झटकाना सीख लिया
जब हाथ किसी ने मांगा ��ा
अब याद कर के रो जाते हैं
उन पलों को फिर से बुलाते हैं
पर जाने वाला ना कभी आएगा जो बोएगा तू वो खाएगा।
- Kalam ka karigar
बाद में मैं पछताऊंगा
समय को फिर बुलाऊंगा
समय ना वापस आएगा
वो पल भी संग ले जाएगा
जब हंसना था तब गुस्सा था
अब साथ न कोई हसने वाला है
जब दोस्त बना हम सकते हैं दुश्मनी बनाते फिरते हैं
अब इज्जत उतार ली, छुपा के रख दी है कोने मैं,
किस को दिखाऊं चेह��ा इसका सबको नापसंद है ,
कुछ ने कहा जला के फेंक दे, ये तेरी तरक्की मैं रोडा है,
मैंने कहा नींद नहीं आती इसके बिना तो रात मैं ओढ़ लेता हूं
Kalam Ka Karigar
क्या कहें आज के हालात ठीक नहीं ,
वो दौर गुजर गया जब अखबारों में खबरें छपती थीं
लोग किनारा करके निकलते हैं अब बाजार में ,
अब नहीं है वो वक्त जब अंजानों से राम-राम मिलती थी
-Kalam Ka Karigar
Of All the People I've met
I've ignored mostly myself
Of all the people I've seen
I've not seen most of myself
Of all the people I've loved
I've not loved myself completely.
-Kalam ka karigar