संस्कृति परंपराओ के रक्षक राजपूत समाज की महिलाएं लोकतंत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहीं हैं।
आज फुहड़ता के दौर में हमारी पढ़ी लिखी मातृशक्ति जिस तरह अपने पहनावे,संस्कार व मर्यादाओं का ध्यान रखते हुए लोकतंत्र के पर्व का हिस्सा बन रही है वह सभी के लिए प्रेरणादाई मार्ग हैं।
अनारक्षित वर्ग को मिले EWS आरक्षण में मौजूदा व्यवस्था में सबसे बड़ी विसंगति कृषि जमीन व भूखण्ड प्रावधान का होना है।
इस देश में कोई भी दो जमीनें,उनकी कृषि उत्पादन क्षमता और जमीन की कीमतें एक जैसी नहीं हैं।..
#EWS#सरलीकरण@BandikuiSingh@RavindraBhati__
आज टाक परिवार द्वारा आयोजित स्नेह मिलन समारोह में उपस्थित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
सभी संत-महात्माओं एवं गणमान्य अतिथियों का सान्निध्य, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त होना गौरवपूर्ण एवं सुखद अनुभव रहा।
आज हम खेतड़ी के राजा अजीत सिंहजी शेखावत को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं,जिनके संरक्षण और सहयोग ने स्वामी विवेकानंद को शिकागो में अपना ऐतिहासिक भाषण देने में महत्वपूर्ण सहायता की।
उनके और उनके पूर्ववर्ती शासक के संरक्षण ने नेहरू परिवार की आर्थिक स्थिति को पुनः सुदृढ़ करने में मदद की
बहुत अच्छा बोली यह बहन , फिल्मों को समाज का आईना बताकर अपनी आईडीयोलोजी लोगों पर थोपकर पुरे देश को चरित्रहीनता की आग में झोंकने वाले लोगो के एसे ही जुबानी जुत्ते मारने चाहिए।
तब ये गंध इस देश से मिटेगी।
विदिशा के गर्ल्स कॉलेज में आज कुछ ऐसा हुआ जो पूरे सिस्टम को आईना दिखा गया।
मंच से प्रिंसिपल मैडम बी.डी. अहिरवार छात्राओं को ज्ञान दे रही थीं -
"बेटा मुगल-ए-आज़म देखो, उमराव जान देखो, यही हमारा समाज है, इनसे प्रेरणा लो।"
तभी भीड़ में से एक पूर्व छात्रा महिमा दुबे उठी, माइक हाथ में लिया और एक ही लाइन में पूरी कहानी पलट दी -
"मैडम, आक्रमणकारियों की कहानियों से नहीं, रानी लक्ष्मीबाई, महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्यगाथाओं से प्रेरणा मिलती है। हमें मुजरा नहीं, शस्त्र उठाना सिखाइए!"
पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
यही है आज की Gen Z!
जिस पीढ़ी को बचपन से बताया गया कि तुम्हारा इतिहास पिछड़ा है, तुम्हारी संस्कृति में कुछ नहीं है, अंग्रेज और मुगल महान थे...
आज वही पीढ़ी सवाल पूछ रही है।
उन्हें अब हीनभावना नहीं चाहिए, उन्हें गौरव चाहिए।
उन्हें काल्पनिक प्रेम कहानियां नहीं, अपने वीरों का रक्त-रंजित इतिहास चाहिए।
लंबे समय तक हमारे पाठ्यक्रम में, फिल्मों में, मंचों से हमें दूसरों का महिमामंडन परोसा गया। लेकिन अब नई पीढ़ी ने किताबों के बाहर झांकना सीख लिया है।
ये बदलाव सिर्फ एक कॉलेज का नहीं, पूरे भारत की सोच का बदलाव है।
जब एक छात्रा बोलती है, तो समझ लो आने वाली पूरी पीढ़ी बोल रही है।
महिमा दुबे जैसी बेटियों को प्रणाम है।
एक उम्मीदवार एसा भी, वक्त बदलता है रक्त नहीं।
तीसरी पीढ़ी जनता की सेवा के लिए तैयार है। पर चुनाव लड़ने से पहले गांव से इजाजत मांगकर खड़ा हो ना बहुत बड़ी बात है।
@RavindraBhati__@9noHall
किसानों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से अनशन पर बैठे भाई नरेश मीणा जी की बीते दिनों तबीयत बिगड़ने के बावजूद वे अपनी मांगों पर लगातार डटे रहे। आज बारां अस्पताल पहुंचकर उन्हें जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।
जमीन से जुड़े लोगों का सक्रिय राजनीति में होना बेहद जरूरी है, ताकि आम गरीब, किसान, शोषित और पीड़ित वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाया जा सके। वर्तमान समय में ऐसे जनप्रतिनिधियों की आवश्यकता है, जो आमजन के संघर्ष को अपना संघर्ष समझें और उनके हक की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ें।
परमपिता परमेश्वर से भाई नरेश मीणा जी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।
@NareshMeena__
रविन्द्रसिंह भाटी का अंदाज जिसके कारण उनकी लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है..
जोधपुर विश्वविद्यालय में छात्रों की सुविधाओं के लिए हर क्षण अपने अंदाज में तैयार..
@RavindraBhati__
सभी #सावधान
ये चारों एकाउंट एक ही दिन में बने हैं...
मौके की तलाश में.. माहौल बिगाड़कर भाजपा की ओर करने के लिए...
इन एकाउंट पर कोई प्रतिक्रिया से रीच न देकर केवल रिपोर्ट मारो...
RLP वाले भी इस तरह के आप पर बने फेक एकाउंट को ढूंढे...
"हम सरकार के खिलाफ एक होकर लड़ते रहेंगे..."
जो व्यक्ति समाज का नेता है,वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रहा था,उसको छात्रों ने जिम्मेदारी का अहसास करवाया और संत के आदेश से वो जिम्मेदारी मानने के लिए तैयार हुआ।मतलब वह समाज का दोषी तो था ही,फिर ये समाज के दो तीन दलाल उसका साफा पहनाकर कौनसी विजय की खुशी मना रहे हैं।
राजपूत छात्रावास और सभा के मध्य समझोता संत प्रमेंद्र नाथ जी ने करवाया था,पर उनके कुछ नकली चेले जो जयपुर में राजपूत समाज के दलालों के नाम से फैमस हैं वो इसका श्रेय लेने के लिए हायतोबा मचा रहें हैं।कल उन्होंने रामसिंह जी को संत से साफा पहनवा दिया,जबकि सीधे संत उनकी गणित नहीं समझें।