Private Hospital में इलाज करवाने की ज़रूरत पड़ जाए तो एक आम परिवार का घर-गहने गिरवी रखने तक की नौबत आ जाती है।
अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही ₹50,000-1,00,000 तक Advance रखवाया जाता है। अस्पतालों के कमरों का रेंट 5 स्टार के होटल से महँगे।
बेड मिलते ही बिल में thermometer-sanitizer-masks-gloves सब बिल में जुड़ना शुरू हो जाते हैं। जो दवाएँ बाह��� डिस्काउंट पर मिलती हैं वो अस्पताल में पूरे रेट पर मिलती है। लैब टेस्ट मान्य होती है तो सिर्फ़ अस्पताल की।
आज संसद में ये ज़रूरी मुद्दा रखा।
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।
2. जबकि पार्टी का यह भी मानना ह��� कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।
3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
कोई कें���्रीय एजेंसी छापा मारे और राज्य का मुख्यमंत्री वहाँ पहुँच कर फाइलें उठाकर भागने लगे तो समझ लीजिये उस राज्य की स्थिति क्या हो चुकी है --- ममता बनर्जी जी ने जो किया वह चिंताजनक है --- देश के लिए और बंगाल के लिए भी ----
#WATCH दिल्ली: भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, "बंगाल में जो हुआ वो आज़ाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ कि एक वर्तमान मुख्यमंत्री, एक प्राइवेट प्रॉपर्टी में घुसकर जहां ईडी के द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई चल रही है वहां जाती हैं और धमकाती हैं तथा पेपर छीनकर करके वहां से चली जाती...उनका आचरण अमर्यादित, असंवैधानिक, शर्मनाक है लेकिन उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।"
श्री सोमनाथ महादेव की कृपा और आशीर्वाद से सबका कल्याण हो।
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥
जब Mother Dairy का दूध खरीदा गया, जिसकी एक्सपायरी 90 दिन बताई जाती है,
तो फिर एक्सपायरी से 11 दि��� पहले ही दूध सड़कर बदबूदार कैसे हो गया?
कुछ सीधे और ज़रूरी सवाल ���
• क्या पैकिंग से पहले बैच की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच हुई थी?
• कोल्ड चेन में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई?
• स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन की निगरानी कौन करता है?
• क्या हर बैच की शेल्फ-लाइफ वास्तव में टेस्ट की जाती है या सिर्फ़ कागज़ों में?
• ग्राहक की शिकायत पर सैंपल उठाकर तुरंत जांच क्यों नहीं होती?
1-50 gm का चूजा स्टेरॉयड से 21 दिन में ढाई किलो का,
2-75 रुपए लीटर दूध पनीर 200 रुपए kg,
3-समोसा 5 रुपए का तेल 180 रुपए लीटर,
4-स्ट्रीट फूड के ��भी प्रोडक्ट में मिलावट,
5-पैक्ड छाछ और मट्ठे में धरती आसमान का अंतर है,
6-ओरिजिनल दूध और पैक्ड दूध का आपस में कोई संबंध नहीं है,
7-लौकी तोरी कद्दू टिंडा घीया, सब इंजेक्शन से एक दिन में तैयार हो रहा है,
8-क्रीम बिस्किट में क्रीम गायब है जैसे कश्मीरी पुलाव से कश्मीर,
9-सारी सॉफ्ट ड्रिंक्स जहर से भी बदतर हैं,
10-माजा में कोई आम की पल्प नहीं है,
है तो बहुत कुछ लेकिन @fssaiindia
की नींद खुल ही नहीं रही है।
खैर हम भ��� जिद्दी हैं।
मेरी कामना है कि आने वाले समय में आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिले। दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो।
उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु।
भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः।।
सीने में दर्द से जूझता एक गरीब आदमी इलाज के लिए BHU के अस्पताल पहुँचा—और वहाँ ₹3.5 लाख का बिल थमा दिया गया। सवाल सीधा है कि सरकार�� संस्थान में इलाज जीवन बचाने के लिए होता है या गरीब को डराने और तोड़ने के लिए? बीमारी देखी गई या पहले जेब तौली गई?
अब आदमी उम्��ीद लेकर AIMS पहुँचा। जाँच के बाद ECG के लिए 12 दिन बाद की तारीख दे दी गई। दो रातों से वह शख़्स रात 12 बजे कड़ाके की ठंड में खुले में अपने नंबर का इंतज़ार करता रहा। क्या सीने का दर्द कैलेंडर देखकर बढ़ता है? क्या इमरजेंसी को “डेट” दी जाती है?
यही है दो भारत। एक जहाँ नेताओं और अफ़सरों का इलाज बिना पर्ची, बिना लाइन, एक घंटे में हो जाता है। दूसरा जहाँ गरीब आदमी का नंबर आते-आते वह खुद मर जाता है। यहाँ प्राथमिकत�� बीमारी नहीं, पहचान है; जरूरत नहीं, रसूख है।
यह सिर्फ़ एक-दो मामलों की कहानी नहीं पूरे देश के सरकारी जिला अस्पतालों की हकीकत है। संसाधन हैं , बजट है, दावे हैं—लेकिन गरीब के लिए इलाज नहीं, इंतज़ार है। यह सिस्टम इलाज नहीं करता, चयन करता है। और यह चयन हर दिन गरीब के खिलाफ होता है।
बड़ी गलती नहीं बल्कि यात्रियों के साथ जो @IndiGo6E ने किया वो किसी क्राइम से कम नहीं है।
इंडिगो अपनी माफ़ी अपनी जेब में रखे और ये बताए कि इतनी ही ग्लानि महसूस हो रही है तो यात्रियों का डबल पैसा रिफंड करेगा?
मोदी और नीतीश को जीताकर 10, 10 हजार रुपए में बिककर सरकार की वापसी करवाकर 🚨
बिहारी अब अपने कामों पर वापसी कर रहे हैं🚨
वैसे इन्हें चाहें बॉथरूम में बैठकर जाना पड़े चाहें कोई सीने पर चढ़कर जाए सब चंगा सी 😂🔥
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा मुझे बिहार में भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव हेतु केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने के लिए हृदय से आभार व अभिनंदन!