मेरा दर्द, मेरा ही रहा, हर चोट को चुपचाप मैंने सहा। लोगों ने मुस्कान पढ़ ली मेरी, पर आँखों में छुपा समंदर न देखा। अब आदत सी हो गई है मुझे— टूटकर भी ख़ामोश रहने की।
हमने अश्कों को भी हँसकर छुपा लिया।अब हाल ये है कि तन्हाई भी कहती है—तू टूटकर भी कितना ख़ामोश रही।
#दिलसे#मेरादर्द
@Jasvind18446528 कुछ लोग आँसुओं से भी मोहब्बत लिख जाते हैं…
और कुछ ख़ामोशियाँ पूरी किताब बन जाती हैं 🪻💙
बशीर बद्र साहब उन्हीं लोगों में थे,
जिनकी ख़ामोशियाँ भी ग़ज़ल लगती हैं।
जिस कागज़ पर अश्क गिरें,
वो सिर्फ़ खत नहीं रहता—
वो दिल का आख़िरी इक़रार बन जाता है 🪻💙
@Jasvind18446528 कुछ अफ़साने सच में गीत नहीं होते,
बस दिल के अधूरे हिस्से होते हैं…
जिन्हें लोग महफ़िलों में सुन लेते हैं,
मगर उनका दर्द सिर्फ़ तन्हाइयाँ समझती हैं। 💕
@Jasvind18446528 कुछ दर्द ऐसे होते हैं जनाब,
जो महफ़िलों में गुनगुनाए तो जाते हैं,
मगर असल में उन्हें सिर्फ़ तन्हाइयाँ समझती हैं।
हँसते हुए लफ़्ज़ों के पीछे,
अक्सर रोती हुई रूह छुपी होती है।
@Jasvind18446528 हम भी गुज़रे हैं उन रातों से,
जहाँ साँसें चलती थीं मगर दिल हार जाता था।
फिर वक़्त ने सिखाया मुस्कुराना और संभलना।
ये सब्र, ये बदलाव यूँ ही नहीं आया जनाब,
इसके पीछे कई खामोश दर्द दफ़्न हैं।
@Jasvind18446528 ये सब्र यूँ ही चेहरे पर नहीं उतरा,हमने भी दर्द को चुपचाप जिया है।कई रातें थीं,जहाँ नींद से ज़्यादा आँसू जागते थे और खामोशी दिल से लिपट कर रोती थी।
हम भी टूटे थे भीतर से,इतना कि अपनी ही साँसों की आवाज़ डराने लगी थी। मगर वक्त ने सिखा दिया हर बिखराव के बाद इंसान पहले जैसा नहीं रहता
@Jasvind18446528 और शायद यही दर्द इंसान को बदल देता है... जो कभी छोटी बातों पर टूट जाता था, वो अब खामोशी से हर तूफ़ान सहना सीख जाता है। कुछ ज़ख्म दिखते नहीं, मगर वही इंसान को सबसे मज़बूत बना देते हैं। आपकी ये मुस्कुराहट भी यूँ ही नहीं आई, इसके पीछे अनगिनत टूटी हुई रातों का सब्र छुपा है।
@Jasvind18446528 कुछ लोग यूँ ही नहीं आते राहों में,
वे अतीत के पन्ने नहीं पलटते—
बस थाम लेते हैं हाथ चुपचाप,
और सिखाते हैं फिर से चलना।
उनकी आहट में छुपा होता है एक वादा,
कि अब जो लिखा जाएगा,
वो पहले से कहीं ज़्यादा ख़ूबसूरत होगा।
@Jasvind18446528 लबों तक आया सच, मैंने #ख़ामोशी में छुपा लिया,
कुछ जज़्बात बयान नहीं, बस दिल में बसा लिया।
ये हार नहीं थी, रिश्तों का एहतराम था,
मैंने खुद को खोकर भी, अपनों को बचा लिया।
@Jasvind18446528 बेहद मार्मिक और याद रह जाने वाली रचना ♥️
वो अब तस्वीरों में नहीं,
हर साँस की ख़ामोशी में बसती है,
मोहब्बत अब दुआ बनकर रह गई है।
रंग आज भी वही हैं,पर कैनवास थोड़ा उदास है—
क्योंकि जिसे सजाता था,वो अब मेरे पास नहीं है।
मगर सच ये है,
वो गई नहीं…हर धड़कन में चुपचाप मुस्कुराती है।
@Jasvind18446528 दिल में जो दर्द है, उसे लफ़्ज़ों में नहीं बाँधती,
अब हर एहसास यूँ ही किसी पर नहीं लुटाती।
हर ज़ख्म को दिल में इज़हार बनाकर रखती हूँ,
ख़ामोशी में भी एक तूफ़ान रखती हूँ।
जो सच में अपना होगा, वो ठहर जाएगा—
अब बाकी सबको वक्त के हवाले करती हूँ… 🔥❤️
@Jasvind18446528 महफ़िलों में अब सन्नाटा साथ चलता है,
तेरी यादों का साया हर रात मुझसे मिलता है।
इंतज़ार की दीवारें थककर गिरती नहीं,
दिल हर सुबह तुझको ही ढूंढता है।
शायद लौट आओगे किसी मोड़ पर कभी…
तन्हाई आदत बन चुकी है
यादें… दिल की धड़कन।
इंतज़ार में बैठा दिल थक चुका है
उम्मीद की लौ बुझी नहीं
@Jasvind18446528 दिल हमेशा हिसाब नहीं मानता।वो थोड़ा ज़्यादा दे बैठता हैऔर फिर उसी ज़्यादती में टूट जाता है।
कभी किसी के लिए सब कुछ होते हो,और वही “सब कुछ”एक दिन सिर्फ याद बनकर रह जाता है। सबसे भारी बात ये नहीं कि लोग बदल जाते हैं, बल्कि ये है कि हम उन्हें वैसा ही मानते रहते हैं जैसे वो कभी थे।
@Jasvind18446528 भुला देने वालों में से हम नहीं,
वक्त चाहे कितना भी बदल जाए,
यादों को सौदा नहीं बनाते।
जो दिल में बस जाए, उसे यूँ ही
भीड़ में खो जाने नहीं देते—
हम वो हैं जो महसूस करते हैं,
और महसूस कराके निभाते हैं।
@Jasvind18446528 भुला देने की आदत दुनिया की पुरानी है, पर दिल हर याद को अपनी निशानी मानता है। आईना नहीं बदलता, बस चेहरों पर वक्त की परछाई बदल जाती है। जो कभी अपना था, वो आज अजनबी सा लगता है, मगर एहसास अब भी वहीं ठहरा रहता है। ख़ामोशी सब कुछ कह जाती है। बस यूँ ही। खामोश।