जो पड़ोसी यह ज्ञान दे रहा है, उसके पैर में भी एक गोली की जरूरत है।
इन्हें moral policing का अधिकार किसने दिया?
वह कहाँ बैठेगी और कहाँ नहीं, यह तय करने वाले ये लोग कौन हैं? रात में कहीं बैठना कोई अपराध नहीं है, और न ही इसका मतलब यह है कि वहाँ कुछ गलत ही हो रहा था।
अगर इन्हें सच में लगा कि कुछ गैरकानूनी या गलत हो रहा है, तो पुलिस को बुलाते। कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार इन्हें किसने दिया?
मोदी जी, दिनकर जी को सिर्फ नमन करने से बात नहीं बनेगी, उनकी बातों को शासन में उतारना भी पड़ेगा।
कुछ पंक्तियाँ हैं आशा है इन पर भी अमल करेंगे।
शान्ति नहीं तब तक जब तक,
सुख भाग न नर का सम हो,
नहीं किसी को बहुत अधिक हो,
नहीं किसी को कम हो।
हक न्याययुक्त जो मांगते,
कोमल वचनों से झुककर,
तुम उन्हें समझते भीरु,
ओठ अपने दाँतों से दबाकर।
नमन तस्वीरों को नहीं, विचारों को चाहिए।
आप किसी एक वर्ग के प्रधानमंत्री नहीं, पूरे देश के प्रधानमंत्री हैं। और अगर सरकार की नीतियाँ केवल किसी एक वर्ग के लिए हैं, तो फिर सवाल उठेगा कि सवर्ण किसके भरोसे है ?
Youth के हाथ में ही देश सौंप देना चाहिए और इन सबको इस्तीफा दे देना चाहिए।
जब Viksit Bharat बनाने से लेकर हर जिम्मेदारी Youth को ही उठानी है, तो सरकार और नेताओं का काम क्या है? सिर्फ बड़ी बड़ी बातें फेंकना और दो कौड़ी की योजनाओं का ढोल पीटना?
शिक्षा और Research पर इनका बजट देख लो। ऊपर से नाकाबिल बच्चे को सीट मिल रही है और काबिल बच्चा बाहर बैठा है। ऐसे बनेगा Developed Nation ?
नेता सिर्फ सत्ता, सुविधाएँ और VIP life लेने के लिए बैठे हैं क्या?
Mediocre Government. Mediocre Leaders and Expectations World Class.
@BJP4India जातियों में बाँट-बाँटकर लोगों को आपस में भिड़ाते रहो। बस ये ये बीजेपी की नीति रह गई है।
जिस दिन यही खेल हाथ से निकल गया और लोग आपस में ही लड़ने लगे, उस दिन खेलते रहना अपने Defence Systems, Missiles और Nuclear Bombs से।
बाहर की सुरक्षा पूरी है, पर अंदर आग लगाने का काम जारी है।
पहले बाकायदा नाम लेकर आरोप ठोको।
फिर सामने वाला सबूत माँगे और केस करने की बात बोले तो तुरंत दुम दबाकर बोल दो मैंने तुम्हारा आधार कार्ड थोड़ी लगाया था, अजीत नाम के और भी लोग हैं।
और फिर उसी पलटी के बाद ऐसी अकड़ दिखाओ जैसे बहुत बड़ा मैदान मार लिया हो।
दम था तो आरोप पर कायम रहते।
इसको कहते है अपने ही थूके को चाटना और मूँछों पर ताव देना है।
घंटे का लीजेंड।
अनिल यादव जी, इसके लिए प्रमाण तैयार रखिएगा। संध्या 6 बजे तक पोस्ट डिलीट कर लेना, वरना कोर्ट में घसीटूँगा तो रोना मत।
मेरा सारे मित्रों से आग्रह है कि जो भी व्यक्ति ऐसा दावा ठोकता नजर आए जिसमें उन्होंने मूर्खतावश नाम और पैसा लेने की बात लिखित में कही है, स्क्रीनशॉट के साथ मुझे भेजते रहें। इन सबकी चिकित्सा हम करेंगे।
बाय द वे, @UPCMOffice आपने मुझे पैसा दिया और बताया तक नहीं। कृपया चेक संख्या या ट्रांजेक्शन ID बताएँ। यदि ऐसा नहीं है तो इन लोगों का ध्यान रखें। बाकी, @noidapolice देख ले।
जनता ने सड़क माँगी और कहा काम नहीं होगा तो वोट नहीं देंगे।
जवाब मिला - मेरे सामने ऐसी भाषा का प्रयोग दोबारा मत करना।
जनप्रतिनिधि से काम माँगना और वोट के जरिए जवाबदेही तय करना लोकतंत्र का सबसे सामान्य अधिकार है।
पर जनता को कहा पता था ये तो महान ज्योतिरादित्य सिन्धिया है। इनसे न जवाब मांगा जा सकता है और न ये जवाब देंगे।
जनता सवाल पूछेगी, काम का हिसाब भी माँगेगी और वोट किसे देना है या नहीं देना है यह भी जनता ही तय करेगी।
यहां जा रहा है दीदी।
मोदी जी के जन्मदिन पर देश में दीपोत्सव मनाया जा सकता है, टैक्स पेयर्स का करोड़ों रुपया यो ही बर्बाद किया जा सकता है
तो मैदान में ॐ नमः शिवाय से परेशानी क्यों ?
ये तो किसी का पैसा बर्बाद भी नहीं कर रहा। अपनी मेहनत का जश्न अपने धर्म के हिसाब से मना रहा है। खेल भी देश के लिए ही रहा है।
अब इस से किसी की भावना आहत हो तो मोदी जी इस पर भी कोई एक्ट ला सकते है मोदी एक्ट जैसा ही कुछ। सिर्फ मोदी जी की जी पूजा होगी, बाकी को जेल डाल दिया जाएगा।
सपनों का उत्तराखंड तो ब्रिटेन, दुबई या फ्रांस जैसा भी हो सकता है मुख्यमंत्री जी, लेकिन हकीकत का उत्तराखंड कैसा हो, मेरी कुछ छोटी-सी अपेक्षाएँ हैं।
1. हर गाँव के अस्पताल में डॉक्टर, दवाइयाँ और बेसिक सुविधाएँ हों।
2. नजदीकी शहर में ऐसा सरकारी अस्पताल हो कि हर मरीज को हल्द्वानी या देहरादून या दिल्ली रेफर न करना पड़े।
3. बड़े शहर आना भी पड़े तो इलाज के लिए निजी अस्पताल की मजबूरी न हो।
4. खस्ताहाल 108 एम्बुलेंस सेवा की बदहाली दूर हो। एम्बुलेंस समय पर पहुँचे, उनमें ऑक्सीजन और जरूरी जीवनरक्षक उपकरण हों तथा जरूरत के अनुसार वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस उपलब्ध हों।
5. गाँव के स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक हों और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो।
6. गरीब बच्चों को किताबें और जरूरी शिक्षण सामग्री मुफ्त मिले।
7. हर स्कूल में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और कंप्यूटर शिक्षक हो।
8. गाँव के नजदीक बैंक/ATM हो, छोटे से काम के लिए 20, 30 किमी न जाना पड़े।
9. गाँव-गाँव तक पक्की और अच्छी सड़क हो। सड़क निर्माण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो और भ्रष्टाचार पर रोक लगे, ताकि बनी हुई सड़क छह महीने में ही उखड़ने न लगे।
10. नियमित सार्वजनिक परिवहन, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा हो।
11. स्थानीय रोजगार के अवसर हों, ताकि पलायन मजबूरी न बने।
12. किसानों को बाजार और उनकी उपज का उचित दाम मिले।
13. बिजली, स्वच्छ पानी और जरूरी सरकारी सेवाएँ गाँव में आसानी से मिलें।
14. उत्तराखंड में भू-कानून सख्त हो। बाहरी लोगों द्वारा जमीन की अनियंत्रित खरीद पर प्रभावी नियंत्रण हो, ताकि स्थानीय लोगों की जमीन कौड़ियों के भाव न बिके और उत्तराखंड के पहाड़ों, गाँवों तथा उनके मूल स्वरूप को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जा सके।
मुख्यमंत्री जी, आप उत्तराखंड के लोगों को इतनी बुनियादी सुविधाएँ ही दे दीजिए। हम अपने उत्तराखंड को ही ब्रिटेन, फ्रांस और पेरिस मान लेंगे।
जिस तरह BJP मोदी जी को पेश कर रही है और उनके जन्मदिन पर दीपोत्सव जैसे आयोजन कर रही है, उससे बात दशरथ जी तक सीमित नहीं लगती। ऐसा लगता है जैसे उन्हें भगवान राम से भी ऊपर स्थापित करने की कोशिश हो रही है।
मुझे तो कभी-कभी लगता है कि मोदी जी भी अब इस महिमामंडन को सच मान बैठे हैं।
जिस रफ्तार से यह सब चल रहा है, कहीं ऐसा न हो कि BJP कार्यालयों में भगवान राम की जगह मोदी जी की ही पूजा शुरू हो जाए। दिवाली दशहरा में सब जगह बीजेपी अब भगवान मोदी जी की पूजा अर्चना करेगी।
@BJP4India@NitinNabin भाइयों, इनके झाँसे में नहीं आना है।
यूपी चुनाव तक ये सभी भगवा वस्त्रों में ही नज़र आएँगे और खुद को हिंदुत्व के सबसे बड़े रक्षक के रूप में पेश करेंगे।