30वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी #COP30, आज से ब्राज़ील के बेलेम में ।
🗓️10 नवंबर - 21 नवंबर
सम्मेलन की वार्ता पेरिस समझौते के क्रियान्वयन, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराने तथा अनुकूलन योजनाओं पर केंद्रित होगी।
ORS v/s ORSL🚨
Oral rehydration solution (ORS) हम लोग दस्त लगने पर देते जिसमे WHO प्रमाणित फार्मूला ( Electrolytes Na+, K+, Cl-, citrate, glucose, water etc) होता है।
जिसकी Total osmolarity 245 mOs/L होती है।
��म दुकान पर जा के ORS माँगते है, वो हमको ORSL वाली मीठी ड्रिंक पकड़ा देता है जो किसी काम की नहीं है, मरीज के लिए नुकसान दायक है।🙏
करोड़ो मरीजों के स्वास्थ्य और इलाज के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
किसी डॉक्टर,नेता, मंत्री, अफसर, सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा!👎
Dr Shivranjani Mam ने 8 साल तक कोर्ट में मरीजो के लिए केस लड़ा, जीती लेकिन ORSL वाली कंपनी अपना सुगर ड्रिंक को बेचने के लिए उस पर कोर्ट से स्टे ले आई।
माई लॉर्ड बि��ा WHO formula पढ़े ही स्टे भी दे दिया।
इस देश में जहर बेचना बहुत आसान है, हो सके तो अपने आप को बचाओ।🙏
कई कंपनियाँ, जिनमें
Johnson & Johnson,
Dr Reddy’s,
Zydus Wellness
शामिल है,
‘ORS’ नाम से मीठे एनर्जी ड्रिंक बेच रही हैं, जबकि वे ors के WHO मानकों पर खरे नहीं उतरते।
इन सबको FSSAI ने इजाज़त भी दी वो ऐसे भ्रमित नाम रख कर अपने उत्पादों को बेचें ।
माता-पिता दस्त के दौरान अपने बच्चों को ये ड्रिंक दे देते हैं, लेब�� पर भरोसा करते हुए, यह जाने बिना कि ये वास्तविक ORS नहीं हैं और हानिकारक भी हो सकते हैं।
हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवरंजनिनी ने इस गलत लेबलिंग के खिलाफ सालों तक संघर्ष किया।
FSSAI ने आखिरकार इन नकली ORS उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया।
लेकिन कंपनियाँ अदालत पहुँच गईं, यह कहते हुए कि उनके पास करोड़ों रुपये का स्टॉक है, और कोर्ट ने प्रतिबंध पर रोक लगा दी।
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FSSAI को आपके और हमारे बच्चों की, हमारे परिवार की जान की फ़िक्र नहीं ।
कोर्ट को आपके और हमारे बच्चों की, हमारे परिवार की जान की फ़िक्र नहीं ।
ये फ़िक्र आपको और हमें करनी होगी ।
इन सब प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करें ।
सभी से ये जानकारी साझा करें ।
Democracy is a precondition for lasting peace. However, we live in a world where democracy is in retreat, where more and more authoritarian regimes are challenging norms and resorting to violence.
Maria Corina Machado – awarded the 2025 #NobelPeacePrize – has spent years working for the freedom of the Venezuelan people. The Venezuelan regime’s rigid hold on power and its repression of the population are not unique in the world. We see the same trends globally: rule of law abused by those in control, free media silenced, critics imprisoned, and societies pushed towards authoritarian rule and militarisation. In 2024, more elections were held than ever before, but fewer and fewer are free and fair.
#NobelPrize
ये ब्रांडेड कंपनी Paracetamol , Phenylehrine
Hydrochloride & Chlorpheniramine
के नुकसानदायक कॉम्बि��ेशन सिरप बना रही है जो की बैन है 😳
डॉक्टर, फार्मा का नेक्सस तो ज़िम्मेदार है ही अभिभावक भी ज़िम्मेदार है 👇🏽
भारत में लगभग हर तीसरा अभिभावक बच्चों के लिए बिना डॉक्टर की सलाह OTC खाँसी की दवा खरीदते हैं 😢
बच्चों को दवा हमेशा बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह से ही दें 🙏🏾 #CoughSyrup
मध्य प्रदेश सरकार ने आरक्षण के प्रकरणों को फिर बहस के लिए समय हेतु निवेदन किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रकरणों को कल दिनांक 9 अक्टूबर को पुन सुनवाई के लिए प्रकरण सूचीबद्ध किए गए है! सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य के 42 परसेंट रिजर्वेशन की याचिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा की विधान सभा के बनाए गए कानून का उस राज्य की जनसंख्या,भूगोलिक,सामाजिक परिस्थितियों के अंतर्गत परीक्षण हाईकोर्ट करेगी! सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया की समस्त अंतरिम आदेश वैकेट करके मामलो को हाईकोर्ट रिमांड करेंगे!
जब पूरे देश में EWS 10% मिला तो मध्य प्रदेश में भी 10% EWS आरक्षण मिला किसी ने विरोध नहीं किया।
जब पूरे देश में 27% OBC आरक्षण मिल रहा है फिर मध्य प्रदेश में सिर्फ 14% OBC आरक्षण क्यों, अब वहाँ भी 27% हो रहा है तो उसका इतना विरोध क्यों कर रहे हो।।
🚨 @neha_laldas द्वारा OBC आरक्षण संबंधी MP शासन के हलफनामे को तोड़-मरोड़कर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।
@MPPoliceDeptt@DGP_MP
इस पर तत्काल संज्ञान लें।
🔴 यह असत्य व अफवाहपूर्ण जानकारी है
🔴 आईटी एक्ट व IPC की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध है
दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो!
सोशल मीडिया पर ओबीसी आरक्षण से जुड़े कुछ भ्रामक कथन मध्यप्रदेश सरकार के हलफनामे से जोड़कर प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जो असत्य हैं।
वस्तुस्थिति इस प्रकार है…
@JansamparkMP#FactCheck
पीएम @narendramodi जी मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण पिछले 6 वर्षों से जानबूझकर लंबित करके रखा है,
@BJP4MP , @RSSorg की असली सच्चाई यह��� है—ये लोग केवल चुनाव आते ही ओबीसी का नाम जपते हैं, खुद को ओबीसी हितैषी बताते हैं, लेकिन अदालत में उनकी लापरवाही ओबीसी वर्ग के भविष्य पर कुठाराघात करती है,
यह बीजेपी सरकार की दोहरेपन की राजनीति है—बाहर आकर बड़ी-बड़ी बातें, और अंदर जाकर ओबीसी अधिकारों को कमजोर करना। यह ओबीसी समाज के साथ सबसे बड़ा धोखा है।
बिहार में बहुजनों को उनका पूरा हक़ और अधिकार दिलाने के लिए आज हमने ऐतिहासिक ‘अतिपिछड़ा न्याय संकल्प पत्र’ जारी किया है। इसमें 10 ठोस संकल्प हैं -
1. आरक्षण की 50% सीमा बढ़ाने के लिए पास कानून को 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए भेजेंगे।
2. पंचायत-नगर निकाय में आरक्षण 20% से बढ़ाकर 30% होगा।
3. सभी प्राइवेट कॉलेज-यूनिवर्सिटी में आरक्षण लागू होगा।
4. नियुक्तियों में "Not Found Suitable" जैसी व्यवस्था खत्म होगी।
5. अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में सही प्रतिनिधित्व के लिए कमेटी बनेगी।
6. SC/ST/OBC/EBC के आवासीय भूमिहीनों को जमीन मिलेगी (शहर: 3 डेसिमल, गांव: 5 डेसिमल)।
7. प्राइवेट स्कूलों की आधी आरक्षित सीटें SC/ST/OBC/EBC ��च्चों को मिलेंगी।
8. ₹25 करोड़ तक के सरकारी ठेकों में 50% आरक्षण SC/ST/OBC/EBC को।
9. अतिपिछड़ों के ख़िलाफ़ अत्याचार रोकने का कानून बनेगा।
10. आरक्षण देखने के लिए प्राधिकरण बनेगा, सूची में बदलाव केवल विधानसभा करेगी।
प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा – 27% OBC आरक्षण
पिछले 6 साल से युवाओं का भविष्य दांव पर!
👉 22 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट में रोज़ सुनवाई
👉 13% होल्ड पदों पर ≈ 9000 नियुक्तियाँ अटकीं
निर्णय जो भी हो, लेकिन यह बेरोज़गार युवाओं के लिए सीधा नुकसान है।
#OBCआरक्षण#न्यायदो
मध्यप्रदेश में युवाओं का भविष्य हमेशा से सरकार और ठेकेदार कंपनियों के हाथों खिलौना बना हुआ है। आबकारी भर्ती परीक्षा के नाम पर जिम्मेदारी दी गई है Eduquity Career Technology को, लेकिन यह कंपनी छात्रों के सपनों से खेल रही है। नियम, सुविधा और पार��र्शिता की जगह यहाँ मनमानी हावी है।
कई परीक्षार्थियों को उनके घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर सेंटर दिए गए हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों के लिए यह बोझ किसी सज़ा से कम नहीं है। सरकार कहती है कि “रोज़गार देंगे”, लेकिन हकीकत में रोज़गार तक पहुँचने की राह को ही कांटों से भर दिया जाता है।
सवाल यह है कि क्या भर्ती एजेंसियों की जिम्मेदारी सिर्फ परीक्षा करवाना है, या अभ्यर्थियों की सुविधा ���र समान अवसर भी इसमें शामिल है?
लेकिन यहां तो लगता है Eduquity Career Technology और सरकार दोनों ही युवाओं की मेहनत और उम्मीदों को हल्के में ले रहे हैं।
इस मनमानी का नतीजा यह होगा कि योग्य छात्र परीक्षा देने से ही वंचित रह जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया से पहले ही उनका मनोबल तोड़ा जा रहा है।
#मध्यप्रदेश #आबकारीभर्ती #Eduquity #युवाओंकेसाथअन्याय #परीक्षामेंमनमानी
मा.श्रीमति कृष्णा गौर का यह कथन ओबीसी को गुमराह करने बाला है , मध्य प्रदेश का ओबीसी वर्ग सरकार की मंशा जान चुका है, की कानून पर स्टे नहीं है फिर भी सरकार महाधिवक्ता के आगे वेवस होकर न तों 13% होल्ड पदों को अनहोल्ड कर रही है औऱ न ही 27% आरक्षण लागू करने की कोई रणनीति बना रही है !
👉 सुप्रीम कोर्ट मे दो अधिवक्ताओ को निय��क्त करने से समस्या का हल नहीं होगा, मौजूदा सरकारी वक़ील तुषार मेहता एवं के.एम. नटराज,तथा म्हधिवक्ता प्रशांत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तन मन से ओबीसी आरक्षण के विरूध कार्य करके ओबीसी को गुमराह करने का कार्य कर रहे है ! दाखिल याचिका क्रमांक 606/2025 मे दिनांक 25/7/25 के दिन हुई सुनवाई मे जब सुप्रीम कोर्ट याचिका के अंतिम निर्णयधीन 27% लागू करने तथा होल्ड पदों को अनहोल्ड करने जा रही थी तों श्री मेहता ने ���हा था my lord I have strong objection एवं दिनांक 04/8/25 की सुनवाई मे भी सरकार की ओर से ओबीसी के 27% आरक्षण का विरोध किया गया ��था याचिका https://t.co/hMtFZJ3tpP (C) 07 of 2025 में सरकार द्वारा दाखिल IA पर वहस ही नहीं की गई ! एवं छत्तीगढ़ के प्रकरणों मे पारित अंतरिम आदेश को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश मे लागू करने का सुप्रीम कोर्ट मे विरोध किया गया !
मध्य प्रदेश सरकार ज़ब तक महाधिवक्ता श्री प्रशांत सिंह को पद मुक्त नहीं करेगी तब तक ओबीसी को न तों 27% आरक्षण मिलेगा औऱ न ही होल्ड पद अनहोल्ड होंगे ! माननीय महाधिवक्ता अपनी नियुक्ति के पहले ही ���िन से सरकार की मंशा के विरूध ओबीसी वर्ग के हितो के विपरीत कार्य कर रहे है, महाधिवक्ता महोदय जो psc के भी पेरोकार है,इन्होने हाईकोर्ट मे कई आवेदन दाखिल करने 14% आरक्षण लागू करने की मांग की है जिसे हाईकोर्ट ने याचिका क्रमांक wp/5901/2019 से लिंक मामलो मे दिनांक 13/7/2021 को विस्तृत आदेश पारित किया गया है तथा ओबीसी को गुमराह करके बताया जा रहा है की हाईकोर्ट ने 27% लागू नहीं करने पर रोक लगाई है !
ओबीसी के किसी भी माम��े मे महाधिवक्ता महोदय एवं महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से आज दिनांक तक विस्तृत जबाब दाखिल नहीं किया गया है औऱ न ही सरकार की ओर से ओबीसी का 27% का कानून जास्टिफाई करने का कोई प्रयास किया गया है !
मध्य प्रदेश सरकार हाईकोर्ट मे ओबीसी की ओर से सरकार का पक्ष रखने हेतु दिनांक 14/9/2021 को दो विशेष अधिवक्ताओ को नियुक्ति किया गया है,उक्त दोनों अधिवक्ताओ को सरकार तथा प्रसाशन का कभी कोई सहयोग नहीं मिला तथा उक्त विशेष अधिवक्ताओ को महाधिवकता कार्यालय मे बैठने तक स्थान तक मुहैया नहीं कराया गया,जिस सम्वन्ध मे उक्त दोनों विशेष अधिवक्ताओ ने समय समय पर प्रेस वार्ता करके सरकार की कार्यप्र���ाली को आम जन मे हाइलाइट किया गया है !
तत्कालीन सरकार ने दिनांक 15/10/2019 को हाईकोर्ट मे 558 पेज का जबाब दाखिल करके ओबीसी की 51% आवादी का डाटा पेश करके ओबीसी का 27% आरक्षण को जास्टिफाई किया गया था,लेकिन सरकार परिवर्तन के बाद आज दिनांक तक सरकार ने ओबीसी कल्याण अयोग के डाटा हाईकोर्ट मे दाखिल नहीं किए,शायद सरकार की मंशा हो की उक्त कानून कांग्रेस के समय बना था इसलिए !
सर्व दली बैठक मे सभी दलों के प्रतिनिधियों ���े एक राय होकर ओबीसी को 27% लागू करने की पहल की गईं,लेकिन उस बैठक मे म्हधिवक्ता की भौतिक उपस्थित एक मिस्ट्री है !
दिल्ली मे दिनांक 4/9/25 की बैठक मे महाधिवक्ता महोदय ने किसी भी सदस्य क��� बात को गंभीरता से नहीं लिया,उनका बार बार एक बात पर ही जोर था की कोई दो अधिवक्ताओ ने नाम बताए जिन्हे सरकार अधिकृत कर सके !
बैठक मे स्पष्ट कर दिया गया था की ओबीसी वर्ग को किसी भी अधिवक्ता की जरूरत नहीं है, जब तक सरकार ओबीसी के 13% पदों को अनहोल्ड नहीं करती एवं एडवोकेट जनरल ऑफिस मे नियमनुसार सभी वर्गों के अधिवक्ताओ को प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं कर दिया जाता !
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ���े मीटिंग मे स्पष्ट रूप से कहा की हम लोग 2019 से ओबीसी आरक्षण के पक्षए पैरवी करते आ रहे है आज दिनांक तक कानून पर स्टे नहीं होने दिया, फिर भी सरकार ने याचिका क्रमांक 18105/21 मे पारित अंतरिम आदेश दिनांक 4/8/23 का हवाला देकर महाधिवक्ता के अभिमत से हजारों पदों को होल्ड कर दिया गया! जब उक्त याचिका दिनांक 28/01/25 को हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दी तब भी पदों को अनहोल्ड नहीं किया गया एवं हाईकोर्ट के उक्त आदेश दिनांक 28/01/25 को स��प्रीम कोर्ट ने भी हरी झंडी दे दी फिर भी सरकार ने 13% पद अनहोल्ड नहीं किए ! बल्कि महाधिवक्ता एवं सरकार के हवाले से याचिका 3668/2022 मे पारित अंतरिम आदेश दिनांक 04/05/2022 का हवाला देकर अनहोल्ड नहीं करने की बात कही जाने ल��ी !