखो यही नाक रगड़ने आएंगे और छाती पीट पीट कर कहेंगे कि हम तुम्हारी बात सदन में रखेंगे।
राजस्थान में राजपूत 14 प्रतिशत है उनका 2 प्रतिशत वसुंधरा को सीएम के चेहरे पर पसंद करता है , बाकी 98% राजपूत अशोक गहलोत को सीएम के तौर पर पसंद करता है।
वैसे अखबार वाले राजपूतों की संख्या दो प्रतिशत ही बताई है, पर साला कौनसा गणित लगाकर यह खबर बनाई है। बिल्कुल जीरो सेंस ।