आतंकवाद से कई गुना ज्यादा निर्दोष झूठी शिकायत, झूठी FIR, झूठी जाँच और झूठी गवाही के कारण मरते हैं।
घटिया नियम-कानून और सिस्टम कब बदलेगा?
@PMOIndia@narendramodi
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जा��ँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
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मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन क��सी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
सरदार पटेल ने देश बनाने के लिए जमीनें माँगी सवर्णों ने इस देश को बनाने के लिए 548 रियासतें दे दी
सरदार पटेल ने सोना मांगा सवर्णों ने अपने खजाने खोले और RBI को सोने से भर दिया
बदले में जब इन सवर्णों के बच्चे स्कूल गए तो वहाँ उनसे दस गुना ज्यादा फीस बसूली गई
कॉलेज गए तो वहां इन्हें उस सब्जेक्ट में एडमिशन ही नहीं मिला जिसे ये पढ़ने गए थे वजह बताई गई कि इनका सवर्ण होना
हॉस्टल गए तो रहने के लिए रूम नहीं मिला लाइब्रेरी गए तो पढ़ने के लिए पुस्तकें नहीं मिली वजह बताई गई कि इनका सवर्ण होना
नौकरियों के लिए आवेदन करने गए तो फिर से मनमाने पैसें बसूले वजह बताई गई कि इनका सवर्ण होना
400 नंबर लाकर भी इन्हें नौकरी नहीं मिली और वहीं नौकरी -40 नंबर लाने वाले को दे दी गई वजह बताई गई कि इनका सवर्ण होना
धीरे धीरे सरकारों ने अपनी कुर्सियां बचाए रखने के लिए पूरे के पूरे सवर्ण समाज को बाकी समुदाय का दुश्मन बना दिया
उस सवर्ण समाज को जिनकी कुर्बानियों पर ही इस देश की नींव रखी गई थी।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करन��� चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस क�� घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन स��� किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
आरक्षण सिर्फ पढ़ाई लिखाई में नहीं है,
आरक्षण पीएम आवास योजना में है,
आरक्षण पीएम शौचालय योजना में है,
आरक्षण पीएम किसान सम्मान निधि में है,
आरक्षण सारी सरकारी योजनाओं में है,
आरक्षण सरकारी नौकरियों और रोजगार में है
आरक्षण पंचायत चुनाव से लेकर संसदीय चुनाव में है,
आरक्षण देश को दीमक की तरह खोखला कर ���हा है, मैं जिस मातृ भूमि में जन्मा हूँ वहाँ से विधायक नहीं बन सकता, ये आरक्षण का अभिशाप है,
एक ही परिवार को पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण देकर सामान्य वर्ग के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है,
उसका विरोध करेंगे,
डिप्लोमा, ग्रेजुएशन और लॉ करने वाला छात्र भी करेगा और अशिक्षित व्यक्ति भी जातिगत आरक्षण के कुनीतियों का विरोध करेगा,
इसे विरोध को घंटा नहीं दबाया जा सकता…
PM @narendramodi जी के सामाजिक न्याय के मंत्री @RamdasAthawale ने सामान्य वर्ग के बच्चों को 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कहा है! @RHAreforms ने केवल आरक्षण में सुधारों और इसकी समीक्षा की बात की है, और इसके लिए सरकार हमें 'देशद्रोही', 'जाहिल' और 'मानसिक रोगी' कह रही है।
(विडंबना देखिए कि अनपढ़ नेता उच्चतम कटऑफ वालो को जाहिल बोल रहा है!)
एक फेक स्क्रीनशॉट पर मुझे @NCSC_GoI & दिल्ली पुलिस ने SC/ST एक्ट का नोटिस भेजा।
लेकिन राजकुमार भाटी जो खुलेआम ब्राह्मणों के खिलाफ बोल रहा है, क्या कोई नेशनल कमीशन सवर्णों के लिए है जो उसे नोटिस भेजेगा?
क्या इस देश में सवर्णों की कोई सुनवाई नहीं है?
फिरसे एक अभद्र मुहावरे के माध्यम से ब्राह्मणों को गाली दी जा रही है। गाली देते देते हँसी और ख़ुशी भी नहीं रुक रही है।
इस नफ़रत भरी भाषा और टार्गेटिंग को क्या नाम दिया जाये?
दुर्भाग्यपूर्ण-
माननीय @gupta_rekha जी, आप एक महिला है और अगर आपके राज्य में आपकी पुलिस द्वारा बेवजह किसी महिला को scst एक्ट के अंतर्गत ग़लत तरीक़े से केस करके परेशान किया जाता है तो आपको इस ��िषय में संज्ञान लेते हुए निष्पक्षता के साथ एक जांच कमिटी बिठानी चाहिए तथा इन दोषी पुलिस अधिकारियों पर एक्शन लेना चाहिए,
cc- @narendramodi @AmitShah
‼️यह समानता है या सिस्टमेटिक अन्याय?‼️👇
एक ही परीक्षा, एक ही देश, एक ही उम्र के बच्चे, लेकिन परिणाम?
JEE Mains 2026 Cutoffs:
UR – 93.4
General (EWS) – 82.4
OBC (NCL) – 80.9
SC – 63.9
ST – 52.01
UR (PwD) - 0.002318
मतलब 92 percentile लाने वाला एक "जनरल कैटेगरी" का छात्र बाहर, और 65 percentile वाला reserved category का अंदर।
सोचिए, ना उस 18 साल के बच्चे ने किसी पर अत्याचार किया, ना उसने किसी के साथ भेदभाव किया, फिर भी उसे सज़ा मिलती है सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका जन्म एक खास caste में हुआ।
क्या यही समानता (equality) है?
या ये एक ऐसा सिस्टम है जो चुपचाप अन्याय को “नीति” का नाम देकर चला रहा है?
ये आंकड़े सिर्फ numbers नहीं हैं,
ये लाखों मेहनती छात्रों की हकीकत हैं।
#JEEMains #EducationSystem #Equality
सर कभी 29% हिन्दू सवर्णों को भी राष्ट्रनिर्माण में हिस्सेदार बनाने का सौभा��्य दीजिए। या केवल टैक्स ले कर मुस्कुराते हुए हमें ‘टैक्सदाता’ कह कर पल्ला झाड़ लेंगे? हमारी भी महिलाएँ हैं, निर्धन विद्यार्थी हैं जिनके लिए कोई निःशुल्क स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज फीस आदि की कोई सुविधा नहीं।
भारत के सबसे सर्वोच्च स्थान पर विराजमान होने वाली राष्ट्रपति महोदया भी “वंचित समाज” की है।
150 करोड़ नागरिकों का प्रधानमंत्री भी “अति पिछड़ा” है।
देश के कई राज्यो में मुख्यमंत्री बने लोग लोग भी “वंचित पीड़ित और शोषित” है।
लेकिन रिक्शा चलाकर 200 रुपया रोज़ कमाने वाले तिवारी जी, ��िश्व के सबसे ताक़तवर व्यक्ति है।
यही भारतीय संविधान है। 🤷🏻♂️😂
जिस पार्टीं की विचारधारा एक समय
देशभक्ति ,हिंद्त्व और विकास के नीव पर
खड़ी थी ..आज उस पार्टी की पूरँ
��ाजनीति अंबेडकर और आरक्षण के इर्दे-
गिर्द सिमट कर रह गई है!
#BJP
पूर्व उप राष्ट्रपति जी का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य और शिक्षा के अलावा कुछ भी मुफ्त नहीं देना चाहिए,
मैं उनसे पूर्णतया सहमत हूं लेकिन बस इसमें न्याय और जोड़ना चाहता हूँ, लोगों को न्याय ,शिक्षा और स्वास्थ्य के अलावा कुछ भी फ्री नहीं मिलना चाहिए।
हे मूर्ख निशिकांत दूबे! जब तकनीक का ज्ञान न हो तो वमन मत किया करो। ‘कम्यूनिटी नोट’ @X स्वयं नहीं लगाता, जैसे कि हैंडल से पोस्ट X स्वयं नहीं करता। कम्यूनिटी नोट यूजर जेनेरेटेड होते हैं, प्लेटफॉर्म जेनेरेटेड नहीं।
@narendramodi जी, क्यों बार-बार इन मूर्खों के चक्कर में सरकार और देश की भद्द पिटवाने पर तुले हुए हो? आधारभूत सूचना और समझ तो होनी चाहिए आपकी संसदीय समितियों में कि चीजें कैसे कार्य करती हैं!
और यह तो स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि आपके नेताओं के हर दिन के दोगलेपन को कम्यूनिटी नोट से एक्सपोज किया जा रहा है, आपका उस पर नियंत्रण नहीं है, आप इरिटेट हो रहे हैं, तो ऐसे मूर्खतापूर्ण निर्णय कर रहे हैं।
ढंग के लोगों को सांसद बनाइए। चाटने वालों के चक्कर में रहेंगे अंतरराष्ट्रीय अ��मान झेलना पड़ेगा।