राजस्थान के बीकानेर जिले के बज्जू क्षेत्र से भीखाराम नायक पुत्र चेनाराम की संदिग्ध मौत की अत्यंत दुःखद एवं चिंताजनक सूचना सामने आई है। परिजनों द्वारा आरोप लगाया गया है कि भीखाराम के साथ मारपीट की गई थी और घटना से पहले उसे जान का खतरा भी था। इसके बाद उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिवार द्वारा मामले को हत्या बताते हुए आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है। लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्याय और कार्रवाई की मांग को लेकर पीड़ित परिवार को बज्जू सरकारी अस्पताल के सामने धरने पर बैठना पड़ रहा है।
राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन से सवाल है—जब एक परिवार अपने बेटे/परिजन की मौत के बाद न्याय की गुहार लगा रहा है, तो उसकी आवाज़ सुनने के लिए उसे सड़क पर बैठने को क्यों मजबूर किया जा रहा है?
@RajPolice_Citizen @BikanerPolice@RajCMO
राजस्थान में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन यदि किसी परिवार को अपने मृत परिजन के लिए न्याय मांगने के लिए धरना देना पड़े, तो यह सरकार के उन दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
हम स्पष्ट रूप से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य, घटनास्थल, कॉल रिकॉर्ड, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा परिजनों द्वारा लगाए गए प्रत्येक आरोप की गंभीरता से जांच हो।
यदि जांच में हत्या अथवा किसी अन्य अपराध की पुष्टि होती है तो सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। किसी भी राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक प्रभाव के कारण किसी आरोपी को संरक्षण मिला तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
पीड़ित परिवार की मांगों पर तत्काल कार्रवाई हो, परिवार को सुरक्षा दी जाए, उचित आर्थिक सहायता/मुआवजा दिया जाए और उन्हें शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन यह याद रखे—
न्याय मांगने वाले परिवार को धरने पर बैठाना शासन की उपलब्धि नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता है।
भीम आर्मी पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले में खानापूर्ति नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और परिणामकारी कार्रवाई हो।
दोषी बचना नहीं चाहिए।
निर्दोष फंसना नहीं चाहिए।
पीड़ित परिवार को डराया या दबाया नहीं जाना चाहिए।
और भीखाराम नायक के परिवार को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए।
ये तस्वीरें थीं 11 सितंबर 2024 को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम की, जहां @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद ने एक बड़ी रैली की और लाखों की संख्या में लोग पहुंचे थे👇🏻
अब पुनः लगभग दो वर्ष बाद 24 सितंबर को चन्द्रशेखर आजाद ने आरक्षण के समर्थन में दिल्ली में एक बड़े आंदोलन का आवाह्न किया है
अब देखना होगा कितने लोग दिल्ली पहुंचते हैं और चन्द्रशेखर आजाद का यह आंदोलन कितना प्रभाव डालेगा
मेरे अनुसार 10 लाख से अधिक लोग पहुंचेंगे, मैं देख रहा हूं देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अभी से तैयारी में लग गये हैं।।
आज स्वतंत्र भारद्वाज मामले को लेकर दिल्ली के संसद मार्ग थाने में @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद पहुंचे और गंभीरता दिल्ली पुलिस को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया👇🏻
चंद्रशेखर आजाद के थाने पहुंचने के कुछ ही देर बाद बुलंदशहर में आरोपी युवक को पकड़ लिया गया....!!
दिल्ली पुलिस प्रशासन पर भड़के चंद्रशेखर आज़ाद जी!
चंद्रशेखर आज़ाद जी ने मीडिया के सामने बोला की जब इंसान कही फस जाता हे!तो बो इस तरह की बाते करता हे
इंटरव्यू मेने दिया या उसने दिया या उस बच्ची ने दिया!
बो इंटरव्यू मे कह रा था मेने उसके बाप का सर फाड़ा!
हमारा कुछ नही हुआ!
सुनो.
"मैं वही चंद्रशेखर हूँ जिसको सड़को से पकड़ कर पुलिस जेल मैं डाल देती थी जिसके पैर के नाखुनो को नोचा गया जिसको पिट पिट कर रीड की हड्डी मे गेप दे दिया। "
लेकिन आज आप लोगो की ताक़त की वजह से लोकसभा मैं प्रधानमंत्री जी की आख मे आख डाल कर आपके हको की बात करता हूँ ।
@BhimArmyChief
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
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