हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“एक फ़ाहिशा औरत सिर्फ़ इस वजह से बख़्शी गई कि वो एक कुत्ते के क़रीब से गुज़र रही थी जो एक कूँए के क़रीब खड़ा प्यासा हाँप रहा था, ऐसा मालूम होता था कि वो प्यास की शिद्दत से अभी मर जाएगा, उस औरत ने अपना मोज़ा निकाला और उसमें अपना दुपट्टा बाँध कर पानी निकाला और इस कुत्ते को पिला दिया तो उसकी बख़्शिश उसी (नेकी) की वजह से हो गई”
(बुखारी 3321)
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“और ख़र्च भी करते है तो (खुदा के लिए नहीं बल्कि) लोगों को दिखाने को और ईमान ना ख़ुदा पर लाए औरना रोज़े आख़िरत पर (ऐसे लोगों का साथी शैतान है) और जिसका साथी शैतान हुआ तो (कुछ शक नहीं के) वह बुरा साथी है”
(सूरा निसा 38)
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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
“अल्लाह ने रहमत के सौ हिस्से बनाए, और अपने पास इन में से निन्नानवे हिस्से रखे सिर्फ़ एक हिस्सा जमीन पर उतारा और इसी की वजह से तुम देखते हो की मख़लूक़ एक दूसरे से मुहब्बत करती है…”
(बुख़ारी 6000)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“अगर किसी शख़्स के दरवाज़े पर नहर जारी हो और वह रोज़ाना इसमें पाँच पाँच दफ़ा नहाए तो तुम्हारा क्या गुमान है, क्या इसके बदन पर कुछ भी मेल बाक़ी रह सकता है, सहाबा ने अर्ज़ किया नहीं या अल्लाह के रसूल हरगिज़ नहीं, आप ﷺ ने फ़रमाया कि यही हाल पाँचो वक़्त की नमाजों का है, की अल्लाह पाक इनके ज़रिए गुनाहों को मिटा देता है”
(बुख़ारी 528)
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पूछा गया, कौनसी औरत बेहतर है ?
आप ﷺ ने फ़रमाया :-
“वह औरत की जब ख़ाविंद उसे देखे तो वह उसे ख़ुश कर दे, और जब उसे कोई हुक्म दे तो वह उसकी इताअत करे और अपने नफ़्स और माल मे उसकी मुख़ालिफ़त ना करे जिसे वह नापसंद करता हो”
(नसई 3233)
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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
“हम उस दिन पहले नमाज़ पढ़ेंगे फिर ख़ुतबा के बाद वापस होकर क़ुर्बानी करेंगे, जिसने इस तरह किया उसने हमारी सुन्नत पर अमल किया और जिसने नमाज़ से पहले क़ुर्बानी की तो इसका जिबाह का गोश्त जानवर है जिसे वह घर वालों के लिए लाया है, क़ुर्बानी से उसका कोई ताल्लुक़ नहीं”
(बुख़ारी 965)
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अल्लाह आपको ऐसे तरीकों से हैरान करेगा जिनकी आपने कभी उम्मीद भी नहीं की होगी। सब्र करना अभी शायद भारी लग रहा हो, लेकिन अल्लाह ने आपके लिए जो लिखा है, वह इंतज़ार के हर पल के लायक होगा। हर देरी में एक छिपी हुई रहमत होती है, और जल्द ही आप देखेंगे कि उस हस्ती ने, जो कभी कोई गलती नहीं
हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“अल्लाह की क़सम में नहीं जानता, अल्लाह की क़सम में नहीं जानता, जबकि में अल्लाह का रसूल भी हूँ, मेरे साथ और तुम्हारे साथ क्या सुलूक़ किया जाएगा”
(मिश्क़ात 5340)
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हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:-
"अल्लाह उस औरत पर निगाहे रहमत नहीं करता जो अपने शौहर की शुक्रगुज़ार नहीं है, क्यों की औरत का शौहर के बग़ैर गुजारा नहीं है"
(मुस्तद्रक 7335)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया:-
“देने वाला हाथ ऊँचा होता है और सबसे पहले तू उसे दे जिसकातु ज़िम्मेदार है अपनी माँ को दे, अपने बाप को दे, अपनी बहन को दे, अपने भाई को दे, फिर अपने क़रीबी रिश्तेदार को दे, फिर अपने पड़ौसी को दे”
(निसई 2533)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“सफ़र क्या है गोया अज़ाब का एक टुकड़ा है, आदमी की नींद खाने पीने सब में रुकावट पैदा करता है इसलिए जब मुसाफ़िर अपना काम पूरा कर ले तो उसे जल्दी घर वापिस आ जाना चाहिए”
(बुख़ारी 3001)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“जिसके पास (क़ुर्बानी करने की) गुंजाईश हो और वह क़ुर्बानी ना करे तो उसे चाहिए की हमारी ईदगाह के क़रीब भी ना आए”
(इब्ने माज़ा 3123)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“गाय का दूध पिया करो, इनका घी भी खाया करो और इसका गोश्त खाने से बचो, क्यों की इसका दूध और घी में शिफा है और इसका गोश्त में बीमारी है”
(मुस्तद्रक 8232)
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हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया :-
“जब जिलहिज़्ज़ा का चाँद शुरू हो जाए तो जो शख़्स क़ुर्बानी का ईरादा रखता हो तो वह अपने बाल या जिस्म का कोई और हिस्सा (मसलन नाख़ून वगेरह) ना काटे”
(नसई 4369)
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शहद में अगर सिरका मिल जाए तो उसकी मिठास खत्म हो जाती है। ठीक वैसे ही बदअख़लाक़ी इंसान के नेक आमाल को बर्बाद कर देती है।
अच्छे लफ़्ज़, नरम रवैया और पाक दिल यही असली मोमिन की पहचान है।
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आज एक पेड़ लगाओ हो सकता है कल उसी पेड़ का फल किसी भूखे इंसान या परिंदे के काम आ जाए।
नबी ﷺ ने बताया ऐसा हर फल तुम्हारे लिए सदक़ा बन जाता है। सोचो… एक छोटा सा पौधा भी क़यामत तक सवाब का ज़रिया बन सकता है।
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