🇮🇳 लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक को चुनाव लड़ने का समान अवसर मिलेगा।
राजनीतिक आरक्षण (Art. 330, 332, 334) पर अब खुलकर चर्चा और समीक्षा जरूरी है।
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#Democracy#EqualRights#India
@modified30@ajeetbharti कुछ दिन और इंतज़ार कीजिए BJP के हिंदूवादी नेता गोल टोपी पहनकर ताजमहल भी एक दूसरे को गिफ्ट करते हुए नजर आयेंगे। केवल ये निश्चित हो जाय मुस्लिम समुदाय भी इनको अच्छा खासा वोट दे सकता है।
@ajeetbharti इन्होंने तो "विकला��ग" शब्द को "दिव्यांग" बना दिया और "विकलांग" को हिन्दी शब्दावली से बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये महामानव इतिहास में अपने नाम के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं।
एक अमेरिकी मंत्री भारत को उसके राजधानी में खुला चैलेंज दे कर चला जाता है और हम चूं तक नहीं करते। लग रहा है मोदी अब अमेरिकी दलाल बन चुका है..
@narendramodi@BJP4India
तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है
दो बकचोदियाँ भाजपा के कंटेंट ग्रुप में चल रही हैं:
१. PM मोदी ने जो ओबीसी में मुस्लिम आरक���षण की बात की वह तो 1784 या 1498 से ही है जब वास्को डी गामा भारत आया था।
२. मैं यूजीसी पर बोलते बोलते अब फॉरेन विजिट, सर्वोच्च नागरिक सम्मान और बिल गेट्स की वैक्सीन पर क्यों कटाक्ष कर रहा हूँ।
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पहले विषय में मेरा उत्तर यह है कि जब पीएम ओबीसी में मुस्लिम के होने पर छाती ठोकते हैं और उनकी पार्टी कर्नाटक और महाराष्ट्र में मुसलिम को मजहबी आधार पर आरक्षण देने पर बवाल करती है, तो यह दोगलापन है।
यदि आपको मुसलमानों को आरक्षण से बाहर रखना है तो ओबीसी से बाहर करो। नहीं करना है तो ये टेक्निकल बकलोली मत करो कि मजहबी में नहीं देंगे पर जातिहीन ��स्लाम में जातियाँ बना कर उन्हें हिन्दू ओबीसी के कोटे का आरक्षण दे देंगे।
दूसरे विषय में यह कहना है कि मैं भाजपा का दास नहीं हूँ, स्वतंत्र पत्रकार हूँ। मेरा मन करेगा मैं यूजीसी पर पचास दिन तक लिखूँगा, मैं मोदी को मिलने वाले नागरिक सम्मान पर भी मजे लूँगा और मैं बिल गेट्स जैसे दरिंदों के सरकारी एक्सेस पर भी बोलूँगा।
तुम यह तय करोगे कि मैं यूजीसी पर बोलते-बोलते अन्य विषयों पर न बोलूँ? मान लेते ह���ं कि मैं मोदी से एकदम घृणा करने लगा हूँ, तो क्या यह तुम बताओगे कि मुझे घृणा करना चाहिए या नहीं? कैसे-कैसे तर्क ले आते हैं लोग!
भाई मेरे, मैं जब भाजपा के समर्थन में लिखता हूँ और वामपंथियों को पेलता हूँ, तो तुम मुझे अकारण ही ‘भाजपाई’ मान लेते हो। तुम्हें लगता है कि मैं पार्टी के समर्थन में हूँ, जबकि मैं केवल अपने विवेक के आधार पर नीतियों का समर्थन करता हूँ। किसी पीएम के विजन और क्रियान्वयन का समर्��न करता हूँ। वही पत्रकार का कार्य है।
तुम अपनी आशाएँ क्यों ब��़ा लेते हो कि अब मैं पार्टी का दास हो जाऊँ? ‘पर आपको कर्नाटक पुलिस से…’ हाँ बचाया, पर क्यों बचाया? क्योंकि मैं दस साल से पार्टी और नेता की सकारात्मक नीतियों के समर्थन में लिखता रहा, जिसके प्रतिफल में यूपी पुलिस से ले कर कई भाजपा नेताओं ने लिखा-बोला।
दस वर्ष का निवेश था मेरा, फिर भी हायकोर्ट में केस लड़ने में दो लाख रुपए मेरे गए। पंजाब में केस हुआ, दो-दो बार, कहाँ थी पार्टी? बंगाल में केस हुआ, कहाँ ��ी पार्टी? बिहार में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी? तेलंगाना में केस हुआ, कहाँ थी पार्टी?
हर केस में औसतन दो-तीन लाख लगे हैं, कितने केस के बारे में तुम या तुम्हारी पार्टी जानती है? कितने के बारे में किसी ने लिखा या बोला? नहीं लिखा क्योंकि मैंने कभी सहयोग माँगा नहीं। मैं जानता हूँ कि जो मैं लिख और बोल रहा हूँ, वह मेरा अपना विवेक है, पार्टी ने मुझे लिखने नहीं बोला, तो मैं यह आशा क्यों रखूँ कि पार्टी मेरा सहयोग करे?
मुझे न तो किसी ने बनाया है, न फंड किया है, इसलिए मुझसे यह आशा क्यों रखना कि मैं पार्टी या संघ की ��लोचना न करूँ, चालीसा पढूँ? हाँ, मेरे नाम पर कोई पार्टी से फंड ले रहा है, और इसके बारे में आप जानते हैं, तो आप यह आशा कर रहे हैं कि यह तो पाला हुआ कुत्ता है, भौंक क्यों रहा है मालिक पर, तो मैं बता दूँ कि उस दलाल को पकड़ो क्योंकि मैंने कोई पैसा नहीं लिया है।
मैं पार्टी के पैसे लेने का मतलब जानता हूँ: अपनी स्वतंत्रता पर कुल्हाड़ी मारना। पाँच लाख ले कर आँख मूँद लेना वैसे विषयों पर जिस पर बोलना आवश्यक है। मुझसे वह संभव नहीं है, इसलिए मैं लूसिफर के लिए डॉक्टर फॉस्टस नहीं बनना चाहता। मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी यह डील।
जो पार्टी वामपंथियों की सास के मरने पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री कार्यालय से शोक संदेश भेजती हो, और मेरी माँ के देहांत पर अपने ट्रोलों से भद्दी गालियाँ दिलवाती है, या चुपचाप देखती है, वह मुझसे यह आशा रखती है कि मैं पीएम का उपहास न करूँ, सरकार और बिल गेट्स के इतिहास पर न लिखूँ?
मैंन�� जो लिखा वह दुर्भावना नहीं है, बिल गेट्स जैसों के इतिहास को ले कर है। वह व्यक्ति संदिग्ध है। भाजपा की आरक्षण की नीतियाँ संदिग्ध हैं, उनका कथित इस्लाम विरोध संदिग्ध है, उनकी कथनी-करनी का अंतर संदिग्ध है।
तुमने मुझे भाजपा का दास माना, यह तुम्हारी समस्या है। मेरा समर्थन नीतियों का है, विजन का है, एक्जीक्यूशन का है। और हाँ, मैंने यह नाम, यह स्थान और यह दर्शक-पाठक-श्रोता अपने परिश्रम से बनाए हैं।
जो मेरी आय है वह मेरे शब्दों के आधार पर, याचक वृत्ति से, क्यूआर कोड लगा कर भिक्षाटन कर के अर्जित किया है। वही मुझे पालता है। मेरे नाम से पेट पालते दलालों के घर और कार को देख कर मुझे ईर्ष्या नहीं होती क्योंकि जो मेरे प्रारब्ध में होगा वही होगा।
यदि तुम्हें ऐसा लगता है कि पार्टी ही पाल रही है तो (तुम्हारे अनुसार) जो दे रहे थे, मत दो।
NEET PG काउंसलिंग में 4 नंबर, 10 नंबर लाने वालों को भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में PG की सीट मिल गई है।
सीट भरने के नाम पर सीट दे तो दिए लेकिन
ये किस लेवल के डॉक्टर बनेंगे ये समझना कोई रॉकेट सा��ंस है क्या?
कोई मंत्री-नेता इनसे इलाज कराएगा क्या?
और अगर कल को डॉक्टर नहीं बन पाए तो इनका पैसा, इनका समय और टैक्स पेयर का जो पैसा इनकी पढ़ाई में लगा वो कौन लौटाएगा?
लेकिन देखिए क्या चल रहा है। गजबे है।
बिहार सरकार ने ‘स्वच्छता अभियान’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर वार्ड में कूड़ा उठाने हेतु एक-एक व्यक्ति को ₹3000/माह पर नियुक्त किया।
पिछली मई जब में अपने गाँव में था तो एक दलित नवयुवक ने मुझसे कहा कि मुखिया पैसे नहीं दे रहा। आज वही ��वयुवक पुनः आया और कहा कि डेढ़ वर्ष से उसके जैसे चौदह दलित नवयुवकों को पंचायत से पैसे नहीं मिल रहे।
@NitishKumar जी, ये गरीब लोग कूड़ा उठा रहे हैं, और @DM_Begusarai की नाक के नीचे पंचायतों में फंड रिलीज नहीं हो रहे। यदि रिलीज हो रहा है, तो मुखिया पैसे बाँट क्यों नहीं रहा है। मेरी पंचायत (बभनगामा) का मुखिया मोहम्मद मोख्तार है, प्रखंड बरौनी है।
आपसे आग्रह है कि दलितों का ही काम है, इन अत्यंत निर्धन परिवारों को उन��े किए हुए कार्य का पैसा दिलाया जाए। @bdobarauni
UGC द्वारा लाया गया काला कानून हिंदुओं के लिए डेथ वारंट साबित होगा…
SC ST OBC को हिंदू से अलग कर उनके बीच में खाई पैदा करने हेतु यह सब कुकृत्य किए गए हैं।
आज हिंदू समाज इसपर मौन रहा तो विनाश तय है ।
#Feb1BandAgainstUGC
आध्यात्मिक बनना और सांप्रदायिक बनना दोनों दो चीजें हैं। आध्यात्मिक ऊर्जा विश्वास पैदा करत��� है और इससे आप खुद का विकास करते हैं जबकि सांप्रदायिक बनने पर आपकी ऊर्जा कोई अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करता है।