देश में IAS,IPS और IFS के कुल पदों की संख्या और उसमें से कितने पद खाली हैं..??
IAS - 5577/6877
IPS - 4594/5099
IFS - 2164/3193
यानी कि देशभर में IAS के 1300 पद या कुल 19% पद खाली हैं और IPS के 505 पद जबकि IFS के 1029 पद खाली पड़े हुए हैं।
तैनात पदों में OBC SC ST की संख्या इस प्रकार है👇
• IAS ———
OBC:- 245 - 4.3%
SC :- 135 - 2.4%
ST :- 67 - 1.2%
• IPS ———
OBC-: 255 – 5.5%
SC:- 141 – 3%
ST:- 71 – 1.4%
• IFC———
OBC:- 231 – 10.6%
SC:- 95 – 4.3%
ST:- 48 – 2.2%
देश में सबसे बड़ी आबादी SC ST और OBC की है लेकिन ब्यूरोक्रेसी में इनकी हिस्सेदारी न के बराबर है — मतलब देश में घूसखोरी के लिए कौन जिम्मेदार है इसका जवाब मिल गया होगा।
• भारत के UP राज्य में सबसे अधिक 571 IAS व सिक्किम में सबसे कम 36 IAS अफसर तैनात हैं।
• IAS अफसर में महिलाओं की संख्या लगभग 21% है, जिनमें पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 84 महिलाएं हैं।
🚨 अरावली: अस्तित्व की आखिरी जंग! 🚨
विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली पर मौत का वारंट जारी हो चुका है! ⚠️ सुप्रीम कोर्ट की 100 मीटर वाली नई परिभाषा 90% अरावली को संरक्षण से बाहर कर देगी।
अगर पहाड़ियाँ खत्म हुईं तो:
🌪️ दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधियां बढ़ेंगी।
💧 भूजल स्तर पूरी तरह सूख जाएगा।
🌵 थार का रेगिस्तान आपके दरवाजे तक पहुँच जाएगा!
यह सिर्फ पहाड़ों की नहीं, हमारी सांसों की लड़ाई है। खनन लॉबी के खिलाफ आवाज उठाएं! 📢
#SaveAravali #अरावली_बचाओ #NoTo100MeterRule #EnvironmentFirst #DelhiNCR
♻️ RT करें और इस मुहिम का हिस्सा बनें!
कायरों की समस्या हमेशा एक-सी होती है!
आरएसएस वाले चाहते तो इतिहास की धारा में कूदकर अंगरेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ सकते थे, जेल जा सकते थे, फाँसी के फंदे तक जा सकते थे और अपने हिस्से की गौरवपूर्ण क़ुर्बानी दे सकते थे; लेकिन उन्होंने यह कठिन रास्ता चुना ही नहीं। इसके बजाय उन्होंने दूसरों के बलिदान से मिली आज़ादी के इतिहास पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। मानो शहादत उनकी थी और क़ब्रें भी उनकी हों!
कायरता की यही मनोवैज्ञानिक गाँठ आगे चलकर एक और रूप में दिखती है। आज के ज़माने का ज़िंदा तानाशाह सीने पर खड़ा हो; लेकिन “इतिहास–पुरुष” बनने का दावा करने वाला लेखक उसकी आलोचना करने की हिम्मत न जुटाए; इसके बजाय वह सदियों पुराने तानाशाहों की खोज में पड़ जाए। यानी जोखिम यहीं–अब लेने की जगह वह सुरक्षित अतीत में जाकर बहादुरी का अभिनय करे।
इन्हीं प्रवृत्तियों की वैचारिक जमीन पर बीएस मुंजे जैसे लोग उभरे, जिनके रास्ते पर चलकर नाथूराम गोडसे जैसे घृणित लोग तैयार हुए।
तिलक जी के निधन के बाद अचानक भारतीय स्वतंत्रता के आकाश में गांधी नाम के एक सियासी संत का सूर्य जैसा उदय हुआ तो मुंजे विचलित थे। जनांदोलन की अहिंसक राजनीति उन्हें स्वीकार नहीं थी। इसलिए वे सोनिया गांधी के मायके वाले देश इटली के फ़ासिस्टों से मिलने, उनकी सेनाओं और संगठनों का अध्ययन करने, और उनके तौर–तरीकों की तारीफ़ करते हुए वही ढाँचा यहाँ गढ़ने के सपने देखने लगे।
यही वह विचारधारात्मक धारा है, जो स्वतंत्रता–संघर्ष की मुख्यधारा से अलग होकर हिंसक, असहिष्णु और कायरता–आधारित राजनीति की ओर मुड़ जाती है। और कायरता का धर्म होता है कि वह किसी न किसी की गोद में मोद करे! अंगरेज़ की गोद में पला-बढ़ा आरएसएस हो या आज के समय के काँग्रेस-भाजपा के गोद में बैठे लोग!!!
सही डॉक्टर का चुनाव कैसे करें:
1.अगर किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का प्रचार कोई social media influencer कर रहा हो तो वहाँ कभी न जाएँ।
याद रखें, मार्केटिंग के एक-एक पैसे का बोझ मरीजों पर ही पड़ता है।
अगर किसी भी क्लिनिक को प्रचार के लिए influencer की ज़रूरत पड़ रही है तो वहाँ डॉक्टरों का स्तर न्यूनतम होगा।
2.ज़्यादातर Google रिव्यू फेक रहते हैं। उस पर आँख बंद कर भरोसा न करें।
3.मरीज को क्या बीमारी है, वो बीमारी क्यों हुई, इलाज के क्या-क्या उपाय हैं, इलाज न कराने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं —
ये सारी जानकारी अगर डॉक्टर न दें या न दे पाएँ तो second opinion लीजिए।
4.किसी भी डॉक्टर का अगर अपना फार्मेसी है तो वो चाहेंगे कि आप वहाँ से दवाई लें।
ये चाहने में कोई दिक्कत नहीं।
लेकिन “दवाई यहीं मिलेगी” या “दवा यहीं से लेनी पड़ेगी” — अगर वो ये कहते हैं तो इसमें दिक्कत है।
फिर डॉक्टर बदल लीजिए।
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर कहे कि बस उनके यहाँ की लैब की रिपोर्ट ही मान्य होगी तो ऐसे डॉक्टर से बचें।
5.इलाज की गारंटी देने वालों से दूर रहिए।
ज़्यादातर वे गड़बड़ निकलते हैं।
6.Second opinion लेने की बात पर अगर कोई डॉक्टर भड़क उठे तो वो डॉक्टर ठीक नहीं।
7.ज़्यादातर समय, ख़ासकर ICU में गंभीर मरीज के बारे में लोग अक्सर डॉक्टर से सवाल करते हैं कि मरीज़ कब तक ठीक हो जाएँगे।
इस सवाल का जवाब किसी डॉक्टर के पास नहीं होता। वो भविष्यवक्ता नहीं हैं कि भविष्यवाणी करें।
मरीज़ की स्थिति कैसी है और जो इलाज चल रहा है उससे स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है —
अगर डॉक्टर ये अच्छे से बता रहे हैं तो ठीक है।
8.डॉक्टर की डिग्री ज़रूर देखें।
डिग्री अच्छे से उनके पर्चे पर लिखी होनी चाहिए।
9.इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।
10.अगर डॉक्टर कोई जाँच या दवा लिखते हैं तो ज़रूर पूछें कि वो जाँच किस लिए लिखी जा रही है।
अच्छे डॉक्टर ज़रूर बताएँगे कि किस जाँच या किस दवा का क्या उद्देश्य है।
ये सारी चीज़ें प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर लागू होती हैं।
सरकारी अस्पतालों में समय के अभाव के कारण डॉक्टर ज़्यादा समय नहीं दे पाते,
लेकिन जो बुनियादी चीज़ें हैं वो उन्हें भी देनी चाहिए।
जल्द ही आप घर बैठे आधार कार्ड में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदल सकेंगे। आधार को रेगुलेट करने वाली संस्था यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने नई डिजिटल सर्विस की घोषणा की है।
इसके जरिए यूजर्स आधार एप पर OTP वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन से अपना मोबाइल नंबर अपडेट कर पाएंगे। इस सर्विस से दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोग और सीनियर सिटिजन को आसानी होगी।
पूरी खबर: https://t.co/AMBYzZlcAZ
प्रिय साथियों,शुभचिंतकों एवं मेरे अपने जनों,
9 अक्टूबर मेरे जीवन का सबसे कठिन और असहनीय दिन बन गया,
जब मेरा लाडला पुत्र हनुमंत सदा के लिए मुझसे दूर चला गया।
एक पिता के रूप में यह पीड़ा शब्दों से कहीं गहरी है —
यह ऐसा घाव है, जो शायद जीवनभर नहीं भर पाएगा।
पर इस अंधेरे दुःख के बीच,आप सबका स्नेह, आपका साथ और आपकी संवेदनाएँ
मेरे लिए सच में ईश्वर के करुणामय आशीर्वाद बनकर उतरीं।
जब मन पूरी तरह टूट चुका था,
तब आपके प्रेमभरे शब्दों,आपकी करुण आँखों और आपके मौन स्नेह ने मुझे थाम लिया, संभाल लिया,और फिर से जीने की हिम्मत दी।
हजारों-लाखों साथियों, शुभचिंतकों और स्वजनों ने जिस आत्मीयता से मुझे संबल दिया,
उसने मुझे गहराई से महसूस कराया कि —
मेरा एक बेटा चला गया है,
पर मेरे हजारों-लाखों बेटे-बेटियाँ और साथी आज भी मेरे साथ खड़े हैं।
आप सबका यह प्रेम,यह साथ,अब मेरे जीवन में हनुमंत के रूप में जीवित है।
आपका स्नेह ही उसकी मुस्कान बनकर
मेरे हर दुःख में प्रकाश बन जाता है।
मैं और मेरा पूरा परिवार आप सभी के प्रेम, प्रार्थनाओं और अपनेपन के लिए हृदय की गहराइयों से आभारी हैं।
ईश्वर आप सबको सदा सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करे —
और हनुमंत की पवित्र स्मृति
आपके स्नेह और आशीर्वाद के रूप में
हमारे जीवन में हमेशा यूँ ही बनी रहे।
सादर।
राहुल गांधी ने आज हमारी जिस Gen Z को ‘आंदोलित’ करने की कोशिश की है वह हिन्दू- मुस्लिम वाली घुट्टी पीकर बड़ा हुआ है।
उसे नेपाल की Gen Z की तरह नौकरी- भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा नहीं लगता। मंदिर- मस्जिद- मजार लगता है।
#RahulGandhi#Genz
सचिन पायलट की एक और कारगुज़ारी और डूबती कांग्रेस:
जनता के लिए लड़ने वाले युवा नेताओं को ऐसे रोना पड़े तो समझ जाओ उन्हें बहुत बुरी तरह राजनीति में फंसाया गया है और उम्मीद देकर धोखा दिया गया है
फिर ऐसे लोगों के साथ जनता जुड़ती है और भावनाओ की लहर में पार्टियों की जड़े उखड़ जाती है तब पार्टियां इन पर आरोप लगाती हैं कि ये तो वोट काटने के लिए राजनीति कर रहे हैं
समय रहते अगर इन्हें सचिन पायलट ने 2018 विधानसभा या 2019 लोकसभा या 2023 में ही दिलवा दिया होता, 2023 छोड़ो, 2024 लोकसभा या उपचुनाव में ही दे दिया होता तो आज कांग्रेस को पुर्वी राजस्थान में एक मजबूत जननेता का साथ मिला हुआ रहता और विधायक की ताकत से जनहित में ये आवाज गूंजती रहती, लेकिन इन्होंने उपचुनाव में भी पुरी साजिश रचकर टिकट काटने और निर्दलीय लड़वा कर कांग्रेस से दूर करने के पुरे बैकडोर इंतजाम किए थे।
सचिन पायलट ने स्वार्थ दिखा दिया और वो तो चाहते ही यही है कि कांग्रेस से पूर्वी राजस्थान के दलित आदिवासी किसान वोट दूर हो, उनके बराबरी में कोई युवा नेता खड़ा न हो
उधर अशोक गहलोत जी कांग्रेस से गद्दारी करने वाले किसी वयोवृद्ध, किसी बलात्कारी गद्दार नेता को तो वापस कांग्रेस में लाने के लिए जी जान लगा देते हैं, दिल्ली राजस्थान के बीच में जूते घिस लेते हैं लेकिन ऐसे जननेता के लिए कभी आंख भी नहीं खोलते हैं, और उनसे उम्मीद भी नहीं दिख रही है
लेकिन अब इतना होने के बाद सब से बड़ी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा जी, प्रह्लाद गुंजल जैसे नेताओं की बनती है कि वो आगे आएं, किसान वर्ग को उम्मीद दें कि अब उनके साथ बुरा नहीं होने देंगे और इस प्रकार के जननेता को पार्टी में शामिल करें, जिम्मेदारी लेकर इन्हें पार्टी लाइन पर चलकर जनहित में धरातल पर कार्य करने की सूझबूझ दें और कांग्रेस पार्टी को पूर्वी राजस्थान में उखड़ने से बचा लें वरना आप में और सचिन पायलट में कोई फर्क नहीं रह जाएगा
उम्मीद है कांग्रेस आलाकमान, प्रदेश कांग्रेस जगह जगह से खत्म होती कांग्रेस से सीख लेंगे और इस युवा जननेता को पार्टी में शामिल करेंगे, इनकी आवाज को सहारा देंगे और युवाओं को कांग्रेस से दूर नहीं जाने देंगे।
#वीडियो आज का है जहां झालावाड़ स्कूल में मृतक बच्चों के पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा सहायता के रूप में बकरी एवं खिलौने वितरण के खिलाफ अन्न त्याग कर धरने पर बैठे नरेश मीणा को पुलिस जबरदस्ती उठा कर अस्पताल में ले गई थी
#नोट: राजस्थान के सरकारी स्कूल की बिल्डिंग गिरने से 7 दलित आदिवासी बच्चों की मौत हो गई जिसके बाद विपक्ष के सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने पीड़ित परिवारों से जाकर मिलने की भी जरूरत नहीं समझी, सरकार ने मृतक बच्चों के परिवारों को अतिरिक्त सहायता के रूप में बीमार बकरियां और खिलौने दिए है जिसके बाद मांगे मनवाने के लिए जयपुर में धरना दिया गया था
@Khalbaali
“मेरे शहीद पति के खून पर खेलेंगे पाकिस्तान से क्रिकेट?
यह कैसी देशभक्ति है?”
पहलगाम में शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी कुछ कह रही हैं मोदी जी
खुरपेंच के 'ह्वाट्सऐप फॉरवर्ड' को अपना बड़ा खुलासा बताने का पूरा सच: नीचे पढ़ें.
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खुरपेंच के अनुसार कांग्रेस ने 'वोट चोरी' से जुड़ी जो पीडीएफ़ अपलोड कीं, उसके metadata में उन्हें मिला कि उस pdf को adobe illustrator सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया गया है ,जो की इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर का Timezone लेता है। Metadata से साफ़ पता चल रहा है जब ये फ़ाइल Export की गई उसका timezone +6:30 MMT है। यानी म्यांमार का। खुरपेंच के अनुसार ये पीडीएफ़ म्यांमार में बनाई गई हैं, इसलिए राहुल गांधी का और म्यांमार का संबंध है। अब इसकी सच्चाई जान लीजिए
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1. पहली बात Metadata, लोकेशन प्रूफ़ नहीं होता। Metadata सिर्फ़ उस सिस्टम की सेटिंग्स दिखाता है, जिस पर फ़ाइल बनी है। अगर किसी मोबाइल/कंप्यूटर या अन्य मशीन का timezone गलत सेट है (जानबूझकर, गलती से या default), तो मेटाडेटा में वही टाइम record हो जाएगा। जैसे मैं दिल्ली में हूँ और एक पीडीएफ़ क्रिएट करूँ लेकिन मेरे कंप्यूटर का टाइम अगर गलती से कलकत्ता के टाइमजोन पर सेट है तो मेरे पीडीएफ़ के मेटाडाता में कलकत्ता का टाइम ज़ोन दिखेगा। जबकि मैंने उसे दिल्ली में क्रिएट किया है।
खुरपेंच जी भूल गए कि Windows/Mac/Linux पर manually या accidentally timezone बदलना common है।
खुरपेंच द्वारा शेयर किए गये Metadata में CreateDate MMT (+06:30) में है। लेकिन इसी स्क्रीनशॉट में ModifyDate और MetadataDate IST (+05:30) में है। मतलब: फाइल India Standard Time (IST) में खोली और सेव भी हुई है, उसकी पूरी एडिट हिस्ट्री IST में है, लेकिन export के वक़्त system clock पर Myanmar टाइमज़ोन दर्ज हो गया। जिस कारण ये कन्फ़्यूशन आया। जो एक सामान्य बात है। जिस क्रिएट डेट को खुरपेंच ने MMT (म्यांमार) का दिखाया, उसके आगे और पीछे दोनों में IST का टाइमजोन दर्ज है. इंट्रेस्टिंगली डेट,समय, और सेकंड भी सेम है। MMT में जो टाइम/date : 2025:08:07, 15:08:41 (Time)- MMT दिखा रहा है उससे ऊपर ही सेम डेट, सेम टाइम, सेम सेकंड के लिए IST दिखा रहा है।
तीनों लैंग्वेज की पीडीएफ़ में म्यांमार के टाइमजोन MMT वाली क्रिएट डेट के ऊपर सेम डेट, सेम टाइम, सेम सेकेंड्स के लिए IST में टाइम दर्ज है.
खुरपेंच जी की बात मानूँ तो एक सेकंड के अंदर एक आदमी दिल्ली आ जाता है और एक सेकंड के अंदर वो म्यांमार चला जाता है. मतलब मिलीसेकेंड्स में एक आदमी म्यांमार और दिल्ली में आ जा रहा है. तभी ये पॉसिबल है कि एक फाइल के मेटाडेटा में दो टाइमजोन दर्ज हैं वो भी एक भी सेकंड के अंतर के बिना।
बेचारे खुरपेंच जी को ये स्क्रीनशॉट आईटी सेल के किसी लौंडे ने बड़ा खुलासा कहकर पकड़ा दी। और उन्होंने यहाँ शेयर कर दिया। अनपढ़ भक्त इसे ही बड़ा खुलासा बड़ा खुलासा कहकर शेयर कर रहे हैं। खुरपेंच जी बेचारे को क्या पता कि टाइमजोन का कनफ़्यूज़न कई बार Dual Clock Handling (OS vs Adobe) के कारण आता है. System Clock Reset / Timezone Switch के कारण भी आता है. ये एक Known Bug/Behaviour है. Forensics cases में इसको “timestamp anomaly” कहा जाता है। CreateDate और ModifyDate का gap seconds/minutes का होना ये दिखाता है कि फाइल एक ही सिस्टम पर बनी और save हुई है. जिसमें ऊपर और नीचे दोनों जगहों पर IST (इण्डियन टाइमज़ोन) दर्ज है. मतलब इंडिया में ही फाइल बनी हैं. बस गलती से म्यांमार टाइमज़ोन का टाइम फाइल एक्सपोर्ट के समय दर्ज हो गया है. जो एक कॉमन बग/नोन बेहवियर है.
लेकिन खुरपेंच ने सिर्फ़ Create Date के MMT (म्यांमार टाइमजोन) को हाईलाइट किया. लेकिन उसी सेम सेकंड में ऊपर दर्ज IST (इण्डियन टाइमज़ोन) के बारे में कुछ नहीं कहा. इस तथ्य पर बड़े भाई ने बड़े ही प्यार से चुप्पी मार ली. क्योंकि ये शायद उनके 'सोकॉल्ड इन्वेस्टीगेशन' में फिट नहीं बैठ रहा होगा. या पूरी इन्वेस्टीगेशन ही यहाँ फुस्स हो जा रही थी.
खुरपेंच ने बड़ी ही चालाकी से सेलेक्टिवली- CreateDate उठाया, जबकि ModifyDate (IST) को ignore कर दिया। Forensic analysis हमेशा पूरा context देखता है, partial नहीं।
खुरपेंच ने इस फैक्ट को छुपा दिया कि फाइल India Standard Time (IST) में ओपन एंड सेव हुई है। सिर्फ़ एक्सपोर्ट करते समय का क्रिएट डेट MMT में दर्ज हो गई है. जो लोकेशन का प्रूफ नहीं है बल्कि उस कंप्यूटर में सेट टाइमजोन भर है, वो कंप्यूटर दिल्ली में भी हो सकता है और लंदन में भी. लेकिन खुरपेंच जी ने अपने ट्वीट में इस बात का ज़िक्र तक नहीं किया। और केवल म्यांमार के टाइमज़ोन के कारण ही इतना बड़ा एलीगेशन लगा दिया कि क्या राहुल गांधी के म्यांमार, अमेरिका और विदेशी ताकतों से रिलेशंस हैं।
खुरपेंच की सोकॉल्ड इन्वेस्टीगेशन दिखाती है कि उन्हें कितनी टेक्निकल नॉलेज है. कोई मूर्ख बालक ही अपनी ऐसी मूर्खता पर ऐसी उछल-कूद सकता है.
मोदी 17 सितम्बर को अपने 75वें जन्मदिन पर गया जाएंगे, जहाँ वे अपनी माँ हीराबेन का पिंडदान करेंगे।
इसके बाद उनका रोड शो और राजनीतिक रैली भी होगी।
एक बेटे के तौर पर उनके आचरण पर सवाल उठ रहे हैं।
• माँ के निधन के बाद उन्होंने मुंडन नहीं कराया।
• सारी उम्र कठिनाइयों में बिताने वाली माँ को उन्होंने आख़िरी समय में अपने पास नहीं रखा।
• पिंडदान करने के लिए पूरे 3 साल इंतज़ार किया — वो भी बिहार चुनावों तक।
कितनी शर्मनाक बात है।
यह कर्नाटक सरकार का निर्णय है – फिर बीजेपी क्यों घबरा रही है..?
स्थानीय निकाय चुनाव कराना राज्य सरकार का अधिकार है, और ये अधिकार कानून में स्पष्ट रूप से दिया गया है।
हमारी सरकार ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला किया है
- डीके शिवकुमार
RJD की नई महिला प्रवक्ता ब्रिगेड धूम मचा रही है..!!
मैं हमेशा से कहती रही हूँ कि राजनीति और क़ानून में ज़्यादा महिलाओं की उपस्थिति देश की सूरत बदल देगी!
इस बात को प्रियंका भारती और कंचना यादव ने बखूबी करके दिखाया है।