स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजों के बूट की पॉलिश करने से लेकर, उनके बूट को पैर से निकालकर उससे, उसके ही सर को लहूलुहान करने तक के सब मार्ग मेरे स्वतंत्रता प्राप्ति के साधन हो सकते हैं। मैं तो इतना ही जानता हूँ कि देश को स्वतंत्र करना है।
- डॉ० हेडगेवार (जुलाई 1930, सत्याग्रह के दौरान)
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख आदरणीय श्री स्वांत रंजन जी से विजय निकेतन, पटना में मुलाक़ात हुआ और अपनी पुस्तक भेंट किया। प.पू. सरसंघसाचलक डा. मोहन भागवत जी के द्वारा लॉंच किया गया @AudioKumbh के प्रगति के बारे में भी अवगत कराया।
@RSSorg@MODIfied_SKP@blsanthosh@DrMohanBhagwat
संगठन शक्ति के आधार पर, देश भर में फैले अपने असंख्य कार्यकर्ताओं के त्याग, बलिदान तथा परिश्रम के आधार पर संघ इस अग्निपरीक्षा से भी सफलतापूर्वक बाहर निकला।
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आशा है आप सब ऑडियो कुम्भ पर संघ साहित्यों का आनंद ले रहे होंगे। पिछले डेढ़ साल में हमने 100 से अधिक नई पुस्तकों को प्रॉफेशनली रिकॉर्ड कराया और साथ ही App में नए-नए फीचर्स भी जोड़ें ताकि आपको ��ेहतर अनुभव मिल सके।
इसी कड़ी में हमने ऑडियो कुम्भ के सिग्नेचर ट्यून पर विचार किया और हमने शमी नारंग जी (Voice of Metro) से ऑडियो कुम्भ के लिए आवाज़ ली। आइये इस नए सिग्नेचर ट्यून के साथ ऑडियो कुम्भ के नए version का आनंद लीजिये। हम लगातार नई पुस्तकों को आप तक लाते रहेंगे। आप हमसे लगातार जुड़े रहें।
यदि अभी तक आपने नया अपडेट इनस्टॉल नहीं किया है तो आज ही करें और हमें अपना सुझाव और फीडबैक ज़रूर दें। : @TheRSSGuy
प्रतिभाएं सभी क्षेत्रों में एवरेस्ट-शिखर नहीं होती; परंतु जब किसी क्षेत्र में किसी पुरुष का उत्कर्ष साबित हो गया, तो उसकी कदर करना तथा उससे काम लेना समाज का कर्त्तव्य है।
- महापंडित राहुल सांकृत्यायन
Things to know about Ambedkar that your History Teacher didn't teach you:
~ He refused conversion into Islam & Christianity
~ He asked Jogendra Mandal not to go with Pakistan
~ He spoke about complete population swap based on religion
More: https://t.co/Q4peOiLCR7
राष्ट्रीय चरित्र के वृक्ष पर व्यक्तिगत चरित्र की बेल पल्लवन या आश्रय पाती है। महाभारत का यह सुभाषित शाश्वत सत्य कहता है "अधिष्ठतो बले धर्मो द्रुमे वल्लीव संश्रिता।"
[छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती विशेष]
विश्व इतिहास में पश्चिम से 3 बड़े पुरुषों का नाम हम जानते है
- सिकंदर
- जूलियस सीज़र
- नेपोलियन बोनापार्ट
संसार के प्रसिद्ध लोगों में जब ��ुलना करते हैं तो शिवाजी का श्रेष्ठतम स्थान क्यो आता है?
जानते है इस Thread में। 🧵
भारत के इतिहास में दो व्यक्ति महान हुए
छत्रपति शिवाजी महाराज, चंद��रगुप्त मौर्य
समानता?? → दोनों के गुरु महान थे।
भारत गुरु शिष्य परंपरा का देश रहा है।
० शिवाजी - समर्थ गुरु रामदास
० चंद्रगुप्त - चाणक्य
० विवेकानंद - रामकृष्ण परमहंस
→ आगे आप कड़ी जोड़ सकते हैं
→ @AudioKumbh
अब जब हम स्वतंत्र हो गए हैं, तो क्या यह हमारा कर्तव्य नहीं हो जाता कि हम अपनी इस कमी को शीघ्र अति शीघ्र पूरा करके विश्व के प्रगतिशील देशों के साथ खड़े हो जाएं।
पूरी पुस्तक सुनने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें।
https://t.co/nbgdp3KAS8
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@RSSorg@friendsofrss@RSSgeet
बदली हुई परिस्थितियों में जीवन को बनाए रखने तथा स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने में अपने जीवन को अभिव्यक्त किया।हमारे जीवन का प्रवाह अवरुद्ध नहीं अपितु आगे बढ़ता गया।
विश्व में हम अकेले ही तो नहीं है,दूसरे राष्ट्र भी हैं जिन्होंने पिछले 1000 वर्ष में अभूतपूर्व उन्नति की है।
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फिर यह कहना भी युक्तिसंगत नहीं होगा कि परतंत्रता के साथ 1000 वर्ष पूर्व का हमारे जीवन का सूत्र एकदम टूट गया है तथा तब से अब तक हम पूर्णता निष्क्रिय हैं अथवा गतिहीन रहे हैं।
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पर राष्ट्र कोई वस्तु या पुस्तक के समान निर्जीव वस्तु तो है नहीं, जिसे बुनते या पढ़ते समय जहां एक बार छोड़ दिया वहां से फिर किसी विशेष अवधि के बाद उसे आगे बढ़ाया जा सके।
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हम किस ओर चलें? राष्ट्र के समक्ष यह प्रश्न है। कुछ लोग कहते हैं कि राष्ट्र के परतंत्र होने से पूर्व (1000 वर्ष पहले) जहां अपने राष्ट्र का जीवन का सूत्र छोड़ दिया था वहीं से हम उसे आगे बढ़ाएं।
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