धुळे एक्स्प्रेसमध्ये अश्रफ अली सय्यद हुसैन या ७२ वर्षीय वृद्धा���ा केलेल्या मारहाण प्रकरणी तिघांना अटक करण्यात आली होती. मात्र, पोलिसांनी योग्य ती कलमे न लावल्यामुळे मारहाण करणाऱ्यांची तेवढ्याच लवकर स���टका झाली होती. या प्रकरणात पोलिसांची भेट घेऊन त्यांना शांतपणे समजवून सांगितल्यानंतर पोलिसांनी BNS 302 आणि BNS 311 ही दोन कलमे अधिकची दाखल केली. त्यामुळे आज न्यायालयाने त्यांचा जामीन रद्द केला. तुम्हाला न्यायासाठी भांडावे लागेल... झगडावे लागेल ! जात, पात, पंथ, प्रांत न बघता भारतीय संविधानाने सांगितल्याप्रमाणे न्याय सर्वांसाठी समान आहे, समजून - उमजून आपणाला लढा द्यावा लागेल. जर राजकारण्यांनीच ठरव���ले की आपण शांत बसायचे तर हा देश अशांत होईल. ज्याने केलंय , त्याला योग्य ती शिक्षा झालीच पाहिजे. दोन कलमे अधिकची लावली म्हणून वृद्ध माणसाला मारहाण करणारी तीन पोरं पुन्हा जेलमध्ये गेली. ती आधीच जायला हवी होती. पण, पोलिसांच्या निष्काळजीपणामुळे ते काल सुटले होते. आज पोलिसांनी काळजीपू��्वक कलमे वाढविली अन् आज ते जेलमध्ये गेले.
धुले एक्सप्रेस में 72 साल के बुज़ुर्ग हाजी अशरफ अली सैयद हुसैन की पिटाई के मामले में तीनों आरोपियों को फिर से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने गंभीर धाराओं को नहीं लगाया था. जिस कारण आरोपियों को तुरंत ज़मानत मिल गई थी. लेकिन NCP के विधायक @Awhadspeaks ने रेलवे पुलिस से लंबी बातचीत और तीखे सवालो-जवाब किए. जिसके बाद रेलवे पुलिस ने दो ��र धाराएं बीएनएस 302 और बीएनएस 311 दर्ज कीं. सोमवार को कोर्ट ने उनकी ज़मानत रद्द कर दी. विधायक जितेन्द्र अव्हड का कहना है कि अगर आपको इंसाफ चाहिए तो आपको लड़ना होगा. लड़ो जैसा कि संविधान में आपको अधिक��र दिया गया है. विधायक के प्रयास के बाद पुलिस ने गंभीरता से अन्य धाराओं को शामिल कर लिया जिसके बाद आरोपियो को फिर से जेल जाना पड़ा.
CC @ShamsTabrezGazi
इस तरह के पोस्ट बताने के लिए काफी है कि अभी मुसलमानों को बहुत लात जूते खाने बाकी है. पूरा फलस्तीन उजड़ गया. दुनियां में ऐसी कोई जगह बाकी नहीं है. जहां मुसलमानों को जुतियाया न जा रहा हो. पर जब तक दिमाग में फिरकापरस्ती का कीड़ा ज़िन्दा रहेगा. तब तक मुसलमानों पर अज़ाब नाज़िल रहेगा. पता नहीं इस तरह के पोस्ट करने वाले कितने लोग���ं के दिल कितने काले हैं.
@Voice_OfMuslim ये टि्वटर हैंडल ही कूफी नज़र आ रहा है. चालीस हज़ार फलस्तीनियों का कत्लेआम करने वाला इसरायल है. चुपचाप शांत देखने वाले सबसे ज़्यादा कौन से फिरके के देश हैं. क्या फलस्तीनियों का कत्ल सुन्नियों ने करवाया. या मसलक का ज़िक्र करके ये टि्वटर हैंडल मुसलमानों को गुमराह कर रहा है.
@Voice_OfMuslim ये तो बड़ा खतरनाक और ज़हरीला टि्वटर हैंडल है. मैं इसे कॉपीराइट देने जा रहा हूं. इस तरह के हैंडल समाज के लिए घातक है. जो उनको फिरका वारियत में उलझा रहे हैं. फलस्तीन शिया और सुन्नी का मौज़ू नहीं है. बल्कि मुसलमानों का मौज़ू हैं. लेकिन इस टि्वटर हैंडल ने गलत बयानी शुरु कर दी है.
@sheikhs83148857@Voice_OfMuslim@ShamsTabrezGazi शम्स तबरेज़ सोशल मी���िया पर मौजूद हैं. लेकिन ज़्यादा इस्तेमाल नहीं करते. यूट्यूब पर सारी वीडियो शम्स तबरेज़ की लिखी हुई होती है. जिनको हर्ष���ता मिश्रा पढ़ती है. शम्स तबरेज़ नफरत भरा पोस्ट करते ही नहीं है. आपको गलत फहमी हो गई हो. उनकी ख़बरों में तंज़ होता है. जो समझने वाले समझते हैं
@ShubhamShuklaMP फर्ज़ी पत्रकार की यही पहचान है. वो अपनी अज्ञानता पर घमंड करता है. आर्मी में कैप्टन कमांडर पद होता ही नहीं है. सेना में रहकर कोई भी नेता नहीं बन सकता. लेकिन शुभम शुक्ला जैसा नफरती जोकर ठहरा एक नम्बर का अनपढ़. ये झोलाछाप पत्रकार है जो हर महीने क्यूआर कोड दिखाकर भीख मांगता है.
@Voice_OfMuslim इस वीडियो के छोटे छोटे क्लिप शेयर करके मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों के द्वारा आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है. ये वीडियो मुस्लिम समुदाय को भड़काने के लिए किया जा रहा है.
ये वीडियो यूट्यूब चैनल- "टाइम्स मेल" का है. लिखने वाले खुद एक पेशेवर पत्���कार है. वीडियो को आधा अधूरा शेयर न करे. इस वीडियो की स्क्रिप्ट राइटर शम्स तबरेज़ @ShamsTabrezGazi हैं. हमारे चैनल वीडियो पूरा यूट्यूब पर मौजूद है. टि्वटर हैंडल भी पूरा वीडियो मौजूद है. कृपया आधा अधूरा वीडियो शेयर मत करिए.
@Voice_OfMuslim पूरा वीडियो देख सकते हैं. बिना पूरा वीडियो देखे किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते. न तो वीडियो में कोई आपत्तिजनक शब्द कहें गए हैं औ��� न कोई कुतर्क किया गया है.
@YouTube@YouTubeIndia@YouTubeCreators@TeamYouTube
प्रिय य��ट्यूब हमारे चैनल के वीडियो के लगा���ार रोका जा रहा है. उसकी रीच को कम किया जा रहा है. लाइव चैट की सुविधा भी काम नहीं कर रही है. शायद ऐसा सिर्फ हमारे साथ ही किया जा रहा है. क्योंकि 4-5 महीने से वो सबकुछ हो रहा है जो यूट्यूब को हमारे साथ नहीं करना चाहिए. सत्ता की आलोचना करना ही पत्रकारिता है. हम नाच गाने और मनोरंजन के वीडियो बनाने के लिए यूट्यूब चैनल नहीं चला रहे हैं. हमने लंबे समय तक टीवी पत्रकारिता के बाद ही टाइम्स मेल की शुरुआत की है. ले��िन हमारे चैनल के वीडियो को येलो किया जा रहा है. अर्थात हमारे चैनल के वीडियो की मोनेजाइजेशन और रीच को सीमित किया जा रहा है. यूट्यूब की इस हरकत को पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की हत्या कहा जाना चाहिए. क्योंकि यूटूयूब अब भारत की सत्ताधारी दल के इशारे पर काम कर रहा है. मीडिल ईस्ट विशेषकर फिलिस्तीन और इसरायल से संबन्धित ख़बरों को बार-बार और हर बार रोका जा रहा है. जबकि, हमारा चैनल https://t.co/nD3eJnPT6d बिना न्यूज़ रि���्रेंस और फैक्ट के क��ई ख़बर नहीं दिखाता. हम फेक न्यूज़ को एक्सपोज करने के लिए भी जाने जाते हैं. लेकिन इसके बावजूद भी हमारे चैनल पर लगातार हमले हो रहे हैं. बीते साल जुलाई महीने में हमारे चैनल को हैक करने का प्रयास गया. दिल्ली पुलिस साइबर सेल में इसकी शिकायत भी दर्ज है. हमारे चैनल के साथ यूट्यूब का रवैया दमनकारी है. अगर यूट्यूब को सरकारी प्रेशर में काम करना है तो यूट्यूब का नाम बदल कर सरकारी भोपू रख देना चाहिए. ताकि यू��्यूब की निष्पक्षता का भ्रम टूट जाए. अगर यूट्यूब को सरकारी मशीनरी के दवाब में काम करने का शौक है तो आपको खुलकर सामने आना चाहिए. यूं इस तरह से आंख मिचोली और लुका-छिपी से हम तंग आ चुके हैं. हमारा चैनल किसी भी राजनैतिक विचारधारा से मुक्त है और ऐसा कोई राजनैतिक दल नहीं है जिसकी बेबाकी और मुखतरता से आलोचना न की गई हो. पर यूट्यूब हमारे वीडियो की मोनेटाइजेशन को सीमित कर रहा है. हम पति पत्नी बहुत ही सीमित ���ंसाधनों में घटों की रिसर्च के ��ाद ही कोई वीडियो दिखाते हैं, इसलिए कृपया हमारे साथ ऐसा न करे. हमारी शिकायत पर सुनवाई करें और तत्काल इस समस्या का समाधान करें.
प्रिय यूट्यूब टीम, शायद आपने हमारी शिकायत को ठीक से नहीं पढ़ा. हमारे वीडियो में आखिर आपको दिक्कत क्या है. जिस वीडियो को येलो किया गया है है उसका चैट की सुविधा भी हमें नहीं मिल रही है. जिन वीडियो को येलो किया गया है. उनमें से कुछ ��ीडियो के कुछ घंटे के बाद अपलोड करने पर ग्रीन हो जाते हैं. इसका सीधा सा मतलब यही है कि यूट्यूब की टीम हमारे शिकायतों नहीं देख रही है. टि्वटर पर केवल चंद शब्द लिखकर क्रिएटर को निपटाया जा रहा है. हमारे वीडियो में कोई दिक्कत नहीं है. पूरी तरह से जांच और परख के बाद ही वीडियो तैयार किया जाता है. हमारे काम करने का पैटर्न नहीं बदला है. कृपया हमारे वीडियो की समीक्षा करें क्यों मेनुअली समीक्षा के लिए 2-3 दिन ���ा समय लगता है जिसका इंतज़ार हम नहीं कर सकते.
ये गेरूआ टोला पूरी तरह से अंग्रोज़ों के चरणों में लेट चुका है. जिस फिलिस्तीन पर अंग्रेज़ों ने कब्ज़ा करके उस पर इसरायल बना दिया. वो इनका हमदर्द हो गया. फिलिस्तीन इनका दुश्मन हो गया. आतंकी हो गया. खुद भारत ही आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र में इसरायल का साथ छोड़कर फिलिस्तीन के साथ खड़ा है. पूरा फिलिस्तीन पैगम्बरों की ज़मीन है. वहां पर यहूदी मुसलमान और ईसाईयों की आस्था है. मुसल��ान, ईसाई और यहूदी अगर आपस में लड़ते हैं और या फिर एक दूसरा समर्थन और विरोध करते हैं. तो बात कुछ समझ में आती है. फिलिस्तीन में मुसलमानों का धार्मिक स्थल है. दुनिया भर के करोड़ो लोग फिलिस्तीन के साथ खड़े हैं. पर इन अंधभक्तों को फिलिस्तीन के विरोध और इसरायल के समर्थन में क्यों खड़ा होना है. इसरायल तो खुल्लम हिन्दुत्व का विरोधी है. गौहत्या का समर्थन भी करता है. और गौमांस का सेवन भी करता है. मूर्तिपूज�� का कट्��र विरोधी है और इसे बहुत बड़ा पाप मानता है. आखिर इसरायल में अंधभक्तों ने क्या देख लिेया. जो इसरायल का समर्थन करते हैं. सिर्फ यही न इसरायल के हमले से गज़ा में फिलिस्तीनियों का खून बह रहा है. और फिलिस्तीनी उसी धर्म को मानते हैं जिस धर्म के मानने वालों से अंधभक्त नफरत करते हैं. दरअसल इनकी रगों में गद्दारी भरी हुई है. ये हमेशा शक्तिशाली के चरण धोकर पीने वाले लोग है. जब भारत पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा था. ���ब इनके बाप दादाओं ने अंग्रेज़ों के चरण धोकर पीए. उनकी गुलामी की. उनकी वफादारी की कसमें खाई. क्रांतिकारियों का विरोध करने वाले और अंग्रेज़ों के समर्थन में खड़े होने वाले उस वक्त यही लोग थे. आज भी ये ताकतवर के साथ खड़े हैं. इनकी दिमाग में गोबर की प्रचूर मात्रा भर चुकी है. अब इनको पागलखाने जाने की ज़रूरत है.