#GodMorningThursday#गीताजयंती_पर_जानें_गीतारहस्य
जहां कलप ऐसी करी, चौपड़ि के बैजार।
गरीबदास तंबू तने, पचरंग झंडे सार ।।
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गीता ज्ञान दाता ने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, अध्याय 4 श्लोक 5, अध्याय 10 श्लोक 2 में अपने आप को नाशवान यानि जन्म-मरण के चक्र में सदा रहने वाल��� बताया है। कहा है कि हे अर्जुन! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं। तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ।
हम सभी व्रत क्यो करें! जब पवित्र गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत करने को मना किया गया है।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्�� मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता। इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए।
#Khul_Gaya_Raj_Gita_Ka
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सवाल उठता है कि यदि कृष्ण जी गीता ज्ञान बोल रहे होते तो गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में यह नहीं कहते कि - अर्जुन मैं बढ़ा हुआ ��ाल हूँ, अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।
अर्थात् स्पष्ट है गीता ज्ञान दाता "स्वयं काल" हैं।
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गीता अध्याय 15 श्लोक 1 तो 4 में कहा है कि यह संसार उल्टे लटके हुए वृक्ष की तरह है। जिसकी ऊपर को मूल तथा नीचे को शाखा है। जो इस संसार रूपी वृक्ष के विषय में जानता ह�� वह तत्वदर्शी संत है।
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गीता अध्याय 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता। इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य पढ़ें अनमोल पुस्तक ज्ञान गंगा
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‘‘गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा’’:-
जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘
हम सभी व्रत क्यो करें! जब पवित्र गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत करने को मना किया गया है।
गीता अध्याय 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता। इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए।
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पूर्ण संत से दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करो इस प्रकार जीने की राह पर चलकर संसार में सुखी जीवन जीए तथा मोक्ष रूपी मंजिल को प्राप्त करें। #सत_भक्ति_संदेश
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क्या आप जानते हैं कि गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में व्रत करने को मना किया गया है।
अधिक जानकारी के लिए देखें खास वीडियो Factful Debates YouTube चैनल पर।
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गीता अध्याय 15 श्लोक 17 में कहा गया है कि उत्तम पुरुष यानि पूर्ण परमात्मा तो कोई और है जो तीनों लोकों में प्रवेश करके सबका धारण पोषण करता है। उस परमात्मा को प्राप्त करने की विधि क्या है खास वीडियो "खुल गया राज गीता का"
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गीता अध्याय 4 श्लोक 5 में काल ने कहा कि उसके और अर्जुन के कई जन्म हो चुके हैं।ब्रह्मा, विष्णु, शिव भी जन्म-मरण के चक्र में हैं।ये त्रिलोक के देवता हैं, पूर्ण परमात्मा नहीं।
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शास्त्र विरुद्ध क्रिया का कोई लाभ नहीं
गीता अ. 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता। इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए। जानने के लिए देखें "खुल गया राज गीता का" Factful Debates YouTube Channel पर।
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शास्त्र विरुद्ध क्रिया का कोई लाभ नहीं
गीता अ. 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से ��ोई लाभ नहीं होता। इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए। जानने के लिए देखें "खुल गया राज गीता का" Factful Debates YouTube Channel पर।
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अं���र्राष्ट्रीय #गीताजयंती_पर_जानें_गीतारहस्य
गीता अध्याय 16 श्लोक 23, 24 के अनुसार, शास्त्र विरुद्ध मनमाना आचरण करने से कोई लाभ नहीं होता।इसलिए हमें शास्त्र अनुकूल भक्ति करनी चाहिए। जानने के लिए देखें "खुल गया राज गीता का"
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गीता के अध्याय 14 श्लोक 3-5 में बताया गया है कि काल-ब्रह्म (क्षर पुरुष) ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश का पिता और देवी दुर्गा का ���ति है।
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