हमेशा मुस्कराना ज़रूरी नहीं होता
...!!!
— जब पॉजिटिविटी भी बोझ बन जाती है
"सब ठीक हो जाएगा।"
"कम से कम ऐसा तो नहीं हुआ।"
"सोचो, इससे बुरा भी हो सकता था।"
"मुस्कुराओ, सब अच्छा है।"
कितनी बार ये वाक्य हमारे कानों में पड़े हैं — दोस्त से, रिश्तेदार से, कभी खुद से भी। और पहली नज़र में ये वाक्य सहारा लगते हैं, जैसे डूबते को एक शब्दों की लकड़ी मिल गई हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये शब्द, ये ‘पॉजिटिविटी’, किसी दिन हमारे लिए एक बोझ बन जाए?
हां, पॉजिटिविटी भी टॉक्सिक हो सकती है। अजीब लगता है, लेकिन सच है।
हम इंसान हैं। हमारे भीतर दुख, गुस्सा, असंतोष, थकान, भय — ये सब भावनाएं होती हैं, और इनका बाहर आना, महसूस किया जाना, रिश्तों में जगह पाना ज़रूरी है। लेकिन जब समाज या हमारे अपने ही हमसे यह अपेक्षा करने लगते हैं कि हम हर हाल में ‘सकारात्मक’ रहें — तब यह उम्मीद एक बोझ बन जाती है। और यही बोझ धीरे-धीरे हमें अपनी सच्ची भावनाओं से काट देता है।
किसी के खो जाने पर, दिल टूटने पर, नौकरी छूटने पर या सिर्फ थक कर बैठ जाने की इच्छा में भी अगर हमें सिर्फ "पॉजिटिव रहने" की सलाह मिलती है — तो यह हमारी टूटन को नामंज़ूर करना होता है।
"टॉक्सिक पॉजिटिविटी" दरअसल वही है — जब किसी की सच्ची तकलीफ़ को, उनके दर्द को, उनकी कमज़ोरी को यह कहकर ढांपने की कोशिश की जाती है कि "तुम्हें तो खुश रहना चाहिए", "इसमें भी कुछ अच्छा देखो", "कम से कम तुम ज़िंदा हो"।
इसे समझना ऐसे है, जैसे किसी के गहरे ज़ख्म पर फूल चिपका देना — यह सुंदर तो दिखेगा, पर भीतर से रिसता खून अब भी वहीं है।
रिश्तों में यह और भी खतरनाक हो जाता है। जब कोई अपना टूट रहा हो, और हम उसे उसकी भावनाओं को जीने की जगह सिर्फ ‘सकारात्मक सोचने’ की सीख दे रहे हों — तब वह खुद को अकेला महसूस करने लगता है। उसे लगता है कि उसका दुख स्वीकार्य नहीं है, वह स्वयं ‘कमज़ोर’ है।
कभी-कभी तो हम खुद अपने भीतर यह टॉक्सिक पॉजिटिविटी पाल लेते हैं। अपने आप से कहते हैं — "रोना नहीं है", "मज़बूत बनो", "मैं फील नहीं कर सकता", "जो बीत गया वो गया"। लेकिन हमारा मन रोना चाहता है, सिसकना चाहता है, थककर रुकना चाहता है।
क्या होगा अगर हम सिर्फ कुछ पल के लिए "असली" हो जाएं?
अगर हम अपने आंसुओं को बहने दें, अपने किसी प्रियजन से कहें — "मैं आज टूट रहा हूँ", और वह हमें जवाब में सिर्फ गले से लगा ले, बिना कोई सलाह दिए?
हमारे रिश्तों की गहराई वहीं से शुरू होती है — जब हम एक-दूसरे को सुनते हैं, महसूस करते हैं, और यह अधिकार देते हैं कि "तुम आज कमजोर हो सकते हो।"
हम यह क्यों भूल जाते हैं कि प्रकाश की अहमियत तभी है जब अंधेरे को भी जगह दी जाए?
सकारात्मक सोच अच्छी बात है, लेकिन जब यह हमारी संवेदनाओं, हमारी थकान, हमारी असलियत को दबा देती है — तब यह एक मुखौटा बन जाती है। एक ऐसा नकाब, जिसे उतारते-उतारते लोग थक जाते हैं।
हमारे अपनों को, हमारे बच्चों को, हमारे साथियों को यह बताना ज़रूरी है कि जीवन में सब कुछ ठीक होना ज़रूरी नहीं।
कभी-कभी ‘ठीक नहीं होना’ भी ठीक होता है।
तो अगली बार जब कोई अपने दुख के साथ आपके पास आए — तो बस बैठिए, हाथ थामिए, और कहिए,
"मैं सुन रहा हूँ। रो लो। मैं हूँ यहां।"
शुभ प्रभात 🌞☕
जय श्री राधे कृष्ण 🙏🚩
♥️🫂♥️
@Real_Kittu10@DhaniWadhwa2
श्रीकृष्ण नामकरण लीला::
जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब कंस के भय से नन्द बाबा और माता यशोदा अत्यन्त सावधान रहते थे। कुछ समय बाद नन्द बाबा ने सोचा कि बालक का वैदिक संस्कार कराया जाए। तब उन्होंने यदुवंश के कुलगुरु गर्ग मुनि को गोकुल में आमंत्रित किया।
गर्ग मुनि का गोकुल आगमन::
गर्ग मुनि गुप्त रूप से नन्द भवन पहुँचे। नन्द बाबा ने उनका आदर-सत्कार किया और विनम्रतापूर्वक कहा—
संस्कारान् कारयेत् विप्र बालयोर्नन्दनन्दयोः।
अर्थात् इन दोनों बालकों (बलराम और कृष्ण) का नामकरण संस्कार कीजिए।
गर्ग मुनि ने कहा कि यदि सार्वजनिक रूप से संस्कार किया गया तो कंस को संदेह हो सकता है। इसलिए एक गोशाला में गुप्त रूप से नामकरण संस्कार सम्पन्न किया गया।
बलराम जी का नामकरण::
गर्ग मुनि ने पहले रोहिणी नन्दन का नामकरण किया। उन्होंने कहा—
अयं हि रोहिणीपुत्रो रमयन् सुहृदो गुणैः।
आख्यास्यते राम इति बलाधिक्याद् बलं विदुः॥
यह बालक अपने गुणों से सबको आनन्दित करेगा, इसलिए इसका नाम राम होगा। अत्यन्त बलशाली होने से यह बलराम कहलाएगा।
श्रीकृष्ण का नामकरण::
इसके बाद गर्ग मुनि ने नन्द बाबा से कहा—
आसन् वर्णास्त्रयो ह्यस्य गृहीतोऽनुयुगं तनुः।
शुक्लो रक्तस्तथा पीतः इदानीं कृष्णतां गतः॥
इस बालक ने विभिन्न युगों में श्वेत, रक्त और पीत वर्ण धारण किया है, और अब यह श्यामवर्ण धारण करके प्रकट हुआ है, इसलिए इसका नाम कृष्ण होगा।
"कृष्ण" शब्द का अर्थ है — जो सबको अपनी ओर आकर्षित कर ले। वे परम आकर्षक भगवान हैं।
गर्ग मुनि की भविष्यवाणी::
गर्ग मुनि ने नन्द बाबा से कहा—
एष वः श्रेय आधास्यद् गोपगोकुलनन्दनः।
यह बालक सम्पूर्ण गोकुल का कल्याण करेगा और सभी संकटों से रक्षा करेगा।
उन्होंने संकेत दिया कि यह कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि दिव्य पुरुष है जो असंख्य भक्तों का उद्धार करेगा।
वैष्णव आचार्य कहते हैं—
कृषिर्भूवाचकः शब्दो णश्च निर्वृतिवाचकः।
तयोरेक्यं परं ब्रह्म कृष्ण इत्यभिधीयते॥
"कृष" का अर्थ है अस्तित्व और "ण" का अर्थ है आनन्द। जो सच्चिदानन्द स्वरूप परम ब्रह्म हैं, वे ही कृष्ण हैं।
नाम्नामकारि बहुधा निजसर्वशक्तिः
तत्रार्पिता नियमितः स्मरणे न कालः।
— श्री चैतन्य महाप्रभु
भगवान ने अपने नामों में अपनी समस्त शक्तियाँ स्थापित की हैं, और उनके स्मरण के लिए कोई विशेष समय-नियम नहीं है।
🙏🙏जय श्री राधे! जय श्रीकृष्ण! 🙏🙏
@Real_Kittu10
@myogiadityanath जी आप इन कोचिंग माफियाओं पर लगाम लगाओ।
सेफ्टी नाम की इनके यहां कोई सुविधा नहीं होती है।
भेड़ बकरियां की तरह बच्चों को एक ही रूम में रखा जाता है।
"पापा बचा लो, पापा आग लग गयी है पापा बचा लो".. ये आखिरी कॉल थी उस बच्चे की अपने पापा को..
जो उन बाकि बच्चों के साथ अपने उज्जवल भविष्य की तैयारी करने उस कोचिंग सेंटर में था.. जहाँ आज आग लगी थी.. सिस्टम में बैठी MC की पैसों की हvस ने ली है इन बच्चों की जान..
और सिस्टम एक ही दिन सुधरेगा…
जिस दिन किसी मंत्री का बेटा फोन करके बोलेगा “पापा, मैं उसी खुले नाले में गिर गया हूं जिसे सालों से सिर्फ फाइलों में ढका दिखाया जा रहा है… बचा लो पापा..”
जिस दिन किसी सांसद का बेटा तड़पते हुए कहेगा...-“पापा, बाहर का वही मिलावटी खाना खा लिया जो आम जनता रोज खाती है… मेरा लीवर जवाब दे रहा है… बचा लो पापा”
जिस दिन विधायक की बेटी डरते हुए बोलेगी - “पापा, सड़क पर वही लफंगे मुझे घेर रहे हैं जिन पर कभी एक्शन नहीं लिया गया… बचा लो पापा”
जिस दिन किसी बड़े अफसर का बेटा रोते हुए कहेगा- " पापा.. यहाँ आग लग गयी और यहाँ इमरजेंसी एग्जिट नहीं है.. वही सेंटर जिसे आप ही के एक डिपार्टमेंट ने परमिशन दी थी, मुझे बचा लो पापा.. "
और जिस दिन किसी जज का बेटा रोते हुए कहेगा.. “पापा, पुलिस मुझे फर्जी केस में अंदर डाल रही है… वही सिस्टम जो आपने हमेशा ‘ठीक’ बताया… अब मुझे बचा लो पापा. ”
उस दिन के बाद ना कोई फाइल दबेगी, ना जांच लटकेगी, ना बयानबाज़ी होगी… उस दिन सिस्टम भागेगा, दौड़ेगा, और सुधरेगा.. ना कोई रिश्वत लेके ऐसे सेंटरो को परमिशन देगा और माँ इन्हे चलने देगा..
लखनऊ अग्नि कांड हो या कोई और हादसा… जब तक दर्द “उनका” नहीं होता, तब तक हर दर्द सिर्फ खबर बनकर रह जाता है..
यहाँ भी उम्मीद नहीं है मुझे.. कुछ ज्यादा होने की.. आदत है हमारी भूलने की.. 🙏
#lacknowfire
#YogiAdityanath
@Real_Kittu10@DhaniWadhwa2
"भागी हुई बेटी का पिता"
हत्यारे का पिता छुप सकता है
बलात्कारी का पिता छुप सकता है
दंगाई लुटेरे और डकैत का पिता छुप सकता है
लेकिन भागी हुई बेटी का पिता नहीं छुप सकता -
उसका चेहरा बता देता है
कि जिसे बीस पच्चीस बरस दाना पानी दिया
वह चिड़िया फुर्र से उड़ गई..
और मुँह पर फेंक कर गई
बीट में लिथड़े हुए नोचे हुए रंगीन पंख!
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भागी हुई बेटी का पिता
अचानक झुक कर चलने लगता है
बूढा हो जाता है
हफ़्ते भर में
दोगुने हो जाते हैं
दाढ़ी और खोपड़ी के सफ़ेद बाल
शर्ट पर सिलवटें आ जाती हैं
पेंट के पांयचे रगड़ खाते हैं आँगन और सड़कों पर
___
भागी हुई बेटी का पिता
किराने की दुकान बदल लेता है
सब्ज़ी उस ठेले से नहीं खरीदता
जिससे खरीदा करता था
उस नाई से सुँवार नहीं करवाता
जिस नाई को उसके घर के बारे में सब कुछ पता था
भागी हुई बेटी का पिता
रद्दी वाले से
कचरा उठाने वाले से
बागवानी करने वाले से
सबसे बचता फिरता है लेकिन पकड़ लिया जाता है
उसके आँसू चिलकते हैं
जैसे रेगिस्तान के कुएँ में थोड़ा सा पानी!
---
वह अपनी पत्नी को खाने को दौड़ता है
"तूने ही शह दी थी उसे"
वह अपने लड़कों से कहता है
"तुम सब कहाँ मर गए थे सालो"
वह अपने रिश्तेदारों से कहता है
"मेरी परवरिश में कमी थी भाईजी"
वह अड़ोसियों-पड़ोसियों से कहता है
"उसकी मर्ज़ी है / मुझे बताती तो मैं ही करवा देता"
वह अपने आप से कहता है
इससे बढ़िया गोली मार देती मेरे"
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भागी हुई बेटी का पिता
उसे
आधी रात को यह ख़तरनाक ख्याल आता है
उसकी बेटी पर सवार है एक कमीना
नोच रहा है उसका गोश्त
जिसे मैंने नहीं चुना
कोई मेरी बेटी को निचोड़ रहा है
फ़ायदा उठा रहा है उसका
कितनी पागल है मेरी लड़की
कितनी भोली
किसके चक्कर में फंस गई
और फिर वह रात भर आंगन और छत पर चक्कर काटता है
वह जला देना चाहता है
स्त्री की सुगंध
उसे घृणा हो जाती है
उसे सब कुछ से घृणा हो जाती है
उसे अपने आपसे घृणा हो जाती है
---
पुलिस में रिपोर्ट लिखवाने जाता है
तो हँसते हैं पुलिस वाले :
"अजी अपना माल संभालकर रखना था भाईजी"
किसी जानकार वक़ील को फोन करता है
तो वक़ील कहता है
"बालिग़ है / मैं क्या करूँ"
किसी दबंग को फोन करता है
तो दबंग कहता है :
"मैं ऐसे मामले हाथ में नहीं लेता"
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भागी हुई बेटी का पिता
अगर बीड़ी पीता है तो बीड़ी डबल कर देता है
अगर शराब पीता है तो शराब डबल कर देता है
और कुछ नहीं पीता तो ख़ुद का ख़ून पीने लगता है
कोई सांत्वना
कोई उम्मीद
कोई सहारा
कुछ काम नहीं आता
महीनों बाद बेटी फोन करती है घर पर
तो माँ से बात करवाता है
लेकिन ख़ुद बात नहीं करता
दोहिते का जन्म होता है
तो खिलौनों पर खर्च नहीं करता रुपया
नहीं जाता
बेटी के ससुराल
बेटी को अपने घर में नहीं घुसाता
उसके मुँह पर हमेशा गाली रहती है :
"
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भागी हुई बेटी का पिता
हमेशा भागी हुई बेटी का पिता रहता है
मरने को भी होता है तो लोग कहते हैं :
"अजी फलाने की हालत ख़राब है / दस बरस हुए बेटी को भागे / ऐसी रंगत उड़ी कि पागल ही हो गया"
पत्नी समझाती है : गुस्सा छोड़ो!
बेटे समझाते हैं : घर ले आओ बहन को!
रिश्तेदार कहते हैं : अब क्या जान लोगे उसकी!
लेकिन टस से मस नहीं होता
भागी हुई बेटी का पिता
उसकी नाक में चुभती है
बीट में लिथड़े हुए नोचे हुए रंगीन पंखों की गंध!
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आख़िरी वक़्त
जब सब को पुकारता है पिता
भागी हुई बेटी आती है मिलने
मुँह फेर लेता है भागी हुई बेटी का पिता
हालांकि दोहिते के सर पर हाथ फेरता है
जंवाई खड़ा रहता है घर के बाहर
दो टुकड़ों में बंटी हुई बेटी
धड़ से ऊपर
पिता की ओर भागती है
धड़ से नीचे
पति की ओर भागती है
भागी हुई बेटी
तराज़ू का काँटा है
अपनी ही आत्मा में गड़ता हुआ
---
बेटी
पिता से कहती है : सॉरी पापा!
और
इस नुक़ते पर
प्राण पखेरू उड़ जाते हैं पिता के
इस बार
नहीं बोलता
भागी हुई बेटी का पिता बेटी को
कहता है :
"ख़ुश रहो"!
---
भागी हुई बेटी
अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण को कहती है :
"लड़की नहीं होना है तुझे"
"और होना भी है
तो प्यार नहीं करने दूंगी तुझे
कभी नहीं करने दूंगी प्यार"
@Real_Kittu10
ईरान पर तो खुदा का नूर बरस रहा है खुदा इस पर इसी तरह की मेहरबानी करते रहे ।
ईरान के लिए फिर से रोना शुरू करदो क्लिप कटुओं वालो...
ये ईरान का दृश्य है जहां इज़रायल और अमेरिका ने अपना कहर बरपाया है।
इज़राइल ने ईरान पर एक बड़ा ड्रोन हमला किया, रिपोर्ट्स के मुताबिक नुकसान का लेवल देखकर तेहरान हैरान रह गया।
इलाके में तनाव अब बहुत गंभीर लेवल पर है।
इधर अमेरिकी एयर स्ट्राइक ने दक्षिणी ईरान स्थित
IRGC कमांड सेंटर के अलग चीथड़े उड़ा डाले हैं
कल ही ईरान ने अमेरिका को सबक सिखाने की
बात बोली थी लेकिन 12 घंटे से भी कम समय में
ही इरान को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ा..
US ने तेहरान के पास एक बड़े ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांड सेंटर को 49 टॉमहॉक मिसाइलों से तबाह कर दिया।
उनका एक “सबसे मज़बूत” हब… मिनटों में खत्म हो गया 😂
“अजेय” सरकार बहुत कमज़ोर लग रही है।
IRGC के मेन ऑफिस पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
कई लीडर मारे गए हैं।
अमेरिका नहीं दिखा रहा रहम
रात से ही ईरान को वीरान करने का प्लान तैयार था
अल सुबह ईरान के सबसे बड़े मिलिट्री बेस अल उजुहुबा को तबाह कर आग में मिला दिया
जितने भी छाती पीटने वाले हैं ,जल्दी जाए ईरान के स्पोर्ट में क्यों कि तुम्हारे अब्बुल जान का आखिरी समय चल रहा है।
@Real_Kittu10@yagnaja
चाँदी का वर्क: आपने मिठाइयों पर चाँदी जैसा वर्क देखा होगा। इस वीडियो में जो दिखाया जा रहा है, वह चाँदी जैसा दिखता है पर असल में रांगा (Tin) है।
पहले के समय में पीतल के बर्तनों पर जो कलई की जाती थी, यह उसी प्रकार की धातु है।
अब चूंकि चाँदी और रांगे के वर्क में अंतर करना सबके लिए आसान नहीं है, इसलिए बहुत से पान वाले या मिठाई वाले इसे ही चाँदी का बताकर बेच देते हैं;
जबकि यह बहुत जहरीला होता है और स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचाता है। चूंकि हाथ से बनने वाले वर्क को चमड़े के बैग में कूटा जाता है, इसलिए आजकल मिलावटखोर मशीन से बने होने का बहाना बनाने लगे हैं कि—"यह तो मशीन से बना हुआ है, शुद्ध है, नकली नहीं है" आदि-आदि।
अब इसे पहचानने के 3 तरीके हैं, जिनमें से 2 सबसे आसान हैं:
चमक देखना: मान लीजिए किसी मिठाई या पान पर यह लगा है, तो इसकी चमक देखिए। असली चाँदी का वर्क बहुत ज्यादा चमकता नहीं है, बल्कि बहुत हल्की सी रोशनी ही रिफ्लेक्ट (paravartit) करता है।
आपका प्रतिबिंब उसमें नहीं दिखेगा या बहुत धुंधला दिखेगा। इसके विपरीत, रांगे का बना हुआ वर्क बहुत चमकदार होता है, जैसे उस पर पॉलिश की गई हो।
मसल कर देखना: अगर जहाँ से आप सामान ले रहे हैं, उसके पास इसका नमूना है, तो उसे दो उंगलियों के बीच में या फिर हथेली के बीच रखकर एक उंगली से मसलिये। शुद्ध चाँदी का वर्क बिना टूटे या बिना बिखरे एक महीन तार की तरह सिमट जाता है। आप इसे जलाएँगे, तब भी यह एक तार या बारीक मोती की तरह सिमट जाएगा। वहीं रांगे के वर्क को यदि आप दो उंगलियों या हथेली में लेकर मसलेंगे, तो वह भुरभुरा (पाउडर जैसा) होकर हथेली में ही चिपक जाएगा।
ठीक ऐसा ही सोने के वर्क के साथ भी है।
इसे बनाने के लिए बकरे या फिर अन्य मृत जीवो की चमड़ी के बैग का उपयोग होता है। जब इसे कूटकर बनाते है तब बीच-बीच मे चैक करने के लिए एक अंगुली पर थूक लगाकर उसे सही से सेट किया जाता है।
यह सबसे अशुद्ध है, पूजा में तो उपयोग करना ही अपराध है। शेष सभी के स्वविवेक पर निर्भर है।
@yagnaja@DhaniWadhwa2
लखनऊ में एक मुस्लिम डिजिटल क्रिएटर ने शिकायत की है कि हिंदू मकान मालिक उसे फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर रहे हैं।
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हिजाब पहनकर मुस्लिम इलाके में क्यों नहीं कोशिश करतीं?
मुसलमानों पर भरोसा नहीं है क्या...?
......."खेला होबे"...का मतलब अब मोमता दीदी की समझ मे आ रहा होगा....वो "खेला होबे-खेला होबे" करती रही और असली खेला उनके साथ ही हो गया....TMC सिर्फ टूटी नहीं....बल्कि TMC मोमता के हाथ से ही निकल गई....80 मे से 60 विधायकों ने दीदी और भतीजे को पार्टी से बाहर कर खुद पार्टी पर कब्जा कर लिया....विधानसभा मे विपक्ष का नेता भी चुन लिया...और विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता भी दे दी...........अब मोमता ना तो मुख्यमंत्री हैं...न विधायक...ना सांसद....और राज्यसभा मे जाने की जो बचा खुची संभावना थी....वो भी खत्म ही गई...अब 20 विधायक उन्हें राज्यसभा तो नहीं भेज सकते....इसे कहते हैं असली खेला....मतलब इनकी राजनीति तो खत्म. .....
.......सबसे बड़ी बात ये है कि जिन 60 विधायकों ने ये किया....उनमे से ज्यादातर मुस्लिम हैं...यानि...जिनके लिए मोमता ने खजाना खोल रखा था...उन्होंने ही तिजोरी पर डाका डाल दिया....खैर....डूबती नाव मे कौन बैठना चाहेगा....सबको अपना भविष्य देखना है....और अगले 5 साल तो बंगाल मे कुछ होने वाला नहीं...और 5 साल बाद मोमता 80 साल की हो जाएंगी तो उनकी राजनीति तो वैसे ही खत्म है....भतीजे के साथ कोई रहना नहीं चाहता....क्यूंकि एक तो उसका attitude...दूसरे पता नहीं वो कब जेल चला जाए....तो भविष्य यही है...कि अलग होके इनसे पीछा छुड़ाया जाए....
.....BJP बस मजे ले रही है....वो TMC के किसी विधायक को BJP मे नहीं आने देगी...क्यूंकि वो नहीं चाहती कि TMC खत्म हो....क्यूंकि TMC खत्म होगी तो कॉंग्रेस और लेफ्ट को बंगाल में फिर से खड़े होने का मौका मिलेगा....और उनकी राजनीति दोबारा बंगाल मे शुरू हो....ऐसा BJP किसी क़ीमत पर नहीं चाहेगी...तो उसके लिए ये अच्छा है कि TMC ही रहे लेकिन बिना बुआ-भतीजे के.....ये ज्यादा फायदे वाली बात है....
.....लेकिन कमाल है ना....15 साल एकछत्र शासन करने वाली दीदी के साथ ऐसा होगा....वो भी चुनाव हारने के एक महीने के भीतर...ऐसा शायद ही किसी ने सोचा होगा.....और ये एक सबक भी है उन पार्टियों के लिए....जो सिर्फ एक खास वोटबैंक के भरोसे बैठी हैं....जो मोमता के साथ हुआ....वही उनके साथ भी होगा....
जय श्रीराम 🙏🚩
@Real_Kittu10@yagnaja@sarikatyagi97
कुछ समझो नैरेटिव कैसे सेट किया जाता है और कैसे तोड़ा जाता है।
अपराध पर न्याय विवेचना या न्याय मीमांसा करते समय हरेक समाज की #आस्था को केंद्र में रखना होगा। नहीं तो संभव नहीं है कि किसी भी अपराध के #वैचारिक_स्रोत तक पहुंचा जा सके। वो कौन से विचार हैं? या विश्वास है? जिससे प्रेरित होकर कोई अपराध होता है?
दिल्ली अग्निकांड में एक नाम आ रहा है, किन्हीं रियाजुल खान साहब का। रेस्टोरेंट के बगल जिनकी गद्दों की दुकान है। आग लगी तो जमीन पर गद्दे बिछा दिए। तह के ऊपर तह बना दी। जिन पर ऊपर से कूद कर सात या आठ व्यक्तियों की जान बच गई।
बहुत अच्छा काम। चौतरफ़ा सराहना होनी चाहिए। हो भी रही है। लहालोट हुआ #₹NDTV का एक पत्रकार बता रहा था, रियाज साहब को करीब एक-डेढ़ लाख का भारी नुकसान हुआ, पर रियाज साहब को तनिक परवाह नहीं। इसे #इंसानियत की मिसाल बताया जा रहा है। साथ में पिरोया तर्क है, लेकिन जब बुलडोजर चलता है तो #नफरती खूब शोर मचाते हैं..! आज चुप हैं।
बेशक! रियाजुल साहब ने इंसानियत की खिदमत की। बड़ी बात यह है, #मुसलमान होकर किया। हिन्दू-मुसलमान में फर्क नहीं किया। वाह! वाह!
लेकिन बतौर #नागरिक_समाज एक सवाल है, एक #मुसलमान की पहचान खोड़ा में #असद के मामले में कहां चली जाती है? तब असद साहब का मसला #लॉ_एंड_ऑर्डर का हो जाता है?
माना अपराध हुआ, पर अपराध से अपराधी के आस्था की पहचान तो नहीं छिन जाती? ऐसा है क्या?
दूसरे, यह क्या दलील है, बुलडोजर पर खुशी मनाता नफरती समाज? यह क्या मसला है भाई? डेढ़-दो लाख के #चंद_गद्दों के एवज में अरबों की जमीन पर #अवैध_कब्जों को कबूल कर लिया जाए? नागरिक समाज को #अराजकता के हवाले कर दें? देश को #गटर बनने दें?अच्छा सौदा है?
दरअसल, ऐसे मसलों पर बोलना नहीं चाहता। लेकिन जब हर बात पर #हुकूमत_का_मजहब कायम करने का एकमात्र मकसद हो? संविधान सम्मत नागरिक समाज को बौद्धिक स्तर पर अपाहिज करने की साजिश हो तो चैन से #गाय_चराना थोड़ा मुश्किल है।
मूल सवाल यही है, अपराध से ज्यादा अपराधी की #आस्था पर मीमांसा हो। भले अपराधी हिन्दू हो या मुसलमान! आस्था को खारिज कर ना अपराध से निदान संभव है। ना अपराधी से।
कुछ समझो नैरेटिव कैसे सेट किया जाता है और कैसे तोड़ा जाता है।
छपरी कोचिंग माफियाओं के बारे में अंजना ने जो बोला वो कुछ गलत नहीं बोला,,जो विषय के अलावा घंटे भर में चालीस मिनट बस बकवास करते है।और बीस मिनट पढ़ाते है।
अच्छे कोचिंग वालो की तारीफ भी की,इसलिए अच्छे कोचिंग वालो को तो खुशी होनी चाहिए !!! पर बुरा सबको लग रहा,,क्या सब खुद को छपरी ही समझते है ???
@Real_Kittu10@yagnaja
क्या सचमुच एक पूरा परिवार रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया था?
एक ऐसी कहानी जिसमें आरोप हैं, सवाल हैं, गुमशुदगियाँ हैं और कई अनुत्तरित रहस्य हैं। वर्षों बाद भी कई लोग पूछते हैं कि आखिर उन लोगों के साथ हुआ क्या था?
वीडियो देखें और स्वयं निर्णय करें।
सवाल आज भी बाकी हैं...??
#Mystery #UnsolvedCase
@Real_Kittu10@yagnaja
लो कर लो बात 😂😂
बेदर्दी योगी जी ने 72 हूरों का पूरा चैप्टर तक पढ़ने नहीं दिया और उससे पहले ही मदरसा गिरवा दिया.....अल्पसंख्यकों के साथ कितना जुल्म हो रिया है.....😂 भविष्य के आतं-कवादियों की भ्रूणहत्या करवा दी....🤣
@Real_Kittu10@yagnaja
*UP वाले बाबा @myogiadityanath जी तो*...
*जादूगर निकले*
🤣🤣
रातों रात मस्जिद को
गायब कर दिया,
रात में देख कर गयी थी
यह मोहतरमा, ☝️
*सुबह उठ कर देखा तो नामो निशान नहीं* ये अल्ला का चमत्कार है तुम लोगों से परेशान होकर वो भी निकल लिए । 😂
भाषाओं की लीला दिखाने के बाद अब हुआ रातों रात गायब करने वाला जादुई लीला
योगी जी महाराज, Day by Day 😂😂😂
मैं तो कहता हूं कि भारत के सूअरों के साथ ठीक वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए जैसा पाकिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं के साथ वहां के सूअरों द्वारा किया जाता है तभी प्राकृतिक न्याय का सन्तुलन बन पाएगा और किसी को किसी से शिकायत नहीं रहेगी।
सत्यमेव जयते ✊🇮🇳
@Real_Kittu10
खतना खान कोचिंग सेंटर भाग 2
बकरी 🐐 ईद मे ज्ञान गैंड के रास्ते निकल जाता है इनका चादरमोद जिहादी 🐷🐷🐷
कट 2 AA अपने माँ बहन का सगा नही तो और किसी का क्या होगा।
खतनाई खान की फजीहत हो रही है..खतनाई खान सोच रहा था उके लाखों फॉलोवर हैं तो कुछ भी बकचोई पेलेंगे और जनता मान लेगी...
उसने फायरिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए...
सीसीटीवी जांच में कुछ नही मिला... जबकि खतनाई खान ने खुद अपने गार्डों से गोलियां चलवाई थी जिसका वीडियो इस पोस्ट में मौजूद है।
फिर खतनाई खान ने कहा वो सस्ती शिक्षा दे रहे हैं इसलिए रोशन यादव सर ने कांड करवाया...
रोशन आनंद यादव सर ने खतनाई खान की पोल खोल दी... उनकी फीस खतनाई खान से भी सस्ती है...
अब मैटर शांतिदूत vs जादो जी हो गया है...
जो बड़े बड़े एकाउंट वोटबैंक के चक्कर मे खतनाई खान के साथ खड़े थे... अब वो खुलकर रोशन यादव सर के साथ खड़े हैं...
खतनाई खान के पास सिर्फ मियां समर्थक बचे हैं...
खतनाई खान ने पड़ी लकड़ी ले ली है इस बार!! 🙂🙂
🎭💰 खतनाई खान का झूठ: फायरिंग का वीडियो उजागर, अंजना ओम कश्यप विवाद और धंधे का खेल!
फैसल उर्फ खतनाई खान ने कल ही कहा था — "बगल के कोचिंग वालों ने फायरिंग की, 10 राउंड तो हम खुद सुने हैं।"
#लेकिन इस विवाद में तब नया मोड़ आ गया जब एक नया वीडियो सामने आया — गोलीकांड खतनाई खान के अपने सुरक्षा गार्ड ने किया था। पुलिस ने उसके दोनों गार्ड्स को गिरफ्तार कर लिया है, उनकी राइफलें जब्त कर ली हैं, और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
यानी अब मामला सिर्फ एक कथित फायरिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साफ हो गया कि कहानी जितनी बाहर से दिखाई गई, उतनी सीधी थी नहीं। यह सिर्फ झूठ नहीं, चालबाजी थी — एक तो कंपीटर को फँसाने के लिए, दूसरा एक और विवाद के बहाने धंधा चमकाने के लिए।
खतनाई फैसल खान का बिजनेस मॉडल इतना साफ दिखने लगा है कि अब उसे समझने के लिए किसी बहुत जटिल विश्लेषण की जरूरत भी नहीं पड़ती। विवाद पैदा होता है, नाम ट्रेंड करता है, वीडियो चलते हैं, और Views अपने-आप बढ़ते जाते हैं; यही वह पैटर्न है जिसने उन्हें एक शिक्षक से ज्यादा एक मीडिया-ड्रिवन पब्लिक फिगर बना दिया है।
#इसी पृष्ठभूमि में मई 2026 का अंजना ओम कश्यप @anjanaomkashyap विवाद सामने आया। Aaj Tak के शो 'हल्ला बोल' में उन्होंने YouTube शिक्षकों पर तीखी टिप्पणी की, जिसमें “दो कौड़ी के टीचर”, “बिना ज्ञान के फ्रॉड” और “सिर्फ व्यूज बटोरने और पैसा कमाने के लिए शिक्षा का धंधा चला रहे हैं” जैसी भाषा का इस्तेमाल किया गया।
हालांकि अंजना ओम कश्यप के इस तरह के शब्दावली प्रयोग को मैं उचित मानता हूं।
अंजना एक अच्छी पत्रकार हैं, किंतु जो शब्दावली उनके व्यक्तित्व और उनके पेशेवर स्तर को सूट करती है, उसे उपयोग करते रहना चाहिए।
किंतु उनके उस बयान का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है।
#NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे के बीच जब छात्र गुस्से में थे और YouTube शिक्षक आंदोलन का समर्थन कर रहे थे, तब उनकी टिप्पणी ने एक नए टकराव को जन्म दिया। अंजना का रुख यह था कि कुछ ऑनलाइन शिक्षक छात्रों की भावनाओं का लाभ लेकर अपनी Viewership और कमाई बढ़ा रहे हैं, और यही बात विवाद को और गहरा कर गई।
खतनाई फैसल खान ने इस पर तुरंत और आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उसने अपने अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा: “कहती हैं कि टीचर सबको कुछ आता-जाता नहीं है... अच्छा? तो तुम ही पढ़ाओ, हम लोग पढ़ने आ रहे हैं!"
"पढ़ाओ कि 2000 के नोट में चिप लगा हुआ है! पढ़ाओ कि कैसे तलवे चाटे जाते हैं!”
कुछ दिनों पहले इसी खतनाई खान ने अंजना के पुतिन इंटरव्यू को लेकर और भी कड़ा बयान दिया — “अंजना का यह लेवल है कि वह पुतिन का इंटरव्यू करे?” — और कहा कि अंजना का काम है “लड़वाना”, यानी एक-दूसरे को लड़वाती हैं।
उसने मुख्यधारा मीडिया पर भी सवाल खड़े किए और इसे एक ऐसे टकराव में बदल दिया जिसमें मुद्दा शिक्षा से हटकर व्यक्ति, प्रतिष्ठा और प्रभाव की लड़ाई बन गया।
यही खतनाई फैसल खान की खासियत भी है और समस्या भी: हर आलोचना को वे ऐसे मोड़ देता है कि वह उसके लिए नई पहुंच, नया ट्रैफिक और नया समर्थन बन जाए।
अगर हर विवाद के बाद किसी शिक्षक की पहुँच, दृश्यता और ब्रांड वैल्यू बढ़ती हो, तो क्या यह मानना बहुत कठिन है कि विवाद अब आकस्मिक नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन बन चुके हैं?
#सोशल मीडिया और कोचिंग उद्योग का यह खतरनाक गठजोड़ यही सिखाता है कि जितनी बड़ी भाषा, उतना बड़ा ट्रैफिक; जितना बड़ा टकराव, उतनी बड़ी भीड़; जितना तीखा बयान, उतनी ज्यादा कमाई।
इस मॉडल में विषय, छात्र और शिक्षा धीरे-धीरे पीछे छूट जाते हैं, और केंद्र में रह जाता है व्यक्ति, उसका ब्रांड, उसकी भीड़ और उसकी कमाई।
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@Real_Kittu10
यूपी के शामली में जाट परिवार जो 5 साल पहले मुसलमान बना उस परिवार का चौधरी #आयुष_मलिक से #रहमान बनकर शामली #मस्जिद में नमाज पढ़ते हुए, इससे बड़ा और सबूत क्या होगा #धर्मांतरण का
शामली पुलिस प्रशासन इस जाट परिवार का धर्मांतरण कराने वाले #मौलवी को और चांदनी कुरैशी के परिवार को #धर्मान्तरण में गिरफ्तार करें यदि गिरफ्तारी नहीं होती है तो एक दो दिन में आन्दोलन की तारीख की घोषणा की जायेगी शामली में #कुरैशी #बस्ती में चांदनी कुरैशी के घर और जिस मदरसे में धर्मान्तरण किया गया उस #मदरसे का भी #ऐतिहासिक घेराव करके धरना दिया जायेगा आप सभी हिन्दू वीर वीरांगना इस बडे आन्दोलन के लिए तैयार रहें ।
स्वामी यशवीर महाराज जी का आह्वाहन सभी जाट भाइयों तक पहुंचे।
@myogiadityanath@myogioffice
योगी जी ने “टोंटी चोरी” का जिक्र किया तो पूरा मंच मुस्कुरा उठा ..😜🔥
कहा— “हमने हर घर नल योजना को आगे बढ़ाया, लेकिन कुछ लोग टोंटी ही चोरी कर ले गए!” ..😂
उस एक मुस्कान में तंज भी था, संदेश भी था और व्यवस्था पर कटाक्ष भी ..
**ये मुस्कुराहट की गूंज दूर तक जाएगी ..😄🚰
डॉन 3 तो बहाना है...😎
रणवीर सिंह से पूरे बॉलीवुड माफियाओं और लेफ्टिस्ट की जली पड़ी है...😩
RSS के कार्यक्रम में जाना...🫡
लगातार मंदिर जाकर सनातन को बढ़ावा देना...🚩
मोदी जी की तारीफ करना...👏
धुरंधर 1 और 2 बॉकबस्टर हो जाना...💪
बॉलीवुड माफियाओं की नींद हराम कर दी है भाई ने...❣️
@RanveerOfficial@yagnaja@Real_Kittu10