जमुई में एक नाबालिग बेटी के साथ जो कुछ हुआ, उस पर तमाम विपक्षी पार्टियों के नेता बोल रहे हैं, बोलना भी चाहिए क्योंकि मामला बेहद निंदनीय है। लेकिन JNU में एक प्रोफेसर के द्वारा 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर ये तमाम नेता मौन हैं.
क्योंकि आरोपी प्रोफेसर कांग्रेस पार्टी का सांसद है.
गजब का दो���लापन है.
@BJP4India @JNU_official_50 @ABVPcentral @INCIndia
#JNU #SexualHarassment #DoubleStandards
सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास के PG खाली कराए गए हैं और बच्चों के मेस भी बंद हो गए हैं।
ऐसे मुश्किल वक्त में NSUI छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। छात्रों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है और हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है।
#SOSNSUI
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देह अपनी चिकित्सा खुद ही करती है.
कोल्ड फ़्लू होते ही कफ़ बनता है, गला सूज जाता है और शरीर में ज्वर हो जाता है. यह शरीर की स्वाभाविक प्रतिरक्षा प्रणाली है.
शरीर का कोई हिस्सा कहीं जोर से टकरा जाए तो तुरंत ही वहां एक गुमड़ा बन जाता है.
चोटिल टिशू��� की मरम्मत के लिए हजारों कोशिकाएं वहाँ भेज दी जाती हैं. तुरंत...तत्क्षण !
किसी अन्य मदद आने के बहुत पहले !
कोई घाव हो तो देखिए वह धीरे-धीरे सूखता है.
एक दो दिन उसमें पपड़ी बनती है. फिर कोई बीस पच्चीस दिन में वह पपड़ी स्वतः ही झड़ जाती है. और ता��़ा त्वचा प्रकट हो जाती है.
एक बहुत ही कौशल से भरा, सजग और ध्यानस्थ चिकित्सक हमारे भीतर मौजूद है.
उसकी भाषा..संकेत है.
अगर ज़रा सी उठ बैठ में थकान लगे.. तो यह संकेत है कि शरीर को विश्राम चाहिए.
ज़्यादा खाया न जाए, तो यह संकेत है कि शरीर को अल्प-आहार चाहिए.
ठंड लगे, तो कुछ गर्म ओढ़कर शरीर को ऊष्मा दी जाए.
वह भीतरी डॉक्टर, बोलकर नहीं बल्कि संकेत की भाषा में सजेशन देता है.
कब क्या खाना है, कितना व्यायाम, ��ितनी ऑक्सीजन, कितनी धूप चाहिए.. वह इशारा कर देता है.
चाहे हृदय की चिकित्सा हो कि मस्तिष्क चिकित्सा,
आहार नली का संक्रमण हो कि ओवरियन सिस्ट..दुनिया का सबसे काबिल डॉक्टर हमारा शरीर खुद ही है.
किसी वायरस या बैक्टीरिया का आक्रमण होता है अथवा किसी खाद्य दोष से संक्रमण होता है.. तो शरीर, तत्क्षण उससे जूझने में प्रवृत्त ��ो जाता है.
हमें तो ख़बर तब लगती है.. जब इस भीतरी युद्ध के परिणाम..ज्वर, श्लेषमा (कफ, ब्लगम), ठंड, कमज़ोरी के रूप में बाहरी शरीर पर उजागर होते हैं.
अगर देह की सांकेतिक भाषा को सुनने का अभ्यास हो, तो बहुत आरंभ में ही रोग का नाश किया जा सकता है.
चाहे कितना ही जटिल रोग क्यों न हो, उपचार की सर्वोत्तम व्यवस्था शरीर में ही मौज़ूद है.
उसे हमसे कुछ सहयोग और रसद आपूर्ति की दरकार है.
ऑक्सीजन भरपूर, ठीकठाक पानी , प��्य-कुपथ्य, चित्त की प्रफुल्लता आदि,
और हम बड़े से बड़े रोग को मात दे सकते हैं.. कैंसर को भी.
किंतु देह की हमसे कुछ न्यूनतम अपेक्षाएं भी हैं.
एक , कि देह में अपशिष्ट और टॉक्सिंस इकट्ठे न हों, और अगर हो जाएं, तो उनका पूरी तरह उत्सर्जन भी हो.
दूसरा, मन में भी अपशिष्ट और टॉक्सिंस न र��ें. (ग्रजेस, कुंठा, बदला, शोक)
क्योंकि ज्यादातर रोग, मनोदैहिक होते हैं.
पहले विचार बीमार होता है फिर..
......!
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#औ_का
सरकारी स्कूल के खराब हालत की जिम्मेदार कांग्रेस है।
कांग्रेस वर्��ों तक देश की सत्ता में रही तो सरकारी स्कूल को बदल क्यों नहीं दिया।
मुझे कांग्रेस सरकार से खासकर ज्यादा गुस्सा इसलिए है क्योंकि वो लोग वर्षों तक सरकार में रहे लेकिन सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं किया।
: सोनम वांगचुक
सुबह उठते ही विद्यालय की तैयारी में लगे बच्चे के पास इतना समय भी नहीं होता कि वह भगवान जी के समक्ष एक अगरबत्ती जलाकर खड़ा हो जाए। उसे
"कराग्रे वसते लक्ष्मीः,करमध्ये सरस्वती!
करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते करदर्शनम्॥"
श्लोक याद करा दो तो उसके पास समय नहीं कि वह इसे दोहरा ले। वह इसके प्रभाव को कभी अनुभूत न कर सकेगा। उसके पास सूर��य नमस्कार करने का समय नहीं है। व्यायाम करने का समय नहीं है। जो पाठ उसे सीखना है, उसे देखने का समय नहीं है। कोई खेल खेलता है तो उसके अभ्यास का समय नहीं है।
बच्चा उठता है और जल्दी जल्दी हॉर्लिक्स अथवा चौकोस मिला हुआ दूध पीता है। यही उसका नाश्ता है। पौने छह बजे बच्चा खाए भी तो क्या? जल्दी जल्दी उसका टिफिन रेडी होता है और वह लेकर विद्यालय चला जाता है।
जिन बच्चों को खिलाने में मां, दादी नखरे उठाती हैं और संतान सुख प्राप्त करती हैं, उन बच्चों को एक डिब्बे में रोटी/परांठा ठूंस कर थमाकर भेज दिया जाता है। वह जाने कैसे खाता है, जाने कैसे भोजन मंत्र करता है, किसी को नहीं पता!
इसलिए सुबह सुबह विद्यालय भेजने का यह तरीका अपसंस्कृति का परिचायक है। यह ऐसी पीढ़ी का निर्माण कर रही है जिसने जीवन जीने का सुसंस्कृत ढंग नहीं जाना।
मैं कहूंगा कि सुबह के शिफ्ट में 7:00-2:00 बजे तक क�� विद्यालय की टाइमिंग बंद करो! बच्चों से उनका बचपन और सीखने का समय न छीनो।
और हाँ, कोचिंग बंद करो।
#SchoolEducation
गुजरात में सांस�� — 26
बिहार में सांसद — 40
फिर भी फर्क देखिए—
गुजरात के लोग फैक्ट्री के मालिक हैं,
और बिहार के लोग उसी फैक्ट्री में मजदूर,
क्योंकि समस्या सिर्फ नेताओं की नहीं है, हमारी राजनीतिक सोच की भी है।
हम बिहार में आनंद मिश्रा जैसे नेताओं को ट्रेन रुकवाने वाला काम करने के लिए चुनते हैं, इंडस्ट्री लगवाने के लिए नहीं।
हमें चुनाव के समय बड़ी-बड़ी बातें करने वाला नेता चाहिए, लेकिन ��ुनाव जीतने के बाद जमीन पर काम करने वाला नहीं।
हमारे लिए ट्रेन का ठहराव ही विकास बन गया है,
फैक्ट्री, निवेश, रोजगार और इंडस्ट्री की बात करने की हिम्मत ही नहीं होती।
और अगर कोई बिहार में इंडस्ट्री की बात कर दे तो तुरंत ज्ञान शुरू—
>बिहार में Infrastructure नहीं है…
>बिहार में Skilled Labour नहीं है…
भाई, ये सब 20 साल से किसकी सरकारों की जिम्मेदारी थी?
अगर 20 साल सत्ता में रहने के बाद भी Infrastructure और Skill नहीं बना पाए,
तो फ���र विकास के नाम पर वोट किस बात का मांग रहे हो?
दूसरे राज्यों ने फैक्ट्रियां खड़ी कीं, रोजगार पैदा किया और अर्थव्यवस्था बनाई।
हम अभी भी पूछ रहे हैं—
हमारे गांव में ट्रेन रुकेगी या नहीं ?😐
मुझे बच्चों के विद्यालय की टाइमिंग 7:00AM-2:00PM आज तक समझ में नहीं आया। बच्चों की सुबह कभी भी सुखद और सुकून वाली नहीं होती। वह सोकर उठते ही विद्यालय की चिंता करने लगते हैं। न संध्या वंदन और न योगाभ्यास आदि! ठीक से कलेवा करने का अवसर भी नहीं रहता। शायद ही कोई बच्चा पाठ पढ़कर विद्यालय जाता हो, जिसे अध्यापक कक्षा में पढ़ाएंगे!
खड़ी दुपहर को वह लौटते हैं। उन्हें ठोक पीटकर सुलाया जाता है जो स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है।
यदि कोई ध्यान से देख रहा है तो वह इस समय सारिणी में बदलाव करने पर विचार करे। सही समय 10 से 4 का ही है।
और हाँ, कोचिंग बंद करो!
#SchoolEducation
अभिजीत दीपके
आशुतोष रांका
सौरव दास
ये कोई साधु संत नहीं हैं बल्कि इनकी अपनी खुद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा है और उसी के लिए मेहनत कर रहे हैं।
ये कहना है सोनम वांगचुक का।
ये बातें तो उसी दिन से स्पष्ट हो गई थीं जब अभिजीत दीपके एयरपोर्ट पर लैंड हुआ था और नेता लोग ऐसे ही बनते हैं चाहे वो
किसी प्रोटेस्ट का सहारा लें या फिर किसी अन्य मुद्दे का सबका मकसद सिर्फ एक होता है नेता बनना और यही अंतिम सत्य है।
पहले इस तस्वीर पर गौर कीजिए और बीजेपी में ये होने की कल्पना कीज��ए फिर ये पढ़िए👇
राहुल गांधी को उम्मीद के तौर पर देखने वालों के ही मन में ये सवाल होता था कि राहुल गांधी जिस तरह की अच्छी बातें करते हैं वो बातें कांग्रेस के दूसरे नेताओं में और उनकी जहां सरकारें हैं वहां क्यों नहीं दिखाई देतीं...❓
अच्छी बात ये है कि अब राहुल गांधी का असर पूरी कांग्रेस में दिखने लगा है और जिन राज्यों में उनकी सरकार है वहां भी दिखने लगा है।
ये तस्वीर कर्नाटक की एक यूनिवर्सिटी कैंपस की है जहां के स्टूडेंट को कुछ समस्याएं थीं उन्होंने अपनी बात सी��म दफ्तर तक पहुंचाई और फिर वो हुआ जो उम्मीद से बढ़कर था। खुद स्टेट के सीएम डीके शिवकुमार और होम मिनिस्टर प्रियांक खड़गे यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे और स्टूडेंट की समस्याएं को सुना...
ये आज के दौर में बहुत बड़ी बात इसलिए है क्योंकि देश में ऐसी सरकार चल रही है जो 20 दिन से ज्यादा बच्चे अनशन पर बैठे रहते हैं और सरकार की तरफ से उनसे कोई मिलन तक नहीं जाता मिलने जाना तो छोड़िए एक बयान तक जारी नहीं किया जा��ा।
अगर राहुल गांधी का ये मॉडल कि स्टूडेंट की बातों को सबसे पहले सुना जाना जाए, दूसरे राज्यों में भी सही से लागू कर दिया गया तो बाकि विध्वंस वाले बुलडोजर मॉडल धरे रह जाएंगे...
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
देश की पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत और सशक्त बनाने के साथ ही कंप्यूटर एवं संचार क्रांति लाकर युवा, आधुनिक एवं सुदृढ़ भारत के निर्माण में उनका योगदान अतुल्य है।
मीडिया को इसमें इंटरेस्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री कौन बनता है!
उसे यह बताने की जल्दी है जो नहीं बना वह क्यों नहीं बना?
इसके लिए राहुल कितने दोषी हैं।
और ना बनने वाला किस तरह राहुल की राजनीति खत्म कर देगा।
और पूर्व में इसी तरह की राहुल से कितनी गलतियां हुई हैं।
कहानी यह है!
BJP cruises to a landslide victory in Uttar Pradesh municipal elections, leads in 16 of the 17 corporation seats. Congress and the SP so far set to score a blank.
Shocked by the news of a doctor being stabbed to death, on-duty, in Kerala. My deepest condolences to Dr. Vandana's family & friends.
Our healthcare professionals put their lives on the line to save those of others. Their safety must be among Govt’s top priority. (1/2)