हिन्दू दर्शन में एक वृक्ष की मनुष्य के दस पुत्रों से तुलना की गई है-
'दशकूप समावापी: दशवापी समोहृद:।
दशहृद सम:पुत्रो दशपत्र समोद्रुम:।।
#प्रकृति_वंदन#प्रकृति_पूजक_ब्रह्मपुर
अतिझाडे जैसी घास भी पूजन की सामग्री हो जाती है जिसे बड़े सम्मान के साथ पूजन कर्म में रखा जाता है | प्रकृति के प्रत्येक अंग की सुरक्षा और चिंता का भाव हिदू संस्कृति में सहज ही समाहित है |
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