आइंस्टीन, न्यूटन, रदरफोर्ड, ग्राहम बेल, टेस्ला, डाल्टन, गैलीलियो, नील्स बोर, एडिसन, डार्विन, एनरिको फर्मी समेत तमाम वैज्ञानिकों की सारी खोज 17वी शताब्दी से शुरू हुई ।
16वी शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में प्रवेश किया।
भारतीय ग्रंथो पुस्तकों को अंग्रेजों ने पढ़ना शुरू किया।
मैकाले एक तरफ गुरुकुल शिक्षा और शोध संस्थानों को उन्नति के रास्ते पर बाधक बोल बंद कराता रहा, दूसरी तरफ गोरों को संस्कृत पढ़ाया गया।
गीता से लेकर उपनिषद तक का अनुवाद अंग्रेजो, फ्रेंच, जर्मनी द्वारा करवाया गया।
पश्चिम देशों के विश्व विद्यालयों में संस्कृत केंद्र खोले गए।
वहीं से वैज्ञानिक खोज की भरमार हो गई।
हर वैज्ञानिक ने किसी न किसी भारतीय पुस्तक या ऋषि के खोज का अनुसरण किया।
भारतीय अंग्रेजी में मस्त होकर अपनी भाषा और ऋषियों का मजाक बनाते रहे और पश्चिमी देशों ने भारतीय शास्त्रों से बहुमूल्य रत्न निकाले और हमने शास्त्रों को पढ़ने वालों को जाहिल गंवार घोषित किया।
बाधायन, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य,कणाद, वहारमिहिर, नागार्जुन, सुश्रुत, चरक,पतंजलि के शोध को अपना आधार बनाकर अंग्रेज वैज्ञानिक, डॉक्टर, सर्जन बन गए।
हमने से कितने लोगों को अपने वैज्ञानिकों के बारे में जानकारी हैं ?
ईसा से 600 साल पहले आचार्य कणाद ने परमाणु संरचना का आधार रखा, अणु की खोज की।
डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया और कहा कि मैंने भारतीय ग्रंथों को पढ़कर इसे बनाया । ऐसे कई उदाहरण है । आज आवश्यकता है युवा प्राचीन भारतीय ग्रंथों पर शोध करें एवं आगे का रास्ता तैयार करें ।
अनुवादक है मंत्र का अंग्रेजी विज्ञान।
ग्रंथों के ही कोष में संरक्षित था ज्ञान।।
@VHPDigital@vhpindraprastha
राम मंदिर विवाद पर बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा-
वर्तमान में कलयुग से ज्यादा छलयुग चल रहा है... छलयुग में सावधान रहें...
आस्था घटाने के लिए षड्यंत्र चल रहे हैं... कुछ कालनेमी सक्रिय हो गए हैं...
अयोध्या मामले पर उद्धव गुट के सांसद संजय राउत का बयान , हिंदुओं को भ्रम में करने की सोंची समझी साजिश👇
राम की अयोध्या अंडर वर्ल्ड बन गई है...
सुप्रीम कोर्ट निष्पक्ष है क्या? वो तो उनके नीचे काम कर रहा है न...
👉पहचानिए ऐसे कालनेमि को!!
रांची के उर्सुलाइन इंटर कॉलेज में हिंदू लड़कियों के साथ भेदभाव।
नाक में नोज रिंग पहनने की वजह से हिंदू लड़कियों को कॉलेज से निकाला जा रहा है।
जब लड़की ने प्यार से कहा कि वह डॉक्टर से सलाह लेकर इसे उतार देगी, तब भी स्कूल ने उसकी हिंदू और बिहारी पहचान का अपमान किया
@sanjeev_vhp
@ChampatRaiVHP जी का कोई भी बयान आदि नहीं आ रहा है, इस्तीफे के षड्यन्त्र और इस्तीफे की भ्रामक सूचना पर। ऐसे कमजोर तो वे हैं नहीं जो कि किसी षड्यन्त्र से चुप होकर रह जाएं। सच्चा आदमी कभी चुप नहीं रह सकता।
अतः उनकी चुप्पी अशांकित कर रही है कि कहीं ट्रस्ट पर कब्जा करने के लिए या षड्यन्त्र खुलने के भय से उनको षड्यंत्रकारियों द्वारा बंधक तो नहीं बना लिया गया है ?
बिना किसी प्रमाण के उन्हें ट्विटर पर निरन्तर भयानक गालियां धमकियां दी जा रही हैं, जिससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। चम्पत राय जी की सकुशलता की जानकारी सार्वजनिक की जाए और उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई जाए। इस नेतृत्वहीन अराजक ट्रस्ट को तुरन्त भंग किया जाए।
@sanjeev_vhp@VHPDigital@iRakeshPanday@vpsinghayodhya@vinod_bansal@Vipul_ban@ivivekbansal@ihiteshbansal@dr_vijay8840@VijayVst0502
सत्य की विजय और असत्य का उत्तर
श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में चोरी की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि किसी कर्मचारी ने अपराध किया है, तो उसे कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना ही चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत स्वयं ट्रस्ट द्वारा की गई, जांच आगे बढ़ी और आरोपित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी हुई।
लेकिन इस पूरे प्रकरण में एक गंभीर प्रश्न भी खड़ा होता है।
क्या स्वतंत्र भारत में ऐसा उदाहरण पहले कभी देखने को मिला है कि अपराध की जांच पूरी होने से पहले ही संस्था के संचालकों और ट्रस्टियों को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहरा दिया जाए?
मालिक को ही चोर बना दिया गया
यह स्पष्ट रूप से चोरों की ही बचाने की कोशिश थी
अवैध तरीके से ट्रस्ट पर कब्जा करने की मंशा प्रकट हुई
कानून का मूल सिद्धांत है कि दोष सिद्ध होने से पहले किसी को अपराधी घोषित नहीं किया जा सकता। फिर भी कुछ मीडिया मंचों, राजनीतिक व्यक्तियों और स्वयंभू बुद्धिजीवियों ने बिना प्रमाण पूरे ट्रस्ट की नीयत पर प्रश्नचिह्न लगा दिए। यदि किसी व्यक्ति ने बिना तथ्य के असत्य प्रचार किया, तो यह केवल एक संस्था की प्रतिष्ठा पर नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी आघात है।
आज जब जांच में यह सामने आ रहा है कि आरोपित कर्मचारी हैं और ट्रस्ट द्वारा ही शिकायत दर्ज कराई गई थी, तब यह भी आवश्यक है कि उन लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो जिन्होंने बिना तथ्य और बिना जांच के पूरे ट्रस्ट को कठघरे में खड़ा किया।
हमारी मांग किसी प्रतिशोध की नहीं, बल्कि समान न्याय की है।
चोरी करने वाला चाहे कोई भी हो, उसे दंड मिले।
जिसने बिना प्रमाण असत्य आरोप लगाए हों, उसकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित पदों पर बैठे लोगों से अपेक्षा है कि वे तथ्यों के आधार पर बोलें, न कि पूर्वाग्रह या राजनीतिक हितों के आधार पर।
समाज में विश्वास और आस्था को चोट पहुँचाने वाली निराधार सूचनाओं के लिए भी जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
सत्य को देर तक दबाया जा सकता है, पर पराजित नहीं किया जा सकता।
"सत्यमेव जयते" केवल राष्ट्रीय आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। यदि हम वास्तव में कानून के शासन में विश्वास करते हैं, तो न्याय का एक ही मापदंड होना चाहिए—न अपराधी बचना चाहिए और न ही निराधार आरोप लगाने वाले बिना जवाबदेही के बचने चाहिए।
जय श्री राम।
@VHPDigital@iRakeshPanday
@Opiniozone न वो तो आपके ऊपर वाले फ्लोर में रहता था न?
मैं तो वो वाला हूँ जो जिस गली से निकलता हूँ तो लोग आवाज लगाते हैं " पापा आ गए, पापा आ गए"
याद आया न? चलो शुरू हो जाओ👍
"The Kota Files " आजतक के इस स्टोरी को हर हिंदू भाई,बहन को सुनना चाहिए और विचार भी करना चाहिए!
पाक़िस्तान की साज़िशों के तहत भारत में हिंदू नाबालिग लड़कियों और शादीशुदा महिलाओं को सोशल-मीडिया की सहायता से कैसे ट्रैप किया जाता है और माइंड वाश कर के कैसे धर्म परिवर्तन/ विचारों का परिवर्तन करवाया जाता है!!
@VHPDigital@vhpindraprastha
खोया-पाया ब्रिगेड का जवाब कारसेवकपुरम के प्रभारी पुजारी शिव दास जी शब्दों में👇
"…मंदिर में जो भी सामग्री दान की गई है, चाहे वह चांदी के काकभुशुंडि हों, धनुष-बाण हो या भगवान हनुमान की गदा, देश भर से लोग इसे यहाँ लाए हैं और समर्पित किया है, और सब कुछ सुरक्षित रखा गया है। जो कोई भी इसकी पुष्टि करना चाहता है, वे आकर देख सकते हैं। जिन लोगों ने सोना और चांदी दान किया है, ट्रस्ट ने सभी को इसकी रसीद दी है... हमारे ऑडिटर और अकाउंटेंट ने इसका पूरा हिसाब-किताब रखा है; कोई भी आकर इसे देख सकता है। सभी सामग्रियां सुरक्षित रखी गई हैं…
ट्रस्ट के साथ समस्या यह है कि लोग जो चीजें दान कर रहे हैं, उन सभी को वहाँ (मुख्य मंदिर में) नहीं रखा जा सकता। जगह छोटी है और समाज की उम्मीदें बहुत बड़ी हैं… काकभुशुंडि को महीनों तक राम मंदिर में रखा गया था ताकि भक्तों की इच्छा का भी सम्मान किया जा सके, लेकिन भक्तों द्वारा दी गई हर चीज़ को रखने के लिए वहाँ इतनी जगह नहीं है…”
@VHPDigital@iRakeshPanday
आदरणीय चंपत जी पर आरोप लगाने वाले इतने सच्चे है तो अपनी और चंपत जी दोनों जाँच करा ले पता चल जायेगा सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन में वो ईमानदार, सच्चे, समर्पित और निष्ठावान है या चंपत जी ।
किसी एक की औक़ात नहीं मैं यह दावे के साथ बोलता हूँ !