During the 2026 West Bengal election campaign, BJP candidates were frequently seen holding fish while campaigning. This was part of a deliberate outreach to reassure voters that the party would not interfere with the state’s staple diet of fish and meat if voted to power. However, in its very first budget after forming the government, the BJP administration has removed eggs from the mid-day meal scheme for students in Kolkata schools by handing over the programme to ISKCON for vegetarian meals.
-ये भी तो आपातकाल है-
आतंक का साया गहराया,
जन मन में डर समाया।
राहु-केतु संविधान पर बैठे,
आज़ादी के कान उमेठे।
लोकतंत्र की बिगड़ी चाल
सद्भाव का टूटा सुर-ताल।
झुकी रीढ़ और नत है भाल
फिर भी कहते देश खुशहाल।
ये भी तो आपातकाल है।
बुल्डोज़र-राज की देखो झाँकी,
इंसाफ़ कहाँ रह गया बाक़ी?
कहीं न कोई सुनवाई है,
हर आवाज़ दबाई है।
मीडिया पर पहरा भारी,
सच की साँस हुई दुश्वारी।
झूठ गूँज रहा दरबारों में,
न्याय फँसा इनकारों में।
मुश्किल में अब हर सवाल है,
साज़िशों का फैला जाल है।
ये भी तो आपातकाल है।
जनता को ख़ामोश करो,
झूठे वादों का जोश भरो।
जो सवाल करे, वो गद्दार,
जो सच बोले, वो गुनहगार।
जेलों में भर दो मतभेद,
भाटों से लिखवाओ नए वेद।
असहमति पर ताला डालो,
लोकलाज को छीलो-छालो।
राजा को बस यही ख़याल है,
उसको न कोई मलाल है।
लोकतंत्र बना फुटबाल है।
ये भी तो आपातकाल है।
न रोज़ी-रोटी, न रोज़गार है,
बोले तो लाठियों की मार है।
तिजोरी भर रही सेठों की,
मित्र हो रहे मालामाल हैं।
किसानों और मजूरों का,
हर दिन और बुरा हाल है।
उनकी थाली में छप्पन भोग,
अपना तो बस खाली थाल है।
राजा को इससे क्या मतलब
उसके गाल तो लाल-लाल हैं
ये भी तो आपातकाल है।
विचारों पर बंदिश भारी
रातों-रात होती गिरफ़्तारी
होंठ सीं दिए, जुबाँ पर ताले
ऐसे हैं ये आज़ादी के रखवाले
डर के साये में जीना सीखो,
सच को झूठ कहना सीखो।
कानून भूला अपनी चाल है
अदालतों का भी यही हाल है
कैसा यह लोकतंत्र विशाल है,
जहाँ आम आदमी बदहाल है?
ये भी तो आपातकाल है।
जब सत्ता सत्य बन जाए,
और प्रश्न असभ्य हो जाए,
जब अधिकार कुचले जाएँ,
और झूठ के नगाड़े बजाए जाएँ,
जब डर शासन की ढाल हो,
जब ज़ुल्म-ओ-सितम का माहौल हो
तब समझो आपातकाल है
ये भी तो आपातकाल है।
-मुकेश कुमार
गरीबी की परिभाषा भी अजब है।
₹8 लाख कमाने वाला OBC में "क्रीमी लेयर" हो जाता है, लेकिन वही ₹8 लाख EWS में "आर्थिक रूप से कमजोर" कहलाता है।
सवाल किसी उम्मीदवार की योग्यता पर नहीं है। सवाल यह है कि अगर IIT, MNC और महंगी कोचिंग तक पहुँच रखने वाले भी EWS हैं, तो फिर असली गरीब कहाँ है?
कहीं ऐसा तो नहीं कि हमने गरीबी की परिभाषा इतनी फैला दी कि गरीब ही उसमें गुम हो गया?
#EWS #UPSC #SocialJustice
@arohishukl50402 अभिनय सर ने लाखों खर्च करके एस्पिरेंट्स के कितने केसेज लड़े नौकरियां दिलवाई ये भी तो बताओ और कोई नहीं गया केस लड़ने। और आपने कहा कि यूट्यूब से भी कमाई होती है कितनी कमाई कर ली है उन्होंने वे एक साल में 12 लाख से ऊपर नहीं कमाए हैं उतना तो कोर्ट के एक ही हियरिंग में चली जाती है
बहुत से मैसेज आ रहे हैं। क्या कोई व्यवस्था है, है तो इसे देख ले। इन्हें बता दे कि क्या करना है, क्या होना है। क्या मेरे इस ट्वीट से CBSE का ध्यान आकर्षित हो सकता है?
प्रिय रवीश सर उम्मीद करता हूं आप स्वस्थ होंगे 🙏🙏
सर मैं आपका ध्यान एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु पर आकर्षित करना चाहता हूं सर 2026 की जनवरी है उसमें KVS/NVS की टियर 1 की परीक्षा हुई थी 10 और 11 जनवरी को जिसका रिजल्ट 28 फरवरी को घोषित किया गया था, इसी तरह EMRS की भी वैकेंसी हुई थी TIER 1 की जिसका रिजल्ट 31 जनवरी को घोषित कर दिया गया था।
KVS/NVS ने जब 28 फरवरी को रिजल्ट घोषित किया तब मात्र 27 दिन बाद यानी 27 मार्च से 31 मार्च तक TIER 2 की परीक्षा कंडक्ट करवा दी थी मात्र 27 दिन का टाइम दिया था उन्होंने तैयारी के लिए, और उसी तरह EMRS का भी जो एग्जाम था वह 20 मार्च के आसपास कंडक्ट हुआ था TIER 2 का।
सर ऑलमोस्ट 3 महीने बीत चुके हैं लेकिन सीबीएसई कोई भी जवाबदेही तय नहीं कर पा रहा है रिजल्ट के रिगार्डिंग ।कोई भी सूचना नहीं है जबकि हम डेली देखते हैं कहीं ना कहीं से यूट्यूब से ट्विटर से की रिजल्ट तैयार हो चुका है लगभग प्रक्रिया में लेकिन 15 दिन हो गए वह अभी तक अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया जाता है तो वह बोलते हैं की वेबसाइट विजिट करते रहिए रिजल्ट वहीं पर आएगा, सर हम दिन में 10 बार साइट चेक करते हैं परेशान होते हैं बच्चे बहुत परेशान है डिप्रेशन में पैनिक में फ्रस्ट्रेटेड है क्योंकि अब हम अपना धैर्य खोते जा रहे हैं। इन्होंने एक सिंगल नोटिस भी जारी नहीं किया ना कोई सर्कुलर लेकर आए कि हां इस समय तक आपका रिजल्ट दे दिया जाएगा।
अगर यह एक नोटिस दे दे तो बच्चों को शांति मिल जाए क्योंकि सर अपवाह फैल जाती है फेक न्यूज़ फैल जाती है फेक नोटिस आ जाते हैं उनके की रिजल्ट आने वाला है लेकिन रिजल्ट नहीं आता है तो बच्चे बहुत हताश होते हैं इसलिए सर आपसे निवेदन करता हूं कि आप एक बार यह सवाल जरूर पूछे उनसे।
हमने ट्विटर कैंपेन भी चलाया मेल करी लेकिन सर उनका कोई भी रिप्लाई अब तक नहीं आया।
इस वजह से सर आपसे आशा करता हूं आप हमारी बात को आगे तक पहुंचाएं
सीबीएसई वालों का ध्यान भी इस और आकर्षित करें कि रिजल्ट या कोई नोटिस या कोई सर्कुलर जल्दी से जल्दी वो लेके आए।
ये बूढ़ा बेशक अनपढ़ है, लेकिन तजुर्बे में PhD है। ये अच्छे से समझता है कि पिछली सरकार का पतन भी तभी शुरू हुआ जब मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए, उनकी CBI जाँच की गई।
इस्तीफा लेना मतलब गलती को स्वीकार करना। फिर पब्लिक को ऐसी लत लग जाती है कि एक के बाद के इस्तीफे माँगती है। और फिर एक दिन खुद का ही लवणेन भोज्यम हो जाता है।
इसलिए इस्तीफा माँगने वालों का मजाक उड़ाओ, इग्नोर करो, आगे बढ़ो, फिर किसी नए मुद्दे में उलझा दो, 2047 का सपना दिखा दो।
Those of us who chose not to sell out unwittingly passed the burden of our integrity on to our children.
We watched our family's budget shrink, while those around us moved ahead.
We adults could revel in ethical vainglory.
Our kids were rewarded with confusion.
I'll regret that forever.
ये ईरान की बड़ी जीत है। आख़िरकार ट्रम्प को झुकना पड़ा। ईरान अपनी ज़्यादातर शर्तें मनवाने में कामयाब रहा।
न्यूक्लियर बम के मामले में उसे समझौता करना पड़ा है मगर उसके लिए तो वह पहले भी तैयार था, बल्कि ओबामा के साथ हुए समझौते में ही उसने इसे स्वीकार कर लिया था।
लेकिन किंतु-परंतु कम नहीं हैं। डील 19 जून को साइन होगी। तब तक पता नहीं कौन सी परेशानी कौन खड़ी कर दे।
इस्राइल सबसे बड़ा खलनायक है। ट्रम्प ने उसे एक बार फिर गरियाया तो है मगर वह वह बाज नहीं आएगा।
@GauravBhayana4@RoopDarak@ranvijaylive मानसिक रूप से पैदल व्यक्ति इतनी बदतमीजी से बात करने वाले को और क्या कहूं? और जब तुम अर्थव्यवस्था के बारे में इतना ही जानते हो तो per capita income भी बता दो।
@GauravBhayana4@RoopDarak@ranvijaylive हमारी अर्थव्यवस्था भी कब्र में ही जा रही है। भारत में इस समय घोर पूंजीवाद चरम पर है। और इसका घोर दुष्प्रभाव है जो स्पष्ट दिख रहा है।
AVADH OJHA DESTROYS WHATSAPP HISTORY 🔥
Around 1950, almost every major leader had written books.
Nehru wrote. Maulana Azad wrote. Subhas Chandra Bose wrote. Ambedkar wrote.
Today, out of 545 MPs, maybe a handful can write.
People know nothing about Nehru’s economic policy, foreign policy or Five-Year Plans.
But they know one thing: Edwina Mountbatten.
If someone abuses Nehru without knowing what India was in 1947, that person is historically foolish.
PERIOD.
I am privileged to be associated with the high-profile cases against two news organisations — NDTV and Newsclick.
I was also one of the many picked up from my home by 8 cops and questioned in the Newsclick case.
Although my ordeal was very short — and the cops were extremely polite and almost apologetic — it traumatised my family, especially my kids.
My anger at that time all but made me abandon my father's teachings of never letting my politics come in the way of my analysis. I am glad to say that I was able to transcend the temptation of becoming a partisan commentator.
However, I do not question the establishment for what happened to me. I had already experienced the state's overreach as a three-year-old, when my father had to go underground for a year during the Emergency.
My question is to the mainstream, legacy news media — especially those who do various shades of Journalism of COURAGE.
What made you regurgitate whatever was fed to you against Newsclick, or indeed against NDTV?
What made you not look at the obvious holes in the stories concocted against them?
Why did you not even do your patented 'he said, she said' journalism? Why was it only what HE said?
Make no mistake — YOU are the real enemies of democracy.