नेक दिल इंसान हमारे लिए फरिस्ते
भगवान आपको हमेशा स्वस्थ रखे हैँ सर
जितने दिन अपने पद पर रहे हैँ सच्चे और एक ईमानदार अधिकारी के तौर पर रहे हैँ
आपसे बहुत कुछ सिखा हैँ हमनें इतने दिनों मे
आगे भीं समाज सेवा करते रहेगे आप उम्���ीद हैँ
धन्यवाद सर आपका ❤️🙏
@dines_srn @saten_08
सत्ता पक्ष के 240 सांसदों को साइड कर दिया जाए…
तो बाक़ी बचे हुए लगभग 300 सांसदों में से…
क्या कोई एक भी ऐसा सांसद हैं…
जो हनुमान बेनीवाल की तर��� कार्यरत हो…??
सड़क से लेकर संसद तक…
पाँच साल चौबीस घंटे लगातार…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कहा जाता है कि 18 घंटे काम करते है, कभी छुट्टी नहीं लेते…
उनकी हक़ीक़त तो हमें नहीं पता…
लेकिन हनुमान बेनीवाल को हम अपनी आँखों के सामने देखते है
18 घंटे नहीं चौबीसों घंटे…
और मजाल है कभी किसी ने बेनीवाल को छुट्टी मनाते या घूमने जाते हुए देखा हो…
आपको एक फ़ोटो या विडियो तक नहीं मिलेगा घूमते हुए या छुट्टी मनाते हुए का…!!
और संसद का कोई ऐसा सत्र नहीं रहा होगा…
जहाँ घंटों पूरे सदन को सुनने के बाद…
अपने हिस्से के 2-3 मिनट के समय का पूरा utilisation ना किया हो…!!
ऐसा दूसरा कोई सांसद हो तो ज़रूर बताइएगा…!!
#DOIT_विभाग_आवंटन_करो जब कुछ फिक्स हो जाता है, तो इंतजार करना बड़ा मुश्किल होता हैं ...
समय का पहिया घूमता तो है पर इंतजार की घड़ी में एक एक दिन वर्षों में बीतता है।
तस्वीर रात 10:30 बजे की है
जयपुर में लगभग 25 सांसदों के घर हैं
200 विधायकों के घर हैं
यदि ऐसी एक भी तस्वीर किसी नेता के घर की मिल जाए, तो तुम जीते और हम हा��े
बाकी 0 विधायक वाली पार्टी और स्वयंघोषित मुख्यमंत्री जैसी बातें करने में क्या ही ज���ोर आता है इनका कौन-सा खर्चा लगता है
“जब भर्ती दोबारा हो रही है, तो मौका भी एकसमान हर अभ्यर्थी को मिलना चाहिए”!
SI भर्ती 2021 रद्द होने के बाद अब सितंबर 2026 में दोबारा परीक्षा आयोजित की जा रही है, लेकिन RPSC द्वारा केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अवसर देने की बात कही जा रही है जिन्होंने वर्ष 2021 में परीक्षा दी थी, जबकि आवेदन करने वाले अन्य हजारों युवाओं को इससे बाहर रखा जा रहा है।
यह सिर्फ एक भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि सभी अभ्यर्थियों के अधिकार और समान अवसर का सवाल है। इसी मामले को लेकर कुछ युवाओं ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार और RPSC से जवाब मांगा है। अभ्यर्थियों की ओर से यह भी पक्ष रखा गया कि पूर्व में EO/RO भर्ती रद्द होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को मौका दिया गया था, तो फिर SI भर्ती में ऐसा भेदभाव क्यों?
हम सभी युवाओं की ओर से सरकार और RPSC से विनम्र निवेदन है कि इस भर्ती में सभी आवेदनकर्ताओं को अवसर दिया जाए। पेपरलीक के कारण कई युवा उस समय परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे, ऐसे में उन्हें अब दोबारा अवसर से वंचित करना उचित नहीं होगा।
“पेपरलीक ने पहले ही युवाओं के सपने तोड़े हैं,
अब अवसर छीनकर उनके हौसले मत तोड़िए।”
न्याय वही है जहां हर मेहनतकश युवा को समान अवसर मिले !
@BhajanlalBjp@RajCMO@BJP4Rajasthan@hanumanbeniwal@RLPINDIAorg@DrKirodilalBJP@JogarampatelMLA@RPSC1
#si_भर्ती_2021
1947 में देश का विभाजन हुआ। खान अब्दुल गफ्फार खान इसके सख्त खिलाफ थे। विभाजन के बाद वे पाकिस्तान के हिस्से में रह गए। लेकिन दुख की बात देखिए, जिस इंसान ने पूरी जवानी अंग्रेजों की जेलों में काट दी, आजादी के बाद पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें 'भारत का एजेंट' और 'गद्दार' घोषित कर दिया!
उन्हें अपनी ही जमीन पर करीब 30 साल तक जेल और नजरबंदी में गुजारने पड़े। वे इस कदर टूट चुके थे कि उन्होंने एक वसीयत लिखी
"जब मैं मरूं, तो मुझे पाकिस्तान की इस तानाशाही हुकूमत की सरजमीं पर दफन न किया जाए। मुझे अफगानिस्तान के जलालाबाद में सुपुर्द-ए-खाक करना।"
1988 का वो ऐतिहासिक दिन जब मौत ने य���द्ध को झुका दिया!
साल 1988 में इस महान आत्मा न��� हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। उनकी आखिरी इच्छा के मुताबिक, उनके पार्थिव शरीर को पाकिस्तान से अफगानिस्तान के जलालाबाद ले जाना था।
लेकिन उस समय एक बहुत बड़ा संकट था। अफगानिस्तान में उस वक्त भयानक और खूनी गृहयुद्ध (Civil War) चल रहा था। चारों तरफ बमबारी हो रही थी, टैंक चल रहे थे और दो विरोधी सेनाएं एक-दूसरे के खून की प्यासी थीं। ऐसे माहौल में वहां से जनाजा ले जाना साक्षात मौत के मुंह में जाने जैसा था।
लेकिन फिर इतिहास ने वो चमत्कार देखा जो न कभी पहले हुआ था और न शायद कभी बाद में होगा!
जैसे ही दोनों विरोधी सेनाओं को पता चला कि 'सीमांत गांधी' बादशाह खान का जनाजा सरहद पार कर रहा है, वैसे ही दोनों तरफ के कमांडरों ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। उन्होंने एलान किया:
"जब तक इस महान इंसान का जनाजा गुजर नहीं जाता और इन्हें सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर दिया जाता, तब तक कोई भी सैनिक गोली नहीं चलाएगा।"
इतिहास में इसे 'एक दिन का ऐतिहासिक युद्धविराम' (24-Hour Ceasefire) कहा जाता है। जो काम दुनिया की बड़ी से बड़ी अदालतें या बातचीत नहीं करवा सकीं, वो बादशाह खान के प्रति सम्मान ने कर दिखाया। गोलियों की आवाज थम गई, तोपों के मुंह बंद हो गए और दोनों तरफ के लड़ाके, जो एक-दूसरे को मार रहे थे, सिर झुकाकर उस जनाजे के साथ रोते हुए चल पड़े।
नॉलेज अड्डा की तरफ से:
दोस्तों, खान अब्दुल गफ्फार खान का जीवन हमें सिखाता है कि जब हम अपने सिद्धांतों, अपनी सादगी और अहिंसा पर अडिग रहते हैं, तो हमारी ताकत बंदूकों से भी बड़ी हो जाती है। नफरत कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वो एक सच्चे इंसान के जनाजे के सामने भी घुटने टेक देती है।
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राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी द्वारा लगातार सड़क से सदन तक उठाई गई आवाज़, युवाओं के अटूट संघर्ष तथा माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय और माननीय सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राजस्थान सरकार व राजस्थान लोक सेवा आयोग को आखिरकार S.I.भर्ती 2021 को रद्द करते हुए इस भर्ती का पुनः (Re-Exam) कराने का निर्णय लेना पड़ा | यह निर्णय अचानक नहीं आया, बल्कि हजारों युवाओं के लंबे संघर्ष, RLP के आंदोलन, धरनों, ज्ञापनों और न्याय की लड़ाई का परिणाम है। जब प्रदेश के युवा भर्ती प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे, तब सत्ता में बैठे लोगों ने लगातार मामले को दबाने और युवाओं की मांगों को अनदेखा करने का प्रयास किया, सरकार ने बार-बार दोगलापन दिखाया, लेकिन सच्चाई ज्यादा समय तक छिप नहीं सकी। आज यह फिर से स्पष्ट हो चुका है कि युवाओं की लड़ाई सही थी और उनकी मांग न्यायसंगत थी।
यह सिर्फ SI भर्ती का मुद्दा नहीं था, बल्कि प्रदेश के हर उस युवा के सम्मान और भविष्य की लड़ाई थी जो दिन-रात मेहनत करके अपने सपनों को पूरा करना चाहता है
लेकिन भजनलाल सरकार ने पुन: परीक्षा करवाने के इस निर्णय में भी केवल उन्हीं 383097 अभ्यर्थियों को मौका देने का निर्णय लिया है जो इस परीक्षा में उपस्थित हुए थे ��बकि इस परीक्षा के लिए करीबन 8 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था ऐसे में शेष रहे 3 लाख से अधिक अभ्यर्थी जिन्होने इस SI भर्ती परीक्षा 2021 के लिए आवेदन दिया था परन्तु किसी कारण से वो इस परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाए थे उनके साथ कुठाराघात कर रही है ,ऐसे में हमारी मांग है कि सरकार उन तमाम अभ्यर्थियों को मौका दे जिन्होंने इस भर्ती परीक्षा में सम्मिलित होने का आवेदन दिया था क्योंकि बंगाल शिक्षक भर्ती व राजस्थान की EO/ RO भर्ती में भी भर्तियों के रद्द होने के बाद दुबारा हुई परीक्षा में उन तमाम अभ्यर्थियों को मौका दिया गया जिन्होंने इन परीक्षाओं के लिए आवेदन किया था |
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी हर मेहनतकश युवा के साथ मजबूती से खड़ी थी, खड़ी है और आगे भी रहेगी।
@BhajanlalBjp @RajCMO