"राम मंदिर बनने से देश को आज़ादी मिली' – मोहन भागवत
फिर धरती आबा बिरसा मुंडा महज 25 साल की उम्र में अंग्रेजों से लड़कर शहीद क्यों हुए?
संघ के गद्दार मानसिकता लोग हमारे संघर्ष और इतिहास के साथ खिलवाड़ करना बंद करें !
आज़ादी का मतलब है बाबा साहेब का संविधान।
लेकिन RSS के लिए संविधान मनुस्मृति है, इसलिए समय- समय पर संविधान की समीक्षा की बात करते है।
सावरकर के हिसाब से ये देश मनुस्मृति से चलनी चाहिए।
गोलवलकर के बंच ऑफ़ थॉट्स को कोई भूल सकता है क्या, जिसमें वो साफ़ बोलते हैं की इस संविधान में हमारा कुछ नहीं है।
RSS के पूर्व प्रमुख केएस सुदर्शन ने कई बार कहा की हम भारत के संविधान को स्वीकार नहीं करते, इसकी समीक्षा होनी चाहिए।
अटल जी का संविधान विरोधी ट्रेनिंग तो ऐसा हुआ की संविधान समीक्षा आयोग ही बना डाला।
मोहन भागवत् 2015 में आरक्षण की समीक्षा करने की बात बोले।
अब फिर आज़ादी की लड़ाई के योद्धाओं और वीरांगनाओं का अपमान किए। 1947 को नकारना माने हमारे देश के शहीदों को नकारना।
भागवत का बयान देशद्रोह है। देशद्रोह की सज़ा जेल है। इनलोगों ने 52 साल 🇮🇳नहीं फहराया।
अगर आप चाहते हैं उमर खालिद जेल से बाहर आए तो लिखो RT करो कॉपी पेस्ट करो #ReleaseUmarKhalid लिखते रहें जब तक रिहाई नहीं होती है आप को ही आवाज उठाना है तो लिखो RT करें #ReleaseUmarKhalid
यह तो राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का अपमान किया है
इसीलिए तो अब जनता को भरोसा नहीं है EVM और चुनाव आयोग पर
पहली मशीन खुलते ही राजीव कुमार पकड़े गए!
4 लाख 25 हजार लेने के बाद ड्रामा करने लगे।
राजीव कुमार Exposed हो गए !
बेईमानी की भी हद होती है
अब तो साफ लगता है
राजीव कुमार चुनाव आयुक्त नहीं बल्कि चुनाव आयोग को बीजेपी की चुनावी एजेंसी बनाने वाला बीजेपी की एक इकाई ही है..
मोक के लिए लगभग सवा चार लाख रुपए थोड़े ही ना जमा करवाए गए थे मशीन के डाटा मिलान के लिए ख़र्चा किया था। सच है सवाल है मशीन का रिजल्ट क्या है और यह वीवीपेट का रिजल्ट क्या है। वोट कितने पड़े, मशीन और वीवीपेट में क्या स्थिति है। ये करना था।
11 साल पहले जिस इंसान के पास देश की हर समस्या का इलाज था वही देश के लिए एक समस्या बन चुका है
Dollar हुआ 86 पार देश हुआ बेहाल! Bachchan, Shilpa, Anupam क्यों हुए Troll!
गिरते रूपए के लिए सबसे पहले चूनाव आयोग, भाजपा, ईवीएम, अंधभक्त, और अंधी जनता जवाबदेही है गोदी मीडिया भी इसमें मिली हुई है
एक आदमी ने देश का
बेडा गर्क कर दिया और कुछ अंधों को अभी भी लगता है सब ठीक है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर की यह बीएडधारी योग्य आदिवासी शिक्षिका अपने मासूम बच्चे के साथ सर्द रात में सड़क पर आंदोलन कर रही है। 33,000 शिक्षकों के पद खाली, लेकिन बीजेपी सरकार ने 3,000 शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया। यह वीडियो दिल्ली के हर मतदाता तक पहुँचना चाहिए ताकि BJP से सावधान रहे।
◾ मोदी सर, अब रूपये के साथ किसकी 'आबरू' गिर रही है?
🔹 अमिताभ बच्चन 2014 के बाद रुपए की 'स्पैलिंग' भूल गए।
🔹 जूही चावला अब याद नहीं दिलातीं कि उनके 'अंडरवियर' का नाम डॉलर है।
🔹 चेतन भगत को अब 86 रुपए से ज्यादा का डॉलर 'तबाही' नहीं लगता।
🔹 अनुपम खेर,शिल्पा शेट्टी,विवेक अग्निहोत्री 'रुपए' का नाम लेने से डरते हैं।
नोट: वीडियो कुछ दिन पहले का है जब डॉलर 84 रुपए का हुआ था।
#RupeeVsDollar
#Dollar
#RupeeAtRecordLow
#Rupee
इस बच्ची का चेहरा देखिए, इसकी मासूमियत देखिए।
सिर्फ 13 साल की नाबालिग उम्र में इसे नागा साधुओं के हाथों बेच दिया गया! वही साधु जो भांग और गांजे के नशे में डूबे रहते हैं।
सोचिए, इस बच्ची के साथ क्या हो रहा होगा?
क्या इसे सुरक्षित माहौल मिलेगा?
क्या इसकी गरिमा और बचपन की रक्षा हो पाएगी?
या फिर इसे शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार बनना पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश पुलिस (UPPolice) इस मामले में क्यों सो रही है?
क्यों कोई कार्रवाई नहीं हो रही?
क्यों एक मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ पर आंखें मूंद ली गई हैं?
यह सिर्फ एक बच्ची की बात नहीं है, बल्कि हमारे समाज और प्रशासन की संवेदनहीनता का उदाहरण है। यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह बच्ची अपनी मासूमियत के साथ अपना भविष्य भी खो देगी।
समाज और प्रशासन से अपील है कि इस मामले पर तुरंत संज्ञान लें और इस बच्ची को न्याय और सुरक्षा प्रदान करें।
Published IMR and U5MR substantially different from the estimated life table IMR using MORTPAK and ASDR published by the ORGI. Similar discrepancies are observed in the U5MR.
The SRS Data on Early Childhood Mortality in India https://t.co/tCLXRoq3kx