बिहार में चुनाव आयोग का फर्जीवाड़ा 👇
जगिया देवी की पिछले साल मृत्यु हो गई, लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें 'जिंदा' कर वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया।
SIR के बाद कई केस सामने आ रहे हैं, जहां मर चुके लोगों को वोटर लिस्ट में डाल दिया गया है।
BJP और चुनाव आयोग इसी तरह वोट चुरा रहे हैं।
चार दिन पहले तक राहुल गांधी जी से एफिडेविट मांगा जा रहा था, अब दो पूर्व इलेक्शन कमिश्नर आजतक पर कह गए कि इसकी ज़रूरत ही नहीं है। आज सवाल यह है कि SIR में सब कुछ ठीक है? सुप्रीम कोर्ट में वो लोग भी पहुंच गए हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने 'मृत' घोषित किया था! गजबे है!
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ साहब
जब तक कठपुतली थे तब तक संसद में थे
जब उपराष्ट्रपति बनने गए तो लापता हो गए
तो राधाकृष्णन जी
आप उपराष्ट्रपति बनने जा रहे है
या भाजपा के कठपुतली!!!
अनुराग गोली मारो ठाकुर के बाद अब रीवा से BJP MP जनार्दन मिश्रा जी राहुल गांधी जी की बात का समर्थन कर रहे हैं
उन्होंने वोटर लिस्ट में धांधली का ज़िक्र करके एक कमरे में 1000-1100 वोटों की बात का खुलासा किया है
धन्यवाद मिश्रा जी!
ज्ञानेश जी इनसे हलफनामा मांगने की हिम्मत है?
24 घंटे पहले तक ज्ञानेश कुमार गुप्ता को लग रहा था कि उन्होने विपक्ष की चूड़ी कस दी है। राहुल गांधी को डरा दिया है।
लेकिन दांव उल्टा पड़ गया।
विपक्ष अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी में है।और चुनाव आयोग में घबराहट है।
शायद गुप्ताजी मिजाज नहीं समझ पाये गांधी का !
ECI राहुल गांधी का जवाब देने आई थी, लेकिन खुद ही एक्सपोज़ हो गई 🔥
इस Thread🧵 ट्वीट को पढ़ो💣🔥 और रीट्वीट करो💣💣
इसको मैंने Expose कर दिया है देखो और मजे लो
वोटिंग की खबरों के साथ जब ऐसी तस्वीरें छापना प्राइवेसी का हनन नहीं है तो सीसीटीवी में अलग क्या दिख जाएगा जो छिपाया जा रहा है?
बहाने छोड़िए ज्ञानेश कुमार जी, आप फँस गए हैं।
[सभी तस्वीरें गूगल से]
चुनाव आयोग बहुत बुरी तरह फंस गया है, जानिए कैसे 👇
• चुनाव आयोग अब खुद कह रहा है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ी है। इसका मतलब है कि आज से कुछ महीने पहले चुनाव आयोग झूठ बोल रहा था, क्योंकि तब वह कह रहा था कि वोटर लिस्ट में कोई गड़बड़ नहीं है।
• नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी ने जब इन गड़बड़ियों को उजागर किया तो चुनाव आयोग हलफनामा मांग रहा था। इसपर हम कहना चाहते हैं कि पहले चुनाव आयोग को अपना कागज़ दिखाना चाहिए।
• SIR में भारी पैमाने पर धांधली हो रही है। सारे BLO घर-घर जाकर फॉर्म नहीं भरवा रहे। कई बूथ पर जिंदा लोगों का नाम काट दिया गया और मरे हुए लोगों को लिस्ट में शामिल कर दिया गया।
• पार्टियों को जो डिलीशन लिस्ट सौंपी गई, उसमें सिर्फ नाम थे, EPIC नंबर नहीं था। जब ये बात सुप्रीम कोर्ट को बताई गई, तब कोर्ट ने आदेश दिया कि चुनाव आयोग को लोगों को इस बारे में बताना होगा।
इतना ही नहीं- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आधार कार्ड को अधिकारियों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया और आवासीय प्रमाण पत्र मांगे जा रहे थे। यानी कि कागज के नाम पर वोटर को परेशान किया गया।
: @nsui इंचार्ज @kanhaiyakumar जी
📍 बिहार
भाजपा प्रवक्ता की बदतमीज़ी पर आप चटकारे मत लीजिए अमीश देवगन !!!
वो राहुल जी के लिए अपशब्द कह रहे हैं- आप खुश हो रहे हैं और दोहरा रहे हैं ???
पत्रकार होने का ढोंग तो कर लीजिए !!!
अब मैं ‘Snoopgate का बादशाह’ और ‘तड़ीपार’ कहूँगी तो आप को बुरा लग जाएगा !!!