@BajrangPunia कौन क्या मोड़ दे रहा है उसके लिए आपको अपील करने, सफाई देने, या बैकफुट पर आने की जरूरत नहीं है। आप अपने हक के लिए डटे रहें। हर संघर्ष के अपने दस्तूर होते हैं।
बाकी यहां कमेंट्स से समझ आ ही रहा है कि लोगों की सोच कैसी है।
जब सरकार ख़ुद आजतक किसान की फ़सल MSP पर नहीं बिकवा पाई तो वह अब किस आधार पर दावा कर रही है कि मुक्त बाज़ार नीति के तहत “आत्मनिर्भर भारत” में किसान की फ़सल “सोने के भाव” बिकवा देगी ? #किसान_विरोधी_अध्यादेश_वापस_लो
साहेब एक निजी निवेश की व्यवस्था संसद और बिधानसभाओं में भी कर दो ताकि किसान-मज़दूर ऐग्रिकल्चर फ़ंड स्कीम से क़र्ज़ा लेकर अपने लिए किसी सांसद व विधायक पर निवेश कर सकें । क्योंकि कहावत है , जिसका ‘धन उसकी धुन’ , फिर इस वर्ग की धुन बजाने वाला भी कोई हो जाएगा !
किसानों के हित में अपना जीवन समर्पित करने वाले सर छोटूराम जी को उनकी जयंती पर मेरा शत-शत नमन। वे एक धरतीपुत्र थे, जिन्होंने किसानों की उन्नति के लिए आधुनिक विचारों को प्राथमिकता दी। उन्होंने हमेशा शिक्षा और सेवा पर बल दिया, जो हम सबके लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
@anjanaomkshp ग़रीब जवान ??? ये कौन सा शब्द खोजा आपने जवान के लिए ? वैसे मरने वाला भी किसान कमेरे का बेटा और मारने वाला भी , और बीच में मौज के रहे दिल्ली में बैठे शहरी सफ़ेदपोश , दिल्ली में बैठे लोगों को इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता उलटा उनकी तो दुकान इसी से चलती है इसलिए इसका समाधान नहीं चाहते
ये हाल है हमारी मीडिया वालों का । वैसे अंजाना जी आजतक देश में जितने भी महाघोटाले हुए उनमें 99% हिंदू ही क्यों होते हैं ? और वो भी सिर्फ़ शहरी हिंदू गाँव देहात का किसान कमेरा नहीं ! उसकी बेचारे की अपने हक़ लिए पैरों की बिवाइ फटी पड़ी है । और तुमको हिंदू-मुस्लिम की पड़ी है !!! https://t.co/SXEcYaCoTZ
अमर शहीद राजा नाहर सिंह ,सेनापति गुलाब सिंह सैनी ,ख़ुशहाल सिंह ,भूरा सिंह के शहीदी दिवस व रहबर-ए-आज़म चौधरी छोटूराम की पुण्यतिथि 9 जनवरी को 2018 को सभा का आयोजन किया जाएगा । सभा का समय प्रातः 11 बजे ,स्थान - किसान भवन ,नज़दीक बस स्टैंड लोहारू , तहसील लोहारू ,ज़िला भिवानी हरियाणा
यूनियनिस्ट संदीप मोठसरा , गाँव रावलधि , ज़िला चरखी दादरी , हरियाणा निवासी की शादी का कार्ड । कार्ड पर जय यौद्धेय सैल्युटेशन के साथ किसानों के रहबर-ए-आज़म सर छोटूराम व शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह की तस्वीर ।
कहने को भारत देश एक कृषि प्रधान देश है पर इस देश के किसी भी चुनाव , चाहे 2014 लोकसभा चुनाव या फिर 2017 का गुजरात राज्य का चुनाव हो , इनके कारण उतार चढ़ाव सिर्फ़ शेयर बाज़ार में ही आता है ! किसान और किसान के बाज़ार बेज़ार ही रहते हैं ।
एक तरफ वो औरतें है जो कलाई पर लाखों रुपए कीमत के पर्स लटकाए घूमती, दूसरी तरफ देहात की ये औरतें है जो सारा दिन मिट्टी में मिट्टी हुए रहती है कि जितनी कीमत की ये शहरी औरतें बटुवे रखती उतनी कीमत के साल में दाने हो जाए तो ढंग की छाया बना लें या फिर बेटी का ब्याह ढंग के घर में हो जाए
सर छोटूराम ने कहा था कि संगठन बनाओ और प्रचार करो । संगठन कोई रहा नहीं इसलिए आज हमारे शहीद भी गुमनाम हो गए । जिनके संगठन रहे उनके काग़ज़ी भी क्रांतिकारी कहला गए । शहीदी दिवस पर अमर शहीद करतार सिंह सराभा (ग्रेवाल) को शत् शत् नमन
आख़िर यह लूट कब तक जारी रहेगी ? सच्चाई यह है कि गांधी हो या मोदी , किसान दर्द दोनों ही नहीं समझ सकते क्योंकि दोनों ही शहरी वर्ग से आते हैं । जिस तन बीते सो तन जाने । #unionistmission