Ranchi के IPS SP City Paras Rana ने मीडिया वालों से ये बदतमीजी क्यों की? शांति से बैठे लोगों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अफ़सरों पर कार्रवाई करेगी सोरेन सरकार?
@INCJharkhand_ छी.... कितनी घटिया मानसिकता है आपलोगो की..छात्र यँहा मर रहे है और आपलोग राजनीति करने में लगे हुए है, याद रखिये अगर आप अपने बेटे को पड़ोसी के जैसा स्वभाव बताते हुए डेली डाटते रहोगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि वह पड़ोसी के घर में ही जाकर रहने लगेगा...... समझने वाले समझ जाएंगे
युवाओं पर हुई पुलिसिया बर्बरता के विरोध में आज हमारे छात्रों ने मौन जुलूस निकाला।
न नारेबाजी,
न शोर,
न किसी से बहस
बस हाथों में तख्तियां और आंखों में अपने हक की लड़ाई।
यही है झारखंड के छात्रों की सभ्यता, संस्कार और लोकतांत्रिक तरीका।
जिन्हें कल लाठियों से रोकने की कोशिश की गई,
आज उन्होंने मौन रहकर भी अपनी आवाज़ पूरे झारखंड तक पहुंचा दी।
ये छात्र हैं साहब… हिंसा नहीं, हक की भाषा जानते हैं। और अपने हक के लिए लड़ना भी जानते हैं।
मौन हैं, मगर कमजोर नहीं।
शांत हैं, मगर झुके नहीं।
हर आंदोलन के बाद एक ही कहानी सुनने को मिलती है-
“आंदोलन में दूसरी पार्टी के उपद्रवी घुस गए थे, इसलिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।”
ठीक है, मान लिया उपद्रवी घुस गए थे।
सवाल है-
उन उपद्रवियों की पहचान करके कार्रवाई किसे करनी थी?
अगर 10,000 छात्रों की भीड़ में 50 लोग पत्थर चला रहे हैं, बैरिकेड तोड़ रहे हैं या हिंसा कर रहे हैं, तो कैमरे लगाइए, वीडियोग्राफी कराइए, उनकी पहचान कीजिए, उन्हें पकड़िए और मुकदमा चलाइए।
लेकिन उन 50 के बहाने बाकी 9,950 छात्रों पर लाठी कैसे जायज़ हो गई?
और ये कोई देश का पहला आंदोलन भी नहीं है। प्रशासन को पहले से आशंका है कि बाहरी या उपद्रवी तत्व घुस सकते हैं, तो फिर उसके लिए व्यवस्था पहले से क्यों नहीं?
आंदोलन के आयोजकों के साथ coordination करते
कि इसको रोका जाता ।
लेकिन हर बार ये तर्क नहीं चल सकता कि “चार उपद्रवी घुस गए थे, इसलिए चार हजार छात्रों को पीटना पड़ा।”
बल्कि एक सवाल उल्टा सरकार से भी बनता है-
जब आपको पहले से पता था कि आंदोलन में उपद्रवी घुस सकते हैं, तो उन्हें रोकना किसकी जिम्मेदारी थी?
लोकतंत्र में पुलिस का काम सिर्फ भीड़ को तितर-बितर करना नहीं,
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी और उपद्रवी के बीच फर्क करना भी तो उसका काम है।
वरना कल किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन में चार लोग भेजकर हंगामा करा दीजिए और फिर पूरे आंदोलन पर लाठीचार्ज को जायज़ ठहरा दीजिए।
ये तो किसी भी आंदोलन को कुचलने का सबसे आसान बहाना बन रहा है ।
📍सबसे पहले तो JPSC और JSSC पूरी तरह से खाली करिए सरकारी कर्मचारी हो या गैर सरकारी कर्मचारी, होना तो यह चाहिए था कि इनको बर्खास्त करना चाहिए था लेकिन आपने तो किया नहीं, इनके ऊपर FIR दर्ज कर जांच शुरू की जाए,
📍 JSSC CGL और 11-13th JPSC परीक्षा को CBI जांच को सौंप दीजिए, क्योंकि झारखंड के सभी युवा इस परीक्षा के नियुक्ति के विरोध में है, केवल वे समर्थन में है जिनका आवैध तरीके से नियुक्ति हुआ है, वो भी उनमें से ज्यादातर झारखंड के नहीं है, तो मुख्यमंत्री महोदय आपको यह सोचने की जरूरत है कि जिनका नियुक्ति हुआ है केवल उन्हीं के वोट से आप 2029 का चुनाव जीत जायेंगे क्या? वो भी उनमें से ज्यादातर तो झारखंड के हैं नहीं तो आपको वोट तो देने वाले हैं नहीं, अगर आप यह काम कर देते हैं तो 2029 में JMM का सरकार फिर से आने से कोई नहीं रोक सकता,
📍 और एक चीज यह करना है कि इन संस्थाओं के द्वारा परीक्षा खुद कंडक्ट कराया जाए, किसी थर्ड पार्टी एजेंसी को ना दिया जाए, ऐसे सक्षम लोगों को संस्था में भर्ती कीजिए जो संस्था में अच्छे से काम करें और किसी थर्ड पार्टी एजेंसी की जरूरत ही ना पड़े।
📍 सबसे बड़ी बात आगे से ऐसी गलतियां दोबारा ना दोहराए जाए इसके लिए अभी आपको दोषी कर्मचारी व अधिकारियों को बर्खास्त करना होगा ।
📍 सबसे बड़ी समस्या है छात्रों और इन संस्थाओं के बीच संवाद का कोई माध्यम नहीं है, तो ऐसे माध्यम बनाए जाएं जिससे प्रत्येक छात्रों और इन संस्थाओं के बीच संवाद सुलभ हो।
जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठियाँ चलीं तो सवाल उठा था -
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, तो लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया? गृह मंत्री अमित शाह जवाब दें।
सवाल बिल्कुल जायज़ था और आज भी पूछा जाना चाहिए।
और अब यही सवाल झारखंड में पूछा जाएगा -
कल छात्रों पर लाठियाँ चलीं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, वाटर कैनन चलाए गए। कई छात्रों के घायल होने की तस्वीरें और वीडियो सामने हैं।
और झारखंड में गृह विभाग खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है।
तो फिर सवाल है-
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन @HemantSorenJMM बताइए, छात्रों पर बल प्रयोग का निर्णय किस स्तर पर और किसके आदेश से लिया गया?
नियम पार्टी देखकर नहीं बदल सकता।
वहाँ अमित शाह जी से सवाल है,
तो यहाँ हेमंत सोरेन से जवाब और जवाबदेही की मांग भी उतनी ही है ।
छात्र की पीठ पर पड़ी लाठी यह देखकर दर्द नहीं करती कि सरकार BJP की है, JMM की है या Congress समर्थित है।
सत्ता किसी की भी हो-
लाठी किसके आदेश से चली, जवाब देना ही पड़ेगा।
तो चलिए शुरू करते है
कुछ महीने पहले शिव शंकर शर्मा ने कम्प्लेंट किया था
ACF में 150 लड़कों को और 350 को FRO में करवाया था।
क्या सरकार में हिम्मत है कि इसको रद्द कर दे ??
@DC_Ranchi अरे! इतनी शक्ति और इतनी कठोरता उन बेईमानों, उन घोटालेबाजों , उन सीट बेचने वालो पर की होती न तो आज छात्रों को आंदोलन करने का जरूरत ही नहीं पड़ता..