@rajuparulekar सर तो ये तैयारी 2029 की हो रही है जिसमें अब iskcon की एंट्री कराई गई है।
राम जी से काम निकल गया तो अब कृष्ण जी को बुलाया जा रहा है।
राजनीति बड़ी चतुर है—देवता भी उसके लिए इलेक्शनल रिसोर्स हैं।
Fools have strength in numbers, but truth stands with humanity. The Pandavas were five, while the Kauravas were a hundred. Krishna sided with the Pandavas
The original Krishna, not the ISKCON version!
#UniversalOneness
Self-styled Journalist aka Propagandist making efforts to hide the truth . @_pallavighosh , as a journalist , go to Haldwani and check first hand instead of sharing such videos.
We Uttarakhandis are shocked . Such a despicable act of caste humiliation has no place in our state.
The “shuddhikaran havan” at Haldwani’s Ramlila Ground after @kharge 's rally is not religion. It is untouchability in modern clothes.
A Dalit leader speaks , the ground is declared “polluted” ,purification follows.
The message is clear.
Article 17 of the Constitution abolishes untouchability “in any form.”
This act insults the dignity of a Scheduled Caste citizen and violates Articles 14 & 21.
It attracts the SC/ST (Prevention of Atrocities) Act.
No amount of “religious sentiment” can justify caste humiliation.
Public grounds belong to the people, not to self-appointed purity police.
Declaring a citizen’s presence as pollution is a direct challenge to the Constitution’s equality code.
This is not politics. This is a crime.
Strict action is mandatory, not optional. FIR under SC/ST Act. Investigation. Prosecution.
Those who organised it, performed it, and those defending it must face the law. By now the members Shri Ram Sena (Shri Ram Sena Dharmarth Seva Nyas Sangathan) who performed the havan should have been behind bars .
Anything less means the Constitution is optional for some.
#Haldwani #ConstitutionFirst
नरेंद्र मोदी की पार्टी ने अपने सभी हैंडल्स से दो महत्वपूर्ण ऐलान किए हैं -
पहला, उनके विरोधी "दिमागी" नक्सल हैं यानी वे खुद दिमाग से पैदल हैं।
दूसरा, उन्हें वोट नहीं देने वाली भारत की लगभग 64% जनता उनकी दुश्मन है जिसके खिलाफ वे हिंसक फिल्मी दृश्यों के सहारे हिंसा का आह्वान कर रहे हैं।
हिटलर के पदचिन्हों पर चलने वाले संघ की विचारधारा में व्याप्त नफरत और हिंसा अब खुलकर देश के सामने है।
@Ravipandey4AAP ये usa में जा के क्यों बोल रहा है इसको तो सबसे पहले अपने सदस्यों से ये आग्रह करना चाहिए जो दिन ब दिन समाज में हिंसा और नफ़रत फैला रहे है।
@priyanshu__63 बीजेपी दो मुंहे सांप की तरह है ये सिर्फ दोगलपंती है एक डिप्टी सीएम आरक्षण विरोधी खेमा से मिल रहे दूसरे बोल रहे आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं। ये सिर्फ वोटर को साधने की तरकीब है इसे पता है आरक्षण विरोधी खेमा कुछ भी हो वो बीजेपी से अलग नहीं होने वाले तो दूसरे को साधने में लगे है।
@KirenRijiju Rijiju ji, congress is desh ke dalit aur aadivasi ko bahut kuch diya. Lekin apki sarkar inse wo sb sari chize chhin rhe ho. Apki sarkar ke data hai ki pichle 5-7 yr me dalit aur aadivasi pr julm badha hai. Unki baaton ko ansuna kiya jaa rha hai.
Penguin India का बयान पढ़कर 1878 का Vernacular Press Act कब्र में करवट ले रहा होगा।
1878 में भाषा पर पहरा था, आज शब्दों पर ‘editorial recommendation’ है।
फर्क बस इतना है कि तब राज सत्ता तय करती थी कि क्या छपे,
और आज प्रकाशक तय कर रहा है कि क्या ‘fact-check’ के बाद छपने लायक है।
1-अगर @PenguinIndia पब्लिशर नहीं है/था, तो बात लेखक को रिकमेन्डेशन देने या फ़ैक्ट चेक तक कैसे पहुँची?
2- Knopf Doubleday Publishing Group पेंगविन रेंडम पब्लिशिंग समूह का हिस्सा है, उसने एक लाख कॉपी का पहला प्रिन्ट छापने की घोषणा कैसे की?
3- पेंगविन के हिन्दी समूह ने गोडसे का भाषण 'मैंने गांधी वध क्यों किया' हिन्दी में छापा है, क्या उसके फ़ैक्ट चेक किये गए थे?
खैर, इतना झूठ बोलने की ज़रूरत कैसे पड़ी?
जिस किताब को छापने मे Penguin World को कोई समस्या नहीं है,उसको लेकर penguin India झूठ बोल रहा है।दरअसल कहानी कुछ और है।कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य लिखे हैं, दूसरा चीन ने कैसे देश की जमीन पर क़ब्ज़ा किया और संघ ने कैसे देश के संस्थानों को नियंत्रित किया है।असली समस्या Belonging में लिखी इन बातों से है।
आरक्षण पर बीजेपी का दोहरा चरित्र
आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा की कथनी और करनी के बीच का अंतर समझने के लिए @Ashok_Kashmir सर का यह महत्वपूर्ण वीडियो जरूर देखें।
https://t.co/PffmN8VGl8
जब ‘आरक्षण हटाओ’ के नाम पर आंदोलन और उसके पीछे उठती आवाज़ों को देखता हूँ, तो लगता है कि आरक्षण पर बहस सचमुच अवसरों की समानता के लिए नहीं बल्कि फिर उस सामाजिक व्यवस्था को वापस पाने की बेचैनी है जिसमें जाति के आधार पर असमानता को सामान्य मान लिया गया था।
#Save_Reservation
आरक्षण खत्म करने की मांग वही लोग कर रहे हैं, जो जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त हैं।
‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन इस बात का गवाही भी दे रहा है। वो नारे और मीडिया बाईट्स गवाह है इस बात का।
“लोकसभा में विपक्ष का नेता”
किसी एक राजनेता का नाम बताओ जो एक व्यक्ति की तरफ़ से FIR लिखवाने के लिए घंटों थाने के चक्कर काटता रहा, एक भी नेता।
सोचना चाहिए कि आम इंसान का जीवन इतने क्रिमिनल लोगों के बीच में कैसे गुज़रता होगा।
एलियन RSS के लोग इस देश को क्यों खा रहे हैं?
@AnumaVidisha@NavbharatTimes ये सुधरने वाले नहीं है इसको प्रोपोगेंडा तो करना ही है। बस इस प्रोपोगेंडा से देश को आगाह करना और लोगों को बचाना है।
जिसके संस्था ने वंदे मातरम् का, तिरंगे का, अंग्रेज़ों से आजादी का विरोध किया हो वो आज वंदे मातरम् पर दाद दे रही है। क्या ही कहा जाए ऐसे लोगों को