ऑस्ट्रेलिया का थाना ‘प्राथमिक सुरक्षा केंद्र’ है और भारत का थाना ‘प्राथमिक भ्रष्टाचार केंद्र’।
पुलिस को स्वतंत्र, निष्पक्ष, जवाबदेह, पारदर्शी, आधुनिक, स्मार्ट और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए ‘पुलिस चार्टर’ कब लागू होगा?
@PMOIndia@narendramodi
Prepaid Recharge Customers के साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury नहीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।
जबतक आप अपने क्षेत्र के समस्याओं को नहीं दिखाओगे तबतक कुछ सही नहीं होने वाला 😡
माँ का इलाज कराने Sadar Hospital Giridih पहुँचा। दीवार पर बड़ा सा बैनर लगा था “यहाँ अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध है।” लेकिन अंदर डॉक्टर ने साफ कहा बाहर प्राइवेट जगह से अल्ट्रासाउंड कराइए। अगर सुविधा यहाँ है, तो बाहर क्यों? क्या गरीबों को गुमराह करना ही सिस्टम बन गया है? इनकी माँ इलाज के लिए आई थीं, कमाई लुटाने के लिए नहीं। भ्रामक बैनर का विरोध किया, क्योंकि सच के लिए आवाज़ उठाना ज़रूरी है। सरकारी अस्पताल जनता का है, किसी प्राइवेट नेटवर्क का नहीं। अब सवाल उठेगा और जवाब भी लिया जाएगा। #jharkhand #giridih
Private Hospital में इलाज करवाने की ज़रूरत पड़ जाए तो एक आम परिवार का घर-गहने गिरवी रखने तक की नौबत आ जाती है।
अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही ₹50,000-1,00,000 तक Advance रखवाया जाता है। अस्पतालों के कमरों का रेंट 5 स्टार के होटल से महँगे।
बेड मिलते ही बिल में thermometer-sanitizer-masks-gloves सब बिल में जुड़ना शुरू हो जाते हैं। जो दवाएँ बाहर डिस्काउंट पर मिलती हैं वो अस्पताल में पूरे रेट पर मिलती है। लैब टेस्ट मान्य होती है तो सिर्फ़ अस्पताल की।
आज संसद में ये ज़रूरी मुद्दा रखा।
इन पुलिस वालों को हाथ उठाने का अधिकार किसने दिया है?
जब देखो, जिसको देखो हाथ उठाते हैं,
जब खुद इन्हें अपना कानून नहीं पता, तो यह नौकरी में क्या कर रहे हैं...
चेकिंग के दौरान, बहस करने पर या चुप रहने पर थप्पड़ या मारपीट करना पूरी तरह गैरकानूनी है !
इसीलिए कहा जाता है शिक्षा शेरनी का दूध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा।
अगर आप शिक्षित है जागरूक हैं तो आप अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर सकते हैं वरना हर गली हर मोड़ पर आपका आत्मसम्मान कुचला जाएगा।
गुजरात के सूरत में CCTV वीडियो में महिला पुलिसकर्मी एक 90वर्षीय आदिवासी वृद्धा को घसीटते और थप्पड़ मारते दिख रही है। यह कानून नहीं, निर्दयता और सत्ता का दुरुपयोग है। हम इस बर्बरता की कड़ी निंदा करते है और दोषी पुलिसकर्मियो के तत्काल निलंबन की मांग करते है।
हैलो @RailMinIndia –
ये TTE है या काली कोट वाला गुंडा?
माना कि रेल में बिना टिकट वाले यात्रियों का रिज़र्व कोच में यात्रा करना अपराध के श्रेणी में आता है।
लेकिन क्या ट्रेन में TTE द्वारा हाथापाई करना अपराध नहीं? अगर यात्री बिना टिकट था तो उसका फाइन करते, जरूरत पड़े तो रेलवे पुलिस को बुलाते लेकिन इस तरह किसी की कॉलर को पकड़कर उसे थप्पड़ मारना अपराध माना जाएगा।
कृपया इस अपराधी TTE की पहचान कर तुरंत रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज करके गिरफ्तारी करें।
लड़का बिना टिकट के यात्रा कर रहा है तो जुर्माना कर दो!! या हमेशा की तरह रिश्वत लेकर सलटा दो!! या फिर अगले स्टेशन पर उतार दो!! मगर चलती ट्रेन से फेंकने जैसी हरक़त क्यों? वर्दी पहने हो तो ख़ुदा हो गए क्या?
@RailMinIndia@RPF_INDIA@RPFCR
रेलवे पुलिस का कर्मचारी किस तरह एक लड़के को चलती ट्रेन से फेंकने की कोशिश कर रहा है
यदि यह लड़का मर जाता तो कौन जिम्मेदार होता।
@RailMinIndia@RPF_INDIA@RPFCR