गांधी दर्शन की बात करने वाले अशोक गहलोत जी को गांधारी-दर्शन त्यागकर सत्य का सामना करना चाहिए !
प्रदेश के मुखिया के रूप में पाँच वर्षों तक कुशासन देने वाले श्री @ashokgehlot51 आज तथ्यों की मांग कर रहे हैं, जबकि तथ्य स्वयं उनकी सरकार के काले कारनामों की गवाही देते आ रहे हैं।1/4
“हाथ कंगन को आरसी क्या,
पढ़े-लिखे को फ़ारसी क्या!”
PIB के अधिकृत बयान के अनुसार, आज से ठीक बारह साल पहले 26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभाली थी, उस दिन भारतीय basket का कच्चा तेल $108.05 प्रति बैरल था और डॉलर-रुपया exchange rate 58.59 रुपए थी। उस समय पेट्रोल ₹71.51 और डीज़ल ₹56.71 प्रति लीटर मिल रहा था।
आज कच्चे तेल की कीमत $99 प्रति बैरल से कम है, लेकिन पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़कर क्रमशः ₹102.12 और ₹95.20 प्रति लीटर हो गए हैं।
यानी कच्चा तेल सस्ता हुआ, लेकिन पेट्रोल करीब 42.8 % और डीज़ल करीब 67.9 % महँगा हो गया।
हर अर्थशास्त्री जानता है कि पेट्रोल-डीज़ल की महँगाई का असर हर क्षेत्र पर पड़ता है। परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं तक, आम आदमी पर महँगाई की मार बढ़ती है। इसके बावजूद सरकार की मुनाफ़ाख़ोरी जारी है।
सवाल सीधा है कि जब कच्चा तेल सस्ता हुआ, तो पेट्रोल-डीज़ल महँगा क्यों?
जनता को राहत क्यों नहीं?
आजकल देश में एक अजीब ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। लाखों-करोड़ों कमाने वाले डॉक्टर और इंजीनियर अपनी पेशेवर नौकरियाँ छोड़कर UPSC की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उनमें से कई सफल भी हो रहे हैं और सिविल सेवाओं में जा रहे हैं। सवाल यह है कि जब देश पहले से ही डॉक्टरों और इंजीनियरों की भारी कमी से जूझ रहा है, तब हमारे सबसे प्रतिभाशाली लोग अपने मूल पेशे छोड़कर प्रशासनिक सेवाओं की ओर क्यों जा रहे हैं?
क्या देश की सेवा केवल UPSC पास करके ही की जा सकती है? क्या एक अच्छा डॉक्टर मरीजों को बचाकर देश की सेवा नहीं कर रहा? क्या एक ईमानदार इंजीनियर बेहतर सड़कें, पुल, बिजली और तकनीक बनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान नहीं देता? अगर हर प्रतिभाशाली डॉक्टर और इंजीनियर अंततः प्रशासनिक कुर्सी की तरफ ही भागेगा, तो फिर अस्पतालों, रिसर्च लैब्स और तकनीकी संस्थानों का क्या होगा?
यह भी एक गंभीर प्रश्न है कि क्या यह बदलाव वास्तव में सेवा भावना के कारण है, या फिर सत्ता, प्रभाव और निर्णय लेने की ताकत का आकर्षण अधिक है। कई लोगों को लगता है कि प्रशासनिक पद सिर्फ सेवा का मंच नहीं बल्कि शक्ति, प्रतिष्ठा और सिस्टम पर नियंत्रण का साधन भी बन गया है। यही कारण है कि कॉरपोरेट या पेशेवर क्षेत्र में सफल लोग भी उस कुर्सी की ओर खिंचे चले आते हैं।
सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। ऐसी नीतियाँ बननी चाहिए जिससे देश के श्रेष्ठ डॉक्टर, वैज्ञानिक और इंजीनियर अपने ही क्षेत्रों में काम करते हुए सम्मान, सुरक्षा, संसाधन और निर्णय लेने की शक्ति महसूस करें। यदि स्वास्थ्य, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्रों में भी उतनी ही प्रतिष्ठा, वेतन और प्रभाव होगा जितना सिविल सेवाओं में है, तो शायद प्रतिभा का यह पलायन रुक सके।
क्योंकि एक मजबूत राष्ट्र केवल अच्छे प्रशासकों से नहीं बनता।
उसे उत्कृष्ट डॉक्टर, वैज्ञानिक, इंजीनियर, शिक्षक और शोधकर्ताओं की भी उतनी ही जरूरत होती है।
"तुम्हें शर्म नहीं आती चोरों देश को खा गये"... कुछ
इस अंदाज़ में, लताड़ लगाते #बाबा दिखाई दिये l
जिसने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जीवनभर लड़ाई लड़ी हो
वह आंखों के सामने, भ्रष्टाचार कैसे बर्दास्त करेगा?
#DrKirodiLalMeena
उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का विरोध—अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों के अधिकारों के संदर्भ में—किया जाना सामाजिक न्याय के विरुद्ध एक भ्रामक एवं संगठित प्रयास है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
जबकि UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान अथवा दिव्यांगता के आधार पर—विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तथा दिव्यांगजनों—या इनमें से किसी भी वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव का उन्मूलन करना तथा सभी हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को सुनिश्चित करना है।
उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन करने के उद्देश्य लाए गए UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 का भीम आर्मी - आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) पूर्ण समर्थन करती है।
#ASP_K_Support_UGC_Act
#ASP_K_Support_UGC_Act
अनपढ़ ब्राह्मण भी UGC का विरोध कर रहा हैं पढ़ा लिखा गडरिया,गुर्जर,कश्यप,सैनी, प्रजापति,विश्वकर्मा बढई सारा OBC
यूट्यूब पर खाटू श्याम और बागेश्वर बाबा का स्टेटस ढूंढ रहा है कल सुबह उठकर व्हाट्सएप पर जो लगाना है।
#We_support_UGC_Act
"जहां #मीणा_समाज खड़ा हो जाए, वहां से ही
अमिताभ के डायलॉग की तरह, मेरे बाद लाइन
चालू होगी"....
मीणा समाज प्रतिभा सम्मान समारोह में, मध्य प्रदेश
के मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी ने मीणा
समाज के संघर्ष, कर्मठ और स्वाभिमानी जीवन की
जमकर प्रशंसा की !!
#MadhyaPradesh
BJP के बलात्कारी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में बीजेपी के तमाम नेताओं के बाद अब बृज भूषण सिंह उतर आए हैं।
जिस सेंगर ने उन्नाव की बेटी का बलात्कार किया, उसके पूरे परिवार को तबाह कर दिया, उस बलात्कारी सेंगर के समर्थन में पूरी बीजेपी उतर आई है।
दरअसल यही BJP का असली चेहरा और चरित्र है‼️
आज अभिनेता से लेकर बड़े बड़े दिगज़्ज़ खिलाड़ी आज देश मैं हो रहे अन्याय और अत्याचार के ख़िलाफ़ बोलना छोड़िये लिख नहीं पा रहे है, 2014 से पहले भले ही सब कुछ ख़राब रहा हो मगर ये आज़ादी ज़रूर थी कि सब बोलते थे आवाज़ उठाते थे सरकारो से सवाल पूछते थे और सरकारें दबाब भी महसूस करती थी और जवाब भी देती थी । आजकी सरकारो के लिए जनता सिर्फ़ वोट लेने की मशीन और tax कमाने जा ज़रिया मात्र है । याद रखना दोस्तों -
जब न्याय सत्ता की जेब में चला जाये
तो अकेला कोई बलात्कारी ही सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की उसमे साझेदारी है ।।
अच्छा राम राज्य है - जहाँ एक rape पीड़िता को न्याय के लिए सड़को पे उतरकर सुरक्षा के लिए बनी police से ही भिड़ना पड़ रहा है और तमाम intellectual वर्ग मूक बनकर बैठा है ।।
bulldozer क्या बस ग़रीब की छत पे चलने के लिए है , बड़े गुनहगार के घर पहुचते ही तो डीजल खत्म ।।
@narendramodi साहब कुछ रहम कीजिये 🙏
#JusticeForUnnaoVictim
"मैं केवल किरोड़ी लाल जी से डरता हूं"
डरते हो.....??
बिल्कुल.. उस एक आदमी से डरता हूं उनका सम्मान
करता हूं बाकी तो किड़े-मकोड़े हैं, नेता ही नहीं हैं !
~नरेश मीना [ भगतसिंह सेना-प्रमुख ]
#DrKirodiLalMeena#NareshMeena
आदरणीय भजनलाल जी, दिया जी... समस्त पुलिस
प्रशासन मैने आपको,सबको खूब हंसाया है अभी मेरे
साथ यह घटना हो गई, मेरा बेटा नहीं आ सकता.. पर
ऐसे लोग जो साजिश रच करके.... दूसरे के बच्चों को
ठिकाने लगाते हैं इन पर कार्रवाई जरूर करे !
~पन्या सेपट [हास्य कलाकार]
@BhajanlalBjp@KumariDiya
कपिल शर्मा — मैं नया देश बनाऊंगा वहां पर लोग अलग-अलग धर्म के होंगे।
संतरी — अलग-अलग धर्मो के क्यों महाराज?
कपिल शर्मा — एक धर्म के लोग राजा को पीट सकते हैं, अलग-अलग धर्म के रखेंगे तो एक-दूसरे से लड़ते रहेंगे और राजा बचा रहेगा।
इशारों इशारों में भारत के वर्तमान हालात बता दिए।