जयपुर में कल शाम क्षत्रिय विधायक/प्रत्याशियों की बैठक…और तस्वीरों में बीजेपी के अधिकांश चेहरे।
हाल ही में उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की ऐसी ही बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष ने नोटिस जारी कर दिए थे।
क्या जाति आधारित जमावड़े अब विचारधारा से ऊपर हो गए हैं?
नियम सबके लिए बराबर हैं या फिर परिस्थिति देखकर बदल जाते हैं?
राजनीति अगर सामाजिक समरसता की बात करती है, तो संदेश भी वैसा ही होना चाहिए।
@BJP4India
आखिर इंतजार कब तक?
अध्यापक भर्ती 2022 अध्यापकों का प्रोबेशन पूरा हुए 4 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थाईकरण का इंतजार है
राजस्थान के सभी जिलों में स्थाईकरण होने के बावजूद जाँच का हवाला ....🤔
#बाड़मेर_अध्यापकों_का_स्थाईकरण_करो
बाड़मेर जिले के कई नवनियुक्त शिक्षकों ने जानकारी में लाया है कि करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ भेदभाव हो रहा है।
कांग्रेस सरकार के दौरान निकाली गई 62,000 शिक्षकों की रीट भर्ती परीक्षा से भर्ती बाड़मेर में पदस्थापित शिक्षकों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद इन स्थायीकरण पिछले 4 महीनों से अटका हुआ है।
प्रदेश के बाकी जिलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, पर बाड़मेर के शिक्षक आज भी 70% वेतन कटौती और मानसिक तनाव झेलने को मजबूर हैं।
बाड़मेर के इन शिक्षकों को तुरंत उनका हक और पूरा वेतन मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से आग्रह है कि इस विषय में आवश्यक कार्रवाई कर न्याय सुनिश्चित करें।
@RajCMO
राजस्थान में शिक्षा की अलख जगाने वाले हजारों नवनियुक्त शिक्षकों के भविष्य पर आज अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। मामला बाड़मेर जिले का है, जहां करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ हो रहे प्रशासनिक भेदभाव ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में निकाली गई 62,000 रीट भर्ती के तहत बाड़मेर में नियुक्त इन शिक्षकों का सितंबर 2025 में प्रोबेशन पीरियड सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। हैरानी की बात यह है कि जहां प्रदेश के अन्य सभी जिलों में स्थायीकरण की प्रक्रिया पूरी कर शिक्षकों को पूर्ण वेतन दिया जा रहा है, वहीं बाड़मेर के ये शिक्षक पिछले 4 महीनों से फाइलों के दफ्तरों में अटकने के कारण मानसिक तनाव झेल रहे हैं। प्रोबेशन पूरा होने के बावजूद इन शिक्षकों को आज भी 70% वेतन कटौती का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के इस दौर में आधे से भी कम वेतन पर परिवार का पालन-पोषण करना इन शिक्षकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। जब भर्ती एक है, परीक्षा एक है और प्रोबेशन खत्म होने की अवधि भी एक है, तो फिर बाड़मेर जिले के साथ यह 'सौतेला व्यवहार' क्यों? यह संविधान के समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। जब शिक्षक खुद आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव में होगा, तो वह छात्रों के भविष्य के साथ न्याय कैसे कर पाएगा? प्रशासनिक देरी का खामियाजा अंततः बाड़मेर की शिक्षा व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पुरजोर आग्रह किया है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। बाड़मेर जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए जाएं ताकि इन 2000 शिक्षकों का स्थायीकरण बिना किसी और देरी के सुनिश्चित हो सके और उन्हें उनका बकाया समेत पूरा वेतन मिल सके। यह केवल 2000 शिक्षकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उन 2000 परिवारों के भविष्य का सवाल है। अब देखना यह होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद भजनलाल सरकार कितनी सक्रियता दिखाती है और इन शिक्षकों को न्याय कब तक मिल पाता है।
1. 2019 में क्राइम होता है, 6 साल बाद यानि 2025 में उजागर होता है तो कुछ तो रोल रहा होगा हमारा इस घपला पकड़ने में?
2. सभी को एक ही पेंट से ब्रश करना सही है?
3. कल्पना के आधार पर एनालिसिस करना अच्छी बात है, मगर सच जाने बिना जिम्मेवारी तय कर देना, वर्डिक्ट सुना देना सही है क्या?
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थायीकरण को आज चार माह पूरे हो चुके हैं, मगर अब तक न तो स्थायीकरण के आदेश जारी हुए हैं और न ही वेतन का नियमितीकरण किया गया है। वेतन के लगभग 70% हिस्से से वांछित शिक्षक वर्ग मानसिक एवं आर्थिक रूप से गंभीर परेशानियों का सामना कर रहा है।
राज्य सरकार एवं शिक्षा मंत्री @madandilawar को इन समस्याओं के समाधान पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। जब पूरा कार्य लिया जा रहा है तो वेतन भी पूरा मिलना चाहिए। अध्यापक ऐसा वर्ग है जो प्रत्येक आर्थिक निर्णय पूरी योजना के साथ करता है, ऐसे में समय पर बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिलने से उनकी समस्त योजनाएं धराशायी हो जाती हैं।
थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा : 150 प्रश्न हल करने के लिए RPSC देती है 3 घंटे का समय, RSSB ने ढ़ाई घंटे का ही समय दिया...पेपर भी लेंदी
L-2 अंग्रेजी पेपर में 56 पेज, L1 में 64पेज आए,
पेपर पूरा पढ़ने का भी समय मिलना चाहिए ,
पढ़ते पढ़ते अभ्यर्थी चकराए.. @alokrajRSSB
मैं ग्रामीण भारत से आता हूँ। सरकारी स्कूल में पढ़ा हूँ। आज भी याद है कक्षा पाँच में खो-खो खेलने हमारी टीम 40 किलोमीटर दूर कल्याणपुर ट्रैक्टर-ट्रॉली में गई थी। हम जीते…इनाम में एक लोटा मिला। शायद शहरों में इसकी कोई कीमत न हो, लेकिन उस रात जब मैं घर पहुँचा, पिता जी और माता जी को वो "लोटा" दिखाकर कहा... “हमारी टीम जीतकर आई है” उस खुशी की कीमत किसी बजट, किसी फाइल, किसी सरकारी आदेश से नहीं आंकी जा सकती।
वही खेल, वही मंच, वही अवसर किसी बच्चे को हौसला देता है, उसके सपनों को पंख देता है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए खेल महोत्सव जैसे आयोजन कर रहे हैं। केंद्र सरकार पैसा भेज रही है... ताकि खेल, पेंटिंग, फोटोग्राफी, विज्ञान मॉडल, ग्रुप डांस जैसे हर क्षेत्र के युवा आगे बढ़ें।
लेकिन सवाल यह है...जब राजस्थान के 41 जिलों के लिए बजट भेजा गया, तो आयोजन सिर्फ 5 जिलों में क्यों हुआ?
बाकी 36 जिलों के युवा क्या दोषी हैं?
क्या उनकी मेहनत, उनके सपने
कम अहम हैं?
कुछ नेता और अधिकारी चाहते हैं
कि आप जाति विवाद, सीमा विवाद
और बेकार की बहसों में उलझे रहें,
और वे चुपचाप जनता के हिस्से का हक
बिना जवाबदेही के हजम करते रहें।
अब सवाल उठाना ज़रूरी है।
क्योंकि यह राजनीति का नहीं,
युवाओं के भविष्य का सवाल है।
- युवाओं, आवाज़ उठाओ...
पूछो क्यों 41 में से 36 जिलों में
खेल महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ
जबकि बजट केंद्र से भेजा जा चुका था?
क्योंकि
आज सवाल नहीं उठे,
तो कल सपने भी चुप करा दिए जाएंगे।
#Rajasthan