अधर्म का धन ही धर्म भ्रष्ट करता है।
पहले वो धन सात्विक बुद्धि को दुर्बुद्धि बनाता है ,और दुर्बुद्धि कुभाव पैदा करती है और कुभाव अधर्म का रूप लेती है फिर अपराध मार्ग में ले जाती है और वही अपराध धर्म और मनुष्य दोनों के पतन का कारण बन जाती है।
मेहनत की दाल रोटी में ही सुकून है।
अधर्म का धन ही धर्म भ्रष्ट करता है।
पहले वो धन सात्विक बुद्धि को दुर्बुद्धि बनाता है ,और दुर्बुद्धि कुभाव पैदा करती है और कुभाव अधर्म का रूप लेती है फिर अपराध मार्ग में ले जाती है और वही अपराध धर्म और मनुष्य दोनों के पतन का कारण बन जाती है।
मेहनत की दाल रोटी में ही सुकून है।
थू है, लानत है ऐसे संविधान पर और संविधान के रखवालों पर जो इंसानियत और बचा कुचा विश्वास को खत्म करते जा रहा है।
इससे अच्छा हम आजाद ही नहीं होते,
तो यह बहाना तो रहता, और यह बोल की काश हम आजाद होते। 🥺
#एक_जिंदगी_का_फांसी_ही_इंसाफ_हैं
💔
पैसे की बात न्यारी है
झूठ बोलूँ तो कौआ काटे
सच बोलू लो लठ्ठ बाजे..
जहाँ बात मीठी
वहीं ईमानदारी है..
पैसे की बात न्यारी है।..
पैसों पे कान खड़े है
बिन पैसे काम अड़े है
जज की भी लार पड़े है
अब तो न्याय बड़ा भारी है..
पैसे की बात न्यारी है...
#AsK_Words#बज़्म
@bazmofficial आज का बचपन मुरझा रहा ,
कागज वाली कश्ती का पानी सूख रहा.!
याद कर वो पल जब थोड़े में संतुष्टि थी
सुखी रोटी भी बड़ी स्वादिष्ट थी,
फट्टी एक चद्दर पर भी
निंद सुकून की थी,
देख आज के बचपन को
मिला सब भरपूर है
पर फिर भी बचपन रो रहा...!
#अगम#बज़्म#बज़्म_दैनिक_प्रतियोगिता
जीवन के हर दर्द को
बिन कहे समझने वाले किरदार थे तुम,
वाकई में ही असली प्यार थे तुम ,
राहों में चलते बहुत राही मिलते हैं
पर जो हर सफर में
साथ चले वह हमसफ़र थे तुम....✍
#AsK_Words#बज़्म