"विधायक जी का पूरा जीवन लोगों की सेवा में निकल गया, संघर्ष करके उन्होंने राजनीति में अपना स्थान बनाया।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी,बदायूं
देहरादून के तिब्बती मार्केट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि 18 जुलाई की शाम एक पुलिस अधिकारी ने सड़क किनारे फल बेच रहे बुजुर्ग विक्रेता से मारपीट की। वीडियो बना रहे युवक ने कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि मारपीट नहीं, नियमों के तहत चालान होना चाहिए। वहीं, अधिकारी का कहना है कि वे अतिक्रमण हटाने के आदेशों का पालन कर रहे थे।
देश का छात्र कह रहा है - “हमारा कोई भविष्य नहीं।”
और इस सरकार के मंत्री कह रहे हैं - “हमारी कुर्सी नहीं जाएगी।”
जिस देश में छात्र भविष्य खो दे और मंत्री कुर्सी न खोए - वहां न्याय है ही नहीं।
कितना दर्द होगा उस इंसान के भीतर, जो अपने लिए नहीं, बल्कि इस देश के बच्चों के भविष्य के लिए भूखा बैठा हो।
शिक्षा केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि हर इंसान का सबसे बड़ा अधिकार है।
सबसे अधिक ज़रूरत उसकी उस बच्चे को है, जो गरीबी, वंचना और सामाजिक भेदभाव के बीच जन्म लेता है। क्योंकि शिक्षा ही वह रास्ता है, जिसके सहारे वह अपने जीवन की दिशा बदल सकता है। शिक्षा केवल रोज़गार नहीं देती, बल्कि सोचने की क्षमता, आत्मसम्मान और एक बेहतर इंसान बनने की समझ भी देती है।
जब किसी देश में सरकारी स्कूल लगातार बंद होने लगें, विश्वविद्यालयों पर बुलडोज़र चलने की ख़बरें आएँ, परीक्षाएँ बार-बार पेपर लीक से प्रभावित हों और लाखों युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में झूलता रहे, तब यह केवल छात्रों की समस्या नहीं रह जाती। यह पूरे समाज और राष्ट्र की चिंता का विषय बन जाती है। ऐसे समय में यदि कोई व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा और भविष्य के लिए अपनी सेहत दाँव पर लगा देता है, तो यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक संवेदनाओं की परीक्षा भी है।
आज ज़रूरत किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में खड़े होने की नहीं है। ज़रूरत उस विचार के साथ खड़े होने की है कि इस देश के हर बच्चे को ऐसी शिक्षा मिले जो सुलभ हो, गुणवत्तापूर्ण हो, ईमानदार व्यवस्था पर आधारित हो और उसके सपनों को सुरक्षित रख सके।
किसी भी राष्ट्र का भविष्य संसद की ऊँची इमारतों में नहीं, बल्कि उसके स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लिखा जाता है। यदि हम शिक्षा को नहीं बचाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों से एक बेहतर भारत का सपना भी उनसे छीन लेंगे।
मुलायम सिंह यादव जी ने पार्टी की तरफ से मुझे हरे रंग की पजेरो दे रखी थी... मैं पीछे सीट पर लेटा हुआ था उस वक्त अब्दुल्ला बहुत छोटा था..!
मैं मुरादाबाद से रामपुर होते हुए जा रहा था रास्ते में अब्दुल्ला ने मुझे जगाया देखो बाबा सामने बड़ी पुलिस है.. मैने देखा कतार में पुलिस खड़ी है और सब राईफल ताने..
एक इंस्पेक्टर ने नंगी रिवाल्वर मेरे सीने पर तान दी और कहा गाड़ी से उतरिए.. मैं उतरा ड्राइवर से कहा बच्चे को दूर खेतों में ले जाओ जिससे वो बच सकें और मैं जमीन पर बैठ गया।
मुरादाबाद के सभी MLA,DM,SP वहां आ गए और कहा गलती हो गई आप जाइये।
मैं दिल्ली यूपी हाउस आ गया और अगले दिन टीवी पर हेडलाइन देखी कि आजम खान पर फला फला धाराओं में मुक़दमा दर्ज हो गया उसमें मुझे सजा हो गई और मेरी मेंबरशिप चली गई।
(कपिल सिब्बल ने कहा क्योंकि आप आजम खान हैं)
"जो दो लोग ऊपर बैठे हैं उनका कोई परिवार नहीं है, परिवार वाले ही परिवार वालों का दुख दर्द समझते हैं।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, एटा