आचार्य प्रशांत कौन हैं???
उनके कार्य की विवेचना निम्नलिखित है ⤵️
आचार्य प्रशांत एक भारतीय लेखक, अद्वैत वेदांत शिक्षक, और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिनका काम आध्यात्मिकता, सामाजिक जागरूकता, और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में विस्तृत है। उनके कार्य का विस्तार निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में देखा जा सकता है:
🪔आध्यात्मिक शिक्षण और वेदांत का प्रचार:
आचार्य प्रशांत भगवद गीता, उपनिषद, और अष्टावक्र गीता जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों की गहरी व्याख्या करते हैं। वे 17 प्रकार की गीता और 60 प्रकार के उपनिषदों की शिक्षाएं देते हैं, जो आधुनिक जीवन के संदर्भ में प्रासंगिक हैं।उनके यूट्यूब चैनल पर 64 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं, और उनके वीडियो को 6 बिलियन से अधिक बार देखा गया है, जिससे वे विश्व के सबसे अधिक फॉलो किए जाने वाले आध्यात्मिक गुरु हैं।वे ऑनलाइन और ऑफलाइन गीता सत्र आयोजित करते हैं, जिनमें 45,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल होते हैं। उन्होंने हाल ही में विश्व की सबसे व्यापक ऑनलाइन गीता-आधारित आध्यात्मिक परीक्षा का आयोजन किया।
🪔प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन:
आचार्य प्रशांत ने गैर-लाभकारी संगठन "प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन" की स्थापना की, जिसका उद्देश्य युवाओं और समाज को आध्यात्मिक जागरूकता, आत्म-ज्ञान, और सत्य की खोज की दिशा में प्रेरित करना है। यह संगठन विशेष रूप से युवाओं को जीवन के मूल सिद्धांतों, सुख-शांति, और सफलता के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।
🪔शाकाहार और पशु अधिकार:
आचार्य प्रशांत शाकाहार और पर्यावरण संरक्षण के प्रबल समर्थक हैं। उनके प्रयासों से लाखों लोगों ने शाकाहार या विशुद्ध शाकाहार (वीगनिज्म) अपनाया, जिससे पशुओं की जान बचाने और पर्यावरण संरक्षण में योगदान हुआ। फरवरी 2023 में, PETA इंडिया ने उन्हें "2022 का सबसे प्रभावशाली शाकाहारी" पुरस्कार से सम्मानित किया। वे मांसाहार को जलवायु परिवर्तन की प्रमुख वजह मानते हैं ( जो कि वास्तव में हैं) और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाते हैं। ।
🪔महिलाओं और सामाजिक सशक्तिकरण:
आचार्य प्रशांत महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए सक्रिय हैं। उनकी पुस्तक स्त्री में उन्होंने महिलाओं के वस्तुकरण और मानसिक दासता के कारणों को उजागर किया और उनके आत्म-सम्मान और मुक्ति के लिए मार्ग सुझाया।वे सामाजिक सुधार के लिए धर्म के नाम पर होने वाली शोषणकारी परंपराओं का विरोध करते हैं।
🪔लेखन और प्रकाशन:
आचार्य प्रशांत ने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें कर्म: व्हाई एवरीथिंग यू नो अबाउट इट इज़ रॉन्ग, संबंध, आनंद: हैप्पीनेस विदाउट रीज़न, और माया: आई बो टू थी, यू कैननॉट बी ओवरकम, भगवद गीता, अष्टावक्र गीता, संघर्ष अपने विरुद्ध, आह जवानी आग है नशे में या पानी जैसी उच्च पुस्तकें शामिल हैं। उनकी पुस्तकें रोजमर्रा की भाषा में गहरे दार्शनिक विचार प्रस्तुत करती हैं।
🪔युवाओं का मार्गदर्शन:
वे विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करते हैं ताकि वे अपने जीवन के उद्देश्य को समझ सकें। उनके सत्र और कार्यशालाएं IIT, IIM जैसे संस्थानों में आयोजित होती हैं, जहां वे आध्यात्मिकता और जीवन दर्शन पर चर्चा करते हैं। वे आधुनिक चुनौतियों जैसे तनाव, अवसाद, और सामाजिक दबावों का सामना करने के लिए व्यावहारिक समाधान सुझाते हैं।
🪔डिजिटल उपस्थिति और ऐप:
आचार्य प्रशांत का आधिकारिक ऐप लोगों को उनकी शिक्षाओं, पुस्तकों, और दैनिक अंतर्दृष्टि तक पहुंच प्रदान करता है। यह ऐप विशेष रूप से उनके अनुयायियों के बीच लोकप्रिय है। उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति (यूट्यूब, फेसबुक) के माध्यम से वे करोड़ों लोगों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं।
🪔पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता:
आचार्य प्रशांत पर्यावरण संरक्षण और न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट के लिए जागरूक जीवनशैली को बढ़ावा देते हैं। वे मानते हैं कि मानव का पर्यावरण के प्रति अज्ञान स्वयं के मन और शरीर के अज्ञान से उत्पन्न होता है। वे ग्लोबल वॉर्मिंग जैसे मुद्दों पर भी बोलते हैं और लोगों को अपनी फालतू की जरूरतें कम करने की सलाह देते हैं।
🪔प्रभाव और पहचान:
आचार्य प्रशांत का काम पारंपरिक आध्यात्मिकता और आधुनिक जीवन के बीच एक सेतु का काम करता है। उनकी शिक्षाएं भारतीय संस्कृति को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बनाती हैं। वे न केवल आध्यात्मिक शिक्षक हैं, बल्कि एक पर्यावरण कार्यकर्ता, शाकाहार प्रचारक, और सामाजिक सुधारक भी हैं। उनकी स्वतंत्र सोच और स्पष्ट दृष्टिकोण ने उन्हें विशेष रूप से युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच लोकप्रिय बनाया है।
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#AcharyaPrashant
The British Parliament stood to welcome him.…👏👏
His own country stays silent. 🙁
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And here, in India? Silence. Not one honor. Not one meaningful acknowledgment. Not one major national platform. After more than two decades of extraordinary service to society, not a single government body has recognized his work.
This is a man over 90 million people follow. Mothers. Daughters. Students. Soldiers. Farmers. Engineers. In India and across the world.
Around 1,50,000 students sit in his online Gita classes, the largest school of Indian wisdom in history….
Yes, while the Indian government and much of the mainstream media choose to ignore him, a man is writing history right here, right now....
Every morning, more join. Every day, somewhere, a life quietly turns around.
No party made him. No corporate funds him. No godman’s empire protects him.
One man. A mic. The Upanishads. And a nation, human society that cannot stop listening….
He gave us back what we had forgotten. Inquiry instead of superstition. Understanding instead of blind belief. Courage instead of fear.
The British sat in their own Parliament and heard the Gita from an Indian.
Two hundred years ago, they dismissed it as superstition. Today, they invite him as the Chief Guest.
And we?
We haven’t even said thank you. If the Bharat Ratna is not for this, what is it for?
India’s heart has already decided. More than 90 million times.
Now it’s the Government of India’s turn. Show that this nation values integrity over influence, service over status, and genuine nation-building over spectacle.
Recognize those who elevate the minds of millions, carry India’s intellectual and spiritual legacy to the world’s most prestigious platforms, and create lasting change, not just those who occupy headlines. The people have already spoken.…. Will the Government?
@PMOIndia@HMOIndia@PIB_India@AmitShah
#BharatRatnaForAcharyaPrashant #PadmaAwards2027 #AcharyaPrashant
Acharya Prashant at the British Parliament (2026) https://t.co/y1xOP8xPWb via
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भाई अभिजीत तुम समझ ही नहीं रहे हो इसका परिणाम दुखद के सिवा और कुछ नहीं होने का!!!
अगर सच में को substantial change पूरी ईमानदारी से चाहते हो भारत में तो आचार्य प्रशांत @Advait_Prashant की ओर आओ और Gen Z को भी लाओ!!
इनके सिवा और कोई है ही नहीं जो भारत में एक स्थायी बदलाव ला सकता है किसी भी तल पर!!
वही ढाक के तीन पात रह जाने वाले हैं! लाओ प्लीज़ सारे युवाओं को आचार्य प्रशांत की ओर! भारत की तस्वीर बदलने का माद्दा रखते हैं आचार्य प्रशांत!!!
The ego is not a doer but a distorter:
it does not perform any action,
but merely stakes its claim
over every action.
- Acharya ji, in dialogue with Professor Lars Chittka
7 July 2026 | Queen Mary University of London, UK
#AcharyaPrashant#Vedanta