“अगर जेन्युइन हो तो दोबारा परीक्षा देकर फिर पास कर लेना।”
यह तर्क सुनकर लगता है जैसे योग्यता कोई ऐसी चीज है, जिसे हर साल नई रसीद कटवाकर साबित करना पड़ता है।
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 में ओलंपिक गोल्ड जीता, लेकिन पेरिस 2024 में गोल्ड नहीं जीत पाए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि टोक्यो का गोल्ड ��न्होंने 35 लाख रुपये देकर जीता था?
भारत ने 2011 में क्रिकेट विश्व कप जीता, लेकिन 2015 में खिताब नहीं बचा पाया।
तो क्या 2011 की जीत इसलिए संदिग्ध हो गई कि 2015 में वही टीम दोबारा विश्व कप नहीं जीत सकी?
इसी तरह, इस वर्ष NEET की पुनः परीक्षा में मेरे कई जानने वाले छात्रों के अंक पहली परीक्षा की तुलना में कम हो गए।
तो क्या इसका मतलब यह है कि पहली परीक्षा में उनके अंक फर्जी थे?
नहीं।
क्योंकि हर परीक्षा, हर मैच और ���र चुनाव एक नई परिस्थिति होती है।
राजनीति में ही देख लीजिए।
नरेंद्र मोदी ने 2019 में वाराणसी से लगभग 4.79 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 में जीत का अंतर घटकर लगभग 1.52 लाख रह गया।
तो क्या 2024 में जीत का अंतर कम होने से 2019 की जीत कम वैध हो गई?
बिल्कुल नहीं।
क्योंकि बाद का प्रदर्शन, पहले के प्रदर्शन को अपने-आप ��वैध नहीं कर देता।
ठीक यही बात भर्ती परीक्षा पर भी लागू होती है।
अगर किसी अभ्यर्थी ने नियमों के अनुसार परीक्षा दी, अपने प्रदर्शन के आधार पर कटऑफ पार की और चयनित हुआ,
तो बाद में परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने पर यह कहना
“अगर सच में योग्य हो तो फिर से परीक्षा देकर पास कर लो”
दरअसल उसकी पहली सफलता को प्रमाणित करने के बजाय उसे एक नई प्रतियोगिता में फिर से उतारना है।
पहली परीक्षा में ���सकी योग्यता का प्रमाण उसका उस परीक्षा में किया गया प्रदर्शन था।
दूसरी परीक्षा में वह पास होगा या नहीं, यह पहली परीक्षा में उसके प्रदर्शन का न तो प्रमाण है, न खंडन।
कोई पहली बार 90 अंक लाकर चयनित हो और दूसरी बार 70 अंक पाए, तो इससे यह सिद्ध नहीं होता कि पहली बार उसके 90 अंक फर्जी थे।
अलग परीक्षा = अलग परिस्थिति = अलग प्रदर्शन।
इसलिए व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो सवाल यह होना चाहिए
किसने गड़बड़ी की?
किसे उसका लाभ मिला?
गड़बड़ी कितनी व्यापक थी?
किस स्तर तक परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई?
और जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध है, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
लेकिन हर चयनित अभ्यर्थी से यह कहना
“चलो, अब फिर से साबित करो कि तुम योग्य हो।”
यह समाधान नहीं है।
योग्यता का प्रमाण यह नहीं कि कोई व्यक्ति हर बार वही परीक्षा पास कर सकता है।
योग्यता का प्रमाण है जिस परीक्षा में चयन हुआ, उसमें उसने नियमों के अनुसार कैसा प्रदर्शन किया।
द��षी को खोजिए।
लाभार्थी को चिन्हित कीजिए।
गड़बड़ी का दायरा तय कीजिए।
लेकिन केवल इसलिए कि व्यवस्था अपनी गलती सुधार नहीं पा रही, निर्दोष अभ्यर्थी से उसकी सफलता की दूसरी रसीद मत मांगिए।
@JHAR98765@kunalpratap86@ExamsFighters@lagatarIN@The_FollowUp@TheNewspinch मैंने आईआरबी में 3 साल नौकरी की है। यकीन मानिए जितना इस नौकरी में सेटिंग से लड़के आए हैं उतना झारखंड के इतिहास में आज तक किसी भी परीक्षा में धांधली से लड़के नहीं आए हैं। आप आईआरबी के किसी भी लड़के से जो उस नौकरी में सही तरीके से गया था उससे यह चीज कं��र्म कर सकते हैं।
क्या इसी उद्देश्य के लिए इस ग्रुप का निर्माण किया गया था??
झारखण्डी 96% और न्याय की जीत 100%🔱🙏🏻 न्यायालय में पूर्ण विश्वास है।
@SACHNAMA_@gutthi_org@yourBabulal
@JPSCreformanch गजब टोपी बाज हो जी 😁बस बरगलाते रहो छात्रों को और अपना राजनीतिक रोटी सेकते रहो
बस नाम में ही केवल तुमलोग का REFORM है बाकी REFORM करवाना तुमलोगों के बस का बात नहीं है
झारखंड के छात्र ज्या��ा नहीं बस OVER AGE होने का इंतजार करिये 😂 झारखंड में छात्रों का किस्मत भगवान भरोसे है
@JPSCreformanch अच्छा, अभी निम्न वेतन वाले आपके लिए जेनुइन हो गया , और कुछ देर पहले 2000 चोर था और अभय तिवारी ने PGT में भी उच्च स्तरीय सफलता पाई थी, उसपे कुछ नहीं बोला जाता। दोगलापन इसे नहीं कहते तो और क्या है🤨
@NAVEENK81161084@JPSCreformanch आप परेशान मत हों महोदय वो जॉच एजेंसी पर छोड़ दें खुद जाँच एजेंसी न बनें और यदि कोई जानकारी और साक्ष्य आपके पास है तो आप जाँच एजेंसी के साथ साझा करें। 🙏
और एक बात ईमानदारी से अपनी असेसमेंट भी कर��ं।
और पढ़ाई पर ध्यान दें क्यूंकि अंततः सीट के बराबर ही लोगों की नौकरी लगेगी।
@pravinm53747916 अगर रद्द करने से सारे दोषी जेल चले जाएँ और 100 प्रतिशत फर्जी लोगों को सज़ा मिल जाए, तभी ठीक है।
नहीं तो सिर्फ रद्द करके दोषियों को आराम से बैठा देना — इससे रद्द करने का क्या फायदा?
वे कहीं और नौकरी खरीद लेंगे।
इसलिए रद्द करना कोई समाधान नहीं है।
@pravinm53747916 उन्हें उनकी नौकरी में रहते हुए पकड़ा जाना चाहिए, ताकि उन्हें ज़िंदगी भर खौफ बना रहे।
रद्द करने से वे तो सुकून में चले जाएँगे।
नुकसान सिर्फ उन्हीं को होगा जो मेहनत करके आए हैं।
एक सवाल बार-बार पूछे जाने की जरूरत है
व्यवस्था की गलती की सजा आखिर किसे मिल रही है?
JPSC में TDPL एजेंसी का चयन छात्रों ने नहीं किया था।
सरकार और आयोग की व्यवस्था ने किया था।
तो अग�� एजेंसी में गड़बड़ी हुई, सवाल छात्रों की नौकरी पर क्यों?
सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कहाँ है?
JSSC-CGL परीक्षा ठीक ढंग से आयोजित कराने की जिम्मेदारी छात्रों की नहीं, JSSC की थी।
छात्रों ने न प्रश्नपत्र बनाया, न परीक्षा केंद्र चलाया, न निगरानी की, न परिणाम तैयार किया।
फिर गलती व्यवस्था की और नौकरी छात्रों की जाएगी?
JSSC के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
जिन इंटरव्यू बोर्डों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठे, उनमें सिर्फ अभ्यर्थ��� नहीं थे
अधिकारी, सदस्य और बोर्ड के जिम्मेदार लोग भी थे।
फिर हर सवाल का अंतिम निशाना वही छात्र क्यों, जिसने सिर्फ परीक्षा दी थी?
और सबसे बड़ा सवाल
जिन परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को पहले सरकार और उसकी संस्थाओं ने वैध माना, परिणाम जारी किए, चयन किया और नियुक्तियां दीं, तब छात्रों ने नहीं बल्कि व्यवस्था ने उन्हें सही माना था।
आज वही व्यवस्था अपनी गलती का बोझ किसके कंधे पर डाल रही है?
उस लड़के के कंधे पर, जो लाइब्रेरी में बैठकर सिर्फ पढ़ रहा था।
उसने TDPL नहीं चुना।
उसने प्रश्नपत्र नहीं बनाया।
उसने परीक्षा की निगरानी नहीं की।
उसने परिणाम नहीं बनाया।
उसने नियुक्ति प्रक्रिया नहीं बनाई।
उसका अपराध बस इतना है कि उसने भरोसा किया कि सरकार की परीक्षा-व्यवस्था ईमानदार और विश्वसनीय होगी।
अगर व्यवस्था की गलती का भुगतान हमेशा अभ्यर्थी ही करेगा, तो फिर व्यवस्था चलाने वालों की जवाबदेही का अर्थ क्या है?
दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए
लेकिन निर्दोष की नौकरी छीनकर व्यवस्था को निर्दोष नहीं बनाया जा सकता।
सरकार से सवाल होना चाहिए, आ��ोगों से सवाल होना चाहिए, जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल होना चाहिए।
क्योंकि
जिसने परीक्षा कराई, उससे जवाबदेही मांगिए।
जिसने एजेंसी चुनी, उससे जवाबदेही मांगिए।
जिसने परिणाम जारी किया, उससे जवाबदेही मांगिए।
लेकिन जिसने सिर्फ परीक्षा दी,
उससे उसकी नौकरी का हिसाब मत मांगिए।
वरना यह न्याय की तलाश नहीं,
व्यवस्था की विफलता का बिल उस छात्र के हाथ में थमाना है, जिसका इस पूरी व्यवस्था में हस्तक्षेप शून्य था।
@JPSCreformanch
@AdiwasiVoice
@Jrkndikhurpench
@HemantSorenJMM
@yourBabulal
@BJP4Jharkhand
@kunalpratap86 आप इतना परेशान काहे हो रहे हो ?
आप ये क्यों नहीं सोच रहे हो कि सरकार आपके पक्ष में है क्या पता वो आपसे इस केस के सिलसिले में ���हयोग लेने आयी हो।
सहयोग कीजिए।
@WeAreRanchi@ranchipolice आप लोग परेशान काहे हो रहे हो ?
आप ये क्यों नहीं सोच रहे हो कि सरकार आपके पक्ष में है क्या पता वो आपलोग से इस केस के सिलसिले में सहयोग लेने आयी हो।
सहयोग कीजिए।
@Allahkiga@JPSCreformanch Tumhi to diye the hamko 30 , 36 laakh
Bhul gaye kya , tumhara hi to kamai h ye 30 , 36 lakh jo tum hamko diye then
Aaram karo nhi to BP High ho jayega tumhara .....