शुभेंदु अधिकारी कितने बड़े वाले भ्रष्ट हैं, ये बात नरेंद्र मोदी बता रहे हैं.
ये वीडियो 2016 का है.
अब उन्हीं शुभेंदु अधिकारी को मोदी ने पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री बना दिया है.
मोदी का फंडा साफ है- खूब खाओ, मुझे भी खिलाओ.. जमकर भ्रष्टाचार फैलाओ.
प्रधानमंत्री जी गैस संकट पर जवाब देने से बचने के लिए सदन दूर चुनावी प्रचार में लगे हैं, और स्थितियां गंभीर बन रही हैं।
राजस्थान में हालात ��िंताजनक होते जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री कहते हैं कि गैस आपूर्ति उनका काम नहीं है।
क्या गैस सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाज़ारी रोकना उनकी जिम्मेदारी नहीं है? जब रसोई गैस की भारी किल्लत से जनता परेशान है और बाजार में कालाबाज़ारी चरम पर है, तब सरकार की ऐसी बजानबाजी हास्यास्पद लगती है।
भाजपा सरकार में कुछ लोग संकट में भी भ्रष्टाचार की चांदी कूटने में लगे हैं, और जनता को लाइनों में खड़ा होने के लिए छोड़ दिया है। इस संकट का असर अब हर क्षेत्र पर दिखाई देने लगा है। पर्यटकों के नहीं आने से पर्यटन प्रभावित हो रहा है, किसानों का 60 हजार टन चावल का निर्यात नहीं हो पा रही है, उद्योग और व्यापार ठप होने की कगार पर हैं। हॉस्टल, फूड प्रोसेसिंग, हैंडीक्राफ्ट, फर्टिलाइज़र, सीमेंट, ग्लास, स्टील जैसे क्षेत्रों में कई प्लांट बंद होने लगे एवं कई जगह उत्पादन 30% कम हो गया है। दवाई कंपनियां पर भी असर पड़ रहा है, हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हवाई जहाज के टिकट लाखों में मिल रहे हैं।
ये सिर्फ एक गैस संकट नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर मंडराता गंभीर खतरा है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे भ्रमित करने वाले भाषणों से बाहर निकलें, और तुरंत ठोस कदम उठाएं। प्रधानमंत्री से बात कर गैस आपूर्ति सुचारू करवाएं, जमाखोरी और कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई करें।
दुनिया तेज़ी से बदल रही है। संकट हमारे दरवाज़े पर है।
अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो LPG, पेट्रोल और डीज़ल करोड़ों भारतीय परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन जाएंगे।
सच्चाई साफ़ है - Compromised PM Modi ji ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता कर दिया है।
कमज़ोर और दिशाहीन विदेश नीति ने देश को इस खतरनाक स्थिति में ला खड़ा किया है।
अब समय है सच बताने का और देश को तैयार करने का। वरना इसकी कीमत भारत के आम लोग चुकाएँगे।
India–US Trade Deal ने 140 करोड़ भारतीयों का भविष्य गिरवी रख दिया।
युवाओं के रोज़गार दांव पर,
किसानों की फसल समझौते की मेज़ पर,
और ऊर्जा सुरक्षा विदेशी शर्तों पर!
कोई PM बिना भारी दबाव के ऐसे घुटने नहीं टेकता। भारत समझता है - यह समझौ���ा बराबरी का नहीं, मजबूरी का है।
Epstein files से हो या Adani Case से - मोदी जी ने अपनी सत्ता बचाने की कीमत राष्ट��रीय हित से चुकाई है।
आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।
मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।
किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िर�� सहारा भी छिन सकता है।
जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया।
क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।
भारत पर अमेरिकी टैरिफ - 3% से बढ़कर 18%
अमेरिका पर भारतीय टैरिफ - 16% से घटकर 0%
भारत $100 बिलियन का अमरीकी आयात बढ़ाएगा -
मगर, अमेरिका का ऐसा कोई commitment नहीं आएगा।
सौदे ��े नाम पर भारत के ख़िलाफ़ ये आर्थिक आघात होता रहा - और PM चुपचाप, हाथ बांध कर, खड़े देखते ��हे।
ट्रंप ने कहा 👇🏼
'नरेंद्र मोदी ने मुझे खुश करने के लिए रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया'
ये भारत का अपमान है- नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए, देश को सच्चाई बतानी चाहिए।
सत्यमेव जयते 🇮🇳
नेश��ल हेराल्ड के फर्जी केस के ज़रिए मोदी–शाह ने कांग्रेस की आवाज़ दबाने की कोशिश की, लेकिन अंततः सच्चाई की जीत हुई।
आज जयपुर में भाजपाई षड्यंत्र के खिलाफ नेता विपक्ष टीकाराम जूली जी, कांग्रेस नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मैंने गिरफ्ता��ी दी।