भाजपा सरकार में शिक्षा व्यवस्था ���े पूरी तरह "फेल" और "शिक्षक विरोधी" होने का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा!
शिक्षा मंत्री के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में शिक्षक सड़कों पर हैं, शवयात्रा निकाल रहे हैं.. शर्मनाक।
सरकार को शिक्षकों की भावना��ं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द उनकी मांगों का समाधान निकालना चाहिए। @RajCMO
ग्रीष्मावकाश सहित अन्य अवकाशों में मनमानी कटौती को वापस लेने की मांग को लेकर संगठन के आंदोलन के चौथे चरण के तहत कल 18 मई को माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी के विधानसभा क्षेत्र में विशाल शिक्षक रैली का आयोजन किया जाएगा।
@RajCMO@BhajanlalBjp@Shaikshiksraj@rajshiksha_
#Kota#रामगंजमंडी अवकाशों में कटौती का विरोध
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के विधानसभा क्षेत्र में जुटे प्रदेशभर के शिक्षक, मंत्री की शव यात्रा निकालकर जता रहे विरोध, शिक्षा मंत्री के खिकाफ जमकर कर रहे नारेबाजी, विभन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम उपखण्ड कार्यलय में सौपेंगे ज्ञापन
@ajamchaoud1914 #LatestNews #RajasthanNews #RajasthanWithZee
क्या सभी शिक्षक संघ एक साथ मिलकर #ग्रीष्मकालीन_अवकाश कटौती का विरोध करे तो भी कुछ नहीं होगा क्या ?
सभी शिक्षक संघों की मंशा अगर शिक्षक हित है तो एक साथ इस मुद्दे पर अवश्य ध्यान देवे।सभी शिक्षक भी साथ देवे, चाहे रीट्वीट से ही सही।
@Dadarwal7@PRESIDENTBKN2@DrRamprakashSa9
प्रेस विज्ञप्ति
ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी, विक्रम संवत 2083, रविवार
दिनांक : 10 मई 2026
*शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता से बदहाल शिक्षा व्यवस्था के विरोध में किया क्रमिक आंदोलन का शंखनाद*
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय श��क्षा) का कड़ा प्रहार : शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हठधर्मिता ने शिक्षा व्यवस्था को किया ध्वस्त
नवाचार के नाम पर विनाश : शिक्षक और शिक्षार्थियों के भविष्य से खिलवाड़
जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने निरंतर संवाद के बावजूद आवश्यक निर्णय एवं शैक्षिक तथा विभागीय कार्य समय पर नहीं होने के कारण सरकार और अधिकारियों के विरुद्ध आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। इसी क्रम में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को जयपुर में प्रेस वार्ता आयोजित कर आंदोलन की घोषणा की।
संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि प्रदेश में नवीन सरकार के गठन के साथ ही संगठन ने नियमित संवाद एवं वार्ता के माध्यम से शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया, लेकिन सरकार और उसके अधिकारियों की हठधर्मिता एवं उदासीनता के कारण सरकार के दो वर्ष से अधिक के कार्यकाल में भी शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर लगातार वार्ता के माध्यम से समाधान के प्रयास किए। इनमें प्रमुख मांगें — शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति, वर्ष 2019 से अब तक क्रमोन्नत सभी विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी करना एवं स्टाफिंग पैटर्न लागू करना, RGHS को सुचारु रूप से जारी रखना, तृतीय श्रेणी शिक्षकों और प्रबोधकों की वेतन विसंगति दूर करना, संविदा शिक्षकों को नियमित करना तथा संगठन के मांगप��्र अनुसार सभी मांगों का त्वरित समाधान करना शामिल हैं।
किन्तु सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने से संगठन ने चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद किया है। प्रदेशाध्यक्ष पुष्करणा ने बताया कि संगठन द्वारा 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 05 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तर पर धरना-प्रदर्शन तथा 10 जून को जयपुर संभाग स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया जाएगा। इसके पश्चात 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना प्रारंभ किया जाएगा तथा मानसून सत्र में विधानसभा का घेराव किया जाएगा।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों की कार्यशैली पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है। महासंघ का स्पष्ट आरोप है कि वर्तमान में विभाग के अधिकारी “नवाचार” का चोला ओढ़कर शिक्षा, शिक्षक और शिक्षार्थी — तीनों का अहित करने पर तुले हुए हैं। विभाग में ऐसा अनिश्चितता का वातावरण उत्पन्न कर दिया गया है, जहाँ किसी भी निर्णय पर पुनर्विचार की कोई संभावना नहीं बची है। अधिकारी अपनी तानाशाही प्रवृत्तियों के चलते सरकार को गुमराह कर रहे हैं तथा शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर सड़कों पर उतरने के लिए विवश कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के संयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा लिए गए कई निर्णयों से शिक्षकों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है।
*अवकाश कटौती : एक ही राज्य में दोहरा मापदंड और कुतर्क*
महासंघ के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि अधिकारियों ने शासन को भ्रामक तथ्यों के आधार प�� भ्रमित किया है। शिक्षण दिवस बढ़ाने के नाम पर ग्रीष्मकालीन अवकाशों में की गई कटौती पूरी तरह अवैज्ञानिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत है। राजस्थान जैसे प्रदेश में, जहाँ भीषण गर्मी सर्वविदित है, वहाँ पूर्व में भौगोलिक आधार पर ही अवकाश निर्धारित किए गए थे।
विडंबना यह है कि एक ही राज्य में उच्च शिक्षा के लिए 60 दिवस, केंद्रीय विद्यालयों में 61 दिवस तथा नवोदय विद्यालयों में 56 दिवस का अवकाश ��िर्धारित है, जबकि प्रदेश के माध्यमिक एवं प्रारंभिक विद्यालयों में इसे घटाकर मात्र 35 दिवस कर दिया गया है।
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विकसित देशों में शिक्षकों को लंबी छुट्टियां दी जाती हैं शिक्षण एक अत्यधिक मानसिक श्रम वाला कार्य है.!
35 दिन की छुट्टी को भी ज्यादा बताने वाले लोग दरअसल शिक्षा की गुणवत्ता के दुश्मन है
एक थका हुआ और मानसिक रूप से प्रताड़ित शिक्षक बेहतर भविष्य कैसे गढ़ेगा.?
@RajCMO@madandilawar
ग्रीष्मकालीन अवकाश विवरण
1. राजकीय विद्यालय राजस्थान सरकार - 17 मई से 20 जून = 35 दिन
2. राजकीय महाविद्यालय राजस्थान सरकार - 1 मई से 30 जून = 61 द��न
3. नवोदय विधालय - 1 मई से 29 जून = 60 दिन
4. केंद्रीय विद्यालय ( KVS)- 3 मई से 20 जून = 49 दिन
सत्र 2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर में अवकाश कटौती के विरोध में @RESMA_7 द्वारा 7 अप्रैल को जिला स्तर पर कलेक्टर को ज्ञापन दिया जाएगा
मुख्य मांगें:
• प्रधानाचार्य अवकाश 2 दिन यथावत रहें
• ग्रीष्मकालीन अवकाश 17 मई–30 जून किया जाए
• शीतकालीन अवकाश 26 दिसम्बर–10 जनवरी किया जाए
सत्र 2026 -27 में शैक्षणिक कैलेंडर वर्ष में अवकाश में की गई कटौतियों का विरोध संगठन को करना चाहिए
1.प्रधानाध्यापक घोषित अवकाश पूर्व की भांति 2 दिन यथावत रखे जाएं
2.ग्रीष्मकालीन अवकाश 11 मई से 20 जून तक किया जाए
3.शीतकालीन अवकाश 26 दिसं��र से 10 जनवरी किया जाए
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