डर नहीं, विश्वास दें। चुप्पी नहीं, सहारा दें।
संवेदनशीलता ही हमारी शक्ति: राजस्थान पुलिस हर उस बच्चे के साथ खड़ी है जो किसी भी प्रकार की हिंसा या प्रताड़ना का शिकार है। पुलिस का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि सुरक्षा का विश्वास जगाना है।
बचपन की रक्षा, सामूहिक ज़िम्मेदारी: बच्चों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान करना केवल पुलिस का नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
हिंसा के खिलाफ उठाएं आवाज़: यदि आपके आस-पास किसी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार या हिंसा हो रही है, तो चुप न रहें। आपकी एक छोटी सी पहल किसी मासूम का भविष्य बचा सकती है।
पहचान रखी जाएगी गुप्त: पुलिस को सूचना देने वाले नागरिक की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। इसलिए बिना किसी डर के आगे आएं।
चौबीसों घंटे उपलब्ध हेल्पलाइन: किसी भी आपात स्थिति या बाल अपराध की सूचना तुरंत आपातकालीन नंबर: 112 या
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098 नंबर पर दें।
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कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान, बढ़ता पुलिस का मान!
राजस्थान पुलिस मुख्यालय, जयपुर में महानिदेशक पुलिस, लॉ एंड ऑर्डर एवं आर्म्ड बटालियन श्री संजय अग्रवाल, अतिरिक्त महानिदेशक, आर्म्ड बटालियन एवं एस.डी.आर.एफ., श्री रुपिंदर सिंघ, डी.आई.जी., R.A.C., श्रीमती श्वेता धनखड़, D.I.G., आर्म्ड बटालियन, श्री विनीत कुमार बंसल, कमांडेंट, एस.डी.आर.एफ., श्री राजेन्द्र कुमार एवं उच्चाधिकारियों ने R.A.C. के 128 जांबाजों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया साथ ही उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
विशेष हुनर को प्रोत्साहन: घुड़सवार, बैंड दल एवं एस.डी.आर.एफ. के 116 जवानों को "महानिदेशक पुलिस प्रशस्ति डिस्क व रोल" के लिये चयनित कर सराहा गया एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए 12 जवानों को 5,100-5,100 रुपये के नकद पुरस्कार व प्रशंसा पत्र से सम्मानित किया।
अनुशासन, समर्पण और सेवा का यह अटूट सिलसिला केवल विभाग के लिए नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा और शांति के लिए चौबीसों घंटे तत्पर है।
आइए, ज़िम्मेदार नागरिक बनकर सुरक्षित समाज के निर्माण में सहयोग करें।
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उक्त अधिकारियों की रात्रिकालीन गस्त 12 AM से 5 AM तक रहेगी। रात्रि में किसी प्रकार की सहायता के लिए उक्त अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। आपकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
खिली मुस्कान, और मजबूत हुआ विश्वास!
अजमेर पुलिस ने साइबर सेल की मदद से गुमशुदा मोबाइल बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंपे।
बड़ी सफलता: अजमेर पुलिस द्वारा ₹50 लाख की कीमत के 215 मोबाइल फोन बरामद।
तकनीकी कौशल: साइबर सेल एवं सीईआईआर (C.E.I.R.) पोर्टल के प्रभावी उपयोग से मिली कामयाबी।
सीमाओं से परे: राजस्थान ही नहीं, अन्य राज्यों से भी खोज निकाले गए चोरी व गुमशुदा मोबाइल।
जन-सेवा: बरामद मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द कर लौटाई गई उनकी अमानत।
मोबाइल गुम होने पर तुरंत C.E.I.R. पोर्टल या Rajcop Citizen App पर दर्ज करें शिकायत।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर डिजिटल उपकरणों के प्रति विशेष सतर्कता बरतें।
आधुनिक तकनीक और कठिन परिश्रम से राजस्थान पुलिस आपकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!
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महिलाओं और बच्चों के ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी
• अब बिना पहचान उजागर किए दर्ज कर सकते हैं शिकायत, NCRP पोर्टल पर उपलब्ध है ‘Anonymous Reporting’ सुविधा
जयपुर, 15 मई। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा द्वारा महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया पर अभद्रता और साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा एवं गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऐसी सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से पीड़िता बिना अपनी पहचान उजागर किए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकती है।
यदि किसी महिला या बालिका को फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम अथवा अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परेशान किया जा रहा है, तो वह नेशनल साइबर क्राईम रिर्पोटिंग पोर्टल https://t.co/y8cYaY5Rrg पर ‘Women/Child Related Crime’ विकल्प के माध्यम से गुप्त रूप से शिकायत दर्ज कर सकती है।
बिना नाम-पते के दर्ज होगी शिकायत:
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ‘Report Anonymously’ विकल्प चुनने पर शिकायतकर्ता से नाम, पता, आधार नंबर या अन्य निजी जानकारी नहीं मांगी जाती। शिकायत दर्ज करते समय केवल घटना से जुड़ी जानकारी, जैसे तारीख, समय, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का नाम तथा आरोपी की प्रोफाइल लिंक और स्क्रीनशॉट अपलोड करने होते हैं। इससे पीड़िता की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहती है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव हो पाती है।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया:
सबसे पहले साइबर क्राइम पोर्टल पर जाकर “Register a Complaint” विकल्प चुनें। इसके बाद “Women/Child Related Crime” पर क्लिक करें और फिर “Register Anonymously” विकल्प का चयन करें। डिस्क्लेमर स्वीकार करने के बाद घटना का विवरण भरें, जिसमें अपराध की श्रेणी, तारीख, समय और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जानकारी देनी होती है।
यदि आरोपी की सोशल मीडिया आईडी या प्रोफाइल लिंक उपलब्ध हो तो उसे भी दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद आरोपी के मैसेज, कमेंट या आपत्तिजनक सामग्री के स्क्रीनशॉट अपलोड कर शिकायत सबमिट की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद एक कंप्लेंट आईडी प्राप्त होती है, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
स्क्रीनशॉट और लिंक सुरक्षित रखना जरूरी:
साइबर क्राइम शाखा ने आमजन से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में आरोपी की प्रोफाइल लिंक, चैट, मैसेज और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें, क्योंकि ये कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी या ऑनलाइन अपराध होता है अथवा ऐसा प्रयास किया जाता है, तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://t.co/y8cYaY5Rrg, साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर दें।
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ज़िन्दगी के सफर में सुरक्षा को सबसे बड़ा हमसफ़र बनाएं, हेलमेट अपनाए।
छोटी हो या लंबी दूरी, हमेशा हेलमेट पहने!
दोपहिया वाहन चलाते समय 'हेलमेट' पहनना केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि आपके जीवन की सुरक्षा की गारंटी है।
याद रखें, घर पर कोई आपका इंतज़ार कर रहा है।
सड़क सुरक्षा नियमों को अपनाएं, अपने कल को सुरक्षित बनाएं।
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सेवा और सुरक्षा में राजस्थान पुलिस का नया कीर्तिमान!
केंद्र सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान Top-5 राज्यों में शामिल है। अब 112 डायल करते ही मात्र 6 मिनट के औसत समय में पुलिस सहायता आपके द्वार पहुँच रही है। संकट कोई भी हो, हमारा संकल्प आपकी सुरक्षा है।
रिकॉर्ड रिस्पॉन्स टाइम: संकट के समय हर सेकंड कीमती है, और हमारी टीम औसतन 6 मिनट 34 सेकंड में मदद पहुँचा रही है।
देश में अग्रणी: इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) में राजस्थान ने देश के शीर्ष राज्यों में अपनी जगह बनाई है।
एकीकृत सेवा: 112 डायल करते ही पुलिस, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की सहायता एक साथ उपलब्ध।
आधुनिक तकनीक: GPS और आधुनिक नियंत्रण कक्ष के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी त्वरित पहुँच सुनिश्चित।
भरोसा बरकरार: आपकी सुरक्षा के प्रति हमारी सजगता ही हमारी असली उपलब्धि है।
बस एक कॉल की दूरी—डायल करें 112।
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सड़क पर 'ओवरलोड' वाहन, मतलब हादसों को खुला निमंत्रण!
क्षमता से अधिक भरा माल वाहन के संतुलन को बिगाड़ता है और ब्रेक फेल होने जैसे बड़े हादसों का कारण बनता है। जनहानि की संभावना को बढ़ाता है।
आपकी एक छोटी सी लापरवाही, कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है।
ओवरलोडिंग को हल्के में न लें, यह खतरनाक है, इससे बचें।
यातायात नियमों का उल्लंघन न केवल भारी जुर्माना बल्कि लाइसेंस रद्द करने का कारण भी बन सकता है।
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नशा खोरों पर सरकार का शिकंजा? | ANTF के IG IPS Vikas Kumar का खास Podcast ...
जब माफिया से हुई मुठभेड़, अपराधी आगे पीछे पुलिस। पूरी कहानी सुनिए IPS VIkas kumar की जुबानी ...
UPSC aspirants के लिए IPS ने दिए मूल मंत्रा, IPS Vikas Kumar की जरूरी बात जरूर सुन लीजिए ...
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आपकी मेहनत की कमाई पर जालसाजों की नज़र है!
'टास्क स्कैम' के झांसे में न आएं।
अग्रिम भुगतान, भारी कमीशन का झांसा, रकम ट्रांसफर कर लोगों से छल करते हैं।
अनजान लिंक पर क्लिक करना या घर बैठे लाखों कमाने के लालच में पैसा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। अपनी जानकारी शेयर न करें।
यदि आप ठगी का शिकार हुए हैं, तो बिना डरे तुरंत 1930 पर कॉल करें या https://t.co/DlzOGXZv1B पर शिकायत दर्ज करें।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। राजस्थान पुलिस—आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प।
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अतीत को सहेजें, भविष्य को संवारें!
संग्रहालय हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं। राजस्थान की समृद्ध विरासत की सुरक्षा में राजस्थान पुलिस सदैव आपके साथ है।
हमारी प्राचीन कलाकृतियाँ देश की संपत्ति हैं, इनका सम्मान और सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
संग्रहालय ज्ञान के ऐसे केंद्र हैं जो इतिहास को किताबी पन्नों से बाहर निकाल कर हमें उसे महसूस करने का अवसर देते हैं।
अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझकर ही हम एक बेहतर और संगठित समाज का निर्माण कर सकते हैं।
राजस्थान पुलिस केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है।
आइए, आज अपनी गौरवशाली कला और संस्कृति को और करीब से जानें।
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मृत्यु के पश्चात भी गरिमा हर व्यक्ति का अधिकार है।
'मृत शरीर का सम्मान अधिनियम, 2023' के तहत शव का उपयोग विरोध प्रदर्शन या दबाव बनाने के लिए करना दंडनीय अपराध है। आइए, कानून का पालन करें और दिवंगत आत्मा के सम्मान व मानवाधिकारों की रक्षा में सहभागी बनें।
गरिमा सर्वोपरि: शव का उपयोग किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, आंदोलन या दबाव बनाने के लिए करना प्रतिबंधित है।
कानूनी प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने या शव लेने से इनकार करने पर 2 वर्ष तक की सजा व जुर्माने का प्रावधान है।
समय सीमा: मृतक के परिजनों द्वारा 24 घंटे के भीतर अंतिम संस्कार करना अनिवार्य है।
पुलिस की भूमिका: शव के दुरुपयोग की आशंका होने पर प्रशासन के आदेश से शव को संरक्षण में लेने का अधिकार।
अधिनियम का उद्देश्य: दिवंगत व्यक्ति की गरिमा, सामाजिक मर्यादा और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
राजस्थान पुलिस — शांति और न्याय के लिए संकल्पित।
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जब समय हो कम और परिस्थिति हो गंभीर, तब आपका एक सही कॉल बनेगा आपका रक्षक।
पुलिस, एम्बुलेंस या अग्निशमन सेवा—अब अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं। किसी भी आपात स्थिति में बस 112 डायल करें। राजस्थान पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए हर पल, हर मोड़ पर आपके साथ है।
एक नंबर, अनेक समाधान: पुलिस, स्वास्थ्य और अग्नि संबंधी आपात स्थितियों के लिए एकीकृत सेवा।
समय की बचत: संकट के क्षणों में सही नंबर डायल करना ही जीवन रक्षक साबित होता है।
त्वरित प्रतिक्रिया: आपकी एक कॉल पर राजस्थान पुलिस की टीम मदद के लिए तुरंत रवाना।
हर वर्ग की सुरक्षा: महिला, बालक, बुजुर्ग या कोई भी संकटग्रस्त व्यक्ति—112 है सबका साथी।
भरोसा और सेवा: हम केवल कानून के रक्षक ही नहीं, आपके सुख-दुख के साथी भी हैं।
याद रखें, सतर्कता ही सुरक्षा है!
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