Bollywood Bimbo strikes again.
Twinkle Khanna @mrsfunnybones says Mughals invented Kofta, Korma and Kabab so we have no right to eat them.
Someone tell this 20 IQ Moron. Koftas and Kormas are ancient Persian dishes that existed BEFORE Islam.
Mughals were beggars who lived in tents before coming to India.
Vast majority of Chagatai Turks/Mughals used to eat insects and locusts in their native homeland before coming to India.
Adding my support here to GC and the other former international captains. I hope the court ordered medical assessment be allowed to run its course, and that family visits continue. I hope Imran Khan is treated with the dignity anyone deserves
मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर���ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
दूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
Respecting a festival isn’t about restriction, it’s about understanding its ethos.
For Eid, for instance, I wouldn’t dress the way I do on a regular holiday. What I wear is my choice but choosing to dress in tune with the occasion reflects awareness, not compromise. That’s where personal freedom meets maturity.
कौन-सा संघर्ष रहा रामविलास पासवान जी का? यही न कि कैसे UPA में भी मंत्री बनें और कैसे NDA का भी हिस्सा बन जाएँ?
पासवान और चमार, बिहार का सबसे अधिक SC आरक्षण पाते रहे हैं। आप स्वयं अपना विकास आरक्षित सीट से कर रहे हैं। आपने मुसहर, डोम, चंडाल, भुइयाँ के कितने नेताओं को आगे ब��़ाया है?
मैं भी बिहार से हूँ। हाँफ-हाँफ कर मोदी जी का नाम लेने से कुछ नहीं होता।
बकवास बंद कीजिए और महादलितों का हक दीजिए। अब बहुत हो गया। पर आपका सही है, सत्ता बदलेगी फिर भी आप मंत्री बन ही जाओगे! आपको कुछ भी कहना बेकार ही है।
@SauravDassss तुम चूतिए इसी कारण तीन बार लॉ में फेल हुए हो। तुम्हें लॉ की झाँट समझ नहीं है। और चिकने लूडो, तू तो डिफेंड कर रहा था पीएम की माँ को गाली देना। तू कैसे मॉरल हाय ग्राउंड ले रहा बे लौड़े?
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
���ख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
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मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ��े उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्��� वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अव���न्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए ��ोते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
आज मुझे गर्व हो रहा है कि मैंने बहुत सही व्यक्ति के मार्गदर्शन में अपनी पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की, ईश्वर आपको और संबल प्रदान करें @ajeetbharti सर!
सत्ता किसी भी रही हो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। व्यवस्था-सुधार ��र युग की आवश्यकता है। अबकी जंतर-मंतर पर जो भीड़ जुटी है वो व्यवस्था में सुधार के लिए ही जुटी है। जब सत्ताधीश न सुनें तो अन्याय को रोकने के लिए सड़क ही अंतिम रास्ता बच जाता है। जब तुष्टिकरण की आँधी में किसी समूह को पीड़ा पहुँचाई जा रही हो तो उससे क्या करने की अपेक्षा रखते हैं आप?
अत्याचार हुआ होगा, सामाजिक भेदभाव हुआ होगा, पानी पीने को दिक्कतें हुई होंगी। सबकुछ मान लेते हैं। लेकिन, मौजूदा पीढ़ी का इससे क्या लेना-देना है जो अच्छे अंक लाने के बावजूद उन्हें सही शिक्षण संस्थान नहीं मिलते, नौकरियों में जगह नहीं मिलती। किसी मासूम बच्चे का क्या दोष है? जब वो देखता होगा कि उससे कम मेहनत करने वाले साथी उससे कम अंक लाकर भी व्यवस्था द्वारा आगे बढ़ा दिए जा रहे हैं, तो उसके दिमाग पर क्या ��सर पड़ता होगा? उसे कौन जाकर समझाएगा कि हजार साल पूर्व तुम्हारे पूर्वज पर ऐसा-ऐसा करने का आरोप है जिसकी सज़ा तुम्हें भुगतनी होगी।
अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए साहस चाहिए होता है, अजीत भारती सर ने उस साहस का प्रदर्शन किया है।
#WATCH | Delhi: On the Jantar Mantar protest against caste-based reservation, YouTuber Ajeet Bharti says, "Our biggest demand is that the government should come up with a white paper stating that the reservations you've given to people for 80 years... I come from Bihar. Research how dire the situation of the Musahar community is. Their children aren't getting reservations. Why? Because those caste groups don't even have leaders... The second demand is quota within quota, on which the government has also said that we will not implement the creamy layer in it. Why will you not implement it? It is so absurd that the government is bowing down to those few Dalit leaders who only talk about their caste group... The third demand is minimum marks. You cannot sell the dream of a developed India by compromising on merit. If 50% of the deserving youth or boys and girls who are studying will not get admission in the IITs, IIMs, or higher education, your efficiency has reduced by 50% right there... Then the Economically Weaker Section (EWS) should be made a part of the Scheduled Castes (SC). The class whose definition says economically weaker, you are neither giving them a facility in buying the form, nor are you waiving their hostel fee, nor is their course fee being waived; what will you achieve by merely recognising it?... At least indicate that we are going to have a sit-down talk about this..."
शहज़ाद पूनावाला ने कहा है कि उनके बीजेपी से अलग होने के आर्थिक कारण है। जिस मकान में वो रहते हैं, उसका उनको किराया देना होता है और वे दे नहीं पा रहे थे। इसलिए उन्हें अपने जीवकोपार्जन के लिए पार्टी से अलग होना पड़ा।
यह कितनी विचित्र बात है कि भारत की सबसे अमीर पार्टी का प्रवक्ता उससे अलग इसलिए हो जाता है क्योंकि उसे मकान का किराया भी देना है। हालाँकि यह अनेक कारणों में से एक कारण हो सकता है किंतु यह बहुत आश्चर्यजनक कारण है।
क्या पार्टी प्रवक्ताओं को आर्थिक सहयोग नहीं देती?
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