चांदपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: बिना मुकदमा संख्या का नोटिस देकर युवक को किया गया प्रताड़ित।
चांदपुर (बिजनौर):
थाना चांदपुर पुलिस द्वारा पीड़ित योगिंदर सिंह, पिता छत्तर सिंह, ग्राम रुखनपुर, पोस्ट बाहमनशोरा, तहसील चांदपुर, थाना चांदपुर, जिला बिजनौर, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। पीड़ित युवक ने पुलिस प्रशासन पर जबरन परेशान करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उनसे नाम, पता और पिता का नाम (छतर सिंह) पूछकर फॉर्म में भर लिया और हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी 'मुकदमा अपराध संख्या' और 'धारा' का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, BNSS की धारा 35(3) (जो पूर्व में CrPC की धारा 41A थी) के तहत नोटिस तभी जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई विशिष्ट प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो। नोटिस में मुकदमा संख्या, धारा, और उपस्थिति का समय व स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। पीड़ित का कहना है कि बिना एफआईआर संख्या दर्ज किए नोटिस देना और हस्ताक्षर कराना उन्हें गैर-कानूनी तरीके से फंसाने या प्रताड़ित करने की साजिश है।
पीड़ित के लिए इंसाफ के कानूनी मार्ग
यदि किसी व्यक्ति को बिना एफआईआर नंबर के इस प्रकार का अधूरा नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो कानून में इसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत: पीड़ित तत्काल इस पूरे मामले और हस्ताक्षरित नोटिस की प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर और पुलिस महानिरीक्षक (IG/DIG) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें कि बिना मुकदमा संख्या के जबरन हस्ताक्षर कराए गए हैं।
जनसुनवाई पोर्टल (IGRS): उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की जा सकती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क: यदि पुलिस द्वारा बिना किसी वैध अपराध संख्या के अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर से मुफ्त कानूनी मदद ली जा सकती है।
उच्च न्यायालय का रुख: यदि पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारी या प्रताड़ना की आशंका हो, तो पीड़ित अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर राहत और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बिना किसी दर्ज मुकदमे या बिना एफआईआर विवरण के जारी किया गया नोटिस प्रक्रियात्मक त्रुटि का स्पष्ट मामला है और कानून के समक्ष यह मान्य नहीं है, जिसकी गहनता से जांच कर पीड़ित को इंसाफ मिल सके। @dgpup@Uppolice@CBIHeadquarters@acbimeerut@bijnorpolice@UPGovt@myogiadityanath@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia पीड़ित का संपर्क नं: +919927232882
चांदपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: बिना मुकदमा संख्या का नोटिस देकर युवक को किया गया प्रताड़ित।
चांदपुर (बिजनौर):
थाना चांदपुर पुलिस द्वारा पीड़ित योगिंदर सिंह, पिता छत्तर सिंह, ग्राम रुखनपुर, पोस्ट बाहमनशोरा, तहसील चांदपुर, थाना चांदपुर, जिला बिजनौर, को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करने के मामले में गंभीर अनियमितता सामने आई है। पीड़ित युवक ने पुलिस प्रशासन पर जबरन परेशान करने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने उनसे नाम, पता और पिता का नाम (छतर सिंह) पूछकर फॉर्म में भर लिया और हस्ताक्षर करा लिए, लेकिन नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी 'मुकदमा अपराध संख्या' और 'धारा' का कॉलम पूरी तरह खाली छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, BNSS की धारा 35(3) (जो पूर्व में CrPC की धारा 41A थी) के तहत नोटिस तभी जारी किया जाता है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई विशिष्ट प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो। नोटिस में मुकदमा संख्या, धारा, और उपस्थिति का समय व स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना अनिवार्य है। पीड़ित का कहना है कि बिना एफआईआर संख्या दर्ज किए नोटिस देना और हस्ताक्षर कराना उन्हें गैर-कानूनी तरीके से फंसाने या प्रताड़ित करने की साजिश है।
पीड़ित के लिए इंसाफ के कानूनी मार्ग
यदि किसी व्यक्ति को बिना एफआईआर नंबर के इस प्रकार का अधूरा नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, तो कानून में इसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत: पीड़ित तत्काल इस पूरे मामले और हस्ताक्षरित नोटिस की प्रति के साथ पुलिस अधीक्षक (SP) बिजनौर और पुलिस महानिरीक्षक (IG/DIG) को लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें स्पष्ट उल्लेख करें कि बिना मुकदमा संख्या के जबरन हस्ताक्षर कराए गए हैं।
जनसुनवाई पोर्टल (IGRS): उत्तर प्रदेश सरकार के आईजीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की जा सकती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क: यदि पुलिस द्वारा बिना किसी वैध अपराध संख्या के अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) बिजनौर से मुफ्त कानूनी मदद ली जा सकती है।
उच्च न्यायालय का रुख: यदि पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारी या प्रताड़ना की आशंका हो, तो पीड़ित अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर राहत और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकते हैं।
बिना किसी दर्ज मुकदमे या बिना एफआईआर विवरण के जारी किया गया नोटिस प्रक्रियात्मक त्रुटि का स्पष्ट मामला है और कानून के समक्ष यह मान्य नहीं है, जिसकी गहनता से जांच कर पीड़ित को इंसाफ मिल सके। @dgpup@Uppolice@CBIHeadquarters@acbimeerut@bijnorpolice@UPGovt@myogiadityanath@ChiefSecyUP@CMOfficeUP@HMOIndia@PMOIndia पीड़ित का संपर्क नं: +919927232882
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजे की बिक्री: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
(पूर्वी दिल्ली: राजधानी के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चित्रा विहार रेड लाइट के पास अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़क पर बनी झुग्गियों के सामने सरेआम अवैध गांजे की बिक्री की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध नशीले कारोबार की कमान रईस नामक व्यक्ति के हाथों में है।
कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क किनारे बिना किसी खौफ के हो रही तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों का निकलना भी दूभर हो गया है।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना, फिर भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अध्यक्ष को फोन पर इस अवैध धंधे की विस्तृत सूचना दे दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पूर्व में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य सड़क पर बेखौफ जारी नशीले पदार्थों का यह कारोबार न केवल स्थानीय पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।
नाबालिगों के भविष्य पर मंडराता खतरा
अपराध में नाबालिग बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नशीले पदार्थों के कारोबारी बच्चों को कम उम्र में ही इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह तबाह हो रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) से मांग की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। चित्रा विहार रेड लाइट के पास विशेष अभियान चलाकर मुख्य आरोपी रईस समेत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल हो सके। @DCPEastDelhi@ShoPreet@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@CrimeBranchDP@CPDelhi@JointCP_ER@LtGovDelhi@DelhiPolice@DelhiGovDigital@dgovcbic
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजे की बिक्री: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
(पूर्वी दिल्ली: राजधानी के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत आने वाले चित्रा विहार रेड लाइट के पास अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्य सड़क पर बनी झुग्गियों के सामने सरेआम अवैध गांजे की बिक्री की जा रही है, जिससे पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवैध नशीले कारोबार की कमान रईस नामक व्यक्ति के हाथों में है।
कारोबार का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिग बच्चों और महिलाओं को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क किनारे बिना किसी खौफ के हो रही तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है, बल्कि मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों, महिलाओं और स्थानीय निवासियों का निकलना भी दूभर हो गया है।
थाना अध्यक्ष को दी गई सूचना, फिर भी ठोस कार्रवाई का इंतजार
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना अध्यक्ष को फोन पर इस अवैध धंधे की विस्तृत सूचना दे दी गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पूर्व में भी इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने और शिकायतें दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य सड़क पर बेखौफ जारी नशीले पदार्थों का यह कारोबार न केवल स्थानीय पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर सवालिया निशान खड़ा करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर किसकी शह पर यह अवैध गतिविधि फल-फूल रही है।
नाबालिगों के भविष्य पर मंडराता खतरा
अपराध में नाबालिग बच्चों और महिलाओं का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। नशीले पदार्थों के कारोबारी बच्चों को कम उम्र में ही इस दलदल में धकेल रहे हैं, जिससे उनका भविष्य पूरी तरह तबाह हो रहा है।
क्षेत्रीय निवासियों ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) से मांग की है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए। चित्रा विहार रेड लाइट के पास विशेष अभियान चलाकर मुख्य आरोपी रईस समेत इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए, ताकि इलाके में शांति और सुरक्षा का माहौल बहाल हो सके। @DCPEastDelhi@ShoPreet@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@CrimeBranchDP@CPDelhi@JointCP_ER@LtGovDelhi@DelhiPolice@DelhiGovDigital@dgovcbic
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
चित्रा विहार रेड लाइट के पास खुलेआम गांजा बिक्री: स्थानीय पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल।
पूर्वी दिल्ली के थाना प्रीत विहार क्षेत्र अंतर्गत चित्रा विहार रेड लाइट के पास बनी झुग्गियों के सामने ऑन-रोड अवैध नशीले पदार्थों (गांजे) की बिक्री का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, रईस नामक एक व्यक्ति इस अवैध कारोबार की बागडोर संभाल रहा है और वह इस काम में नाबालिग बच्चों तथा महिलाओं का ढाल बना उन्हें इस्तेमाल कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पुलिस और कानून की कार्रवाई से बचने के लिए आरोपी द्वारा बच्चों और महिलाओं को आगे किया जाता है। सड़क किनारे सरेआम हो रही इस तस्करी के कारण न केवल क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है, बल्कि आसपास के मुख्य मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों में भी असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि यह अवैध व्यापार स्थानीय पुलिस की कथित शह या अनदेखी के कारण लगातार फल-फूल रहा है। ऐसे में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या स्थानीय बीट ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध है? बीट पुलिसकर्मी का मुख्य काम अपने क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखना होता है। ऐसे में ऑन-रोड चल रहे इस कारोबार की जानकारी बीट ऑफिसर को न होना कई संदेह पैदा करता है।
क्या थाना अध्यक्ष इस गतिविधि से बेखबर हैं? यदि चित्रा विहार जैसे मुख्य रेड लाइट इलाके पर अवैध नशीले पदार्थ बिक रहे हैं, तो सवाल यह भी है कि क्या यह जानकारी थाना अध्यक्ष तक नहीं पहुंची, या फिर मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और समाजसेवियों ने इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों, विशेषकर संबंधित डीसीपी (East District) से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त कर मुख्य आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और संबंधित बीट कर्मियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए ताकि क्षेत्र को नशे के इस जाल से मुक्त कराया जा सके। @DCP_SHAHDARA@ADCP1Shahdara@ShahdaraAddlDCP@ACPPuneet@ShoPreet@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@CBIHeadquarters@DelhiGovDigital
उत्तर दिल्ली में पुलिस चौकी के पास बेखौफ सट्टेबाजी: प्रशासन की मिलीभगत या अपराधियों के बुलंद हौसले?
नई दिल्ली:
राजधानी में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराध मुक्त दिल्ली के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर दिल्ली के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन के अंतर्गत आने वाली मजनू का टीला पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध सट्टेबाजी और जुए का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
पुलिस चौकी के पास बेखौफ गोरखधंधा
बताया जा रहा है कि अरुणा नगर (मजनू का टीला) स्थित मनोज मेडिकोज के पास वाली गली के एक मकान में सन्नी, सुमित और चेतू नामक व्यक्तियों द्वारा चिड़िया-कबूतर, तितली-कबूतर और मटका जैसे अवैध जुए व सट्टे का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, करन प्रधान के पास भी कुछ ही दूरी पर इसी प्रकार के जुए का अवैध कारोबार सक्रिय है।
SHO की गश्त के बावजूद बेधड़क कारोबार
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ समय-समय पर इलाके में गश्त करते रहते हैं। इसके बावजूद पुलिस की नाक के नीचे बिना किसी डर के यह अवैध धंधा चल रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर स्थानीय पुलिस की सह पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था को सख्त करने और अपराधियों पर लगाम कसने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा यह सट्टेबाजी का खेल न केवल स्थानीय प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे इलाके में अन्य आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर यह मामला भी महज फाइलों में सिमट कर रह जाएगा। @DcpNorthDelhi@shocivillines@ACPCivillines@CrimeBranchDP@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@dgovcbic@HMOIndia@CMODelhi
उत्तर दिल्ली में पुलिस चौकी के पास बेखौफ सट्टेबाजी: प्रशासन की मिलीभगत या अपराधियों के बुलंद हौसले?
नई दिल्ली:
राजधानी में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और अपराध मुक्त दिल्ली के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर दिल्ली के थाना सिविल लाइन क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन के अंतर्गत आने वाली मजनू का टीला पुलिस चौकी से महज कुछ ही दूरी पर खुलेआम अवैध सट्टेबाजी और जुए का काला कारोबार फल-फूल रहा है।
पुलिस चौकी के पास बेखौफ गोरखधंधा
बताया जा रहा है कि अरुणा नगर (मजनू का टीला) स्थित मनोज मेडिकोज के पास वाली गली के एक मकान में सन्नी, सुमित और चेतू नामक व्यक्तियों द्वारा चिड़िया-कबूतर, तितली-कबूतर और मटका जैसे अवैध जुए व सट्टे का धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। इसके अलावा, करन प्रधान के पास भी कुछ ही दूरी पर इसी प्रकार के जुए का अवैध कारोबार सक्रिय है।
SHO की गश्त के बावजूद बेधड़क कारोबार
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि जिस इलाके में यह अवैध गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वहां क्षेत्र के थाना प्रभारी (SHO) अपने अधीनस्थ स्टाफ के साथ समय-समय पर इलाके में गश्त करते रहते हैं। इसके बावजूद पुलिस की नाक के नीचे बिना किसी डर के यह अवैध धंधा चल रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों के बीच यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या यह पुलिस प्रशासन की घोर लापरवाही है या फिर स्थानीय पुलिस की सह पर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
एक तरफ जहां दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री कानून-व्यवस्था को सख्त करने और अपराधियों पर लगाम कसने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर चल रहा यह सट्टेबाजी का खेल न केवल स्थानीय प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
यदि समय रहते इस अवैध कारोबार और अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे इलाके में अन्य आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना यह होगा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी और शीर्ष प्रशासन इस पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं, या फिर यह मामला भी महज फाइलों में सिमट कर रह जाएगा। @DcpNorthDelhi@shocivillines@ACPCivillines@CrimeBranchDP@DelhiPolice@CPDelhi@LtGovDelhi@dgovcbic@HMOIndia@CMODelhi
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी क्षेत्र के भीतर आटोक्लेव यूनिट निर्माण पर चिकित्सकों का विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
पूर्वी दिल्ली स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (दिलशाद गार्डन) के ओपीडी परिसर में आटोक्लेव यूनिट के निर्माण को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। अत्यधिक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र में उच्च तापमान तथा भाप के दबाव पर काम करने वाली इस नसबंदी (स्टरलाइजेशन) प्रणाली की स्थापना से जन-सुरक्षा और संक्रमण नियंत्रण के मानकों पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
भीड़भाड़ वाले ओपीडी क्षेत्र में निर्माण कार्य
अस्पताल की दूसरी मंजिल पर ओपीडी क्लिनिक तथा पंजीकरण काउंटर स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और उनके संबंधी पहुँचते हैं। वर्तमान में दो पंजीकरण काउंटरों को स्थानांतरित करके एक नई दीवार का निर्माण किया जा रहा है, ताकि इस बंद कमरे में आटोक्लेव यूनिट स्थापित की जा सके। चिकित्सकों का तर्क है कि मुख्य आवाजाही वाले मार्ग में इस प्रकार की इकाई की स्थापना किसी दुर्घटना अथवा संक्रमण के प्रसार का कारण बन सकती है।
शल्य चिकित्सा (सर्जिकल) विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि स्थापित स्वास्थ्य मानकों के अनुसार आटोक्लेव यूनिट को सामान्य जन-आवाजाही से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर बनाया जाना चाहिए।
इस नए निर्माण के विषय में शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों से कोई सुझाव या सहमति नहीं ली गई।
जानकारी के अनुसार, यह निर्माण कार्य अस्पताल प्रशासन (चिकित्सा अधीक्षक, उप चिकित्सा अधीक्षक तथा विभागाध्यक्ष) के स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
विभागाध्यक्ष (डॉ. जगमोहन) के निष्कासन और तत्पश्चात पुनर्नियुक्ति को लेकर अस्पताल परिसर में पहले से ही विभिन्न चर्चाएँ चल रही हैं। इस प्रशासनिक उठापटक के बीच ओपीडी क्षेत्र में जोखिम भरे निर्माण कार्य शुरू कराए जाने पर चिकित्सकों ने असंतोष जताया है। समाचार पत्रों में इस विषय पर खबरें प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण कार्य जारी है।
चर्चा में मामले पर अस्पताल प्रबंधक सुनीता का कहना है कि इस नई इकाई से आम जनता अथवा मरीजों को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं होगा। एक अन्य प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, पंजीकरण काउंटर केवल दोपहर तक संचालित होते हैं और आटोक्लेव यूनिट को काउंटर बंद होने के पश्चात ही चलाया जाएगा।
इसके विपरीत, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल के मुख्य ओपीडी ढांचे में ऐसा फेरबदल संक्रमण नियंत्रण के स्वीकृत मापदंडों के विपरीत है। @MCD_Delhi@AdditionalMcd@MoHFW_INDIA@DCP_SHAHDARA@HelthMinistry@LtGovDelhi@DelhiGovDigital@DPCC_Pollution संबंधित अधिकारी हेतु मामले की जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
नंदनगरी डी-ब्लॉक में नियमों की धज्जियां: बेखौफ चल रहा अवैध शराब का कारोबार, पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले के थाना नंदनगरी क्षेत्र अंतर्गत डी-ब्लॉक (जिसे स्थानीय स्तर पर 'स्कूल ब्लॉक' भी कहा जाता है) में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां खुलेआम और बेखौफ तरीके से घरों से शराब परोसी जा रही है। इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'सुनीता' नामक महिला द्वारा संचालित किए जाने की खबर है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार को इलाके के बीट ऑफिसर अशोक का संरक्षण (छत्रछाया) प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारा अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और लापरवाह बीट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, नंदनगरी के इस इलाके में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई घरों को मिनी शराब ठेके में तब्दील कर दिया गया है।
स्कूल ब्लॉक में मंडराता खतरा, निवासियों में रोष
जिस क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसे 'स्कूल ब्लॉक' के नाम से जाना जाता है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि आला अधिकारियों के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर पर बीट पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि समाचार संज्ञान में आने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं और आरोपी बीट स्टाफ व अवैध कारोबार चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है। @DCPNEastDelhi@NNagri60662@shonandnagrined@DelhiPolice@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@LtGovDelhi@dgovcbic@DelhiGovDigital
नंदनगरी डी-ब्लॉक में नियमों की धज्जियां: बेखौफ चल रहा अवैध शराब का कारोबार, पुलिस प्रशासन के दावों पर उठे सवाल।
नई दिल्ली: राजधानी के उत्तर-पूर्वी जिले के थाना नंदनगरी क्षेत्र अंतर्गत डी-ब्लॉक (जिसे स्थानीय स्तर पर 'स्कूल ब्लॉक' भी कहा जाता है) में अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यहां खुलेआम और बेखौफ तरीके से घरों से शराब परोसी जा रही है। इस पूरे अवैध नेटवर्क को 'सुनीता' नामक महिला द्वारा संचालित किए जाने की खबर है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार को इलाके के बीट ऑफिसर अशोक का संरक्षण (छत्रछाया) प्राप्त है, जिसके चलते शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि हाल ही में जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) द्वारा अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने और लापरवाह बीट अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद, नंदनगरी के इस इलाके में कानून का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है और कई घरों को मिनी शराब ठेके में तब्दील कर दिया गया है।
स्कूल ब्लॉक में मंडराता खतरा, निवासियों में रोष
जिस क्षेत्र में यह अवैध कारोबार चल रहा है, उसे 'स्कूल ब्लॉक' के नाम से जाना जाता है। रोजाना स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनती जा रही है। असामाजिक तत्वों के जमावड़े के कारण क्षेत्र का माहौल लगातार खराब हो रहा है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि आला अधिकारियों के सख्त रुख के बावजूद निचले स्तर पर बीट पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नहीं ले रहा। अब देखना यह होगा कि समाचार संज्ञान में आने के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारी इस मामले पर क्या कड़ा संज्ञान लेते हैं और आरोपी बीट स्टाफ व अवैध कारोबार चलाने वालों पर क्या कार्रवाई की जाती है। @DCPNEastDelhi@NNagri60662@shonandnagrined@DelhiPolice@CPDelhi@CrimeBranchDP@DelhiZone_NCB@LtGovDelhi@dgovcbic@DelhiGovDigital
जहांगीरपुरी में मंदिर के सामने कबाड़ माफियाओं का दबदबा, नशे का कारोबार और अवैध कब्जे से स्थानीय निवासी परेशान।
दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में स्थित एक मंदिर के ठीक सामने कबाड़ माफियाओं द्वारा सरेआम नशे का बाजार सजाया जा रहा है। इतना ही नहीं, मुख्य सड़क पर भी कबाड़ माफियाओं और असामाजिक तत्वों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिससे आम जनता और श्रद्धालुओं का निकलना मुश्किल हो गया है।
धार्मिक स्थल के सामने पनप रही हैं अवैध गतिविधियां।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मंदिर में रोज सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं। लेकिन मंदिर के ठीक सामने दिन-रात कबाड़ का अवैध कारोबार, नशे की खरीद-फरोख्त और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इस कारण खासकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
अवैध कब्जे से ट्रैफिक की समस्या
कबाड़ माफियाओं ने मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा जमा रखा है। जगह-जगह कबाड़ के ढेर और बड़े वाहनों के खड़े रहने से सड़क बेहद संकरी हो गई है। इसके चलते इलाके में हर समय भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा अवैध साम्राज्य स्थानीय पुलिस और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों की कथित छत्रछाया में फल-फूल रहा है। निवासियों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शासन-प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण कबाड़ माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने उपराज्यपाल (LG), दिल्ली पुलिस आयुक्त और MCD के उच्च अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। निवासियों की मांग है कि मंदिर के सामने से तुरंत अवैध कबाड़ के कब्जों को हटाया जाए।
इलाके में पनप रहे नशे के कारोबार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। कबाड़ माफियाओं को शह देने वाले लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
यदि प्रशासन ने समय रहते इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थानीय निवासियों में बढ़ता आक्रोश कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। @DCP_NorthWest@CPDelhi@DelhiPolice@CrimeBranchDP@MCD_Delhi@vksaxena21@dgovcbic@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@SHOJahangirPuri@LtGovDelhi@DelhiGovDigital संबंधित अधिकारी हेतु मामले की गहनता से जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
जहांगीरपुरी में मंदिर के सामने कबाड़ माफियाओं का दबदबा, नशे का कारोबार और अवैध कब्जे से स्थानीय निवासी परेशान।
दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में स्थित एक मंदिर के ठीक सामने कबाड़ माफियाओं द्वारा सरेआम नशे का बाजार सजाया जा रहा है। इतना ही नहीं, मुख्य सड़क पर भी कबाड़ माफियाओं और असामाजिक तत्वों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिससे आम जनता और श्रद्धालुओं का निकलना मुश्किल हो गया है।
धार्मिक स्थल के सामने पनप रही हैं अवैध गतिविधियां।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मंदिर में रोज सैकड़ों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं। लेकिन मंदिर के ठीक सामने दिन-रात कबाड़ का अवैध कारोबार, नशे की खरीद-फरोख्त और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इस कारण खासकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
अवैध कब्जे से ट्रैफिक की समस्या
कबाड़ माफियाओं ने मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा जमा रखा है। जगह-जगह कबाड़ के ढेर और बड़े वाहनों के खड़े रहने से सड़क बेहद संकरी हो गई है। इसके चलते इलाके में हर समय भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है।
सूत्रों की मानें तो यह पूरा अवैध साम्राज्य स्थानीय पुलिस और दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों की कथित छत्रछाया में फल-फूल रहा है। निवासियों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतों के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शासन-प्रशासन की इस रहस्यमयी चुप्पी के कारण कबाड़ माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेआम कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मांग
क्षेत्रीय लोगों ने उपराज्यपाल (LG), दिल्ली पुलिस आयुक्त और MCD के उच्च अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। निवासियों की मांग है कि मंदिर के सामने से तुरंत अवैध कबाड़ के कब्जों को हटाया जाए।
इलाके में पनप रहे नशे के कारोबार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। कबाड़ माफियाओं को शह देने वाले लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
यदि प्रशासन ने समय रहते इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थानीय निवासियों में बढ़ता आक्रोश कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। @DCP_NorthWest@CPDelhi@DelhiPolice@CrimeBranchDP@MCD_Delhi@vksaxena21@dgovcbic@DelhiZone_NCB@narcoticsbureau@SHOJahangirPuri@LtGovDelhi@DelhiGovDigital संबंधित अधिकारी हेतु मामले की गहनता से जांच कर कार्यवाही के संदर्भ में।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी से सुधरी यातायात व्यवस्था, जौहरीपुर व नाला रोड पर लगने वाले जाम से मिली राहत।
दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में यातायात को सुगम बनाने और नागरिकों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस टीम द्वारा किया जा रहा कार्य लगातार सरहाया जा रहा है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर (TI) प्रेम सिंह के कुशल नेतृत्व में जौहरीपुर, नाला रोड तथा आसपास के व्यस्त इलाकों में पुलिस टीम की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और समाधान
जैसे ही किसी क्षेत्र से ट्रैफिक जाम या अव्यवस्था की सूचना सामने आती है, खजूरी सर्कल की टीम बिना किसी देरी के तत्काल मौके पर पहुंचती है। पुलिसकर्मी स्थिति को संभालते हुए समस्या का त्वरित और स्थायी समाधान सुनिश्चित करते हैं, जिससे वाहन चालकों को घंटों जाम में नहीं फंसना पड़ता।
चालकों को नियमों के प्रति किया जा रहा जागरूक
खजूरी सर्कल टीम की कार्यशैली में केवल यातायात नियंत्रण ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता भी प्रमुखता से शामिल है। टीम द्वारा समय-समय पर वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका सीधा सकारात्मक असर सड़कों पर देखने को मिल रहा है—स्थानीय निवासी और चालक न केवल नियमों का महत्व समझ रहे हैं, बल्कि उनका मुस्तैदी से पालन भी कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना
क्षेत्रीय निवासियों ने ट्रैफिक पुलिस प्रशासन की इस तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और उचित मार्गदर्शन से न केवल आम जनता के समय की बचत हो रही है, बल्कि क्षेत्र में सड़क हादसों की संभावना भी काफी हद तक कम हुई है। @dtptraffic@DelhiTrafficPol@TIKhajuriKhas
उत्तर-पूर्वी दिल्ली: खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी से सुधरी यातायात व्यवस्था, जौहरीपुर व नाला रोड पर लगने वाले जाम से मिली राहत।
दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में यातायात को सुगम बनाने और नागरिकों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से खजूरी सर्कल ट्रैफिक पुलिस टीम द्वारा किया जा रहा कार्य लगातार सरहाया जा रहा है। ट्रैफिक इंस्पेक्टर (TI) प्रेम सिंह के कुशल नेतृत्व में जौहरीपुर, नाला रोड तथा आसपास के व्यस्त इलाकों में पुलिस टीम की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बेहद सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और समाधान
जैसे ही किसी क्षेत्र से ट्रैफिक जाम या अव्यवस्था की सूचना सामने आती है, खजूरी सर्कल की टीम बिना किसी देरी के तत्काल मौके पर पहुंचती है। पुलिसकर्मी स्थिति को संभालते हुए समस्या का त्वरित और स्थायी समाधान सुनिश्चित करते हैं, जिससे वाहन चालकों को घंटों जाम में नहीं फंसना पड़ता।
चालकों को नियमों के प्रति किया जा रहा जागरूक
खजूरी सर्कल टीम की कार्यशैली में केवल यातायात नियंत्रण ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता भी प्रमुखता से शामिल है। टीम द्वारा समय-समय पर वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका सीधा सकारात्मक असर सड़कों पर देखने को मिल रहा है—स्थानीय निवासी और चालक न केवल नियमों का महत्व समझ रहे हैं, बल्कि उनका मुस्तैदी से पालन भी कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना
क्षेत्रीय निवासियों ने ट्रैफिक पुलिस प्रशासन की इस तत्परता और कर्तव्यनिष्ठा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और उचित मार्गदर्शन से न केवल आम जनता के समय की बचत हो रही है, बल्कि क्षेत्र में सड़क हादसों की संभावना भी काफी हद तक कम हुई है। @dtptraffic@DelhiTrafficPol@TIKhajuriKhas
गोकलपुर-नाला रोड पर अवैध पार्किंग और गैरेज व्यवसाय से यातायात ठप, प्रशासन मौन।
गोकलपुर (दिल्ली)
गोकलपुर से नाला रोड (जौहरीपुर मार्ग) पर बड़े वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर मरम्मत (रिपेयरिंग) करने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सड़क किनारे गाड़ियों के जमावड़े और खुलेआम चल रहे अवैध गैरेज व्यवसाय के कारण इस पूरे मार्ग पर दिन-रात यातायात बाधित रहता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर वाहन (छोटा हाथी बोलेरो, कार और कमर्शियल गाड़ियां) खड़े रहते हैं। सड़क पर ही गाड़ियों की रिपेयरिंग, वेल्डिंग और कटाई-छंटाई का काम किया जाता है। संकरी सड़क पर इन वाहनों के अवैध कब्जे के कारण आए दिन घंटों लंबा जाम लगा रहता है, जिससे स्कूली बसों, एम्बुलेंस और राहगीरों का निकलना दूभर हो गया है।
पुलिस व ट्रैफिक पुलिस की साठगांठ की आशंका
सूत्रों की मानें तो यह अवैध कारोबार स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की कथित 'छत्रछाया' में फल-फूल रहा है। यही वजह है कि बीच सड़क पर खुलेआम नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और संबंधित तंत्र आंखें मूंदे बैठा है।
शिकायतों के बावजूद ढाक के वही तीन पात
क्षेत्रीय निवासियों का आरोप है कि इस संबंध में पूर्व में भी नगर निगम (MCD) अधिकारियों और वरिष्ठ ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया गया था। लेकिन समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे अवैध कब्जाधारियों के हौसले पस्त होने के बजाय और बुलंद हो गए हैं।
स्थानीय लोगों ने अब उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस आयुक्त से मांग की है कि इस क्षेत्र में तुरंत विशेष अभियान चलाकर अवैध अतिक्रमण हटाया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि जौहरीपुर-नाला रोड की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाया जा सके। @DCPTrafficER@dtptraffic@DelhiTrafficPol@AddlCPTraffic1@acpnortheasttr@TrafficCP@TIKhajurikhas@TIbhajanpura@TINandNagri@DelhiPolice@bishtmla@UpenderSolanki7@ShoDayalpur@shodayalpur25@AcpKhajuri@Acpgokalpuri@TransportDelhi@ParivahanSewa@MORTHIndia@NHAI_Official@CMODelhi@HMOIndia@PMOIndia जांच कर कार्यवाही हेतु।
दरियागंज के सर्राफ आंख अस्पताल में व्यवस्थाओं पर उठे सवाल: टोकन काउंटर पर अभद्रता और मरीजों की परेशानी का आरोप
नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली के दरियागंज स्थित प्रसिद्ध 'डॉ. श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल' (सर्राफ अस्पताल) एक बार फिर अपनी प्रशासनिक अव्यवस्था और कर्मचारियों के कथित दुर्व्यवहार को लेकर चर्चा में है। खुद को मरीजों की सेवा में समर्पित बताने वाले इस संस्थान के टोकन काउंटर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
काउंटर पर अभद्रता और पक्षपात का आरोप
हाल ही में सामने आई जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के अनुसार, अस्पताल के टोकन काउंटर के बाहर कुर्सी पर बैठा एक कर्मचारी मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ अभद्रता भाषा करता नजर आ रहा है।
अस्पताल में लगी लंबी लाइनों को देखकर जब वहां मौजूद एक पत्रकार ने कतार में खड़े बुजुर्गों व मरीजों की स्थिति का हवाला देते हुए थोड़ा सहयोग (कॉर्पोरेट) करने की बात कही, तो कर्मचारी ने सहयोग करने के बजाय सख्त टिप्पणी की कहा कि यहां पर पत्रकार स्टाफ की लाइन नहीं सबसे पीछे जनरल लाइन में लगो "ऐसे पता नहीं कितने पत्रकार यहाँ आते-जाते हैं, लाइन में लगोगे तो टोकन मिलेगा वरना प्राइवेट वार्ड 2 नंबर गेट पर चले जाओ।"
एक तरफ जहाँ आम जनता और पत्रकार घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ काउंटर के आसपास स्टाफ के नाम पर कई अन्य लोग बिना लाइन के खड़े देखे गए। इस तरह का पक्षपातपूर्ण रवैया अस्पताल प्रशासन की पारदर्शिता पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अस्पताल परिसर में जनसमस्याओं को उठाने वाले पत्रकारों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सम्मान देने या जनहित के सुझावों को सुनने के बजाय, अस्पताल का अमला गैर-जिम्मेदाराना जवाब देने में व्यस्त है।
अतीत के विवाद और असफल इलाज के दावे
यह पहली बार नहीं है जब सर्राफ अस्पताल विवादों के घेरे में न आया हो। स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के मुताबिक, विगत कुछ वर्षों में अस्पताल के इलाज को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
चर्चाओं के अनुसार, पूर्व में एक महिला की आंख में इंजेक्शन लगाने के बाद उसकी असमय मौत हो गई थी।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सर्राफ अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन सफल न होने के कारण उन्हें मजबूरी में आंख के बिगडै हुए मामले दिल्ली के अन्य सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ा।
क्या सरकारी अस्पतालों से भी बड़ा है सर्राफ अस्पताल?
दिल्ली में बड़े सरकारी अस्पताल मौजूद हैं, जहाँ रोजाना हजारों मरीजों का पारदर्शी और सम्मानजनक तरीके से इलाज किया जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एक निजी चैरिटेबल ट्रस्ट से चलने वाला सर्राफ अस्पताल खुद को दिल्ली के सरकारी अस्पतालों और नियम-कानूनों से भी ऊपर समझने लगा है?
अस्पताल प्रशासन को इस तरह की अव्यवस्थाओं, कर्मचारियों के बदतमीजी भरे रवैये और इलाज में हो रही चूक पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेना चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले असहाय मरीजों को राहत मिल सके। @HelthMinistry @SCEHI @MoHFW_INDIA@healthminister8 @HealthMinisterDL @DelhiMedCouncil @India_NHRC@LtGovDelhi@CMODelhi@MCD_Delhi@DelhiPolice