क्यों? जिस मूवी धुरंधर 2 को प्रमोट करने में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी, उसमें क्या गालियाँ कम थीं? गाली देना गलत है | लेकिन अगर हर साल भाषा और व्यवहार बिगड़ रहा है, तो सिर्फ GenZ को दोष देने से समस्या हल नहीं होगी। हमें यह भी देखना होगा कि समाज, परिवार, राजनीति, मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म मिलकर किस तरह का माहौल बना रहे हैं।
व्यक्ति अपने शब्दों के लिए जिम्मेदार है, लेकिन समाज उस भाषा के माहौल के लिए जिम्मेदार है जिसमें वह व्यक्ति बड़ा हुआ।बच्चा पैदा होते ही गाली देना नहीं सीखता, समाज उसे सिखाता है।
एक ट्रेंड चल रहा है— 'Reservation Hatao'
हो सकता है आपके चार दोस्त हों, जिन्हें लगता हो कि आरक्षण की वजह से उनका चयन नहीं हुआ। उनकी पीड़ा भी वास्तविक है, उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
लेकिन क्या सिर्फ़ उन्हीं चार लोगों की कहानी पूरे भारत की कहानी है?
मैं गाँव से आता हूँ। मैंने अपनी आँखों से ऐसे परिवार देखे हैं जो इंसानी मल साफ़ करते थे। ऐसे बच्चे देखे हैं जिन्हें स्कूल में अलग बैठाया जाता था। जिनके छू लेने पर लोग नहाने चले जाते थे। यह कोई सैकड़ों साल पुरानी कहानी नहीं, आज भी बहुत से गाँव ऐसे हैं जहाँ वो समाज के नल से पानी नहीं पी सकते। आज भी उनकी बारात गाँव के बीच से नहीं निकल सकती।
सोचिए... जिस समाज ने किसी इंसान को जन्म के आधार पर ही सम्मान से वंचित कर दिया हो, उस मानसिक और सामाजिक दूरी का क्या ?
इसका मतलब यह भी नहीं कि आज का आरक्षण सिस्टम बिल्कुल परफेक्ट है।मैं खुद मानता हूँ कि Reforms की ज़रूरत है।?
जैसे General वर्ग में EWS आया।
जैसे OBC में Creamy Layer और Non-Creamy Layer का सिद्धांत आया।
SC/ST आरक्षण में जिन परिवारों की कई पीढ़ियाँ शिक्षा और अवसरों के माध्यम से आगे बढ़ चुकी हैं, उनके बारे में भी नीति-निर्माण के स्तर पर चर्चा हो सकती है।
लेकिन एक बात समझिए।
जब राजनीति आज भी जाति पर होती है...
जब समाज में आज भी जाति पूछी जाती है...
जब सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ...तब केवल यह कहना कि "आरक्षण पूरी तरह खत्म कर दो और सब कुछ सिर्फ़ आर्थिक आधार पर कर दो"
मेरा मानना है कि देश को दो अतियों से बचना होगा।
एक - 'कुछ मत बदलो।'
दूसरी -'सब खत्म कर दो।
'सही रास्ता है- सुधार (Reform), डेटा के आधार पर नीति, और सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर।
क्योंकि किसी भी नीति का उद्देश्य समाज को बाँटना नहीं, बल्कि एक दिन ऐसी स्थिति तक पहुँचाना होना चाहिए जहाँ किसी विशेष सहायता की आवश्यकता ही न रह जाए।
किसी का नाम नहीं लिया हूँ,मेरी बात जिसको चुभेगी उन्हीं के लिए कह रहा हूँ। अगर आपको बुरा लग रहा है,तो समझ लेना रबी,ख़रीफ़,जायद, तीनों ही सीजन में ज़हर की खेती करते हो आप।
उड़ने दो मिट्टी को आख़िर कहाँ तलक उड़ेगी,
हवाओं ने जब साथ छोड़ा तो ज़मीं पर ही गिरेगी।
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।
सीवान में @bihar_police ने प्रदर्शनकारियों पर चलाई गोली!
आसूँ गैस के गोलों तक तो बात समझी जा सकती है, पर गोली क्यों चलाई गई?
सम्राट चौधरी कुर्सी के अहंकार में पागल हो चुके हैं!
@yadavtejashwi#RJD#Bihar
ये एथेनॉल बाबू, जिन्होंने लोगों की ऐसी-तैसी कर रखी है। बाइक वालों की बाइक खराब हो रही है, कार वाले परेशान हैं। मिडिल क्लास पाई-पाई जोड़कर गाड़ी खरीदता है, और अब उसी गाड़ी को गन्ने का रस पिलाने पर मजबूर किया जा रहा है। लेकिन इस पर सब चुप हैं। आखिर कब मुंह खोलेंगे?
धर्मेंद्र प्रधान का तो इस्तीफ़ा हो गया, लेकिन असली प्रधान का इस्तीफ़ा अभी बाकी है। सारी फसाद का जड़ तो असली प्रधान है।
ये आंदोलन अभी रुकना नहीं चाहिए जबतक सभी जेल भेजे गए छात्रों को छोड़ा नहीं जाता है। उनके ऊपर हुई FIR को वापस नहीं लिया जाता है।
आपलोगों की क्या राय है साथियों.?
Kudos to our powerful united courageous cockroaches.
जो लोग कहा करते थे “हमारे यहाँ इस्तीफ़े नहीं होते” वो आँख खोलकर देख लें, युवाओं में कितनी ताक़त है।
This is the beginning of Domino Effect. एक-एक कर सभी के इस्तीफ़े होंगे और ये सिलसिला तब रुकेगा जब प्रधानमंत्री ख़ुद देशहित में अपना इस्तीफ़ा सौपेंगे ।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देते ही सरकार ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई शुरू कर दी है। लोगों की रीच कम की जा रही है और कंटेंट पर लगातार स्ट्राइक लगाई जा रही है। सुबह से मुझे 10 स्ट्राइक मिल चुकी हैं, वो भी उन सभी पोस्टों पर जो मैंने विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में डाली थीं।
सच्चाई, हक, संघर्ष और न्याय की जीत!
दमनकारी सरकार के झूठ, पैंतरे और अहंकार की हार!
छात्र और युवा शक्ति को अनंत बधाई!
बहुत से सवाल अनुत्तरित है। देश के जागरूक युवा जवाबदेही तय करवाते रहेंगे।