The govt has shutdown 16 metro stations around Jantar Mantar. Also learning that Several companies of CRPF are also being flown to Delhi. Is this a preparation for a more brutal crackdown? Such a crackdown will only fuel the fire that the govt has lit by its arrogant behaviour towards our youth.
Eminent people including MPs should go to Jantar Mantar
कल के #संसद_मार्च के दौरान कुछ महिलाओं को
इलेक्ट्रिक झटके देने का आरोप का वीडियो सामने आ रहा है।
बारिश के मौसम में ये तो क्रूरतम चेहरा है #RAF का।
मानवाधिकार आयोग @India_NHRC क्या ये देख रहें है ?
#cjp#CJPprotest
वो चिल्ला कर झूठ को सच बताएँगे,आप शांति से सच पहुँचा देना।
हिंसा का वीडियो सबसे पहले हमने दिखाया,हमारा ही वीडियो सब लगा रहे हैं,मगर वो सिर्फ हिंसा दिखा रहे हैं,शांतिपूर्ण प्रदर्शन को तो वो सुबह से नहीं दिखा रहे।
हमारी क्षमता कम हो सकती है,मगर आपकी नहीं। पहुंचा दीजिए इस सच को घर-घर तक
बाकी मिलता हूँ थोड़ी देर में विस्तृत रिपोर्ट के साथ YouTube पर
16-YEAR-OLD GIRLS TEAR THROUGH GOVT’S “ANTI-NATIONAL” SCRIPT 🔥
REPORTER: What happened here?
KANIKA 😡: We were marching peacefully. Police pushed us, hit us, tore clothes and hurt students. Is this why they have power?
REPORTER: Why did you come?
ANSHIKA 🔥: We skipped school because we care about our future. If fighting for education is wrong, then what is right?
REPORTER: What is your message?
RIYA 🎯: We are 12th-class students. If we stay silent today, this broken system will become our tomorrow. We want education, safety and accountability.
THE MOMENT: These girls did more damage to the “anti-national” narrative than any speech could. They came with school bags and left power exposed.
"ये बेहद भावुक पल हैं" एक पत्नी और एक परिवार के सदस्य के लिए।
सोनम वांगचुक जी की पत्नी उनसे मुलाकात करने जंतर-मंतर पहुंचीं।
यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों नौजवानों के शिक्षा के अधिकार और बेहतर भविष्य की लड़ाई है।
आइए, शिक्षा के हक और अधिकार की इस लड़ाई में बढ़-चढ़कर अपनी आवाज़ बुलंद करें।
@CJP_for_India@Wangchuk66
TMC सांसद @sayani06 ने लोकसभा में Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर अत्यंत प्रभावशाली और संतुलित वक्तव्य दिया।
जिन मुद्दों को उठाने पर सत्ता पक्ष बार-बार विपक्ष को टोकता रहा और उसकी आवाज़ दबाने की कोशिश करता रहा, उन्हीं प्रश्नों को आज विपक्ष ने अत्यंत सूझ-बूझ, संयम और राजनीतिक चातुर्य के साथ सदन के पटल पर रख दिया।
यह वक्तव्य केवल एक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादा की याद दिलाने वाला हस्तक्षेप भी था।
पिछले 2 साल में सौरभ द्विवेदी ने मुझसे कई बार कहा भाई लाइब्रेरी बनने वाली है और आपको आना है
मैं सोचता था कोई छोटी सी लाइब्रेरी होगी 10 से 15 लोग होंगे..
लेकिन कल पता चला 10 हजार लोग आने वाले है कई बड़े शहरों में होर्डिंग लगे है
मैने जीवन में होटल, कॉलेज, हॉस्पिटल के कई उद्घाटन देखे है लेकिन इतनी बड़ी लायब्रेरी वो भी नोट फॉर प्रॉफिट सम्मान की वस्तु बने ये समाज में पहली बार देखा है
! विकास दिव्यकीर्ति दृष्टि IAS !
कांग्रेस राज में बहुत शान्ति थी , कभी हिन्दू मुस्लिम दंगे नहीं होते थे , कभी आतंकवादी घटना नहीं होती थी , भ्रष्टाचार तो दूर दूर तक नहीं था , जातिगत हिंसा और दंगे होते ही नहीं थे , हर जाति को बराबर सम्मान और रिप्रेजेंटेशन मिलता था , महंगाई तो दूरबीन से भी नहीं दिखाई पड़ती थी , पर्यावरण इतना साफ था कि तैरती हुई मछलियों के गिल्स और दिल्ली के किसी भी कोने से ऑरोरा बोरियोलिस के दर्शन हो जाते थे , छात्रों को पकड़ पकड़ के नौकरियां बांटी जाती थी , मेरे चाचा जी को भी घर से घसीट के DM बनाया गया था , नेताओं के बच्चे देश में ही पढ़ते थे , भाई भतीजावाद का स्तर अभी के नोएडा के ग्राउंडवाटर टेबल से भी कम था , सारे नेता बहुत ईमानदार थे ,
भाजपा राज में देश विश्वगुरु बन गया , अब देश नई ऊंचाइयों को छू रहा है , पूरे विश्व में देश का डंका बज रहा है , ईमानदारी अपने चरम पर है , आंदोलन और हड़ताल होना बंद हो गई , कोई बेरोजगार नहीं है , जनता अमीर होती जा रही और नेता गरीब , दुनिया भर से लोग देश में रोजगार की और शिक्षा की खोज में आ रहे , हाइवे सैटेलाइट का इस्तेमाल करके बनाए जा रहे , अमेरिका और चीन हमारी ऊंचाई को टेलिस्कोप से देख रहे ।
दोनों पार्टियों को दिल से शुक्रिया ।❣️
"छोटे बच्चे के लिए कम से कम 4 साल तक घर पर रहना ज़रूरी – मां हो या पिता!"
सोशल मीडिया पर एक विचार तेजी से वायरल हो रहा है, जो हर माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर रहा है।
जब एक नन्हा सा बच्चा इस दुनिया में आता है, तो उसकी सबसे बड़ी ज़रूरत होती है — ममता, अपनापन और समय। उसके जीवन के शुरुआती चार साल उसकी नींव होते हैं, और इन सालों में मां या पिता में से किसी एक का घर पर रहना बेहद ज़रूरी है। यह सिर्फ देखभाल नहीं, बल्कि एक इंसान की जड़ें मजबूत करने का समय होता है।
बच्चा किसी एक का प्यार नहीं चाहता, वो चाहता है मौजूदगी — और ये मौजूदगी किसकी होनी चाहिए, इसका फैसला मिलकर, सोच-समझकर और परिवार की भलाई को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। क्योंकि अंत में, बच्चा सिर्फ ये याद रखेगा कि जब वो रोया था, तब कोई पास था जो उसे गले लगाकर चुप कराता था।
#viral #viralvideo
हम जिस दिन अपराधियों को जाति धर्म और परिवार के चश्में से देखना बंद कर देंगे ,
उस दिन देश से अपराध जैसी चीजें समाप्त हो जाएंगी।
एक मां ने अपनी अपराधी बेटी को खुद कानून के हवाले करवाया ।❣️