मंदिरों में जितना भी चंदा दान रूप में आता है, वह सारा केवल और केवल सनातनी ही चढ़ाते हैं और उसका लाभ मुसलमानों को ईसाइयों को पहुंचाया जाता है। क्या वह सनातनियों के साथ चोरी नहीं है? सबसे बड़ा घोटाला तो यह है हिन्दू का पैसा दूसरे धर्म वालों पर खर्च करना,
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संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर जी की दुहाई देने वाले कहां हैं ?
संविधान के निर्माण के समय 'समलैङ्गिकता' यदि अपराध था और आज वो अपराध क्यों नही है ?
क्या ये हमारे संविधान का अपमान नहीं है ?
आप संविधान को और उसकी पूरी प्रकृति को बदल देते हो और अपने को संविधान का भक्त बताते हो
हम तो वेद के भक्त हैं , लाखों वर्षों में आजतक हमने वेद की एक मात्रा नहीं बदली ।
आप संविधान के भक्त लोग अपराध को गैर अपराध घोषित कर दे रहे हो , व्यभिचार को बढावा दे रहे हो ......
इस तरह के संवैधानिक संशोधनों से आप समाज के चरित्र में गिरावट ला रहे हैं ।
ये कदापि स्वीकार्य नहीं है ।
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"दान करते समय सोचा था की हमारे राम के काम आएगा, इसलिए मैंने ज़मीन बेचकर ₹1 करोड़ दिए थे।"
हालांकि जब दान दिया था तो लोगों ने कहा भी कि पंडा लोग लूट लेंगे।
मगर अब ये सब देखकर बड़ा दुख हो रहा है।
- राम जन्मभूमि ट्रस्ट को ₹1 करोड़ दान करने वाले समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य
एक मुस्लिम जज संविधान के आड़ में अपना मकसद
नहीं भूली और 14 हिंदुओं को उम्र कैद की सजा..
आतंकवादी देशद्रोही के लिए रात को 2 बजे कोर्ट के
दरवाजे खुलते हे तो हमारे गौरक्षकों के लिए क्यों नहीं
हिंदुओं एक हो जाओ दिखाओ अपनी ताकत 🔥💪
किसी के अंतिम यात्रा के लिए ये भीड़ देखकर आप समझ सकते हैं कि वो अपने गाँव समाज के लिए कितना किया होगा और उसका उनके जीवन में कितना अहम योगदान रहा होगा।
कई नेता जीवन भर चप्पल घिस देंगे अपना तब भी ये भीड़ नहीं जुटा पाएंगे। ये भीड़ उस तथाकथित पागल भरत तिवारी के लिए है जो अपने हक अधिकार के लिए सिस्टम तक को झुका दिया।
भरत तिवारी निसंदेह एक देशभक्त, निर्भीक, क़ाबिल, दूरदर्शी और सम्मान योग्य थे हैं और रहेंगे।
शत शत नमन 🙏
🚨हिंदू छात्र का ज़बरदस्त भाषण
ढाका यूनिवर्सिटी के एक बहादुर हिंदू छात्र ने भगवान श्री राम के अपमान के ख़िलाफ़ एक दमदार और जोशीला भाषण दिया।
हमारी हिंदू युवा पीढ़ी जाग रही है!
“हम सनातनी हैं। हमारी खामोशी का मतलब यह नहीं है कि हम कमज़ोर या लाचार हैं। हम मौत से नहीं डरते। कट्टरपंथियों को साफ़ चेतावनी: अगर हमने कभी तुम्हारी 'मॉब कल्चर' (भीड़ वाली संस्कृति) जैसा बर्ताव किया, तो तुम उसे बर्दाश्त नहीं कर पाओगे।”