वनरक्षक भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के बाद अब विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों की भर्ती का स्थागित होना प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ धोखा है। शुरूआत से ही विरोध का सामना कर रही यह भर्ती प्रक्रिया अगर स्थायी रूप से होती तो शायद युवाओं के साथ ऐसा छल नहीं होता।
विद्या संबल योजना के तहत गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों की भर्ती का स्थगित होना प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ धोखा है। शुरूआत से ही विरोध का सामना कर रही यह भर्ती प्रक्रिया अगर स्थायी रूप से होती तो शायद युवाओं के साथ ऐसा छल नहीं होता।
@Rajendra4BJP
राजस्थान सरकार के कर्मचारी काफी समय से तबादलों का इंतजार कर रहे हैं सरकार से निवेदन है कि उनकी मांग को प्रमुखता के साथ सुने और राहत प्रदान करें ❤️❤️🙏🙏
#कर्मचारी_मांगे_तबादला
जैसलमेर जिले में नगर परिषद की डंपिंग साइट पर सैकड़ों गायों की मौत की घटना के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों से भी भूख और प्यास के कारण सैकड़ों गौवंश के दम तोड़ने के भयावह, दर्दनाक और हृदयविदारक दृश्य सामने आया हैं। यह मंजर प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता, प्रशासनिक व्यवस्था तथा गौ-संरक्षण के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
सरकार की नाकामियों और प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही के कारण सीमांत बाड़मेर, बालोतरा और जैसलमेर जिलों सहित प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भीषण गर्मी, पेयजल संकट, चारे की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते पशुधन गंभीर संकट से गुजर रहा है लगातार गौवंश की मौतें हो रही हैं, जो अत्यंत चिंताजनक और दुःखद है।
गौ-रक्षा के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल करने वाले लोगों को अब जनता के सामने जवाब देना चाहिए। मंचों से बड़े-बड़े भाषण देने वालों की संवेदनाएं उस समय कहाँ चली जाती हैं, जब गौमाता भूख, प्यास और अव्यवस्था के कारण तड़प-तड़पकर दम तोड़ रही होती हैं?
सरकार जल जीवन मिशन योजना की उपलब्धियों का व्यापक प्रचार कर रही है, लेकिन धरातल पर हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। पशुधन तो दूर, प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में आम नागरिकों को भी पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी, प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि गौवंश संरक्षण और गोशालाओं के लिए दी जाने वाली सरकारी अनुदान राशि आखिर खर्च कहाँ हो रही है? यदि सरकार द्वारा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, तो फिर गायें भूख और प्यास से मरने को क्यों मजबूर हैं? अथवा क्या गौ-संरक्षण और गोशालाओं को दी जाने वाली अनुदान राशि में कटौती या बंद कर दी गई है?
गौवंश की लगातार हो रही मौतों पर मानवीय संवेदनाएं प्रदर्शित करते हुए सरकार को तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, पशु आहार तथा आवश्यक पशु चिकित्सा सुविधाओं के लिए विशेष राहत शिविर स्थापित करने चाहिए, ताकि इस गंभीर संकट का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
@BhajanlalBjp@RajCMO
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पचपदरा रिफाइनरी की भीषण आगजनी और PM सुरक्षा में हुई चूक पर सरकार का रवैया "खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे" जैसा है।
विश्व स्तरीय अत्याधुनिक तकनीक वाली HPCL रिफाइनरी में प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित दौरे से मात्र 20 घंटे पहले 20 अप्रैल को मुख्य प्रोसेसिंग CDU-VDU यूनिट में आग लग जाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और PM की सुरक्षा में चूक व गंभीर लापरवाही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
लेकिन बड़ा अफसोस यह हैं कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद चार दिन बाद भी किसी पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई। इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है, यह अब तक स्पष्ट नहीं किया गया। केवल पचपदरा थानाधिकारी, CI अचलाराम ढाका को निलंबित किया गया है। क्या इतनी गंभीर घटना पर यही जवाबदेही तय होती है?
कारण यह बताया गया कि 20 अप्रैल 2026 को शाम 07:00 बजे एक युवक ने सभास्थल के पांडाल में वीआईपी मूवमेंट क्षेत्र, मंच और डी-ब्लॉक के पास जाकर वीडियो बना लिया। जबकि इससे पहले शाम 05:00 बजे पेट्रोलियम मंत्रालय ने X (ट्विटर) पर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के स्थगित होने की घोषणा कर दी थी। इसके तुरंत बाद 06:50 बजे मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी ने भी कार्यक्रम रद्द/स्थगित होने की सूचना जारी कर दी थी।
ऐसे में आगजनी जैसी गंभीर घटना को नजरअंदाज कर इस प्रकार के कारण प्रस्तुत करना न केवल हास्यास्पद प्रतीत होता है, बल्कि यह शासन और सुरक्षा एजेंसियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। जब कार्यक्रम पहले ही रद्द हो चुका था, तब खाली मंच पर किसी युवक द्वारा वीडियो बना लेना “प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक” मानकर SHO को निलंबित करना क्या न्यायसंगत है?
वहीं दूसरी ओर, रिफाइनरी में हुई भीषण आगजनी, जिससे देश की संपत्ति को करोड़ों का नुकसान हुआ, उस पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
– तो क्या प्रधानमंत्री की सुरक्षा में वास्तविक चूक वह आगजनी नहीं थी, बल्कि कार्यक्रम रद्द होने के बाद बना यह वीडियो था?
– क्या PM और CM के दौरे की सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा सिर्फ एक थानेदार पर होता है? जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी SPG और उच्चाधिकारियों के अधीन होती है।
– रिफाइनरी के अंदर हुई आगजनी की घटना क्या सुरक्षा तंत्र की लापरवाही, प्रबंधन की तकनीकी खामियों और संभावित भ्रष्टाचार को भी उजागर नहीं करती हैं? इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– चार दिन बाद भी जवाबदेही तय करने के बजाय लीपापोती क्यों की जा रही है? यह गंभीर संदेह उत्पन्न करता है कि आखिर किसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
– यदि घटना के 7 घंटे बाद PM के कार्यक्रम के स्थगन का आधिकारिक आदेश जारी हो चुका था और टेंट/डोम लगाने वाली कंपनी ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया था, तो शाम 07:00 बजे किस प्रकार की सुरक्षा का प्रश्न रह जाता है?
वहीं पिछले वर्ष 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा जिले के नापला गांव में PM मोदी जी की जनसभा के दौरान तकनीकी खराबी के कारण 10 मिनट के लिए वीडियो सिस्टम बंद हो गया था। उस समय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (DOIT) की एक IAS अधिकारी को उसी दिन तत्काल APO कर दिया गया था।
लेकिन पचपदरा रिफाइनरी की इस गंभीर घटना जिसने प्रधानमंत्री की सुरक्षा, देश की संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय छवि तीनों को प्रभावित किया उसमें चार दिन बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
– क्या रिफाइनरी में आग लगना इतनी बड़ी घटना नहीं है कि 4 दिन बाद भी किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई न हो?
– क्या जांच एजेंसियों को अब तक किसी की गलती नजर नहीं आई है?
– क्या एक वीडियो सिस्टम की तकनीकी खराबी, प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी इस गंभीर घटना से बड़ी थी?
– क्या बांसवाड़ा की तकनीकी खराबी, रिफाइनरी में हुए करोड़ों के नुकसान से भी अधिक गंभीर थी, जिस पर तत्काल कार्रवाई हुई?
पचपदरा की इस भीषण आगजनी और सुरक्षा में इतनी बड़ी ढिलाई पर अब तक किसी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इससे यह साफ है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। सरकार बताए कि आखिर किसे बचाने की कोशिश की जा रही है?
@PMOIndia@HardeepSPuri@PetroleumMin@BhajanlalBjp@HMOIndia@RajCMO@RajGovOfficial@PoliceRajasthan
RGHS की दवाइयाँ कर्मचारियों को नहीं मिल रही हैं। उनकी तनख़्वाह में से दवाई का पैसा कट रहा है। आज अस्पतालों को भुगतान नहीं होने की वजह से अस्पतालों ने हड़ताल कर रखी है और कर्मचारी तथा पेंशनर्स को दवाइयाँ देने से मना कर रहे हैं। यह कर्मचारी और पेंशनर्स जाएँ तो जाएँ कहाँ?
क्या मुख्यमंत्री जी, आपको इतना भी नज़र नहीं आता कि मेरे जो कर्मचारी हैं, मेरे जो पेंशनर्स हैं, जो बुज़ुर्ग लोग है वो किस परिस्थिति से गुज़र रहे हैं? कैसे वे दवाइयों की व्यवस्था कर पा रहे होंगे?
रिटायरमेंट के बाद व्यक्ति को जरूरत होती है। उसे बार–बार अस्पताल जाना पड़ता है। और आप हैं कि इस पर ध्यान ही नहीं दे रहे। इसलिए मैं कहना चाहूँगा, मुख्यमंत्री जी RGHS का बजट जारी कीजिए, पेंशनर्स का भुगतान कीजिए, कर्मचारियों का भुगतान कीजिए। ऐसे कैसे काम चलेगा? @RajCMO@BhajanlalBjp
RailOne ऐप
रेलवन (RailOne) ऐप भारतीय रेल का नया ऑल-इन-वन मोबाइल ऐप है।
इस ऐप में टिकट बुकिंग, ट्रेन ट्रैकिंग, पीएनआर स्टेटस और भोजन ऑर्डर जैसी कई सेवाएँ एक ही जगह मिलती हैं।
आप इससे आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकते हैं।...
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@RailMinIndia@MIB_India@airnewsalerts
ये अशोक यादव हैं, जो बिहार के सिवान जिला के लक्ष्मीपुर गांव के निवासी हैं ! परिवार में दो बच्चे हैं बीमारी में पत्नी छोड़कर चली गई है!
देखकर साफ पता चल रहा है इन्हें गंभीर बीमारी है लेकिन क्या बीमारी है इसकी जांच कराने के भी पैसे नहीं है! भीख मांगकर बच्चों का पेट पाल रहे हैं!
बिहार सरकार से तो उम्मीद नहीं है बस अंतिम उम्मीद सोनू सूद ही है! गरीबों के मसीहा @SonuSood आप ही देवदूत बन जाइए!
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