मोदीजी के ऑस्ट्रेलिया से निकलते ही वहां के चैनल 7 ने उनकी पोल खोल दी। बताया कि कैसे भारत की जनता, यहां के मंदिरों और टैक्स के पैसे को लूटकर 30 हज़ार भारतीयों को चार्टर्ड फ्लाइट से मेलबर्न लाया गया।
भारत-लूट ही भिसगुरु की ताकत है।
अब समझ आया कि चंदाचोरी का पैसा कहां जा रहा है?
🤨
एक अफ़्रीकन हाउस मेड अपने देश लौट रही है। उन बच्चों को देखिए जिनका वो टेक केअर करती थी। हमे लोग काले- गोरे, अमीर-गरीब दिखते हैं।
बच्चों को बस प्यार समझ आता है। अगर दुनिया में बच्चों का शासन हो जाये तो सिर्फ प्यार ही रहेगा, नफरत की कोई जगह नहीं होगी।।
सुप्रभात 🥀🖤
Journalist : Do you need change in UP?
Women : No, Yogi ji is doing good work
Journalist : How can you say that?
Women : Because i watched DHURANDAR movie & understood everything 😭😭
This is how propaganda movies work 🫡
If you want to understand how badly we have been ruined by Modi, just watch this video.
The reason we are being treated as cockroaches is becaue as a nation we have stopped valuing hard work, integrity, politeness, and more importantly the art of dialogue.
India needs a reset.
heart-wrenching video. A cruel man tied an innocent girl with a rope because she had plucked guava from his tree. 💔
What kind of society are we living in where this innocent girl is being treated inhumanely for a guava?
एक बार शादी समारोह के उपरांत एक बारात वापस लौट रही थी। जंगल का रास्ता था और समय पर बाराती जंगल पार नहीं कर पाए.... 😀
रात हो गई तो वे रास्ता भूल गये। फिर सुबह हुई लेकिन दिन भर भटकने के बाद भी उन्हें कोई गांव न मिला।
आखिर भूखे प्यासे वे कब तक रहते❓😎 किसी तरह उन्होंने एक नदी ढूंढ़कर प्यास तो बुझा ली,लेकिन अब समस्या खाने की थी.... 😎
जंगल में कौओं को छोड़कर और कोई पशु पक्षी भी नहीं दिखाई दे रहे थे।
भूख से बिलबिलाते कुछ युवकों ने कौओं को ही मारकर खाने का निर्णय ले लिया। बारातियों में से ही किसी बीड़ी पीने वाले के पास माचिस थी तो उसने लकड़ियां ढूढ़कर आग जला दी।
रात का समय था तो उन्हें कौओं को पकड़ने में भी ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
कौवे पकड़-पकड़ कर आते रहे और लोग उन्हें भून-भूनकर खाते रहे....😀
उन युवकों की देखा देखी धीरे-धीरे सभी बारातियों ने कौवे भूनकर खा लिए लेकिन उन्ही बारातियों में ''रामलाल'' भी था....😀
जिसने कहा कि चाहे भूख से तड़पकर मर जाऊँ यह स्वीकार है, लेकिन कौआ नहीं खाउंगा.... 😎
रात गुजर गई। दूसरे दिन सौभाग्य से चरवाहों की मदद से उन्हें बाहर निकलने का रास्ता भी मिल गया लेकिन........
अब समस्या यह थी कि रामलाल जिसने कौआ नहीं खाया था वह जाकर पूरे गांव में यह बात बताएगा कि सबने कौआ खाया है.....😀
इस बात पर मंत्रणा हुई फिर सर्वसम्मति से एक योजना बनाई गई.... 😀
वे लोग जैसे ही गांव के नजदीक पहुँचे सारे एक साथ चिल्लाने लगे:-
राम लाल ने कौआ खाया है.... 😀
"बहुमत" के आगे इकलौते रामलाल की कौन सुनता ❓
😎😎😎दोस्तों राम लाल कि तरह इन गांव वालो ने मनमोहन सरकार को बदनाम करके अपनी राजनीति चमकाई . कौआ खाया किसी ने और बदनाम हुवे राम लाल और मनमोहन सिंह.😎
CEC ज्ञानेश कुमार
अपने परिवार की बहन-बेटियों की तस्वीरें साझा करते हैं।👇
यह साबित करता है कि “प्राइवेसी” का तर्क
सिर्फ़ मतदाताओं की CCTV फ़ुटेज न देने का
एक बहाना था।
Indigo कांड के तुरंत बाद तीन नई एयरलाइंस घोषित हुईं।
लेकिन एक नाम ऐसा है,जो रनवे पर पहुँचे बिना ही धुंध में घिर गया , शंख एयरलाइंस
हमें एक कहानी सुनाई गई।।बहुत पुरानी, बहुत जानी-पहचानी टेम्पो ड्राइवर से एयरलाइन ओनर...
कहानी में संघर्ष था,कहानी में आँसू थे,कहानी में सफलता थी।
लेकिन कहानी वही होती है।जिसकी जड़ें ज़मीन में हों।
और जब इस कहानी की जड़ें खोदनी शुरू कीं,
तो वहाँ वही सब दिखने लगा जो फर्जी चाय बेचने वाली कहानी में था।
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टेम्पो ड्राइवर की बात चली।मैंने खोजा। इंटरव्यू ढूँढे।
वेरिफ़ाइड बायोग्राफी ढूँढी।
कुछ नहीं।
बस एक वेबसाइट मिली
जो कहती है
“एयरलाइन ऑफ द ईयर अवॉर्ड”
अजीब बात है।
एयरलाइन ने एक भी उड़ान नहीं भरी, एक भी यात्री नहीं बैठा,
और अवॉर्ड पहले आ गया।
जिओ यूनिवर्सिटी वाला किस्सा याद होगा आपको।
यह प्रेरक कथा नहीं,यह प्रमोशनल पर्चा है।
देश को ऐसे ही फालतू के संघर्ष भरी दास्तानें सुनाकर इमोशनली फूल बनाया जाने का फॉर्मूला मिल गया है
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अब पैसे की बात।
पेरेंट कम्पनी शंख ट्रेडिंग
उम्र तीन साल
EPFO रिकॉर्ड खोला,।कर्मचारी शून्य।
लेकिन बैंक रिकॉर्ड खोला,₹300 करोड़ का लोन।
क्रेडिट रेटिंग
CRISIL BB
यानी हाई रिस्क
आप 30 साल से बिजनेस कर रहे हों,।बैंक से पचास लाख माँगो। पता चलेगा।
और यहाँ तीन साल की, बिना कर्मचारियों की,
हाई रिस्क कंपनी को।तीन सौ करोड़?
यह उद्यम नहीं, यह विशेष कृपा है।
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अब आते हैं शंख के विकास की कथा पर।
जिसे आँकड़ों की माला पहनाकर
चमत्कार कहा जा रहा है।
एक साल में।₹36 करोड़ से ₹275 करोड़।
658% ग्रोथ।
वाह।
बहुत सुंदर।
बहुत तेज़।
और यही कंपनी
अब ₹2100 करोड़ की एयरलाइन।खड़ी करने जा रही है।
बिना, किसी वेंचर कैपिटल के,
किसी प्राइवेट इक्विटी के,
किसी बड़े निवेशक के।
तुलना कर लीजिए।
आकाशा एयर।
राकेश झुनझुनवाला ने
$35 मिलियन लगाए।
फिर ₹1200 करोड़ और आए।
यहाँ?
न कोई जुनझुनवाला,
न कोई बाज़ार, न कुछ।
सिर्फ बैंक भरोसे।
और बैंक ने क्यों दिया, शेरलॉक होम्स बनने की जरूरत नहीं है।
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अब सवाल पूछना बनता है।
क्या यह
भारत की अगली एविएशन सफलता है या किसी और बड़े फ्रॉड की तैयारी?
क्योंकि
जब कहानी बहुत चमकदार हो
और नंबर कुछ और बताते हों तो सवाल पूछना विद्रोह नहीं,विवेक होता है।
हर उड़ान रनवे पर आने से पहले ही जाँच मांगती है।
वरना क्रैश...
#VijayShukla