धीरे-धीरे अब हर चीज़ से दिल भर सा गया है। ज़िंदगी बस कमाने और सबकी ज़रूरतें पूरी करने का नाम बनकर रह गई है। अपनी कोई ख़्वाहिश बाकी नहीं रही, बस दूसरों के लिए एक ज़िम्मेदारी निभती जा रही है। ⏳
dekho bhai tum or tumhare laude jaise aaka ka dimag hi ghutno me hai , har baar same log aate ho pradarsan karne bas naam alag hota hai ,or social media par content seeding karne se ghanta kuch nhi hoga... isiliye election me gand mara rhe ho 15 saal se
"IRCTC पर Tatkal टिकट बुक करना आम जनता के लिए किसी जंग से कम नहीं है! 11 बजते ही सर्वर हैंग, पेमेंट अटकना और 1 मिनट में 'Regret' दिखाना... क्या आम इंसान का खुद से कन्फर्म टिकट पाना पूरी तरह खत्म हो चुका है? दलालों और बॉट्स पर लगाम कब लगेगी? @RailMinIndia@IRCTCofficial#IRCTC
बचपन में मैं डोगा कॉमिक्स पढ़ा करता था, जिसमें डोगा कहता है कि मुझे दर्द महसूस नहीं होता क्योंकि मैंने दर्द वाली नस निकलवा दी है,,, मैंने नस नही��� निकलवाई है लेकिन मुझे वैसा ही महसूस होता है।
अक्सर हम दूसरों को सलाह देते हैं या उन्हें उन दुखों से बाहर निकलने में मदद करते हैं जिनसे हम खुद गुजर चुके हैं। हम दूसरों को "heal" करने के बहाने अपनी ही अनसुलझी भावनाओं को भरने की कोशिश कर रहे होते हैं। दूसरों की मदद करना हमारे अपने शोक को (process) करने का एक तरीका बन जाता है।