वन्दे वांछितलाभाय, चन्द्रार्द्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां, शैलपुत्री यशस्विनीम्॥
माँ शैलपुत्री, पर्वतराज हिमालय की पुत्री,
अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं।
चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏
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Day-1
🌸माँ शैलपुत्री🌸
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः
देवी दुर्गा का पहला स्वरूप शैलपुत्री है, शैल का अर्थ शिखर। शास्त्रों में शैलपुत्री को पर्वत (शिखर) की बेटी के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर यह समझा जाता है, कि देवी शैलपुत्री कैलाश पर्वत की पुत्री है। किन्तु इसका योग के मार्ग पर वास्तविक अर्थ है- "चेतना का सर्वोच्चतम स्थान"। यह बहुत दिलचस्प है, जब ऊर्जा अपने चरम स्तर है, तभी आप इसका अनुभव कर सकते है, इससे पहले कि यह अपने चरम स्तर पर न पहुँच जाए, तब तक आप इसे समझ नहीं सकते। क्योंकि चेतना की अवस्था का यह सर्वोत्तम स्थान है, जो ऊर्जा के शिखर से उत्पन्न हुआ है। यहाँ पर शिखर का मतलब है, हमारे गहरे अनुभव या गहन भावनाओं का सर्वोच्चतम स्थान।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥