अमरीका ने चार दिन में हिंदुस्तान के तीन जहाज़ों पर हमला किया, बिना चेतावनी दिए, और हमारे कई नागरिकों को मार दिया। फिर भी मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए हैं!
रीढ़ विहीन मीडिया आका की गुलामी के सिवाय और कर भी क्या सकती है।
इसकी हालत इतनी पस्त है कि सच दिखाने की ताकत भी नहीं बची।
...लेकिन हम डंके की चोट पर सच बोलेंगे।
मोहन भगवत की हिम्मत कैसे हुई हमारी आज़ादी, हमारे स्वतंत्रता आंदोलन, हमारे संविधान की बेइज़्ज़ती करने की?
रानी झांसी से लेकर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, अशफ़ाकुल्लाह ख़ान जैसों ने अपने प्राणों की आहूति किसकी आज़ादी के लिए दी?
लाला लाजपत राय ने कहाँ की आज़ादी के लिए लाठियाँ खाईं?
नेहरू ने अपनी जवानी के 10 साल जेल में कहाँ की आज़ादी के लिए बिता दिए, किस आज़ाद देश की नींव उन्होंने रखी?
पटेल विदेश में वकालत छोड़ किसके स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने आए, किस आज़ाद देश में तमाम रियासतों और रजवाड़ों को जोड़ा?
बाबा साहेब ने किस आज़ाद देश के लिए संविधान बना कर सबको बराबरी का मौक़ा दिया?
लाखों करोड़ों भारतीयों ने ब्रिटिश हुकूमत को देश से खदेड़ दिया और आज़ादी पाई
हमारी आज़ादी, आज़ादी के आंदोलन, संविधान के ऊपर सवाल उठा कर मोहन भागवत ने देशद्रोह किया है
इनकी दिक्कत यह है कि आज़ादी में इन्होंने अपना एक नाखून तक नहीं कटाया - इन का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं था, यह तो मुखबिरी कर रहे थे माफ़ीनामे लिख रहे थे - इसीलिए यह उस इतिहास को ही नकारना चाहते हैं
महाकुंभ 2025 में चारों तरफ़ चकाचौंध के बीच एक दृश्य ये भी.
कुंभ में नाव चलाने वाले लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. ये लोग प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? सरकार से इनकी क्या माँगें हैं?
6700 किलोमीटर का सफ़र, करोड़ों भारतीयों का साथ, विविधता और समावेशिता का संगम, भारत जोड़ो न्याय यात्रा की पहली सालगिरह की सभी को शुभकामनाएं।
मणिपुर से मुंबई तक हमने अन्याय के हर रूप को देखा, हर वर्ग की तकलीफ को समझा, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भेदभाव को महसूस किया।
न्याय के लक्ष्य से चले थे - बदलाव आया, भारत जाग उठा, अपने हक़ और अधिकार के लिए लड़ा। लड़ाई लंबी है मगर संकल्प अडिग है - न्याय का हक़, मिलने तक।
सरकार को तो नहीं फ़र्क़ पड़ता लेकिन विपक्ष के सभी दलों को एक साथ दल्लेवाल साहब के पास जाना चाहिए और किसी भी तरह अनशन तुड़वाने की कोशिश करनी चाहिए।
इस निष्ठुर सरकार से तो क्या ही उम्मीद की जाए
सुना मोदी जी के दफ़्तर और घर में खुदाई चल रही है?!
वो रुपए के साथ गिरते गिरते जो मोदी जी की प्रतिष्ठा गर्त में जा चुकी है उसकी खोज जारी है
जानकारी के लिये बता दूँ पिछले 10 सालों में रुपया 58 से गिरते गिरते अब 87 पहुँचने ही वाला है
कन्नौज के रेलवे विभाग का हादसा भाजपा के महा भ्रष्टाचार के महा लालच के कारण हुआ है। जब सारे ठेके कमीशन लेकर दिये जाएंगे, और ठेकेदार भी किसी और को ठेके पर देकर, अपना लाभ काम किये बिना कमाकर निकल जाएगा तो आधे से भी कम बचे पैसों में ऐसे ही थर्ड क्लास जानलेवा निर्माण कार्य होंगे, जिनमें न तो क्वॉलिटी होगी, न ही सिक्योरिटी का ध्यान रखा जाएगा मतलब गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों की बुरी तरह उपेक्षा होगी, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे हादसे होंगे।
हमारी माँग है कि भाजपा सरकार इस हादसे का ज़िम्मेदार अपने को मानते हुए, घायल के परिवारों को तत्काल मुआवज़ा का ऐलान करे।
मोदी और केजरीवाल दोनों नहीं चाहते कि दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को उनका हक़ मिले।
सिर्फ कांग्रेस ही समान भागीदारी और संविधान की रक्षा के लिए लगातार आवाज़ उठा रही है।
आप सभी दिल्लीवासी इस फर्क को समझिए!
मौजूदा सियासी दौर के सबसे ज़्यादा संवेदनशील संजीदा ह्यूमर वाले बेबाक़ नेता हैं @samajwadiparty मुखिया @yadavakhilesh. एक वाक्य में कितना कुछ कह डालते हैं, इसकी ताज़ा बानगी देखिए-
When the owner of a small business, like Annapoorna restaurant in Coimbatore, asks our public servants for a simplified GST regime, his request is met with arrogance and outright disrespect.
Yet, when a billionaire friend seeks to bend the rules, change the laws, or acquire national assets, Modi Ji rolls out the red carpet.
Our small business owners have already endured the blows of demonetisation, an inaccessible banking system, tax extortion and a disastrous GST. The last thing they deserve is further humiliation.
But when the fragile egos of those in power are hurt, it seems humiliation is exactly what they’ll deliver.
MSMEs have been asking for relief for years. If this arrogant government would listen to the people they would understand that a simplified GST with a single tax rate would solve the problems of lakhs of businesses.
इस वीडियो को हिन्दू राष्ट्र की एक झलक के तौर पर देखना चाहिए!
मंदिर में गरीब हिन्दू और लोअर क्लास के हिन्दू की मुंडी पकड़ कर फेंकी जाएगी, जबकि अमीर और एलीट परिवार के लोग भगवान प्रतिमा की ओर तशरीफ़ करके फ़ोटो खिंचाएँगे।
अब ठीक है न?
https://t.co/ns681p02Wf
नून रोटी खाके भले जिनगी बिताइहा,
अपने न पढ़ला बाकि बचवन के पढ़इहा,
पढ़ लिख के ही केहू बनल महान बा,
पढ़ा लिखा बबुआ कलमिये में जान बा।
भोजपुरी में इतना कमाल का वैचारिक और अपील करता हुआ गीत अरसे बाद सुना। क़लम व किताब की अहमियत बताने वाले इस कमाल के गीत को गाँव-घर तक पहुँचाया जाए।
मध्य प्रदेश में सेना के दो जवानों के साथ हिंसा और उनकी महिला साथी के साथ दुष्कर्म पूरे समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है।
भाजपा शासित राज्यों की कानून व्यवस्था लगभग अस्तित्वहीन है - और, महिलाओं के खिलाफ़ दिन प्रतिदिन बढ़ते अपराधों पर भाजपा सरकार का नकारात्मक रवैया अत्यंत चिंताजनक।
अपराधियों की ये निर्भीकता प्रशासन की पूर्ण नाकामी का परिणाम है और इस कारण देश में पनपता असुरक्षित वातावरण भारत की बेटियों की स्वतंत्रता, उनकी आकांक्षाओं पर बंदिश है।
समाज और सरकार दोनों शर्मिंदा हों और गंभीरता से विचार करें - देश की आधी आबादी की रक्षा की ज़िम्मेदारी से कब तक आंख चुराएंगे!