किस बात के अच्छे दिन जब,
1- शेयर मार्केट पाताल लोक में चला गया
2- एशियन गेम्स में 10 वें नंबर पर हैं हम
3- मंहगाई चरम पर है
4-भ्रष्टाचार अपने उच्च स्तर पर है
5- सड़के चांद के सतह जैसी हो गई हैं
6- विधायकों की गुंडागर्दी आसमान छू रही है
7- पेट्रोल डीजल मंहगा हुआ पड़ा है
8- रुपया धरातल में चला गया है
9- अमेरिका हमको पेले पड़ा है
10- चीन हमसे 100 साल आगे चल रहा है
11- 5 किलो राशन के बदले 900 की गैस मिल रही है
12- व्यापारी लोग माल स्टोर करके मंहगी होने पर जनता को बेचते हों
13- गांवों में अस्पताल नहीं है
14- गाँव में स्कूल नहीं है
15- प्राइवेट स्कूल खून पी रहे हैं
16- प्राइवेट अस्पताल में 400 की दवा 4000 में मिल रही है
17- सरकारी एम्बुलेंस दलाली में मिलती है।
2014 में जिस उम्मीद से लोगों ने चुनाव किया था, उसमें पूरी तरह से फेल हुए हैं।
कटिहार डिविजन की स्थापना 15 जनवरी 1958 में हुई 68 साल हो गए।
पहली रेललाइन मनिहारी - कटिहार - कसबा 1 अप्रैल 1887 को शुरू हुई जो 1909 में जोगबनी तक बनी।
वर्तमान में सबसे उपेक्षित कटिहार – जोगबनी और कटिहार – मनिहारी सेक्शन ही है 139 साल में मनिहारी से आगे साहिबगंज तक न रेल पुल स्वीकृत हुआ न जोगबनी स्टेशन पर वाशिंग पिट बना।
लंबी दूरी की 1 ट्रेन दिल्ली के लिए सीमांचल और कोलकाता के लिए त्रि साप्ताहिक एक्सप्रेस दोनों ट्रेन @laluprasadrjd जी ने चलवाया वहीं अररिया - गलगलिया लाइन बनने के बाद मात्र 1 ट्रेन कटिहार - सिलीगुड़ी इंटरसिटी के रूप में मिली। अमृत भारत योजना में पूर्णिया जंक्शन, फारबिसगंज, जोगबनी को शामिल नहीं किया गया।
जलालगढ़ - किशनगंज परियोजना में 2016- 17 में मिले 100 करोड़ की राशि असम की रेल परियोजना में ट्रांसफर कर दी गई और बची राशि वापस कर दी गई।
इस क्षेत्र के ज्यादातर प्लेटफार्म निम्न और माध्यम स्तर के हैं कुछ अब हाइ लेवल बन रहे।
अभी हमें RTI से जानकारी मिली है 2023 से 3 ट्रेन आम्रपाली, पटना इंटरसिटी, कटिहार टाटा के जोगबनी विस्तार का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड में लंबित है। जो ठंडे बस्ते में है।
वहीं विधानसभा चुनाव के समय इरोड के लिए रोजाना चलने वाली ट्रेन को घोषणा कर मजदूरों वाली भारत दर्शन अमृत भारत साप्ताहिक थमा दिया गया। अब कोई और ट्रेन प्रस्तावित नहीं।
बिहार को ध्यान में रखकर @ECRlyHJP की स्थापना हुई क्या मनिहारी - जोगबनी सेक्शन को @GM_ECRly के अधीन नहीं कर देना चाहिए था ?
इतने दिनों में निश्चित कायाकल्प हो जाता।
गुवाहाटी से संचालित @RailNf से बिहार के क्षेत्र का 139 साल में कितना विकास हुआ ये ध्यान देने योग्य है।
वर्तमान में रानीपतरा, पूर्णिया जंक्शन, जलालगढ़, अररिया, बथनाहा जैसे रैक प्वाइंट से सालाना 400 करोड़ से अधिक की कमाई हो रही है फिर भी यह क्षेत्र भारी उपेक्षा का शिकार है। NFR का ध्यान केवल उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर तक सीमित है।
पूर्णिया और अररिया सहित मधेपुरा और सुपौल जिले के लोग भी इससे प्रभावित हैं।
सीधा सवाल यह है कि बिहार के हितों की बलि चढ़ा कर की गई फरक्का जल संधि कब हुई थी? उस समय बिहार के मुख्यमंत्री कौन थे और केंद्र में किसकी सरकार थी? उस समय संधि को क्यों नहीं रोका गया?
पूर्व मुख्यमंत्री @NitishKumar जी तो शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान हो रहा है।
अब जबकि दिसंबर 1996 में हुई जल संधि की 30 वर्षों की समय सीमा दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, हमारी पार्टी @Jduonline ने केंद्र सरकार से अपील की है कि यह संधि बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए, और राज्य की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। मैंने राज्यसभा में भी विशेष उल्लेख के तहत यही मांग रखी है।
#FarakkaWaterTreaty #FarakkaTreaty #WaterTreaty
आज मुझे गर्व हो रहा है कि मैंने बहुत सही व्यक्ति के मार्गदर्शन में अपनी पत्रकारिता के करियर की शुरुआत की, ईश्वर आपको और संबल प्रदान करें @ajeetbharti सर!
सत्ता किसी भी रही हो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। व्यवस्था-सुधार हर युग की आवश्यकता है। अबकी जंतर-मंतर पर जो भीड़ जुटी है वो व्यवस्था में सुधार के लिए ही जुटी है। जब सत्ताधीश न सुनें तो अन्याय को रोकने के लिए सड़क ही अंतिम रास्ता बच जाता है। जब तुष्टिकरण की आँधी में किसी समूह को पीड़ा पहुँचाई जा रही हो तो उससे क्या करने की अपेक्षा रखते हैं आप?
अत्याचार हुआ होगा, सामाजिक भेदभाव हुआ होगा, पानी पीने को दिक्कतें हुई होंगी। सबकुछ मान लेते हैं। लेकिन, मौजूदा पीढ़ी का इससे क्या लेना-देना है जो अच्छे अंक लाने के बावजूद उन्हें सही शिक्षण संस्थान नहीं मिलते, नौकरियों में जगह नहीं मिलती। किसी मासूम बच्चे का क्या दोष है? जब वो देखता होगा कि उससे कम मेहनत करने वाले साथी उससे कम अंक लाकर भी व्यवस्था द्वारा आगे बढ़ा दिए जा रहे हैं, तो उसके दिमाग पर क्या असर पड़ता होगा? उसे कौन जाकर समझाएगा कि हजार साल पूर्व तुम्हारे पूर्वज पर ऐसा-ऐसा करने का आरोप है जिसकी सज़ा तुम्हें भुगतनी होगी।
अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के लिए साहस चाहिए होता है, अजीत भारती सर ने उस साहस का प्रदर्शन किया है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
🔰 केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है?
➤ केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी और सिंचाई की समस्या को कम करने के लिए बनाई जा रही एक बड़ी जल परियोजना है। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए है। इस परियोजना में केन नदी का पानी बेतवा नदी के क्षेत्र में पहुंचाने की योजना है। इसके लिए दौधन बांध, लिंक नहर और अन्य जरूरी निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
KBLP, राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत नदियों को जोड़ने वाली पहली प्राथमिकता वाली परियोजना है, जो निर्माण के चरण में पहुंची है।
🔰 परियोजना में क्या-क्या बनाया जाएगा?
➤ परियोजना में मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिलों में केन नदी पर 96.7 मीटर ऊंचा दौधन बांध बनाया जा रहा है। यह बांध खजुराहो से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। दौधन बांध से 216.465 किलोमीटर लंबी केन-बेतवा लिंक नहर निकलेगी, जो झांसी के पास बरुआ सागर में मिलेगी। परियोजना में लोअर ऑर्र परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना भी शामिल हैं।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मौजूदा नहरों को बेहतर बनाने, तालाबों और वियर्स की मरम्मत, नए बैराज बनाने तथा सिंचाई और पेयजल से जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित करने का भी प्रावधान है।
🔰 परियोजना की कुल लागत कितनी है?
➤ परियोजना की कुल लागत ₹44,605 करोड़ है।
🔰इस परियोजना की जरूरत क्यों है?
➤ बुंदेलखंड में लंबे समय से पानी की कमी, कम और अनियमित वर्षा, सिंचाई की सीमित सुविधा और कई क्षेत्रों में भूजल की कमी जैसी समस्याएं रही हैं। इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई और पेयजल के लिए अधिक भरोसेमंद जल उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही परियोजना से बिजली का उत्पादन और क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
इसलिए KBLP केवल सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड की जल सुरक्षा और विकास से जुड़ी बड़ी परियोजना है।
केन–बेतवा लिंक परियोजना के बारे में और जानना चाहते हैं?
परियोजना से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) पढ़ेंः
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@DoWRRDGR_MoJS #KenBetwaLinkProject
#Bihar
1. अगर आप बिहार से हैं , मेरी तरह आप भी बिहारी हैं , बिहार को बेहतर देखना चाहते हैं । तो प्रधानमंत्री की सलाहकार शमिका रवि को इस वीडियो में सुनिए । बिहार कैसे पिछड़ा और कैसे सुधरेगा? शमिका बता रही हैं @ShamikaRavi जटिल बात को आसान भाषा में समझाती हैं
@ajeetbharti हमेशा से UGC और आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर बेबाकी और निष्पक्षता से अपनी बात रखते आए हैं। 🔥
आज सोशल मीडिया की बहस से निकलकर खुद जंतर-मंतर पहुंचे हैं। उन्होंने भी इस मुद्दे की चिंगारी जलाने में अपनी भूमिका निभाई थी और आज युवाओं के बीच खड़े होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं।
मुद्दा बड़ा है, इसलिए आवाज भी खुलकर उठनी चाहिए।
बिहार और झारखंड की स्थिति में अधिक अंतर नहीं। बिहार तो परीक्षाएँ विलम्ब से कराने में अग्रणी रहा है। बिहार के प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को मेरा समर्थन। मैं आप सबके साथ हूँ। इसे बिना राजनैतिक व्यक्तियों को मंच दिए, अपना प्रदर्शन बनाइए।
भारत को बड़ा दिल दिखाने की ग़ज़ब बीमारी है।
अपने कलेजे पर चोट पहुंचा कर दूसरों को ख़ुश कर बड़ा दिल दिखाने का जज़्बा।
पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते में ऐसा ही हुआ था।
और बांग्लादेश के साथ फ़रक्का जल संधि में भी।
1996 में तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने 'गुजराल डॉक्ट्रिन' के तहत 'बड़ा दिल' दिखाते हुए बांग्लादेश के साथ फरक्का जल संधि की।
इसमें पड़ोसी देशों को एकतरफा रियायत दी गई।
आज जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दैनिक जागरण में लेख में कहा कि इसमें बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी गई।
उस समय बिहार में लालू यादव के नेतृत्व वाली सरकार भी इस पर मौन रही।
संधि के अनुसार फरक्का बैराज पर शुष्क मौसम में निर्धारित जलप्रवाह बनाए रखने का 73% बोझ अकेले बिहार को उठाना पड़ता है।
जबकि गंगा का 75% जलग्रहण क्षेत्र अपस्ट्रीम राज्यों में है।
1975 में बैराज चालू होने के बाद गाद जमा होने से नदी उथली हो गई है।
जिससे बिहार को मानसून में भीषण बाढ़ और शुष्क मौसम में पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ती है।
गाद और बहाव रुकने से गांगेय डॉल्फिन सहित स्थानीय जलीय जीवों पर संकट मंडरा रहा है।
भूजल स्तर गिरने और आर्सेनिक-फ्लोराइड के बढ़ते स्तर से पेयजल एवं कृषि पर गहरा असर पड़ा है।
दिसंबर 2026 में संधि की 30 वर्ष की अवधि समाप्त हो रही है।
बिहार सरकार ने 2050 तक की आवश्यकताओं का वैज्ञानिक आकलन कर 2,000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की मांग की थी, लेकिन केवल 900 क्यूसेक का प्रावधान किया गया।
संजय झा के अनुसार, बिहार के विकास और जल-सुरक्षा के लिए 2050 तक की मांगों का वैज्ञानिक आकलन कर एक नई न्यायसंगत व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
@SanjayJhaBihar@JagranNews
महाराज, मैप में छोटा सा अंश NFR का बिहार में पड़ता है,कारण बिहार का यह क्षेत्र हमेशा से उपेक्षित रहा है? क्या इसे ECR में शामिल होना चाहिए? कमेंट में बताएं और अगर इन क्षेत्रों को ECR में शामिल करने की मांग जायज है तो अपना समर्थन दें और रेलमंत्री के समक्ष X के माध्यम से मांग करें?
𝐆𝐨𝐯𝐞𝐫𝐧𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐚𝐧𝐧𝐨𝐮𝐧𝐜𝐞𝐬 𝐭𝐡𝐞 𝐍𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧𝐚𝐥 𝐒𝐩𝐨𝐫𝐭𝐬 𝐀𝐰𝐚𝐫𝐝𝐬 𝟐𝟎𝟐𝟓.
Badminton stars Treesa Jolly and Pullela Gayatri Gopichand, along with 15 other sportspersons from various disciplines, will receive the Arjuna Award for outstanding performance in sports and games.
Veteran footballer Isaiah Arumainayagam will receive the Arjuna Award (Lifetime). Athletics coach Parveer Singh, boxing coach Chhote Lal Yadav and shooting coach Neha Nandkumar Chavan will be honoured with the Dronacharya Award.
Army Paralympic Node, Pune will receive the Rashtriya Khel Protsahan Puruskar for its contribution to sports promotion and development.
#NationalSportsAwards #ArjunaAward #DronacharyaAward #TreesaJolly #GayatriGopichand
Dimagi Naxal = Naxalandu
आज से 10 साल पहले जब इन्हें लिबरल बनने का कीड़ा काटने लगा था तब लिबरांडू शब्द हमने इन्हें दिया था..अब वक़्त आ गया है कि इन्हें "नक्सलांडू" शब्द से सुशोभित किया जाये 😌🫶🏻❤️
The Real Balochistan
बलोचिस्तान में ॐ नमः शिवाय🙏
यह बलोच लड़की बलोचिस्तान की आजादी के लिए महादेव और हिंगलाज माता से पुकार कर रही है । 4 मिनिट के इस गीत के शब्द तो आपके पल्ले नहीं पड़ेंगे लेकिन आनन्द आ जाएगा सुनकर , ये पक्का है।